प्राथमिक चिकित्सा का अर्थ प्राथमिक चिकित्सा एक प्रकार का उपचार है जो किसी भी दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को तुरंत प्रदान किया जाता है वैसे तो दुर्घटनाग्रस्त हो जाने पर उसके उपचार का कार्य किसी डॉक्टर या चिकित्सक द्वारा किया जाता है परंतु व्यवहार में देखा यह जाता है कि जहां कहीं दुर्घटना घटित होती है वहां कोई चिकित्सक उपलब्ध नहीं होता तथा ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सेवा उपलब्ध नहीं हो पाती सामान्य...
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प्राथमिक चिकित्सा का अर्थ प्राथमिक चिकित्सा एक प्रकार का उपचार है जो किसी भी दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को तुरंत प्रदान किया जाता है वैसे तो दुर्घटनाग्रस्त हो जाने पर उसके उपचार का कार्य किसी डॉक्टर या चिकित्सक द्वारा किया जाता है परंतु व्यवहार में देखा यह जाता है कि जहां कहीं दुर्घटना घटित होती है वहां कोई चिकित्सक उपलब्ध नहीं होता तथा ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सेवा उपलब्ध नहीं हो पाती सामान्य रूप से दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को चिकित्सा के पास अथवा अस्पताल में ले जाने या चिकित्सा को दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के पास बुलाने में कुछ ना कुछ समय तो अवश्य ही लगता है शरीर विज्ञान की मान्यता है कि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को शीघ्र की शीघ्र कुछ ना कुछ सहायता दी जानी चाहिए इस प्रकार की सहायता प्राप्त हो जाने पर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की स्थिति कुछ संभाल जाती है या अधिक बिगड़ने से बच जाती है इस प्रकार की सहायता प्राप्त हो जाने पर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को कुछ सांत्वना मिल जाती है तथा उसका गिरता हुआ मनोबल भी कुछ संभल जाता है इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ही कभी भी किसी भी प्रकार की दुर्घटना घटित होते ही उसे स्थल पर विद्यमान अन्य व्यक्तियों द्वारा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति या व्यक्तियों को आवश्यक सहायता प्रदान की जाती है इस प्रकार से दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को दी जाने वाली सहायता को ही प्राथमिक चिकित्सा कहा जाता है निष्कर्ष रूप हम कह सकते हैं दुर्घटनाग्रता व्यक्ति को दी जाने वाली उसे सहायता को प्राथमिक चिकित्सा कहा जाता है जो डॉक्टर अथवा चिकित्सक द्वारा व्यवस्थित उपचार प्रारंभ करने से पूर्व ही दुर्घटना स्थल पर उपस्थित व्यक्तियों द्वारा प्रदान की जाती है प्राथमिक चिकित्सा से दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को विशेष लाभ होता है धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
05 Apr 2026
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प्राथमिक चिकित्सा किसे कहते हैं " प्राथमिक चिकित्सा वह है जो किसी को अनायास चोट लग जाने अथवा अचानक बीमार पड़ जाने पर डॉक्टर के आने तक रोगी की मरहम पट्टी अथवा उपचार करने में दी जा सके" प्रत्येक व्यक्ति दिन भर कुछ ना कुछ कार्य करता रहता है कोई रोजी-रोटी कमाने के लिए खदानों में कार्यकर्ता है कोई खेतों में कोई कार्यालय में तो कोई नियंत्रण कहीं भी जाते समय कार्य करते समय गृह में कार्य करते समय अर्थात...
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प्राथमिक चिकित्सा किसे कहते हैं " प्राथमिक चिकित्सा वह है जो किसी को अनायास चोट लग जाने अथवा अचानक बीमार पड़ जाने पर डॉक्टर के आने तक रोगी की मरहम पट्टी अथवा उपचार करने में दी जा सके" प्रत्येक व्यक्ति दिन भर कुछ ना कुछ कार्य करता रहता है कोई रोजी-रोटी कमाने के लिए खदानों में कार्यकर्ता है कोई खेतों में कोई कार्यालय में तो कोई नियंत्रण कहीं भी जाते समय कार्य करते समय गृह में कार्य करते समय अर्थात कहीं भी और किसी के भी साथ कोई अक्षय कुमार दुर्घटना हो सकती है किसी वाहन में टकरा जाना फिसल जाना किसी जीव जंतु द्वारा काट लेना अधिक घटनाएं हो सकती है कभी-कभी यह घटनाएं साधारण होती है तथा कभी-कभी एसा धारण होती है ऐसे अवसरों पर तुरंत सहायता की आवश्यकता होती है ऐसे अवसरों पर ही प्राथमिक चिकित्सा की जाती है धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
05 Apr 2026
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जंक फूड :- आधुनिक सभ्यता के विकास के साथ-साथ मानव समाज ने विभिन्न पारंपरिक भोज्य पदार्थों के अतिरिक्त कुछ नए प्रकार के भोज्य पदार्थ तैयार करना प्रारंभ किया है इस वर्ग के कुछ अति लोकप्रिय भोज्य पदार्थों को जंक फूड या फास्ट फूड के नाम से जाना जाता है जंक फूड में मुख्य उदाहरण है चिप्स चॉकलेट पिज़्ज़ा बर्गर तथा अनेक प्रकार के तले होने भोज्य पदार्थ जंक फूड का प्रचलन पूरे विश्व में बहुत तेजी से हुआ...
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जंक फूड :- आधुनिक सभ्यता के विकास के साथ-साथ मानव समाज ने विभिन्न पारंपरिक भोज्य पदार्थों के अतिरिक्त कुछ नए प्रकार के भोज्य पदार्थ तैयार करना प्रारंभ किया है इस वर्ग के कुछ अति लोकप्रिय भोज्य पदार्थों को जंक फूड या फास्ट फूड के नाम से जाना जाता है जंक फूड में मुख्य उदाहरण है चिप्स चॉकलेट पिज़्ज़ा बर्गर तथा अनेक प्रकार के तले होने भोज्य पदार्थ जंक फूड का प्रचलन पूरे विश्व में बहुत तेजी से हुआ है वैसे तो यह भोज्य पदार्थ सभी आयु वर्ग के व्यक्तियों द्वारा अपनाई जा रहे हैं परंतु बच्चों तथा युवा वर्ग की यह पहली पसंद बन गए हैं परी सभी जंक फूड में पर संस्कृत कार्बोहाइड्रेट की अधिक मात्रा होती है इनमें तेल तथा खाद पदार्थों के संरक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाले रासायनिक रेट काफी अधिक मात्रा में होती है इसके अतिरिक्त इन भोज्य पदार्थों को स्वादिष्ट बनाने के लिए अनेक प्रकार के मिर्च मसाले भी इस्तेमाल किए जाते हैं जंक फूड के प्रभाव जंक फूड का प्रचलन बहुत अधिक है तथा इन्होंने सुविधाजनक होने के कारण हमारे आहार में विशेष स्थान पा लिया है परंतु विभिन्न अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि जंक फूड के अधिक इस्तेमाल से जन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
07 Mar 2026
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प्लीहा इसे दिल्ली भी कहते हैं यह एक पिलपीली ग्रंथि होती है इसका आकार से के बीच की तरह होता है इसका रंग बैंगनी होता है तथा लंबाई 12 सेमी होती है इसका मुख्य कार्य आमाशय तथा आंतों को रक्त प्रदान करना होता है पाचन क्रिया के समय रक्त देते समय यह सिकुड़ जाती है और जब पाचन क्रिया पूर्ण हो जाती है तो यह फेल कर उर्वरक हो जाती है धन्यवाद
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प्लीहा इसे दिल्ली भी कहते हैं यह एक पिलपीली ग्रंथि होती है इसका आकार से के बीच की तरह होता है इसका रंग बैंगनी होता है तथा लंबाई 12 सेमी होती है इसका मुख्य कार्य आमाशय तथा आंतों को रक्त प्रदान करना होता है पाचन क्रिया के समय रक्त देते समय यह सिकुड़ जाती है और जब पाचन क्रिया पूर्ण हो जाती है तो यह फेल कर उर्वरक हो जाती है धन्यवाद
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06 Mar 2026
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कोल्लम ग्रंथि कोल्लम ग्रंथि में इंसुलिन बनता है जो रक्त में मिलकर तंतुओं के जलने की क्रिया में मदद देता है और कार्बोहाइड्रेट को वह करने में सहयोग देता है जब इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता है तो कार्बोहाइड्रेट हुए नहीं हो पाता और मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है यह एक प्रकार का रोग है जिसे डायबिटीज या मधुमेह रोग कहते हैं धन्यवाद
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कोल्लम ग्रंथि कोल्लम ग्रंथि में इंसुलिन बनता है जो रक्त में मिलकर तंतुओं के जलने की क्रिया में मदद देता है और कार्बोहाइड्रेट को वह करने में सहयोग देता है जब इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता है तो कार्बोहाइड्रेट हुए नहीं हो पाता और मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है यह एक प्रकार का रोग है जिसे डायबिटीज या मधुमेह रोग कहते हैं धन्यवाद
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06 Mar 2026
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अग्नाशय के बारे में जाने यह आमाशय के नीचे पीछे की ओर एक लंबी सी ग्रंथि होती है इसकी लंबाई 14 सेमी और चौड़ाई 4 सेमी होती है इसकी आकृति कुछ पिस्टल के आकार के समान होती है इसका दाहिनी भाग मोटा और गोल तथा बाय भाग पतला होता है इसे पूछ कहते हैं यहां पर अग्नाशय रस बनता है जो एक प्रकार का पाचक रस होता है अग्नाशय रस साफ पतला तथा संयुक्त होता है इस रस के तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं धन्यवाद
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अग्नाशय के बारे में जाने यह आमाशय के नीचे पीछे की ओर एक लंबी सी ग्रंथि होती है इसकी लंबाई 14 सेमी और चौड़ाई 4 सेमी होती है इसकी आकृति कुछ पिस्टल के आकार के समान होती है इसका दाहिनी भाग मोटा और गोल तथा बाय भाग पतला होता है इसे पूछ कहते हैं यहां पर अग्नाशय रस बनता है जो एक प्रकार का पाचक रस होता है अग्नाशय रस साफ पतला तथा संयुक्त होता है इस रस के तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं धन्यवाद
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06 Mar 2026
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पिताशय क्या है यकृत के पीछे दहनी और एक थैली होती है यह पिताशय कहलाती है इसका आकार नाशपाती के समान होता है या ग्रंथ में बनने वाला पित्त रस यहीं पर संचित होता है पिताशय से एक नाली पित्त लेकर बकवास है में पहुंचती है इसी स्थान पर क्लास से रस भी पहुंचता है पित्त इस भोजन की अम्लीयत समाप्त करके उसे सरिए कर देता है क्योंकि अग्नाशक रस क्षारीय माध्यम में कार्य करता है धन्यवाद
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पिताशय क्या है यकृत के पीछे दहनी और एक थैली होती है यह पिताशय कहलाती है इसका आकार नाशपाती के समान होता है या ग्रंथ में बनने वाला पित्त रस यहीं पर संचित होता है पिताशय से एक नाली पित्त लेकर बकवास है में पहुंचती है इसी स्थान पर क्लास से रस भी पहुंचता है पित्त इस भोजन की अम्लीयत समाप्त करके उसे सरिए कर देता है क्योंकि अग्नाशक रस क्षारीय माध्यम में कार्य करता है धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
06 Mar 2026
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Duodenum:- amashay Aage chalkar Jis Ang Mein samapt Hota Hai use duodenum Kahate Hain yah Yuva kar ka 25 sentimeter Lamba hota hai pachan Tantra ke is Bhag Mein bhojan Mein Pitt Ras ya Granth se pitnali dwara tatha agnyasik Ras agnashay se 17 Vitt hokar colum Nali dwara Milta Hai bhojan ke is Bhag Mein pahunchte Hi yah Sabhi Ras ismein pahunchne Lagte Hain aur apni kriyarambh kar dete Hain than...
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Duodenum:- amashay Aage chalkar Jis Ang Mein samapt Hota Hai use duodenum Kahate Hain yah Yuva kar ka 25 sentimeter Lamba hota hai pachan Tantra ke is Bhag Mein bhojan Mein Pitt Ras ya Granth se pitnali dwara tatha agnyasik Ras agnashay se 17 Vitt hokar colum Nali dwara Milta Hai bhojan ke is Bhag Mein pahunchte Hi yah Sabhi Ras ismein pahunchne Lagte Hain aur apni kriyarambh kar dete Hain thank you
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kumarivanshika01232@gmail.com
05 Mar 2026
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छोटी आत आहार नाल का शेष भाग 8 कहलाता है यह भाग अत्यधिक लंबा तथा कुंडली होता है यह लगभग पूरी तरह से गुहा को घेरे रहता है इसके दो प्रमुख भाग किया जा सकते हैं छोटी आंत तथा बड़ी आंत छोटी आंत ग्रैनी के निचले सिरे से छोटी आत आरंभ होती है यह सक्रिय तथा लगभग 6 मीटर लंबी पेशी नदी उधर के भीतर अत्यधिक कुंडली की स्थिति में स्थित रहती है छोटी आत की दीवार अपेक्षाकृत पतली होती है इसकी संरचना में सब स्टार...
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छोटी आत आहार नाल का शेष भाग 8 कहलाता है यह भाग अत्यधिक लंबा तथा कुंडली होता है यह लगभग पूरी तरह से गुहा को घेरे रहता है इसके दो प्रमुख भाग किया जा सकते हैं छोटी आंत तथा बड़ी आंत छोटी आंत ग्रैनी के निचले सिरे से छोटी आत आरंभ होती है यह सक्रिय तथा लगभग 6 मीटर लंबी पेशी नदी उधर के भीतर अत्यधिक कुंडली की स्थिति में स्थित रहती है छोटी आत की दीवार अपेक्षाकृत पतली होती है इसकी संरचना में सब स्टार वही होता है जो ग्रास मिली तथा आमाशय की दीवार में होते हैं लेकिन अंतर केवल पैसे सूत्रों के फैलाव की दिशा में ही होता है छोटी आंत की बाहरी परत को सिस आवरण कहते हैं यह अत्यंत सूक्ष्म होता है और भीतरी पर तो से बिल्कुल सत रहता है इसके बाद वाली परत पेशी सूत्रों की होती है इस प्रकार मांस सूत्र आंतरिक को गोलाकार घिरे हुए होते हैं धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
05 Mar 2026
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यकृत ( liver) यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि होती है यह शरीर के दहनी ओढ़नी चीनी पसलियों के पीछे तथा महापरिंचियां पेशी के ठीक नीचे स्थित होती है यह है डेढ़ किलोग्राम की होती है यह गहरे भूरे लाल रंग की होती है इसमें दो भाग होते हैं दया भाग और बाय भाग दाएं भाग बाय भाग्य अपेक्षा बड़ा होता है या ग्रंथ में पीले हरे रंग का रस निकलता है जिसे पित्त रस कहते हैं या ग्रंथ में दो रक्त नलिकाएं रक्त को लाने का...
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यकृत ( liver) यकृत शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि होती है यह शरीर के दहनी ओढ़नी चीनी पसलियों के पीछे तथा महापरिंचियां पेशी के ठीक नीचे स्थित होती है यह है डेढ़ किलोग्राम की होती है यह गहरे भूरे लाल रंग की होती है इसमें दो भाग होते हैं दया भाग और बाय भाग दाएं भाग बाय भाग्य अपेक्षा बड़ा होता है या ग्रंथ में पीले हरे रंग का रस निकलता है जिसे पित्त रस कहते हैं या ग्रंथ में दो रक्त नलिकाएं रक्त को लाने का कार्य करती है यह रक्त नलिका या ग्रंथ धमनी कहलाती है यह महाधमनी की एक शाखा है यह महाधमनी से शुद्ध रक्त लाकर यकृत का पोषण करती है दूसरी नाली अशुद्ध रक्त वाहिका शिरा है जो पोर्टल शिरा कहलाती है यह शिरा उन सिरप से मिलकर बनती है जो अमाशा ए पलीहा तथा अग्नाशय से अशुद्ध रक्त लेकर लौटती है धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
05 Mar 2026
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