
जंक फूड :- आधुनिक सभ्यता के विकास के साथ-साथ मानव समाज ने विभिन्न पारंपरिक भोज्य पदार्थों के अतिरिक्त कुछ नए प्रकार के भोज्य पदार्थ तैयार करना प्रारंभ किया है इस वर्ग के कुछ अति लोकप्रिय भोज्य पदार्थों को जंक फूड या फास्ट फूड के नाम से जाना जाता है जंक फूड में मुख्य उदाहरण है चिप्स चॉकलेट पिज़्ज़ा बर्गर तथा अनेक प्रकार के तले होने भोज्य पदार्थ जंक फूड का प्रचलन पूरे विश्व म...
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जंक फूड :-
आधुनिक सभ्यता के विकास के साथ-साथ मानव समाज ने विभिन्न पारंपरिक भोज्य पदार्थों के अतिरिक्त कुछ नए प्रकार के भोज्य पदार्थ तैयार करना प्रारंभ किया है इस वर्ग के कुछ अति लोकप्रिय भोज्य पदार्थों को जंक फूड या फास्ट फूड के नाम से जाना जाता है जंक फूड में मुख्य उदाहरण है चिप्स चॉकलेट पिज़्ज़ा बर्गर तथा अनेक प्रकार के तले होने भोज्य पदार्थ
जंक फूड का प्रचलन पूरे विश्व में बहुत तेजी से हुआ है वैसे तो यह भोज्य पदार्थ सभी आयु वर्ग के व्यक्तियों द्वारा अपनाई जा रहे हैं परंतु बच्चों तथा युवा वर्ग की यह पहली पसंद बन गए हैं
परी सभी जंक फूड में पर संस्कृत कार्बोहाइड्रेट की अधिक मात्रा होती है इनमें तेल तथा खाद पदार्थों के संरक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाले रासायनिक रेट काफी अधिक मात्रा में होती है इसके अतिरिक्त इन भोज्य पदार्थों को स्वादिष्ट बनाने के लिए अनेक प्रकार के मिर्च मसाले भी इस्तेमाल किए जाते हैं
जंक फूड के प्रभाव
जंक फूड का प्रचलन बहुत अधिक है तथा इन्होंने सुविधाजनक होने के कारण हमारे आहार में विशेष स्थान पा लिया है परंतु विभिन्न अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि जंक फूड के अधिक इस्तेमाल से जन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है
धन्यवाद
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प्लीहा इसे दिल्ली भी कहते हैं यह एक पिलपीली ग्रंथि होती है इसका आकार से के बीच की तरह होता है इसका रंग बैंगनी होता है तथा लंबाई 12 सेमी होती है इसका मुख्य कार्य आमाशय तथा आंतों को रक्त प्रदान करना होता है पाचन क्रिया के समय रक्त देते समय यह सिकुड़ जाती है और जब पाचन क्रिया पूर्ण हो जाती है तो यह फेल कर उर्वरक हो जाती है धन्यवाद
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प्लीहा
इसे दिल्ली भी कहते हैं यह एक पिलपीली ग्रंथि होती है इसका आकार से के बीच की तरह होता है इसका रंग बैंगनी होता है तथा लंबाई 12 सेमी होती है इसका मुख्य कार्य आमाशय तथा आंतों को रक्त प्रदान करना होता है पाचन क्रिया के समय रक्त देते समय यह सिकुड़ जाती है और जब पाचन क्रिया पूर्ण हो जाती है तो यह फेल कर उर्वरक हो जाती है
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कोल्लम ग्रंथि कोल्लम ग्रंथि में इंसुलिन बनता है जो रक्त में मिलकर तंतुओं के जलने की क्रिया में मदद देता है और कार्बोहाइड्रेट को वह करने में सहयोग देता है जब इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता है तो कार्बोहाइड्रेट हुए नहीं हो पाता और मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है यह एक प्रकार का रोग है जिसे डायबिटीज या मधुमेह रोग कहते हैं धन्यवाद
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कोल्लम ग्रंथि
कोल्लम ग्रंथि में इंसुलिन बनता है जो रक्त में मिलकर तंतुओं के जलने की क्रिया में मदद देता है और कार्बोहाइड्रेट को वह करने में सहयोग देता है जब इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता है तो कार्बोहाइड्रेट हुए नहीं हो पाता और मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है यह एक प्रकार का रोग है जिसे डायबिटीज या मधुमेह रोग कहते हैं
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अग्नाशय के बारे में जाने यह आमाशय के नीचे पीछे की ओर एक लंबी सी ग्रंथि होती है इसकी लंबाई 14 सेमी और चौड़ाई 4 सेमी होती है इसकी आकृति कुछ पिस्टल के आकार के समान होती है इसका दाहिनी भाग मोटा और गोल तथा बाय भाग पतला होता है इसे पूछ कहते हैं यहां पर अग्नाशय रस बनता है जो एक प्रकार का पाचक रस होता है अग्नाशय रस साफ पतला तथा संयुक्त होता है इस रस के तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं धन्यवाद
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अग्नाशय के बारे में जाने
यह आमाशय के नीचे पीछे की ओर एक लंबी सी ग्रंथि होती है इसकी लंबाई 14 सेमी और चौड़ाई 4 सेमी होती है इसकी आकृति कुछ पिस्टल के आकार के समान होती है इसका दाहिनी भाग मोटा और गोल तथा बाय भाग पतला होता है इसे पूछ कहते हैं यहां पर अग्नाशय रस बनता है जो एक प्रकार का पाचक रस होता है अग्नाशय रस साफ पतला तथा संयुक्त होता है इस रस के तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं
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पिताशय क्या है यकृत के पीछे दहनी और एक थैली होती है यह पिताशय कहलाती है इसका आकार नाशपाती के समान होता है या ग्रंथ में बनने वाला पित्त रस यहीं पर संचित होता है पिताशय से एक नाली पित्त लेकर बकवास है में पहुंचती है इसी स्थान पर क्लास से रस भी पहुंचता है पित्त इस भोजन की अम्लीयत समाप्त करके उसे सरिए कर देता है क्योंकि अग्नाशक रस क्षारीय माध्यम में कार्य करता है धन्यवाद
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पिताशय क्या है
यकृत के पीछे दहनी और एक थैली होती है यह पिताशय कहलाती है इसका आकार नाशपाती के समान होता है या ग्रंथ में बनने वाला पित्त रस यहीं पर संचित होता है पिताशय से एक नाली पित्त लेकर बकवास है में पहुंचती है इसी स्थान पर क्लास से रस भी पहुंचता है पित्त इस भोजन की अम्लीयत समाप्त करके उसे सरिए कर देता है क्योंकि अग्नाशक रस क्षारीय माध्यम में कार्य करता है
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Duodenum:- amashay Aage chalkar Jis Ang Mein samapt Hota Hai use duodenum Kahate Hain yah Yuva kar ka 25 sentimeter Lamba hota hai pachan Tantra ke is Bhag Mein bhojan Mein Pitt Ras ya Granth se pitnali dwara tatha agnyasik Ras agnashay se 17 Vitt hokar colum Nali dwara Milta Hai bhojan ke is Bhag Mein pahunchte Hi yah Sabhi Ras ismein pahunchne Lagte Hain aur apni kriyarambh kar dete Hain&n...
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Duodenum:-
amashay Aage chalkar Jis Ang Mein samapt Hota Hai use duodenum Kahate Hain yah Yuva kar ka 25 sentimeter Lamba hota hai pachan Tantra ke is Bhag Mein bhojan Mein Pitt Ras ya Granth se pitnali dwara tatha agnyasik Ras agnashay se 17 Vitt hokar colum Nali dwara Milta Hai bhojan ke is Bhag Mein pahunchte Hi yah Sabhi Ras ismein pahunchne Lagte Hain aur apni kriyarambh kar dete Hain
thank you
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छोटी आत आहार नाल का शेष भाग 8 कहलाता है यह भाग अत्यधिक लंबा तथा कुंडली होता है यह लगभग पूरी तरह से गुहा को घेरे रहता है इसके दो प्रमुख भाग किया जा सकते हैं छोटी आंत तथा बड़ी आंत छोटी आंत ग्रैनी के निचले सिरे से छोटी आत आरंभ होती है यह सक्रिय तथा लगभग 6 मीटर लंबी पेशी नदी उधर के भीतर अत्यधिक कुंडली की स्थिति में स्थित रहती है छोटी आत की दीवार अपेक्षाकृत पतल...
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छोटी आत
आहार नाल का शेष भाग 8 कहलाता है यह भाग अत्यधिक लंबा तथा कुंडली होता है यह लगभग पूरी तरह से गुहा को घेरे रहता है इसके दो प्रमुख भाग किया जा सकते हैं छोटी आंत तथा बड़ी आंत
छोटी आंत
ग्रैनी के निचले सिरे से छोटी आत आरंभ होती है यह सक्रिय तथा लगभग 6 मीटर लंबी पेशी नदी उधर के भीतर अत्यधिक कुंडली की स्थिति में स्थित रहती है छोटी आत की दीवार अपेक्षाकृत पतली होती है इसकी संरचना में सब स्टार वही होता है जो ग्रास मिली तथा आमाशय की दीवार में होते हैं लेकिन अंतर केवल पैसे सूत्रों के फैलाव की दिशा में ही होता है छोटी आंत की बाहरी परत को सिस आवरण कहते हैं यह अत्यंत सूक्ष्म होता है और भीतरी पर तो से बिल्कुल सत रहता है इसके बाद वाली परत पेशी सूत्रों की होती है इस प्रकार मांस सूत्र आंतरिक को गोलाकार घिरे हुए होते हैं
धन्यवाद
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यकृत ( liver) यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि होती है यह शरीर के दहनी ओढ़नी चीनी पसलियों के पीछे तथा महापरिंचियां पेशी के ठीक नीचे स्थित होती है यह है डेढ़ किलोग्राम की होती है यह गहरे भूरे लाल रंग की होती है इसमें दो भाग होते हैं दया भाग और बाय भाग दाएं भाग बाय भाग्य अपेक्षा बड़ा होता है या ग्रंथ में पीले हरे रंग का रस निकलता है जिसे पित्त रस कहते हैं या ग्रंथ में दो रक्त नलिकाएं रक्त क...
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यकृत ( liver)
यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि होती है यह शरीर के दहनी ओढ़नी चीनी पसलियों के पीछे तथा महापरिंचियां पेशी के ठीक नीचे स्थित होती है यह है डेढ़ किलोग्राम की होती है यह गहरे भूरे लाल रंग की होती है इसमें दो भाग होते हैं दया भाग और बाय भाग दाएं भाग बाय भाग्य अपेक्षा बड़ा होता है या ग्रंथ में पीले हरे रंग का रस निकलता है जिसे पित्त रस कहते हैं या ग्रंथ में दो रक्त नलिकाएं रक्त को लाने का कार्य करती है यह रक्त नलिका या ग्रंथ धमनी कहलाती है यह महाधमनी की एक शाखा है यह महाधमनी से शुद्ध रक्त लाकर यकृत का पोषण करती है दूसरी नाली अशुद्ध रक्त वाहिका शिरा है जो पोर्टल शिरा कहलाती है यह शिरा उन सिरप से मिलकर बनती है जो अमाशा ए पलीहा तथा अग्नाशय से अशुद्ध रक्त लेकर लौटती है
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पाचन तंत्र का अर्थ सभी प्राणी नियमित रूप से आहार ग्रहण करते हैं परंतु उत्तम पोषण के लिए केवल आहार ग्रहण करना ही पर्याप्त नहीं होता इसके लिए ग्रहण किए गए आहार का पूर्ण रूप से पाचन तथा पचे हुए आहार के पोषक तत्वों का आवश्यकता अनुसार अवशोषण भी आवश्यक होता है इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए सभी प्राणियों के शरीर में आहार के पाचन एवं शोषण के लिए अलग से एक तंत्र या संस्थान होता है जिसे शरीर रचना...
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पाचन तंत्र का अर्थ
सभी प्राणी नियमित रूप से आहार ग्रहण करते हैं परंतु उत्तम पोषण के लिए केवल आहार ग्रहण करना ही पर्याप्त नहीं होता इसके लिए ग्रहण किए गए आहार का पूर्ण रूप से पाचन तथा पचे हुए आहार के पोषक तत्वों का आवश्यकता अनुसार अवशोषण भी आवश्यक होता है इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए सभी प्राणियों के शरीर में आहार के पाचन एवं शोषण के लिए अलग से एक तंत्र या संस्थान होता है जिसे शरीर रचना शास्त्र की भाषा में पाचन तंत्र या पाचन संस्थान कहते हैं पाचन तंत्र के कुछ भाग आहार के पाचन का कार्य करते हैं तथा कुछ भाग पोषक तत्वों के अवशोषण का कार्य करते हैं इस प्रकार कुछ आहार की पाचन संबंधी यांत्रिक क्रियो को पूरा करते हैं जैसे की डांट तथा आमाशय इसी प्रकार पाचन तंत्र में कुछ ऐसे अंग भी है जो आहार की पाचन संबंधी रासायनिक क्रियो को संपन्न करने में सहायक होते हैं इन अंगों के अतिरिक्त कुछ ऐसे अंग भी है जो बचे हुए आहार में से पोषक तत्वों के अवशोषण का कार्य करते हैं शरीर में विद्वान यह सभी अंग सम्मिलित रूप से कार्य करते हैं तथा इन सांसद अंगों को ही सम्मिलित रूप में पाचन तंत्र या पाचन संस्थान कहते हैं इस प्रकार निष्कर्ष स्वरूप हम कह सकते हैं कि शरीर द्वारा ग्रहण किए गए आहार पाचन तथा पोषक तत्वों के अवशोषण के विभिन्न कार्यों को पूरा करने वाले सांसद अंगों की समग्रता को पाचन तंत्र कहा जाता है
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पाचन तंत्र जो अंग तथा ग्रंथियां सम्मिलित रूप से भोजन को शरीर के उपयोग में आने योग्य बनाती है उसको पाचन तंत्र कहते हैं भोजन से प्राप्त प्रोटीन हमारे शरीर की रोगों से रक्षा करता है रक्त में कुछ एंटीबायोटिक होते हैं जो प्रोटीन से बनी होती है इन एंटीबायोटिक का मुख्य कार्य रोगों के जीवाणु से लड़ना और रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाना होता है इस प्रकार प्रोटीन हमारे शरीर की प्रतिरोधक...
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पाचन तंत्र
जो अंग तथा ग्रंथियां सम्मिलित रूप से भोजन को शरीर के उपयोग में आने योग्य बनाती है उसको पाचन तंत्र कहते हैं
भोजन से प्राप्त प्रोटीन हमारे शरीर की रोगों से रक्षा करता है रक्त में कुछ एंटीबायोटिक होते हैं जो प्रोटीन से बनी होती है इन एंटीबायोटिक का मुख्य कार्य रोगों के जीवाणु से लड़ना और रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाना होता है इस प्रकार प्रोटीन हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है
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