
" परिवार के सदस्यों की आवश्यकता है, अनंत होती है किंतु एक सुख रहने उनमें से अपनी अर्थव्यवस्था के अनुरूप उनका समायोजित करती है" प्रस्तावना- मनुष्य की आवश्यकता है अनंत होती है एक आवश्यकता के पश्चात दूसरी आवश्यकता स्वामी उत्पन्न हो जाती है किंतु यह भी सत्य है कि यदि आवश्यकता है उत्पन्न ना हो तो आविष्कार भी ना होते कहा गया है की आवश्यकता आविष्कार की जननी है आवश्यकताओं की पू...
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" परिवार के सदस्यों की आवश्यकता है, अनंत होती है किंतु एक सुख रहने उनमें से अपनी अर्थव्यवस्था के अनुरूप उनका समायोजित करती है"
प्रस्तावना-
मनुष्य की आवश्यकता है अनंत होती है एक आवश्यकता के पश्चात दूसरी आवश्यकता स्वामी उत्पन्न हो जाती है किंतु यह भी सत्य है कि यदि आवश्यकता है उत्पन्न ना हो तो आविष्कार भी ना होते कहा गया है की आवश्यकता आविष्कार की जननी है आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मनुष्य आर्थिक प्रयास करता है और वह आवश्यकताओं को दर्शन पूरा करता है परंतु सीमित साधनों में ही असीमित आवश्यकताओं की पूर्ति करनी पड़ती है अतः गृहणी का उत्तरदायित्व है कि वह घर के सभी सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति कर उन्हें संतुष्टि प्रदान कर सके
आवश्यकताओं का अर्थ तथा पूर्ति का महत्व:-
आवश्यकता मनुष्य का प्राकृतिक गुण है गर्भावस्था से मानव की आवश्यकता प्रारंभ हो जाती है और जीवन पर्यटन चलती रहती है जन्म के पश्चात मनुष्य की आवश्यकता है बढ़ती जाती है और मनुष्य इन्हीं आवश्यकताओं की पूर्ति करता रहता है मनुष्य की संसद क्रियाएं विभिन्न आवश्यकताओं द्वारा प्रेरित होती है
कोई भी आवश्यकता बिना इच्छा है तत्परता के आवश्यकता नहीं बन सकती दूसरे शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि- आवश्यकता वह प्रबल इच्छा है जिसे पूरा करने के लिए व्यक्ति के पास उचित साधन उपलब्ध हो तथा वह उन साधनों का उपयोग करने के लिए तत्पर हो अर्थात आवश्यकता के मूल में इच्छा वह साधनों के उपयोग करने की तत्परता का होना आवश्यक है
डॉक्टर बेस के अनुसार केवल वही इच्छाएं आवश्यकता होती है जिन्हें पूर्ण किया जा सकता है जिन्हें पूरा करके योग्य कार्य में लाने की तत्परता भी हो
इसी परिभाषा के अनुसार किसी व्यक्ति को किसी वस्तु की इच्छा हो तथा उसे पूरा करने के लिए उसके पास साधन भी हो तो उसकी वह इच्छा उसकी आवश्यकता बन जाएगी
इस प्रकार आवश्यकता के तीन तत्व होते हैं-
1.इच्छा आवश्यकता में तभी परिवर्तित हो सकती है जब उसकी पूर्ति की जा सके जिन इच्छाओं को बुरा नहीं किया जा सकता में आवश्यकता नहीं कहीं जा सकती
2. इच्छा को आवश्यकता में बदलने के लिए यह आवश्यक है कि व्यक्ति अपने साधनों को प्रयोग करने के लिए तत्पर हो
3. इच्छा आवश्यकता तभी बन सकती है जबकि व्यक्ति के पास इच्छा पूर्ति हेतु साधन उपलब्ध हो
परिवार की मूलभूत आवश्यकता है एवं उनका वर्गीकरण -
प्राचीन काल में मनुष्य की आवश्यकता है सीमित होती थी तथा उन आवश्यकताओं की पूर्ति आसानी से संभव होती थी परंतु आज के वर्तमान वैज्ञानिक युग में निरंतर बढ़ती हुई आवश्यकता के कारण मनुष्य का जीवन जटिल होता जा रहा है प्रत्येक व्यक्ति के द्वारा कमाया गया धन आवश्यकताओं की तुलना में काम होता है इसलिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक ग्रहणी परिवार की सारी आवश्यकताओं के विषय में जाने और आए के जो साधन हो उनके द्वारा परिवार की आवश्यकता की इच्छा को अधिकतम संतुष्ट करें
विभिन्न विद्वानों ने आवश्यकताओं को अलग-अलग प्रकार से विभाजित किया है
कुछ विद्वानों द्वारा आवश्यकता के दो भागों में विभाजित किया गया है 1. प्रारंभिक आवश्यकता है 2.गौण आवश्यकता
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मैं आज आपको संत रविदास के बारे में बताना चाहती हूं भक्त कवि नाभादास ने अपनी रचना भक्तमाल में कबीर और रविदास को रामानंद का शिष्य बताया है स्वयं रैदास ने भी रामानंद मोहित गुरु मिलो कहकर इसकी पुष्टि की है पर यह सभी विद्वान इस धारणा पर भी सहमत है कि कबीर जन्म संत 1455 सन 1627 ई और रविदास समकालीन तेरे पास में उनसे कुछ छोटे थे इस आधार पर रविदास का जन्म सावंत 1456 सन 16 99 के आसपास मां...
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मैं आज आपको संत रविदास के बारे में बताना चाहती हूं
भक्त कवि नाभादास ने अपनी रचना भक्तमाल में कबीर और रविदास को रामानंद का शिष्य बताया है स्वयं रैदास ने भी रामानंद मोहित गुरु मिलो कहकर इसकी पुष्टि की है पर यह सभी विद्वान इस धारणा पर भी सहमत है कि कबीर जन्म संत 1455 सन 1627 ई और रविदास समकालीन तेरे पास में उनसे कुछ छोटे थे इस आधार पर रविदास का जन्म सावंत 1456 सन 16 99 के आसपास मां लेने पर उनके रामानंद का शिष्य और कबीर का समकालीन होने की पुष्टि हो जाती है रामानंद के शिष्य चेतन दास द्वारा सावंत 1505 में रचित प्रसंग पारिजात में उनका जन्म काल नहीं स्वीकार किया गया देवदास संप्रदाय में यह व्यापक विश्वास है कि उनका जन्म माघ पूर्णिमा के दिन रविवार को हुआ था इसलिए में उनका नाम रविदास भी स्वीकार करते हैं रविदास के जन्म स्थान के विषय में भी अनेक मत प्रचलित है जिनके सर यही निकलता है कि इनका जन्म काशी मैया काशी के आसपास किसी स्थान पर हुआ था
रविदास के माता-पिता के नाम के विषय में भी विद्वानों में मेट के नहीं है रविदास की गददी के उत्तराधिकारियों तथा अखिल भारतीय रविदास जी महासभा के सदस्यों एवं रविदास वाणी के संपादक के अनुसार इनके पिता का नाम रघु और माता का नाम दुरउपनिया या कर्म था लोगों में यह भी विश्वास प्रचलित है कि उनकी पत्नी का नाम लूना या लेना था कहते हैं कि चित्तौड़ की नई झाली इन्हें अपना गुरु मानती थी रानी के उनके सम्मान में एक बड़ा लोग भोज दिया इस फौज में ब्राह्मणों ने यह कहकर भजन करने से इनकार कर दिया कि हम बिना जाने उधारी रविदास के साथ भोजन नहीं कर सकते इस पर रैदास ने अपनी त्वचा क्या कर उसमें से सीने का जनेऊ निकालकर सबको विषय मत कर दिया कहते हैं कि जनेऊ की चमक से सभी की आंखें बंद हो गई और रविदास केवल अपने पद चिन्ह छोड़कर विलीन हो गए चित्तौड़ की रानी ने उनकी स्मृति में वहां एक स्मारक भी बनवाया है यह स्मारक आज रविदास की छतरी के नाम से प्रसिद्ध है रविदास संप्रदाय के पक्षधरों का मानना है कि उनका निर्माण क्षेत्र मास की चतुर्दशी को हुआ था वक्त कभी अनंत दास ने उनके देहांतया का समय सावंत 1584 सन 1529 ई और स्थान चित्तौड़ बताते हुए लिखा है
संत रविदास ने स्वयं किसी काव्य की रचना अपने हाथों से नहीं की है उनके भक्त शिष्यों ने उनकी वाणी को लिपि बंद करके प्रकाशित कराया उनके फुटकर पद वाणी नाम से संकलित है अधिक गुरु ग्रंथ साहिब में इनके 40 पद और एक दोहा संकट है जिनकी प्रमाणित पर किसी को संध्या नहीं है वेल वीडियो प्रेस इलाहाबाद से प्रकाशित रविदास जी की वाणी में 84 पद और साथ साथिया है आचार्य आजादी जी ने विभिन्न शीर्षकों से 198 संख्या रविदास दर्शन नाम बेनी प्रसाद शर्मा ने 177 पद और 49 संख्या प्रामाणिक रूप से संपादित करने का प्रयास किया
धन्यवाद-
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मैं आज आपको एक महान लेखक के बारे में बताने जा रही हूं जिनका नाम धनपत राय श्रीवास्तव है और उनका उपनाम प्रेमचंद है प्रेमचंद- कहानी है उपन्यास सम्राट की उपाधि से विभूषित सब नाम धन्य प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई सन 1880 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के लेमी ग्राम में हुआ था उनके बचपन का नाम धनपत राय था किंतु यह अपनी कहानी उर्दू में नवाब राय के नाम से लिखते थे और हिंदी में प्रेमचंद के...
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मैं आज आपको एक महान लेखक के बारे में बताने जा रही हूं जिनका नाम धनपत राय श्रीवास्तव है और उनका उपनाम प्रेमचंद है
प्रेमचंद-
कहानी है उपन्यास सम्राट की उपाधि से विभूषित सब नाम धन्य प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई सन 1880 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के लेमी ग्राम में हुआ था उनके बचपन का नाम धनपत राय था किंतु यह अपनी कहानी उर्दू में नवाब राय के नाम से लिखते थे और हिंदी में प्रेमचंद के नाम से कुछ राजनीतिक कहानी इन्होंने उर्दू में ही धनपत राय नाम से लिखिए उनके द्वारा रचित सोजे वतन ने ऐसी हलचल मचाई की सरकार ने उसे जप्त कर लिया गरीब परिवार में जन्म लेने और अल्पायु में ही पिता की मृत्यु हो जाने के कारण इनका बचपन बड़े कासन मैं पिता किंतु जिस सास और परिश्रम से इन्होंने अपना अध्ययन जारी रखा वह सावधनहीन किंतु कुशरण बुद्धि और परिसर में छात्रों के लिए प्रेरणाप्रद है अभावग्रस्त होने पर भी इन्होंने मां और बा की परीक्षा उत्तरण की प्रारंभ में यह कुछ वर्षों तक एक स्कूल में ₹20 मासिक पर अध्यापक रहे बाद में शिक्षा विभाग में एक डिप्टी स्पेक्टर हो गए कुछ दिनों बाद ऐसे योग आंदोलन से सहानुभूति रखने के कारण इन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और आजीवन साहित्य सेवा करते रहे इन्होंने अनेक पत्रिकाओं का संपादन किया अपना प्रेस खोला और हंस नामक पत्रिका भी निकाली
प्रेमचंद का विवाह विद्यार्थी जीवन में ही हो चुका था परंतु वह सफल न हो सका शिवरानी देवी के साथ इनका दूसरा विवाह हुआ शिवरानी देवी एक पढ़ी-लिखी विदुषी महिला थी आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की प्रेरणा से इन्होंने प्रेमचंद नाम रखा और इसी नाम से साहित्य सृजन करने लगे इन्होंने अपने जीवन काल में एक दर्जन उपन्यास और 300 से अधिक कहानियों की रचना की गोदान इसका विश्व प्रसिद्ध उपन्यास है लंबी बीमारी के बाद सन 1836 ईस्वी में इनका देहावसान हो गया
प्रेमचंद ने हिंदी कथा साहित्य में युगांतर उपस्थित किया इनका साहित्य समाज सुधारो राष्ट्रीय भावना से अनूप प्रेरित है वह अपने समय की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों का पूरा प्रतिनिधित्व करता है उसमें किसने की दशा सामाजिक बंधनों की तड़पती नरिया की वेदना और वर्ण व्यवस्था की कठोरता के भीतर सत्तर हरिजन की पीड़ा का मां अमेरिकी चित्रण मिलता है उनकी सहानुभूति भारत की दलित जनता शोषण किसानों मजदूरों और अपेक्षित नदियों के प्रति रही है समीक्षा के साथ ही उनके साहित्य में ऐसे तत्व विद्यमान है जो उसे शाश्वत और स्थाई बनाते हैं प्रेमचंद अपने युग के उन सिद्ध कलाकारों में थे जिन्होंने हिंदी को नवीन योग की आशा आशंकाओं की अभिव्यक्ति का सफल माध्यम बनाया
साहित्यिक जीवन में प्रवेश करने के पश्चात इन्होंने सर्वप्रथम मर्यादा पत्रिका का संपादन भारत संभाल लगभग डेढ़ वर्ष तक कार्य करने के पश्चात यह काशी विद्यापीठ आ गए और यहां प्रधान अध्यापक नियुक्त हुए तट पश्चात माधुरी पत्रिका का संपादन भार संभाला इसी के चलते स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया अपना प्रेस लगाकर हंस पत्रिका और जागरण नामक पत्र निकाला किंतु आर्थिक स्थिति होने के कारण यह कार्य बंद करना पड़ा अनंत मुंबई आकर ₹8000 वार्षिक वेतन पर एक फिल्म कंपनी में नौकरी कर ली किंतु स्वास्थ्य ने इनका साथ में दिया और लिए अपने गांव लौट आए
प्रेमचंद की प्रमुख रचनाएं-
कर्मभूमि, गोदान, गबन, सेवा सदन, निर्मला,वरदान प्रतिज्ञा, रंगभूमि, कर्मभूमि,प्रेमश्रम (अपूर्ण)
धन्यवाद:-
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प्रत्येक व्यक्ति का जीवन एवं मूल्य है इसका कोई विकल्प नहीं हो सकता जब हम घर से बाहर सड़क पर निकलते हैं तो दुर्घटनाओं की आशंकाओं के चलते हमारा जीवन जिंदगी की कसम कस के बीच दाव पर लगा होता है सड़क पर चलते जीवन पर मेड्रिड इस खतरे को हम सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियमों का पालन करके यदि समाप्त नहीं कर सकते तो न्यूनतम आवश्यक कर सकते हैं सड़क दुर्घटनाओं एवं उनसे होने वाली महतो का सबसे मुख्य कारण याताया...
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प्रत्येक व्यक्ति का जीवन एवं मूल्य है इसका कोई विकल्प नहीं हो सकता जब हम घर से बाहर सड़क पर निकलते हैं तो दुर्घटनाओं की आशंकाओं के चलते हमारा जीवन जिंदगी की कसम कस के बीच दाव पर लगा होता है सड़क पर चलते जीवन पर मेड्रिड इस खतरे को हम सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियमों का पालन करके यदि समाप्त नहीं कर सकते तो न्यूनतम आवश्यक कर सकते हैं सड़क दुर्घटनाओं एवं उनसे होने वाली महतो का सबसे मुख्य कारण यातायात के नियमों की जानकारी का अभाव और उन नियमों का पालन न करना ही है लोग इन नियमों को जाने समझे उनका पालन करें और दूसरों को भी उनके पालन के लिए प्रेरित करके सड़क यातायात को सुरक्षित बनाने में सहयोग करें यही इस पाठ के पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने का मुख्य उद्देश्य है
यातायात दो शब्दों से मिलकर बना है यात+ आयत जिसका अर्थ है आना-जाना प्राचीन काल से ही मानव सभ्यता की संसद जीवन शैली आवाज मां पर ही निर्भर है आधुनिक काल में बढ़ते संसाधन एवं विकास क्षेत्र को देखते हुए देश में ही नहीं संपूर्ण विश्व में यातायात से संबंधित महत्वपूर्ण नियम बनाए गए हैं क्योंकि इसे न केवल यातायात सुगम बनता है बल्कि सड़क दुर्घटना से होने वाले भैया वह खतरों से भी बचा जा सकता है आम जनता खास तौर से युवा पत्र के लोगों में अधिक जागरूकता लाने के लिए इसे शिक्षा सामाजिक जागरूकता अत्यधिक आयाम से जोड़ा जाना प्रासंगिक है क्योंकि विश्व में सड़क यातायात में मोटे और जख्मी होना एक साधारण घटना हो गई है विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रतिवर्ष 10 लाख से अधिक सड़क हादसों के शिकार व्यक्तियों की मौत हो जाती है
हाथों से बचने के लिए यातायात के नियमों का पालन करना अति आवश्यक है इसके ज्ञान के भाव में असचरू रूप से पालन न करने के कारण भारत में प्रत्येक वर्ष 140000 से अधिक व्यक्ति सड़क दुर्घटना में मारे जाते हैं ऐसी विकट परिस्थितियों की भैया बहता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि विश्व भर के कुल वाहनों में से केवल एक प्रतिशत ही वहां भारत में है जबकि विश्व की कुल सड़क दुर्घटना में से 10% हद से भारत में होते हैं वीडियो बनाया है कि कोई नियम तब तक अपने लक्ष्य को नहीं प्राप्त कर सकता जब तक पालन करता उसे आत्म साथ करने की कोशिश ना करें
सड़क यातायात के नियम विवेक पूर्ण होते हैं और उनका विवेकपूर्ण पालन करना भी आवश्यक होता है सड़क पर चलने वालों की सुरक्षा के लिए अनेक कानून एवं नियम बनाए गए हैं जिनका पालन करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व होता है जिससे हर कोई सुरक्षित घर पहुंच सके यदि हम इन नियमों का उल्लेख करते हैं तो स्वयं के साथ दूसरों को भी हानि पहुंचाते हैं यातायात के मुख्य नियमों को सीखने की सुख माता के अनुसार दो भागों में विभक्त कर सकते हैं- 1 सुरक्षा से संबंधित यातायात के नियम एवं सुविधाएं 2 वाहन चलाने के नियम एवं सुविधाएं
पैदल साइकिल हैव रिक्शा चालकों को हमेशा अपनी लाइन में अर्थात बाई तरफ रहना चाहिए और सड़क पार करते समय डेन बाय देखने के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए व्यस्त सड़कों पर हमेशा ज़ेबरा क्रॉसिंग का प्रयोग करना चाहिए तथा क्रॉस करते समय कभी यह न सोचना चाहिए कि वहां चालक उसे देख रहा है सड़क की संरचनात्मक ढांचा का सुविधाओं का पूरा उपयोग हो इसलिए सब में टाल मार्ग फुट ओवर ब्रिज सबका पालन नियामगत करना आवश्यक होता है शॉर्टकट या आसान विकल्प खोजना खतरनाक हो सकता है
पैदल यात्राओं को सड़क पार करते समय मोटर वाहन अपने बीच पर्याप्त दूरी रखनी चाहिए और पार्क की गई या खड़ी गाड़ियों के बीच में रास्ता नहीं बनना चाहिए सड़क के खतरों से अधिकांक्षित बच्चे ज्यादा प्रभावित होते हैं जिसमें हमेशा चालक की गलती नहीं होती क्योंकि बच्चों के लापरवाही और जागरूकता की कमी से भी सड़क दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है बच्चे हमेशा बड़ों का आंदोलन करते हैं इसलिए उनके सामने व्यवस्था में भी सड़क के नियम का उल्लेख नहीं करना चाहिए और उन्हें रोक देखें सुने कमलीय मंत्र बताना व्यापालन करना अति आवश्यक होता है
वाहन चलाते समय यातायात के नियम एवं सुरक्षा की जानकारी के साथ-साथ वाहन चलाने की योग्यता उम्र एवं परिपक्वता की जानकारी प्रिया आवश्यक होती है सड़कों पर तीव्रता से बढ़ती दुखहिया और चौपाइयां वाहनों की भीड़ को व्यवस्थित करने एवं सड़क पर आवश्यक जगह हो पर लगे सड़क नियम यातायात नियम से संबंधित महत्वपूर्ण संकेत की जानकारी रखना भी आवश्यक होता है क्योंकि भारत में वर्ष 2011 की अवधि में लगभग 4. 98 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुई है जिसमें 1,42,485 लोगों की मृत्यु हुई वाहन चलाते समय कुछ मानवीय भूल होती है जिसे दुर्घटना हो जाती है इसलिए ऐसे तथ्यों पर गहन विवेचन की आवश्यकता है बहुत तेज गति से बहन चलाना नशे में गाड़ी चलाना चालक का ध्यान भटकना वाली चीज लाल बत्ती का उल्लंघन करना सीट बेल्ट और हेलमेट जैसे सुरक्षा साधनों की अपेक्षा लेने ड्राइविंग का पालन न करना और गलत तरीके से ओवरटेकिंग करना आदि कर्म से सड़क दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है इसलिए उपयुक्त निर्देशी सांसद बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए सावधानियां बरतनी चाहिए वर्तमान में वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के बढ़ते प्रयोग के कारण दुर्घटनाएं बड़ी है सुरक्षा की दृष्टि से वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग नहीं करना चाहिए
सभी को पीछे छोड़ने की परवर्ती परिहार हर किसी में होती है गति में तीव्रता दुर्घटना का जोखिम और दुर्घटना के दौरान चोट की गंभीरता बढ़ती है खुशी के मुंह के आंसू के कारण लोगों में नशे की प्रवृत्ति होती है परंतु नशे की हालत में गाड़ी चलाना दुर्घटना में वृद्धि करता है कभी-कभी गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन होर्डिंग पर ध्यान चले जाने जैसी क्रियो मस्तिष्क से केंद्रक को प्रभावित करती है इसलिए गाड़ी चलाते समय ऐसी वस्तुओं से दूरी बना लेनी चाहिए कुछ अन्य बातें भी इसमें शामिल होती है जैसे गाड़ी का शीशा समायोजित करना वहां में स्टीरियो और रेडियो का चलाना सड़क पर जानवरों का आ जाना विज्ञापन पर सूचना प्राप्त आदि चीजों से चालक को अपना ध्यान नहीं भंग करना चाहिए और मगर परिवर्तन एवं ध्यान हटाने वाली बाहरी चीज देखने के दौरान सुरक्षित रहने के लिए वहां गति धीमी रखने की आवश्यकता होती है
वाहन चलाते समय चौराहा पर लगी पत्तियों पर चौराहा पर किसी नियम की आवश्यकता होती है उसे पर चर्चा जरूरी है लाल 32 संकेत देती है कि वहां को रोकना है पीली पट्टी का संकेत है कि चलने के लिए तैयार होना एवं अंत में हरी बत्ती का संकेत होता है कि अब आगे बढ़ाना या चलना है इसके साथ ही चौराहे पर बाय मुड़ना लेफ्ट टर्न हमेशा खुला रहने का मतलब है की बाई तरफ मुड़ने के लिए या जाने के लिए रोकने की आवश्यकता नहीं है परंतु ध्यान रखना होता है कि चौराहे पर हमारी दाहिनी तरफ से आने वाले वहां से भी हमें बाई तरफ रहना है और जब तक पर्याप्त जगह ना मिले हमें दयानी लेने में नहीं आना चाहिए पर यह बहन विभाग से जारी किए गए सड़क से संबंधित कई महत्वपूर्ण संकेत निर्धारित किए गए हैं जिसकी जानकारी रखने या पालन करने या तैयार को सुगम सहज और सुखद बनाया जा सकता है सामान्य रूप से उसे दो भागों में बांटा गया है लिखित संकेत एवं चित्र संकेत लिखित संकेत में शब्दों को तथा वाक्य का प्रयोग करके आवश्यक बातें बताई जाती है लेकिन संकेत को इतिहास बहुत पुराना है पर इनकी संख्या बहुत कम है मिल के पत्थर होर्डिंग द्वारा दिशा निर्देश गंतव्य स्थान का ज्ञान करने तथा सड़क यातायात से संबंधित अचानक किसी परिवर्तन आदि की जानकारी देने के लिए लिखित संकेत का प्रयोग करते हैं कभी-कभी कुछ मार्गों पर यातायात संकेत के साथ मोड तिरु मोड सड़क की मरम्मत हो रही है कृपया धीरे चल सावधान बच्चे हैं जैसे लिखित संकेतों के माध्यम से भी सावधानी बरतने के लिए आजा किया जाता है प्रयोजन के आधार पर चरित्र संकेत को तीन श्रेणी में प्रदर्शित करते हैं
1.खतरे की चेतावनी देने वाले संकेत 2. विनियामक संकेत 3. सूचनात्मक संकेत
चित्र संकेत का सबसे बड़ा लाभ यह है कि उन्हें आसानी से देखा समझा और पालन किया जा सकता है प्रत्येक वाहन चालक को निर्देशित चिन्ह को समझ कर ही वहां चलना चाहिए परिवहन विभाग द्वारा प्रयुक्त कॉन का सही ज्ञान कराया ही वाहन चालक को वाहन चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस चलन अनुमति पत्र दिया जाता है परंतु उसका उचित पालन ही यातायात को सुगम एवं सुखदाई बनता है चित्र संकेतों के आकार और रंग अलग-अलग होते हैं लाल रंग के गोलाकार संकेत आदेश आत्मक होते हैं लाल रंग के त्रिकोणीय संकेत चेतावनी देने वाले होते हैं और नीले रंग के आयातकर संकेत सूचना पर दायक होते हैं
यातायात के संकेत भारतीय रोड क्रॉसिंग आरसी द्वारा जारी किए जाते हैं तथा संकेत कॉन और नियमों का प्रयोग कर बनाए जाते हैं जिसका अनुपालन देश के सभी नागरिकों से करने की अपेक्षा की जाती है
यातायात के नियमों का पालन करने में कभी-कभी अन्य गतिरोध भी उत्पन्न हो जाते हैं क्योंकि नियमों की अनदेखी करके अति शीघ्रता करने की कोशिश करते हैं जिसके कारण सड़कों पर जाम की स्थिति बन जाती है एवं यातायात बैंडिट होने लगता है ऐसी स्थिति में कभी-कभी विकल्प के अभाव में जनता यातायात के नियमों को तोड़ने के लिए विवश हो जाती है
परिवहन नियमों के अनुसार उक्त समस्याओं से निपटने के लिए विवेकपूर्ण तथ्यों का अनुपालन करना चाहिए जिसमें कोई दुर्घटना या यह परेशानी का सामना न करना पड़े उल्लेखित परिस्थितियों में कभी-कभी रोड रेस सड़क पर झगड़ा की संभावना बन जाती है जिसको विविध संकेतों से पहचान कर बचा जा सकता है उदाहरण अर्थ उत्तेजक वाहन चलाना अचानक तीव्रता लाना और ब्रेक लगाना सड़कों पर टेढ़ी-मेढ़ी जग जैक ड्राइविंग करना तीव्र गति में बार-बार लेने बदलना अपनी लेने से अचानक दूसरे वाहन के आगे अपना वाहन लाना जानबूझकर अन्य वाहनों के लिए अवरोध उत्पन्न करना दूसरे वाहन की पीछे से या बगल से टक्कर मारना वहां को दूसरे वाहन के पीछे एकदम से सटाकर चलाना निरंतर हॉर्न बजाना वह लाइट फ्लैश करना वाहन चालक को समझदारी दिखाते हुए अपने बचाव के लिए ऐसी स्थिति में उलझने से बचने की कोशिश करनी चाहिए
यातायात के नियम पालन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने सड़क सुरक्षा में सुधार करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं जैसे सड़क फर्नीचर सड़क चिन्ह रोड मार्किंग अनंत परिवहन प्रणाली का प्रयोग करते हुए रोज मर गया टीटी प्रबंधन प्रणाली आरंभ करना निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदारों में अनुशासन बनाए रखना चुनिंदा क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा ऑडिट हत्या दी है संगठित क्षेत्र में भारी मोटर वाहनों के लिए पुरुष जरिया परिश्रम चलाना राज्यों में ड्राइविंग प्रशिक्षण स्कूलों की स्थापना दृश्य श्रव्य तथा प्रिंट माध्यम के द्वारा सड़क सुरक्षा जागरूकता का प्रचार अभियान सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए स्वैच्छिक संगठनों व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों का संचालन वहां ऑन में सुरक्षा मां को और अधिक सख्त बनाना जैसे सेल बेल्ट पावर स्टेरिंग रियर व्यू मिरर अत्यधिक राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्घटना सहायता सेवा योजना के अंतर्गत विभिन्न राज्य सरकारों और सरकारी संगठनों को क्रेन तथा एंबुलेंस उपलब्ध करना राष्ट्रीय राजमार्गों को दो लेने से आठ लेन का 8 लाइन से 6 लाइन का करने का प्रावधान तथा युवा वर्ग में जागरूकता सड़क सुरक्षा का प्रचार करने की प्रक्रिया को भी शामिल करना है
अनंत यातायात के नियमों के बहू आर्मी उद्देश्यों को ध्यान में रखकर प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बनता है कि वह परिवहन विभाग द्वारा बनाए गए यातायात से संबंधित सांसद सैद्धांतिक है व्यवहारिक संकेत को एवं नियमों का पालन कर देश की समृद्धि एवं विकास में अहम योगदान देने का प्रयास करें जिससे हमारा देश समाज एवं परिवार सुरक्षित रहकर विकास की पराकाष्ठा को प्राप्त करने में सफल रहे
धन्यवाद:-
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- Author:- kumarivanshika01232@gmail.com
- Date:- 2026:01:12
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(ICT)- आईसीटी किसे कहते हैं:- आईसीटी का मतलब सूचना संचार प्रौद्योगिकी (Information Communication Technology) है जो सूचना को संभालने स्टोर करने संचालित करने साझा करने उपयोग किए जाने वाले सभी उपकरणों (जैसे कंप्यूटर, स्मार्टफोन, इंटरनेट) और सेवाओं (जैसे सॉफ्टवेयर नेटवर्किंग ) का एक व्यापार समूह है जिसने हमारे काम करने सीखने और स्वाद करने के तरीके में क्रांति ला दी है &nb...
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(ICT)- आईसीटी किसे कहते हैं:-
आईसीटी का मतलब सूचना संचार प्रौद्योगिकी (Information Communication Technology) है जो सूचना को संभालने स्टोर करने संचालित करने साझा करने उपयोग किए जाने वाले सभी उपकरणों (जैसे कंप्यूटर, स्मार्टफोन, इंटरनेट) और सेवाओं (जैसे सॉफ्टवेयर नेटवर्किंग ) का एक व्यापार समूह है जिसने हमारे काम करने सीखने और स्वाद करने के तरीके में क्रांति ला दी है
आईसीटी में क्या-क्या शामिल है:-
हार्डवेयर:- कंप्यूटर,लैपटॉप, स्मार्टफोन, टैबलेट सरवर, राइटर,प्रिंटर
सॉफ्टवेयर:- ऑपरेटिंग, सिस्टम एप्लीकेशन (जैसे- MS Office) डेटाबेस ग्राफिक,सॉफ्टवेयर
नेटवर्क:- इंटरनेट,मोबाइल नेटवर्क, वाई-फाई,क्लाउड कंप्यूटिंग
संचार उपकरण:- टेलीफोन, सेटेलाइट सिस्टम,वीडियोकांफ्रेसिंग ईमेल, सोशल मीडिया, स्टेज मैसेजिंग
अन्य तकनीकी:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा एनालिटिक्स,साइबर सुरक्षा( इंटरनेट का थिंग्स )
उदाहरण :-
ईमेल भेजना,ऑनलाइन वीडियो देखना यूट्यूब,सोशल मीडिया पर चैट करना
स्कूल में कंप्यूटर का उपयोग करके पढ़ाई करना ई लर्निंग
कंपनियां ग्राहकों के दाता का मैसेज करने के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग करती है
महत्व:-
यह शिक्षा स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय और सरकार सहित हर क्षेत्र में दक्षता और पहुंच बढ़ता है
यह सूचना तक पहुंच को आसान बनाता है और लोगों को जोड़ता है
संक्षेप में आईसीटी डिजिटल युग का वह आधार है जो हमें जानकारी के साथ काम करने और एक दूसरे से जोड़ने में मदद करता है
आईसीटी का महत्व:-
आईसीटी सूचना संचार प्रौद्योगिकी आईसीटी का महत्व हर क्षेत्र में है क्योंकि है संचार को तेज शिक्षा को इंटरएक्टिव व्यापार को कुशल और जीवन को सुविधाजनक बनता है सूचना तक पहुंच बढ़ती है टूरिस्ट शिक्षा संभव होती है और नवाचार को बढ़ावा मिलता है यह शिक्षा स्वास्थ्य व्यवसाय और मनोरंजन जैसे कहीं क्षेत्र को आधुनिक बनता है जिससे लोग भौगोलिक बढ़ाओ के बिना जुड़ सकते हैं और काम कर सकते हैं
शिक्षा में महत्व:- मल्टीमीडिया ऑनलाइन कोर्स इंटरएक्टिव व्हाई इट बोर्ड से सीखना मजेदार और प्रभावी बनता है
पहुंचे और समावेशन:- दूरस्थ शिक्षा और डिजिटल संस्थाओं से सभी छात्रों विशेष आवश्यकता वाले छात्रों सहित को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है
नवीनतम जानकारी:- छात्र रोज शिक्षक इंटरनेट के माध्यम से तुरंत नहीं जानकारी प्राप्त कर सकते हैं
व्यवसाय और उद्योग में महत्व:-
दक्षता और स्वचालन :- व्यावसायिक प्रक्रियाओं को स्वचालित करता है जिससे उत्पादकता पड़ती है और लागत कम होती है
संचार और सहयोग:- कर्मचारी और टीमों के बीच कुशल संचार जैसे ईमेल वीडियो कॉन्फ्रेंस को समक्ष बनता है
ई-कॉमर्स और मार्केटिंग :- ऑनलाइन बिक्री ई-कॉमर्स को ग्राहक संबंध प्रबंधन को बढ़ावा देता है
दैनिक जीवन में महत्व:-
तवरित संचार:- ईमेल सोशल मीडिया वीडियो कॉल से तुरंत जुड़ना संभव
सुविधा:- ऑनलाइन बैंकिंग खरीदारी और मनोरंजन फिल्म संगीत गेम को आसान बनाता है
दूर से कम या पढ़ाई:- घर से काम करना वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन पढ़ाई को संभव बनाता है
अन्य लाभ:-
डिजिटल अर्थव्यवस्था:- स्वास्थ्य सेवा शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति को बढ़ावा देता है
वैश्विक जुड़ाव :- भौगोलिक दूरियां को मतकर लोगों और संस्कृतियों को जोड़ता है
संक्षेप में आईसीटी आधुनिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है जो दक्षता पहुंचे और कनेक्टिविटी में सुधार करके हमारे जीने काम करने और सीखने के तरीके में क्रांति ला रहा है
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"मैं आज आपको एक महान कवि के बारे में बताने जा रही हूं जिनका पूरा नाम प्रताप नारायण मिश्र है " हिंदी की बहुमुखी प्रतिभा के धनी में भारतेंदु हरिश्चंद्र बालकृष्ण भट्ट और प्रताप नारायण मिश्र की गणना होती है इनका जन्म सन 1856 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का बैजे गांव मैं हुआ था मिश्रा जी को ना तो भारतेंदु जैसे साधन मिले थे और ना ही भट्ट जैसी लंबी आयु फिर भी मिश्रा ज...
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"मैं आज आपको एक महान कवि के बारे में बताने जा रही हूं जिनका पूरा नाम प्रताप नारायण मिश्र है "
हिंदी की बहुमुखी प्रतिभा के धनी में भारतेंदु हरिश्चंद्र बालकृष्ण भट्ट और प्रताप नारायण मिश्र की गणना होती है इनका जन्म सन 1856 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का बैजे गांव मैं हुआ था मिश्रा जी को ना तो भारतेंदु जैसे साधन मिले थे और ना ही भट्ट जैसी लंबी आयु फिर भी मिश्रा जी ने अपनी प्रतिभा और लगन से उसे युग में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान बना लिया था
मिश्रा जी के जन्म के कुछ दिनों बाद ही इनके ज्योतिषी पिता पंडित संकटा प्रसाद मिश्र कानपुर आकर सह परिवार रहने लगे यहीं पर उनकी शिक्षा दीक्षा हुई पिता इन्हें ज्योतिष पढ़कर अपने प्रत्येक व्यवसाय में ही लगाना चाहते थे परंतु इनका मनमौजी स्वभाव उसमें नहीं राम इन्होंने कुछ समय तक अंग्रेजी स्कूल में भी शिक्षा प्राप्त की किंतु कोई भी अनुशासन और निष्ठा का कार्य जिसमें विषय की निराशता के साथ प्रति घंटा भी आवश्यक होती उनके मोची और फक्कड़ स्वभाव के विपरीत था बताइए यहां भी पढ़ ना सके घर में स्वाध्याय से ही इन्होंने संस्कृत उर्दू फारसी अंग्रेजी और बांग्ला पर अच्छा अधिकार प्राप्त कर लिया
मिश्रा जी के साहित्यिक जीवन का प्रारंभ बाद ही दिलचस्प रहा कानपुर उन दिनों लावनी बाजू का केंद्र था और मिश्र जी को लावणी अत्यंत प्रिय थी लावणी बड़ो के संपर्क में आकर इन्होने लावण्या और ख्याल लिखना आरंभ किया यही से उनके कवि और लेखक जीवन का प्रारंभ हुआ
मिश्रा जी साहित्यकार होने के साथ हिसार सामाजिक जीवन से भी जुड़े थे सामाजिक राजनीतिक धार्मिक संस्थाओं से इनका निकट का संपर्क था और देश में जो नव जागरण की लहर आ रही थी इसके प्रति यह संचित है वास्तव में नवजागरण का संदेश ही जनजीवन तक पहुंचने के लिए इन्होंने साहित्य सेवा का व्रत लिया और ब्राह्मण प्रतीक का आजीवन संपादन करते रहे
मिश्रा जी विपुल प्रतिभा और विविध रुचियां के धनी थे कानपुर में इन्होंने नाटक सभा नमक की एक संस्था बनाई थी उनके माध्यम से यह पारसी थिएटर के सामान्य अंतर हिंदी का अपना रंग मैच खड़ा करना चाहते थे यह स्वयं भी भारतेंदु की भांति कुशल अभिनय करते थे
मिश्रा जी भारतेंदु के व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित थे तथा उन्हें अपना गुरु और आदर्श मानते थे यह वाक्य दुग्ध के धनी थे और अपनी हाजिर जवाब भी है विनती स्वभाव के लिए प्रसिद्ध थे बहुमुखी प्रतिभा के धनी मिश्रा जी का 38 वर्ष की अल्प आयु में सन 1894 में कानपुर में निधन हो गया
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प्रस्तावना "गृह कार्य व्यवस्था से आशय है कि ग्रह के सभी कार्यों को एक योजना बनाकर किया जाए जिससे समय धन व शर्म की बचत हो सके" प्रत्येक परिवार में ए सीमित कार्य होते हैं इसमें अधिकतर कार्यों का संपादन ग्रैनी को ही करना पड़ता है किसी भी कार्यों को रोक नहीं जा सकता अतः ग्रहणी की सुविधा के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह कार्य का उसकी प्रकृति के आधार पर वर्गीकरण कर ली तथा गृ...
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प्रस्तावना
"गृह कार्य व्यवस्था से आशय है कि ग्रह के सभी कार्यों को एक योजना बनाकर किया जाए जिससे समय धन व शर्म की बचत हो सके"
प्रत्येक परिवार में ए सीमित कार्य होते हैं इसमें अधिकतर कार्यों का संपादन ग्रैनी को ही करना पड़ता है किसी भी कार्यों को रोक नहीं जा सकता अतः ग्रहणी की सुविधा के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह कार्य का उसकी प्रकृति के आधार पर वर्गीकरण कर ली तथा गृह कार्य में परिवार के प्रत्येक सदस्य का सुविधा कर सहयोग भी ले जिन घरों में सभी छोटे-बड़े कार्य ग्रैनी ही करती है वहां गृहणी का शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ जाता है और परिणाम स्वरुप घर का वातावरण भी कल युक्त बन जाता है अतः ग्रहणी को अपनी शांति है वह बुद्धिमानी से कार्य को व्यवस्थित ढंग से करना चाहिए
गृह कार्य व्यवस्था का अर्थ -
किसी भी कार्य को योजना प्रबंधन से करने की क्रिया को व्यवस्था कहते हैं ऐसा करने से प्रत्येक कार्य सरलता से हो जाता है तथा संवेदन और श्रम की बचत भी होती है गृह कार्य व्यवस्था से तात्पर्य है कि घर के सभी कार्यों को इस ढंग से व्यवस्थित करके एवं क्रमानुसार करना कि जिस घर के सभी कार्य ठीक समय पर संबंध हो जाए साथ ही ग्रहणी के समय और शक्ति को बचत हो घर व्यवस्थित और परिवार सुखी रहे वह घर का वातावरण शांत रहे
गृह कार्य व्यवस्था की परिभाषा-
"गृह कार्य व्यवस्था के अर्थ से आशय है कि ग्रह के सभी कार्यों को एक योजना बनाकर किया जाए जिससे समय धन व श्रम की बचत हो सके "
गृह कार्य व्यवस्था करते समय निम्नलिखित तत्वों पर ध्यान दिया जाता है-
1. सर्वप्रथम घर के सांसद कार्यों की एक योजना बनाई चाहिए
2.योजना के अनुसार कार्य को किया जाना चाहिए
3. कार्य प्रक्रिया पर पूर्ण नियंत्रण रखना चाहिए
4. कार्यों को प्राथमिकता के अनुसार करना चाहिए
5.परिवार के संसद सदस्यों को उसकी आयु योग्यता एवं क्षमता के अनुसार कार्य सपना चाहिए
उपयुक्त विवरण से स्पष्ट है कि घर के विभिन्न कार्यों को करने की ऐसी व्यवस्था करना कि सभी ग्रह कार्य नियमित रूप से तथा सहजता से हो जाए कार्य व्यवस्था करना कहलाता है
कार्य व्यवस्था की सफलता ग्रहणी की बुद्धिमानी और कुशलता पर निर्भर करती है
गृह कार्यों का वर्गीकरण-
दैनिक कार्य- दैनिक कार्यों में वे सभी कार्य आते हैं जो ग्रहणी द्वारा प्रतिदिन किए जाते हैं उदाहरण के लिए प्रतिदिन नाश्ता बनाना भोजन बनाना घर की सफाई कपड़े धोना बर्तन साफ करना बच्चों को तैयार करना खरीदी तारी करना विश्राम तथा मनोरंजन के लिए समय निकालना आदि कार्य सम्मिलित है एक कुशल ग्रहणी अपने घर के इन सभी कार्यों को योजना बंद करके बड़ी से निपटा सकती है
साप्ताहिक कार्य- कुछ कार्य ऐसे होते हैं जिन्हें प्रतिदिन नहीं किया जा सकता अतः सप्ताह में एक दिन इन कार्यों के लिए निर्धारित किया जाता है अधिकतर घरों में यह कार्य रविवार के दिन किए जाते हैं इसका मुख्य कारण यह होता है कि उसे दिन परिवार के सभी सदस्यों की छुट्टी होती है तो सभी से सहायता ली जा सकती है साप्ताहिक कार्यों के अंतर्गत पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करना चादर बदलना ढूंढने के लिए कपड़े देना रसोई की अच्छी तरह सफाई करना बच्चों के साथ कुछ समय व्यतीत करना बाहर घूमने का प्रोग्राम बनाना अधिकारी आते हैं
मानसिक कार्य - कुछ कार्य महीने भर में एक बार किए जाते हैं जैसे बाजार से महीने भर की खाक सामग्री लाना उन्हें टीपू में भरकर सो व्यवस्थित करना बच्चों की फीस जमा करना महेरी धोबी दूध अखबार का बिल टेलीफोन का बिल बिजली का बिल गैस सिलेंडर भरवाना घर के व्यर्थ सामान को निकलवाना वह भेजना आदि आवश्यक कार्य मानसिक कार्य के अंतर्गत आते हैं
वार्षिक कार्य- यह कार्य वर्ष में एक बार किए जाते हैं यह कार्य अधिकतर वर्षा ऋतु की समाप्ति के पश्चात किए जाते हैं इन कार्यों के अंतर्गत घर की टूट-फूट की मरम्मत घर की पुताई तथा रंग रोगन अनु उपयोगी वस्तुओं को घर से बाहर करना फर्नीचर और दरवाजों पर पेंट करवाना वार्षिक टैक्स जमा करना सालभर का अनाज व तेल खरीदना पापड़ चिप्स अचार मुरब्बा चटनी आदि तैयार करना आता है
सामयीक कार्य- कुछ कार्य समय-समय पर करने पड़ते हैं जैसे स्वेटर बनाना अचार डालना उन्हें वेस्टन को साफ करके रखना भारी साड़ियां का रख रखा करना विभिन्न त्योहार वह जन्मदिन की तैयारी करना आदि इन कार्यों के करने में परिवार के सदस्यों का सहयोग लिया जा सकता है
आकस्मिक कार्य - यह कार्य में होते हैं कि जो अक्षय कुमार सामने आ जाते हैं जैसे परिवार में होने वाली शादी विवाह जन्म मृत्यु अतिथि आगमन स्नान तोरण मित्र या सगे संबंधियों के यहां जाना आदि ग्रहणी को इन कार्यों को संपन्न करने में अपने परिवार के सदस्यों का यथायोग्य सहयोग लेना चाहिए इससे परिवार के सभी सहयोगी बनते हैं तथा सारे कार्य बड़ी सरलता से निपट जाते हैं
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गृह व्यवस्था का महत्व :- गृह व्यवस्था का प्रत्येक परिवार में विशेष महत्व होता है जिस घर में गृह व्यवस्था से चालू रूप से चलती है उसे घर में उन्नति होती है आज के आधुनिक युग में परिवार की आवश्यकताओं में भी वृद्धि होती है अतः सभी आवश्यकताओं की पूर्ति संभव नहीं है ऐसी स्थिति में परिवार के प्रत्येक सदस्य की आवश्यकता को तीव्रता के आधार पर एक व्यवस्थित क्रम में पूरा किया जा सकता है तथा परिवार...
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गृह व्यवस्था का महत्व :-
गृह व्यवस्था का प्रत्येक परिवार में विशेष महत्व होता है जिस घर में गृह व्यवस्था से चालू रूप से चलती है उसे घर में उन्नति होती है आज के आधुनिक युग में परिवार की आवश्यकताओं में भी वृद्धि होती है अतः सभी आवश्यकताओं की पूर्ति संभव नहीं है ऐसी स्थिति में परिवार के प्रत्येक सदस्य की आवश्यकता को तीव्रता के आधार पर एक व्यवस्थित क्रम में पूरा किया जा सकता है तथा परिवार के प्रत्येक सदस्य को अधिकतम संतुष्टि मिल सकती है इसके साथ ही साथ परिवार के प्रत्येक सदस्य का यह कर्तव्य बनता है कि वह गृह व्यवस्था के कुशलता पूर्वक संचालन में गृहणी का पूरा सहयोग करें
गृह व्यवस्था के महत्व का वर्णन निम्नलिखित प्रकार से-
1.रहन-सहन के स्तर को ऊंचा बनने में सहायक- परिवार के रहन-सहन का स्तर ऊंचा बनने में गृह व्यवस्था से पारिवारिक साधनों का उपयोग हो जाता है तथा समय शक्ति व शर्म की बचत होती है परिणाम स्वरुप परिवार के रहन-सहन का स्तर भी ऊंचा उठता है
2. पारिवारिक आवश्यकता की पूर्ति में सहायक - परिवार वह केंद्र है जहां परिवार के सभी सदस्यों की अनेक आवश्यकता है होती है तथा उनकी पूर्ति के लिए नियंत्रित रूप से प्रयास किए जाते हैं परिवार की आवश्यकता है सीमित होती है तथा पूर्ति के साधन सीमित होते हैं ऐसी स्थिति में पारिवारिक आवश्यकता की पूर्ति गृह व्यवस्था के द्वारा ही संभव होती है गृह व्यवस्था के अंतर्गत सर्वप्रथम तीव्रता के आधार पर आवश्यकताओं की वरीयता का निर्धारण किया जाता है उत्तम ग्रह व्यवस्था में परिवार के सभी सदस्यों की महत्वपूर्ण आवश्यकता को ध्यान में रखा जाता है इसी प्रकार गृह व्यवस्था सभी पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक सिद्ध होती है
3. पारिवारिक आय व्यय के नियोजन में सहायक- पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए नियंत्रण धन की आवश्यकता होती है प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति के लिए किए व्यय करना पड़ता है परिवार की आय सीमित होती है तथा पारिवारिक आय को ध्यान में रखकर बजट को तैयार करना चाहिए बजट सदैव बचत का होना चाहिए ऐसा करने से परिवार के सदस्य अपने आप को सुरक्षित अनुभव करते हैं
4. बच्चों वह पति की सफलता में सहायक- घर में उचित व्यवस्था होने से घर का वातावरण शांतिपूर्ण होता है जिसमें रहते हुए बच्चों का पढ़ने में बहुत मन लगता है अर्थात उनकी शिक्षक उन्नति होती है साथ ही उनका शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है
इसी प्रकार व्यवस्थित परिवार में पति को सुख शांति मिलती है तो उन्हें और अधिक परिश्रम करके धन अर्जित करने के लिए उत्साह मिलता है
5. पारिवारिक वातावरण सुखी बनाने में सहायक- जब परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं की अधिकतम संतुष्टि हो जाती है तो परिवार का वातावरण सोहर में वह संतोषजनक हो जाता है परिणाम स्वरुप घर में नैतिक सामाजिक आध्यात्मिक तथा धार्मिक मूल्यों का विकास संभव होता है
गृह व्यवस्था के संचालन में आने वाली बधाए:-
यह सत्य है कि एक कुशल वह बुद्धिमान ग्रहणी अपने घर को नियोजित तथा सुव्यवस्थित ढंग से चलती है परंतु कभी-कभी ऐसी कठिन परिस्थितियों पैदा हो जाती है कि ग्रहणी गृह व्यवस्था के सफल संचालन में असफल हो जाती है अतः व्यवस्था के संचालन में आने वाली बधाओ की गृहणी को जानकारी होनी चाहिए जिसमें वह इसे यथा संभव निपट सके गृह व्यवस्था के कुशल संचालन में आने वाली बढ़ाएं निम्नलिखित प्रकार की होती है
1. लक्ष का ज्ञान न होना- गृह व्यवस्था में मुख्य बाधा लक्षण की जानकारी ना होना होती है ग्रहणी सही समय पर सही कार्य नहीं कर पाती और परिणाम स्वरुप गृह व्यवस्था में समस्या उत्पन्न होती है उदाहरण के लिए धन संचय करके उस मकान बनवाने की अपेक्षा यदि कपड़े अत्यधिक खरीद लिए जाए तो बनाए गए लक्षण की पूर्ति नहीं हो पाएगी
2. नई जानकारी का अभाव - आज विज्ञान का योग है तथा प्रतिदिन नए-नए उपकरण आते रहते हैं जिसे समय वह श्रम की बचत होती है यदि ग्रहणी को नहीं उपकरणों के बारे में जानकारी नहीं होगी तो गृह व्यवस्था में बाधा उत्पन्न होती है
3. समस्याएं व उनके समाधान के ज्ञान का अभाव - यह सत्य है कि गृह व्यवस्था में बहुत सी समस्याएं आती है प्रत्येक परिवार की अपनी समस्या होती है तथा उसका समाधान भी इस परिवार में ही संभव होता है कुछ परिवारों में वही समस्याएं बड़े ही शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हो जाती है और कहीं-कहीं वही समस्या एक विशालकाय समस्या के रूप में प्रस्तुत हो जाती है यदि परिवार में कभी कोई समस्या आ जाए तो उसका किसी तरह शांतिपूर्वक समाधान करना है इसका जी गृहणी या परिवार को ज्ञान नहीं होता उसी परिवार में कोई भी समस्या आने का तूफान आ जाता है
4. कार्य कुशलता में कमी आना- कभी-कभी परिवार में पर्याप्त साधन होते हुए भी उसे परिवार की गृह व्यवस्था अच्छी नहीं होती इसका कारण कार्य कुशलता में कमी का होना होता है साधनों की उपयोग विधि का ज्ञान नहीं होता और परिणाम स्वरुप गृह व्यवस्था सफल नहीं हो पाती
5. परिवार के सदस्यों का असहयोग- गृह व्यवस्था कितनी भी ठीक हो यदि परिवार के सभी सदस्य उसमें सहयोग नहीं करते हैं तो गृह व्यवस्था कुशलता पूर्वक संचालित नहीं हो सकती
एक कुशल ग्रहणी को इन सभी समस्याओं के प्रति संचित रहना चाहिए और कोई भी समस्या आने पर वह बड़ी सूझबूझ के साथ दूर करने गृह व्यवस्था का सफलतापूर्वक संचालन कर सकती है
गृह व्यवस्था के साधन -
गृह संबंधित आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु बहुत से साधनों की आवश्यकता पड़ती है अध्ययन की दृष्टि से करे व्यवस्था के साधनों को तीन भागों में बनता है
भौतिक साधन- परिवार को भली प्रकार सुव्यवस्थित रूप से चलने के लिए भौतिक साधनों की आवश्यकता पड़ती है भौतिक साधनों में धान का विशेष महत्व भौतिक साधनों के अंतर्गत परिवार की आए घर की स्थिति तथा बनावट रहन-सहन का स्टार परिवार के कार्यों में उपयोग होने वाले आधुनिक यंत्र तथा उपकरण आते हैं परिवार की आय होने से आवश्यकता अनुसार व्यय किया जाना संभव हो जाता है परिवार के निवास के लिए एक ऐसा मकान होना चाहिए जिसमें परिवार के सभी सदस्य पूर्ण सुविधा के साथ अपना जीवन यापन कर सके परिवार में कार्यों को करने के लिए आधुनिक यंत्र होने के कार्य सरलता से तथा कम समय में पूर्ण हो जाता है अर्थात श्रम शक्ति वह समय की बचत होती है
भौतिक साधनों में उन सभी वस्तुओं तथा संपत्ति का महत्वपूर्ण स्थान होता है जिन्हें हम प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप में उपयोग में लाते हैं जैसे मकान फर्नीचर आधुनिक उपकरण भोज्य पदार्थ आदि में सभी भौतिक साधन उत्तम प्रकार के होने चाहिए जिससे कार्य कुशलता में वृद्धि हो सके
मानवीय साधन- भौतिक साधनों के अतिरिक्त मानवीय साधनों की भी आवश्यकता होती है मानवीय साधनों के अंतर्गत परिवार के सदस्यों की संख्या नौकर परिवार के सदस्यों का व्यवहार वह मनोवृति ज्ञान व प्रवीणता तथा रुचि आदि आते हैं
गृह व्यवस्था के लिए परिवार के सदस्य तथा नौकरों की सहायता भी लेनी पड़ती है मानवीय साधनों का उपयोग करते समय ग्रहण की विशेष भूमिका होती है तब रानी को चाहिए कि वह परिवार के सदस्यों को उनकी रुचि वह क्षमता किया था पर कार्य का विभाजन करें सदस्य तथा नौकरों से इसने युक्त व मृदुलतापूर्ण व्यवहार करें और आवश्यकता पढ़ने पर उनकी सहायता भी करती रहे ऐसा करने से कार्य शीघ्र वह उत्तम होगा
सार्वजनिक साधन- गृह व्यवस्था के कुशल संचालन हेतु सरकार द्वारा प्रदत सार्वजनिक साधनों का उपयोग करना आवश्यक हो जाता है सार्वजनिक साधनों के अंतर्गत विद्यालय पुस्तकालय अस्पताल बैंक डाकघर धार्मिक स्थल विद्युत एवं दूरसंचार विभाग कानून व सुरक्षा यातायात संबंधित साधन तथा व्यापार आदि आते हैं
हमारे दैनिक जीवन में इन सभी सुविधाओं का विशेष महत्व है यह संस्थाएं यदि अपनी सेवाएं बंद कर दे तो हमारा जीवन अस्त व्यस्त हो जाएगा दूरसंचार बिजली पानी आता इसके उत्तम उदाहरण है सार्वजनिक साधनों का उपयोग ग्रहण की योग्यता पर निर्भर करता है साथ ही साथ सार्वजनिक केदो की पूर्ण जानकारी भी आवश्यक होती है
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- Author:- kumarivanshika01232@gmail.com
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प्रस्तावना:- गृह व्यवस्था निर्णय की एक श्रृंखला है जिसमें पारिवारिक साधनों के अनुसार पारिवारिक लक्षण को प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है इस प्रयास में नियोजन नियंत्रण एवं मूल्यांकन इन तीनों चरणों को सम्मिलित किया जाता है परिवार तभी सुखी वह समृद्ध होता है जब उसे परिवार को चलने वाली निर्देशिका अर्थात ग्रहणी है कुशल व्यक्तित्व की हो परिवार को अच्छा ऐप सुख अर्थात सुव्यवस्थित घर दे...
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प्रस्तावना:-
गृह व्यवस्था निर्णय की एक श्रृंखला है जिसमें पारिवारिक साधनों के अनुसार पारिवारिक लक्षण को प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है इस प्रयास में नियोजन नियंत्रण एवं मूल्यांकन इन तीनों चरणों को सम्मिलित किया जाता है
परिवार तभी सुखी वह समृद्ध होता है जब उसे परिवार को चलने वाली निर्देशिका अर्थात ग्रहणी है कुशल व्यक्तित्व की हो परिवार को अच्छा ऐप सुख अर्थात सुव्यवस्थित घर देखकर ग्रैनी के योग्य होने का परिचय मिलता है परिवार को अच्छा वह सुखी बनाने के लिए ग्रहणी को अनेक कार्य करने पड़ते हैं एक परिवार के सदस्यों के रहन-सहन के स्तर को उच्च बनाने में धन अथवा संपत्ति की इतनी आवश्यकता नहीं होती जितनी करनी की सूचना वह कुशलता की किसी भी परिवार के स्तर को देखने से परिवार की संचालिका के गुना की झलक मिलती है
गृह व्यवस्था का अर्थ:-
गृह व्यवस्था का शाब्दिक अर्थ है- 'घर की व्यवस्था या घर का प्रबंध ग्रह कार्यों को योजना बंद है संयोजित ढंग से संपन्न करना ही गृह व्यवस्था कहलाता है'
वास्तव में व्यवस्था शब्द मनुष्य के संपूर्ण जीवन से जुड़ा हुआ है यह सारी प्रकृति एवं व्यवस्थित ढंग से ही कार्य कर रही है इसी प्रकार यदि मनुष्य अपने जीवन को आदर्श जीवन के रूप में बनाना चाहता है तो उसे व्यवस्था के बंधन में बांधना ही पड़ेगा इसी प्रकार ग्रह को यदि एक आदर्श ग्रह के रूप में दर्शन है तो प्रत्येक कार्य व्यवस्थित ढंग से ही करना पड़ेगा
व्यवस्था या प्रबंध एक मानसिक प्रक्रिया है जो योजना के रूप में प्रकट होती है तथा योजना के अनुरूप ही संपादित एवं नियंत्रित होती है व्यवस्था के रूप में योजना कहां कार्यांव लक्ष्य प्राप्ति का उत्तम साधन बन जाता है
डेविस के अनुसार, " व्यवसाय कार्यकारी नृत्य तब का कार्य यह मुख्यत एक मानसिक प्रक्रिया है यह कार्य नियोजन संगठन तथा सामूहिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए अन्य व्यक्तियों के कार्य के नियंत्रण से संबंधित है"
क्रो एवं क्रो के अनुसार गृह व्यवस्था घर के उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक सीमित साधनों के विषय में उचित निर्णय लेने की प्रक्रिया है
प्राचीन समय में मनुष्य की आवश्यकता बहुत सीमित थी व्यक्ति का रहन-सहन सामान्य वह साधारण हुआ करता था अतः घर को चलाने में कठिनाइयों का सामना काम करना पड़ता था परंतु वर्तमान में वैज्ञानिक आधुनिक फैशन परिषद युग में कदम कदम पर समस्या है वर्तमान मनुष्य की आवश्यकता में वृद्धि हुई है साथ ही साथ एसएमएस साधन भी उपलब्ध हो गए हैं जिससे ग्रहणी के लिए गृह व्यवस्था करने का कार्य जटिल हो गया है अतः एक कुशल ग्रैनी ही परिवार के उपलब्ध साधन का उचित उपयोग करके परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति करके उन्हें अधिकतम संतुष्ट प्रधान कर सकती है
गृह व्यवस्था की परिभाषा :-
गृह व्यवस्था के संदर्भ में निखिल तथा डारसी मैं अपने विचार इस प्रकार प्रस्तुत किए हैं -" गृह व्यवस्था परिवार के लक्षण की पूर्ति के उद्देश्य से परिवार के साधनों के प्रयोग का नियोजन नियंत्रण व मूल्यांकन है अर्थात पारिवारिक लक्षण की प्राप्ति के लिए गृह प्रबंध योजना बंद ढंग से करना चाहिए तथा समय-समय पर मूल्यांकन भी आवश्यक है करो या करो के अनुसार गृह व्यवस्था ग्रह के उद्देश्य की पूर्ति में सहायक सीमित साधनों के विषय में उचित निर्णय लेने की प्रक्रिया मात्र है गुड जॉनसन मैं गृह व्यवस्था को इन शब्दों में परिभाषित किया है गृह व्यवस्था निर्णय की ऐसी श्रृंखला है जो पारिवारिक लक्षण की प्राप्ति के लिए पारिवारिक साधनों को प्रयुक्त करने की प्रक्रिया प्रस्तुत करती है
गृह व्यवस्था के चरण:-
उपयुक्त परिभाषा से स्पष्ट है कि ग्राम व्यवस्था के तीन चरण होते हैं इन्हें गृह व्यवस्था के तत्व या अंग भी कहा जाता है
गृह व्यवस्था के चरण- नियोजन -नियंत्रण -मूल्यांकन -( सापेक्ष,निरपेक्ष)
नियोजन- किसी कार्य की सफलता के मूल में नियोजन का बहुत महत्व होता है उदाहरण के लिए घर में चार बच्चे हैं परिवार की आय के अनुसार उनकी शिक्षा की एक योजना बनाने होगी अर्थात नियोजन का अर्थ है कि भविष्य में हमें क्या और कैसे करना है इसका पूर्ण निश्चय कर लिया जाना इससे भविष्य में होने वाला कार्य सहज हो जाता है और उसकी सफलता में संदेह भी काम रह जाता है निखिल और दर्शी ने नियोजन को इस प्रकार परिभाषित किया है- एक वांछित लक्ष्य एक पहुंचने के विभिन्न संभावित मार्गों के विषय में सूचना कल्पना करना तथा उनकी योजना की संपत्ति तक अनुसरण करना और व्यापक योजना का चयन करना है
योजना लक्ष्य निर्दिष्ट प्रक्रिया होती है इससे इन बातों का उपयोग किया जाता है
1चिंतन 2 कल्पना 3 तक शक्ति तथा 4 सिमरन शक्ति
नियोजन के अनेक लाभ भी होते हैं
नियंत्रण:- नियोजित कार्य को करने में नियंत्रण की आवश्यकता होती है यदि कार्य करने में नियंत्रण नहीं रह पाएगा तो नियोजित कार्य भी पूर्ण नहीं हो सकता नियंत्रण में परिवार के सभी सदस्यों का सहयोग आवश्यक है
मूल्यांकन - कार्य को संपन्न करने के पश्चात उसका मूल्यांकन आवश्यक है पूर्व नियोजन के अनुसार कार्य करने में कितनी सफलता और कितनी असफलता मिली तथा क्या उचित हुआ वह क्या अनुचित हुआ इसका निर्धारण करने को मूल्यांकन कहते हैं मूल्यांकन से कार्य में पाए जाने वाली त्रुटियां का ज्ञान होता है तथा भविष्य में उन त्रुटियों से बचा जा सकता है साथ ही यह भी ज्ञात हो जाता है कि मूल्यांकन करने के आगे इस कार्य को करने में कौन-कौन से परिवर्तन आवश्यक है
गृह व्यवस्था के उद्देश्य
गृह करने वाली संस्था है मनुष्य के जीवन में घर का विशेष महत्व है परिवार के सभी सदस्यों की आवश्यकताओं को पूर्ण करना ग्रैनी का उत्तरदायित्व होता है अतः ग्रहों को इस बात का पूर्ण ज्ञान होता है चाहिए कि गृह व्यवस्था को क्या उद्देश्य होते हैं
गृह व्यवस्था के निम्नलिखित उद्देश्य होते हैं
अनिवार्य आवश्यकताओं की संतुष्टि- गृह व्यवस्था का प्रथम उद्देश्य परिवार की सभी अनिवार्य आवश्यकता की संतुष्टि करना है परिवार के सभी सदस्यों को उत्तम व पौष्टिक भोजन मिलना चाहिए भोजन परोसते समय परिवार के प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता में रुचि का भी ध्यान रखना आवश्यक है परिवार के सभी सदस्यों के लिए वस्त्रो का उचित प्रबंध होना चाहिए तथा एक मकान की व्यवस्था हो जिसमें परिवार के सभी सदस्य सुख पूर्वक रह सके
समय का शुद्ध प्रयोग - घर के सभी कार्यों को इतनी कुशलता से करना चाहिए जिससे बच्चे हुए समय का अधिकतम शुद्ध प्रयोग हो सके इसके लिए ग्रहणी अपनी सामर्थ्य के अनुसार आधुनिक यंत्रों का प्रयोग भी कर सकती है
आय वय का संतुलन- घर के संचालन में आए तथा वे में समाज से होना अत्यंत आवश्यक है परिवार की आई सीमित होती है तथा आवश्यकता है स सीमित होती है अतः उसे सीमित आय में ही वह करना चाहिए तथा साथ ही साथ इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि परिवार के सदस्यों को अधिकतम संतुष्टि भी मिल सके
समाज सेवा - ग्रह के विभिन्न कार्य इस प्रकार व्यवस्थित होने चाहिए कि परिवार के सदस्य अपने समय में से कुछ समय बचाकर समाज की सेवा अधिकारियों में भाग ले सके जिससे मैं सच्चा आत्मिक संतोष कर सके
विश्राम एवं मनोरंजन- घर के सभी कार्यों में प्रत्येक सदस्य को थकान होती है अतः इसके लिए विश्राम करना आवश्यक होता है विश्राम के साथ-साथ मनोरंजन के लिए समय निकलने से परिवार के सदस्यों में सामाजिक बना रहता है
सर्वांगीण विकास - एक कुशल गृह व्यवस्था परिवार के लिए सुख शांति का वातावरण उत्पन्न करके परिवार के संसद सदस्यों का शारीरिक मानसिक आर्थिक है वह अत्यधिक विकास करती है
गृह व्यवस्था के तत्व या कारक-
गृह एवं परिवार दो भिन्न शब्द है- गृह वह स्थान है जहां कोई परिवार रहकर जीवन व्यतीत करता है इस प्रकार ग्रह का आशय मकान से है परिवार व्यक्ति का वह समूह है जो आपस में रक्त संबंधों से संबंध होते हैं व्यवस्था के तत्वों के संदर्भ में गृह तथा परिवार संबंधित तत्वों का अलग-अलग विवेचन करना चाहिए ग्रह के संदर्भ में व्यवस्था के तत्वों या कारक ऑन का सामान्य परिचय निम्नलिखित है
घर का सुविधाजनक होना- घर का निर्माण करते समय अथवा किराए पर लेते समय ध्यान रखना चाहिए की विभिन्न कक्षाओं का नियोजन सुविधाजनक हो धारण के लिए डाइनिंग रूम और रसोईघर निकट होने से शक्तियां समय की बचत होती है स्टोर रूम और रसोई घर भी निकट होना चाहिए अध्ययन कक्ष और स्वयं कक्षा का डाइनिंग रूम से अंतर होना चाहिए जिससे विश्राम में अध्ययन में बाधा ना पड़े शौचालय और गुसलखाने निकट होने चाहिए इसी प्रकार डाइनिंग रूम की व्यवस्था इस प्रकार की होनी चाहिए की मेहमान घर में आंतरिक हिस्सों में काम से कम प्रवेश करते हुए डाइनिंग रूम तक पहुंच जाएं गृह संबंधित इस विशेषता या तत्व को पर्सपानुकूलता कहा जाता है अवश्य भवन में इस विशेषता के होने पर गृह व्यवस्था में लागू की जा सकती है
सफाई- परिवार का लक्ष्य परिवार के सदस्यों को स्वस्थ रखना है और यह तब तक संभव नहीं है जब तक घर में सफाई की उचित व्यवस्था न हो व्यवस्थित और आकर्षक घर के लिए भी सफाई का होना आवश्यक है यदि घर मैं सफाई नहीं है तो मक्खी मच्छर मकड़िया आदि जन्म लेंगे और रोग फैलेंगे रसोई घर की सफाई स्वच्छता के लिए अनिवार्य डाइनिंग रूम की सफाई से ग्रैनी की सुरुचि पूर्णता का आभास होता है बच्चों का पर्याप्त समय अध्ययन कक्ष में बिकता है यदि अध्ययन पक्ष साफ सुथरा है किताबें करने से सजी है मेज कुर्सियां पर धूल नहीं है तो बच्चे के पढ़ने में अधिक रुचि लगे इस प्रकार स्पष्ट है कि गृह व्यवस्था के लिए घर की सफाई एक महत्वपूर्ण तथा अति आवश्यक कारक है
जलवायु और प्रकाश की उचित व्यवस्था- शुद्ध वायु शुद्ध जल और प्रकाश की घर में उचित व्यवस्था होनी चाहिए सभी कमरों में पर्याप्त खिड़की दरवाजे और रोशनदान होने चाहिए जिससे स्वच्छ वायु और प्रकाश का प्रवेश हो सके घर में धूप का आना भी आवश्यक होता है जिन घरों में सूर्य का प्रकाश नहीं आता आता है वहां शिलान और अनेक कीटाणुओं का सामाजिक हो जाता है जो परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है अध्ययन कक्षा में प्रकाश की तथा शौचालय स्नानागार और रसोई में जल की उचित व्यवस्था होनी चाहिए यदि घर में यह सांसद कारक ठीक है तो निश्चित रूप से उत्तम गृह व्यवस्था के अनुपालन में सरलता होगी
भोज्य सामग्री की व्यवस्था - परिवार के सदस्यों को समय पर उचित और संतुलित भोजन उपलब्ध होना चाहिए भोजन अल्पाहार में अतिथि सरकार के लिए सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए अतिथियों के आने पर चाय या कॉफी से उनका सत्कार होना चाहिए यदि घर में दूध या चाय की पट्टी समय पर उपलब्ध नहीं है तो उसे ग्रहण की या कुशलता और व्यवस्था का पता चलता है भोजन सामग्री की व्यवस्था के अंतर्गत घर में शुद्ध और पर्याप्त मात्रा में खाद सामग्री रहनी चाहिए तथा समय-समय पर उनकी सफाई की जानी चाहिए खाद्य पदार्थों का संरक्षण भी इसी में सम्मिलित है काग पदार्थ का अपव्यव नहीं होना चाहिए
घर की सामग्री की व्यवस्था- घर की सामग्री से तात्पर्य है दैनिक प्रयोग की वस्तुएं जैसे बर्तन वस्त्र पुस्तक के बिस्तर फर्नीचर आदि आधुनिक परिवारों में रेडियो टेप रिकॉर्डर टेलीविजन फीस पंखे कूलर सिलाई मशीन कपड़े धोने की मशीन प्रेशर कुकर टोस्टर ओवन चाहिए जिससे इन उपकरणों की टूट-फूट कम से कम हो आवश्यकता अनुसार सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए यदि कोई उपकरण या वस्तु टूट जाती है या खराब तो उसको ठीक करने का प्रबंध होना चाहिए
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- Author:- kumarivanshika01232@gmail.com
- Date:- 2026:01:06
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प्रस्तावना:- " स्वस्थ जीवन का वह गुण है जो व्यक्ति को अधिक सुखी ढंग से जीवित रहने तथा परोक्ष रूप से सेवा करने के योग्य बनता है" "स्वस्थ मनुष्य की पूर्ण शारीरिक मानसिक एवं सामाजिक स्थिति है केवल रोगी की अनुपस्थिति स्वास्थ्य नहीं है " स्वास्थ्य शब्द मानव जीवन से संबंधित है प्रत्येक व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह स्वस्थ रहे स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन का आनंद उठाता है...
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प्रस्तावना:-
" स्वस्थ जीवन का वह गुण है जो व्यक्ति को अधिक सुखी ढंग से जीवित रहने तथा परोक्ष रूप से सेवा करने के योग्य बनता है"
"स्वस्थ मनुष्य की पूर्ण शारीरिक मानसिक एवं सामाजिक स्थिति है केवल रोगी की अनुपस्थिति स्वास्थ्य नहीं है "
स्वास्थ्य शब्द मानव जीवन से संबंधित है प्रत्येक व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह स्वस्थ रहे स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन का आनंद उठाता है स्वस्थ व्यक्ति जीवन में अनेक सफलता प्राप्त कर सकता है
" Health is wealth" अर्थात स्वास्थ्य ही धन है स्वस्थ व्यक्ति अपने लिए परिवार के लिए और समाज के लिए एक धन के समान है इसके विपरीत एक स्वस्थ व्यक्ति सबके लिए बोझ होता है रोग से दुखी व्यक्ति के जीवन में उत्साह नहीं रहता आर्थिक सामाजिक आत्मिक विकास में बाधा उत्पन्न होती है किसी ने कहा है किसी देश की उन्नति उसके नागरिकों की प्रबलता है जो की खानों नदिया वह वनों की संपत्ति से कहीं ज्यादा मूल्यवान है किसी भी समाज व राष्ट्रीय की उन्नति उसके व्यक्तियों की कमतता तथा साहस पर निर्भर करती है कमर्टता तथा साहस के लिए स्वास्थ्य उत्तम होना आवश्यक है
व्यक्तिगत स्वास्थ्य का अर्थ:-
शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य को व्यक्तिगत स्वास्थ्य कहते हैं यदि व्यक्ति का शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा हो तो व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा और परिणाम स्वरुप घर में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहेगी स्वास्थ्य का अर्थ मंत्र रोग मुक्त होना ही नहीं है बल्कि कार्य क्षमता व क्रियाशीलता से भी है अतः व्यक्तिगत स्वास्थ्य को सदैव उत्तम बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य का सीधा संबंध व्यक्तिगत स्वास्थ्य से होता है वह स्वच्छता जो हमारे शरीर की देखभाल से संबंध रहती है व्यक्तिगत स्वच्छता कहलाती है व्यक्तिगत स्वच्छता के सिद्धांतों तथा नियमों का प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण ज्ञान होना चाहिए जिसमें वह इनका सिद्धांतों तथा नियमों का प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण ज्ञान होना चाहिए जिससे वह इनका पालन करते हुए पूर्ण स्वच्छ रह सके और अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सके
व्यक्तिगत स्वास्थ्य के नियम:-
अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य के कुछ नियम इस प्रकार है
आदत:- स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति में अच्छी आदतों का विकास होना चाहिए प्राकृतिक नियमों का पालन न करना है भोज्य भोजन का प्रयोग करना नाशाहत्री रात्रि में देर से सोना और सुबह देर से उठाना आदि बुरी आदतें हैं यदि ऐसी आदतों को नहीं छोड़ा जाए तो व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब हो जाता है आदतों का जीवन में विशेष महत्व है आदतें एक दिन में नहीं बन जाती आदतों का विकास तो बाल्यावस्था से शुरू हो जाता है अतः माता को चाहिए कि प्रारंभ से ही बच्चों मे अच्छी आदतों का विकास करें जैसे प्राप्त सूर्योदय से पहले उठना सच में दांत साफ करने के पश्चात ही कुछ आहार ग्रहण करना समय से स्नान करना स्वच्छ वस्त्र पहनना दूसरे का तोलिया गंगा वह कपड़ों का उपयोग न करना आदि
स्वच्छता:- स्वच्छ रहने के लिए स्वच्छता का भी होना आवश्यक है शारीरिक स्वच्छता होने से हमारा स्वास्थ्य ठीक रहता है शारीरिक रूप से स्वच्छ होने के लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छता के नियमों के विषय में पूर्ण ज्ञान रखता है स्वच्छ रहने के लिए अच्छा वातावरण बनाया जाए शुद्ध भोजन किया जाए तथा शुद्ध व ताजी हवा का सेवन किया जाए इस प्रकार का वातावरण बनाने पर व्यक्ति रोग मुक्त रह सकेगा
पौष्टिक भोजन:- स्वस्थ रहने के लिए शुद्ध तथा पौष्टिक भोजन बहुत आवश्यक है पौष्टिक भोजन का अभिप्राय है व्यक्ति की आवश्यकता अनुसार पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा विटामिन वह खनिज लवण युक्त भोजन ही भोजन शुद्ध होना चाहिए भोजन को स्वच्छता से बनाना चाहिए भोजन करने का समय निर्धारित होना चाहिए तथा अधिक तला भुनाव घनिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए सभी बातों को ध्यान में रखने से व्यक्ति पूर्णता स्वस्थ रहता है
मानसिक शांति:- शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति के मस्तिष्क में शांति होनी चाहिए घर का वातावरण कल है युक्त नहीं बनना चाहिए तथा किसी भी समस्या का हाल आपस में विचार विमर्श तथा विचारों का आदान-प्रदान करके किया जाना चाहिए
जीवन में नियम बांधता :- अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए यह आवश्यक है कि दैनिक कार्यों को नियम अनुसार किया जाए उदाहरण के लिए समय पर सो आदि में निवृत होना नाश्ता भोजन आदि समय से करना व्यायाम नियम अनुसार एवं नृत्य प्रतिदिन करना समय पर सोने तथा समय से उठाना आदि अनेक कार्य प्रतिदिन श्याम अनुसार करने चाहिए व्यक्ति को अपनी दिनचर्या तथा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही अपने दैनिक जीवन के नियमों को शुद्ध भुज पूर्वक निर्धारित करना चाहिए तथा निर्धारित नियमों को यथासंभव सदैव पालन करना चाहिए
नियमित रूप से व्यायाम :- शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्रतिदिन व्यायाम करना आवश्यक है व्यायाम का आशय शरीर के अंगों की व्यवस्थित गति से है व्यायाम के अनेक प्रकार है टहलने दौड़ना धड़ बैठक लगाना योगाभ्यास एवं प्रनियम मलखंब आदि सभी व्यायाम के उदाहरण है अब व्यायाम के लिए विभिन्न मशीनों एवं कर्म को भी तैयार कर लिया गया है व्यायाम शरीर की मांसपेशियों को क्रियाशील बनता है जिससे कार्य करने की क्षमता बढ़ती है इसके अतिरिक्त शरीर स्वस्थ प्रतिनियुक्त तथा सुंदर रहता है
पर्याप्त निद्रा तथा विश्राम :- उत्तम स्वास्थ्य के लिए निंद्रा एवं विश्राम अत्यंत आवश्यक होता है हम जो भी शारीरिक तथा मानसिक कार्य करते हैं उसे हमारे शरीर में थकान आ जाती है वास्तव में शारीरिक परिश्रम करते समय हमारे शरीर में अनेक हानिकारक पदार्थ एक तरफ हो जाते हैं यह पदार्थ ही हमारी मांसपेशियों को ताकते हैं इससे अतिरिक्त कार्य करते समय हमारे शरीर में ऊतक टूटे फट्टे रहते हैं कार्य करते समय इसकी मरम्मत नहीं हो पाती है अतः शरीर के स्वस्थ रहने के लिए इन उत्तकों की मरम्मत तथा हानिकारक पदार्थों का बाहर निकलना अनिवार्य होता है इसके लिए निद्रा अविश्रम ही सर्वोत्तम उपाय हैं
शारीरिक स्वच्छता:-
शारीरिक स्वच्छता के अंतर्गत संपूर्ण शरीर के प्रत्येक अंगों की स्वच्छता आती है अतः हमें अपने शरीर के विभिन्न अंगों की संस्थान प्रकार करनी चाहिए
त्वचा की स्वच्छता:- तू अच्छा शरीर का बाहरी आवरण होता है जो शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है त्वचा के विभिन्न रंग होते हैं किसी त्वचा का रंग काला होता है किसी का रंग सांवला या किसी त्वचा का रंग गेहुआ तथा किसी त्वचा का रंग गोरा होता है
त्वचा में करोड़ों छिद्र होते हैं इसमें कुछ छिद्रतलीय ग्रंथि में खुलते हैं और कुछ श्वेत ग्रंथियां में श्वेत ग्रंथियां हमारे शरीर से पसीना निकलने का कार्य करती है इससे हमारे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है साथ ही पसीने के द्वारा हमारे शरीर की गंदगी एवं उत्सर्जी पदार्थ का विसर्जन हो जाता है ग्रंथि तेल उत्पन्न करती है जिससे हमारी त्वचा चिकनी व चमकदार बनती है
हमारे शरीर से पसीना निकलना अनेक प्रकार के कार्य करना बाहर जाने आदि से हमारी त्वचा गंदी हो जाती है त्वचा के रोमचंद्र बंद हो जाते हैं जिससे सफेद वह तो लिए ग्रंथियां बंद हो जाती है गांधी त्वचा पर विभिन्न प्रकार के रोगाणु बैठते हैं और त्वचा संबंधित रोग उत्पन्न करते हैं जैसे फुंसी फोड़े आदि साथ ही शरीर से पसीने की दुर्गंध आने लगती है अतः त्वचा की प्रतिदिन सफाई करनी चाहिए स्नान करने से हमारे शरीर के रोम छिद्र खुल जाते हैं और त्वचा में रक्त संचार होता है और शरीर में चमक आती है
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- Author:- kumarivanshika01232@gmail.com
- Date:- 2026:01:02
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