हमारे देश में लोकतंत्र कब आया " हमारे देश में लोकतंत्र की नींव एक दिन में नहीं पड़ी इसकी न्यू अंग्रेजों से लड़ते हुए आजादी के समय पड़ी थी कारण यह था कि इस आजादी का मुख्य आधार लोगों की सक्रिय भागीदारी थी " पुराने समय में जब राजा राज्य करते थे वह अपने कुछ खास लोगों की मदद से कानून बनाते थे राजा के बाद उसका बेटा उसे राज्य का राजा बनकर ऐसा ही करता था कानून बनाने या लागू करने में लोगों की कोई भागीदार...
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हमारे देश में लोकतंत्र कब आया " हमारे देश में लोकतंत्र की नींव एक दिन में नहीं पड़ी इसकी न्यू अंग्रेजों से लड़ते हुए आजादी के समय पड़ी थी कारण यह था कि इस आजादी का मुख्य आधार लोगों की सक्रिय भागीदारी थी " पुराने समय में जब राजा राज्य करते थे वह अपने कुछ खास लोगों की मदद से कानून बनाते थे राजा के बाद उसका बेटा उसे राज्य का राजा बनकर ऐसा ही करता था कानून बनाने या लागू करने में लोगों की कोई भागीदारी नहीं रहती थी पर लोगों को उसे कानून का पालन करना पड़ता था अतः हमारे नेताओं ने यह तय किया कि देश का शासन देश के लोगों के हाथों में होगा तभी हमें लोकतंत्र स्थापित करने की प्रेरणा मिले क्योंकि यही ऐसी अवस्था है जिसमें सर्वसाधारण को अधिकतम भागीदारी का अवसर मिलता है धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
13 Mar 2026
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हमारा लोकतंत्र लोकतंत्र क्या है? " लोकतंत्र का शाब्दिक अर्थ लोगों का शासन पर इसका अर्थ यह नहीं कि लोग एक दूसरे पर शासन करें बल्कि लोकतंत्र का तात्पर्य ऐसी शासन व्यवस्था से है जिस देश के लोगों की प्रत्येक्स या अप्रत्यक्ष रूप से सम्मान भागीदारी हो इसमें महिला पुरुषों दलित एवं अल्पसंख्यक को सहित समाज के अन्य सभी वर्गों की समान भागीदारी होते हैं हमारे लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी व्यस्त 18 वर्ष या...
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हमारा लोकतंत्र लोकतंत्र क्या है? " लोकतंत्र का शाब्दिक अर्थ लोगों का शासन पर इसका अर्थ यह नहीं कि लोग एक दूसरे पर शासन करें बल्कि लोकतंत्र का तात्पर्य ऐसी शासन व्यवस्था से है जिस देश के लोगों की प्रत्येक्स या अप्रत्यक्ष रूप से सम्मान भागीदारी हो इसमें महिला पुरुषों दलित एवं अल्पसंख्यक को सहित समाज के अन्य सभी वर्गों की समान भागीदारी होते हैं हमारे लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी व्यस्त 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोग अपने मत का प्रयोग करके कुछ प्रतिनिधियों को चुनते हैं चुने हुए प्रतिनिधि मिलकर देश के लिए कानून बनाते हैं यह कानून भी अधिकांश चुने हुए लोगों की सहमति से बनते हैं लोग अपनी मर्जी से कानून नहीं बना सकते हैं इसके लिए बहुमत द्वारा निर्णय करने का अधिकार सबको बराबर मिलता है लोकतंत्र में व्यक्तिगत निर्णय नहीं अपितु सामूहिक निर्णय महत्व रहता है धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
13 Mar 2026
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सैनी संगठन भारतीय सेवा का सर्वोच्च सेनापति कमांडर राष्ट्रपति है किंतु देश की वास्तविक सुरक्षा का दायित्व मंत्रिमंडल पर होता है मंत्रिमंडल की ओर से रक्षा संबंधी मामलों पर विचार विमर्श करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति है जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है रक्षा मंत्री और रक्षा मंत्रालय इसके कार्य का संचालन करता है और सुना के तीनों अंगों के कार्यों की निगरानी रखता है अपने गणतंत्र दिवस के अवसर पर...
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सैनी संगठन भारतीय सेवा का सर्वोच्च सेनापति कमांडर राष्ट्रपति है किंतु देश की वास्तविक सुरक्षा का दायित्व मंत्रिमंडल पर होता है मंत्रिमंडल की ओर से रक्षा संबंधी मामलों पर विचार विमर्श करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति है जिसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है रक्षा मंत्री और रक्षा मंत्रालय इसके कार्य का संचालन करता है और सुना के तीनों अंगों के कार्यों की निगरानी रखता है अपने गणतंत्र दिवस के अवसर पर टेलीविजन में सेवा के तीनों अंगों तथा जल सीनेटल सेवा एवं वायु सेवा को मार्च पास्ट करते देखा होगा धन्यवाद
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12 Mar 2026
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देश की सुरक्षा स्वतंत्रता के बाद देश की आजादी को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक था कि देश की सैन्य शक्ति को मजबूत किया जाए आजादी के तुरंत बाद पाकिस्तान द्वारा किए गए आक्रमण ने हमें और सतर्क कर दिया अतः सी को आधुनिक बनाने सैन्य बल की संख्या बढ़ाने तथा सेवा की नई जरूरत को पूरा करने के लिए सैन्य अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए विश्व में हथियारों की होने देश को आधुनिक हथियारों के विकास के...
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देश की सुरक्षा स्वतंत्रता के बाद देश की आजादी को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक था कि देश की सैन्य शक्ति को मजबूत किया जाए आजादी के तुरंत बाद पाकिस्तान द्वारा किए गए आक्रमण ने हमें और सतर्क कर दिया अतः सी को आधुनिक बनाने सैन्य बल की संख्या बढ़ाने तथा सेवा की नई जरूरत को पूरा करने के लिए सैन्य अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए विश्व में हथियारों की होने देश को आधुनिक हथियारों के विकास के लिए मजबूत किया जिससे परंपरागत युद्ध प्रणाली के साथ-साथ युद्ध के नए तरीकों तथा सुरक्षा के प्रबंध किए गए सेवा के तीनों अंगों थल सी जल सेवा एवं वायु सेवा को अधिक शक्तिशाली बनाया गया धन्यवाद
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12 Mar 2026
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वायु सेवा भारतीय वायु सेवा में इस समय चार कमाने हैं पश्चिमी वायु कमान पूर्वी वायु कमान परिश्रण कमान और रखरखाव कमान इसका भी मुख्यालय दिल्ली में है वायु सेवा अध्यक्ष को एयर चीफ मार्शल कहते हैं धन्यवाद
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वायु सेवा भारतीय वायु सेवा में इस समय चार कमाने हैं पश्चिमी वायु कमान पूर्वी वायु कमान परिश्रण कमान और रखरखाव कमान इसका भी मुख्यालय दिल्ली में है वायु सेवा अध्यक्ष को एयर चीफ मार्शल कहते हैं धन्यवाद
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12 Mar 2026
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भारतीय नौसेना भारतीय नौसेना को जल सेवा भी कहते हैं यह तीन कमांडो में विभाजित है पश्चिमी कमान पूर्वी कमान और दक्षिणी कमान नौसेना के भारत में दो बेडे है पूर्वी बेड़ा और पश्चिमी बेड़ा इसका मुख्यालय भी दिल्ली में है धन्यवाद
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भारतीय नौसेना भारतीय नौसेना को जल सेवा भी कहते हैं यह तीन कमांडो में विभाजित है पश्चिमी कमान पूर्वी कमान और दक्षिणी कमान नौसेना के भारत में दो बेडे है पूर्वी बेड़ा और पश्चिमी बेड़ा इसका मुख्यालय भी दिल्ली में है धन्यवाद
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12 Mar 2026
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थल सेना भारतीय थल सी 5 कमांडो में विभाजित है पश्चिमी पूर्वी दक्षिणी उत्तरी और केंद्रीय कमान थल सेवा में कई प्रकार की सीन हैं जैसे इन फैक्ट्री टॉप खान अमरी मेडिकल कोर आमिर शिक्षा कौर यह हमारी सी है और इसका मुख्यालय दिल्ली मे है धन्यवाद
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थल सेना भारतीय थल सी 5 कमांडो में विभाजित है पश्चिमी पूर्वी दक्षिणी उत्तरी और केंद्रीय कमान थल सेवा में कई प्रकार की सीन हैं जैसे इन फैक्ट्री टॉप खान अमरी मेडिकल कोर आमिर शिक्षा कौर यह हमारी सी है और इसका मुख्यालय दिल्ली मे है धन्यवाद
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12 Mar 2026
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खान अब्दुल गफ्फार खा पेशावर में जाना क्रॉस की अभिव्यक्ति कई रूपों में देखने को मिलती है यहां कांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर जनता ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया इस इलाके में सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खा वर्षों से सक्रिय थे उनके द्वारा जनता में किए गए कार्यों के कारण अहिंसक क्रांतिकारियों के वीर जाट थे अर्थात् खुदाई खिदमतगारो के दल तैयार हुए थे यह लोग लाल कुर्ती के नाम से जाने जाते थे सविन...
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खान अब्दुल गफ्फार खा पेशावर में जाना क्रॉस की अभिव्यक्ति कई रूपों में देखने को मिलती है यहां कांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर जनता ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया इस इलाके में सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खा वर्षों से सक्रिय थे उनके द्वारा जनता में किए गए कार्यों के कारण अहिंसक क्रांतिकारियों के वीर जाट थे अर्थात् खुदाई खिदमतगारो के दल तैयार हुए थे यह लोग लाल कुर्ती के नाम से जाने जाते थे सविनय अवज्ञा आंदोलन में उनकी भूमिका काफी सक्रिय थी इसी प्रकार देवबंद शाखा की राजनीति या संस्था जमात उल अल्मा ए हिंद में इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
12 Mar 2026
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सशस्त्र क्रांतिकारी का योगदान प्रथम विश्व युद्ध के दौरान क्रांतिकारी आंदोलनकारी को बुरी तरह कुचल दिया गया बहुत से नेता जेल भेज दिए गए और शेष इधर-उधर बिखर गए 1920 ई के प्रारंभ की क्रांतिकारी को जेल से रिहा कर दिया गया इसके कुछ समय बाद ही कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन छेड़ दिया क्रांतिकारी सशस्त्र क्रांति का रास्ता छोड़कर असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए किंतु असहयोग आंदोलन को एकाएक वापस ले लेने से क्रां...
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सशस्त्र क्रांतिकारी का योगदान प्रथम विश्व युद्ध के दौरान क्रांतिकारी आंदोलनकारी को बुरी तरह कुचल दिया गया बहुत से नेता जेल भेज दिए गए और शेष इधर-उधर बिखर गए 1920 ई के प्रारंभ की क्रांतिकारी को जेल से रिहा कर दिया गया इसके कुछ समय बाद ही कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन छेड़ दिया क्रांतिकारी सशस्त्र क्रांति का रास्ता छोड़कर असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए किंतु असहयोग आंदोलन को एकाएक वापस ले लेने से क्रांतिकारी की उम्मीद पर पानी फिर गया इन क्रांतिकारियों ने पुणे अपना क्रांतिकारी संगठन बनाना प्रारंभ कर दिया इसके नेता पुराने क्रांतिकारी सचिंद्रनाथ सरियाला राम प्रसाद बिस्मिल तथा योगेश चंद्र चटर्जी थे धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
11 Mar 2026
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सविनय अवज्ञा आंदोलन सन 1928 में अंग्रेज सरकार ने भारतीय शासन अधिनियम 1919 ई की समीक्षा करने के लिए साइमन नामक व्यक्ति के नेतृत्व में एक समिति बनाई इस समिति में एक भी भारतीय ना था इसे बिल्कुल स्पष्ट हो गया कि अंग्रेज सरकार यह मानने को तैयार नहीं थी कि भारत के लोगों को अपने देश का शासन चलाने का अधिकार होना चाहिए इसलिए भारत में साइमन जहां-जहां गया वहां उसके विरोध में जुलूस वह हड़ताल हुई और साइमन वा...
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सविनय अवज्ञा आंदोलन सन 1928 में अंग्रेज सरकार ने भारतीय शासन अधिनियम 1919 ई की समीक्षा करने के लिए साइमन नामक व्यक्ति के नेतृत्व में एक समिति बनाई इस समिति में एक भी भारतीय ना था इसे बिल्कुल स्पष्ट हो गया कि अंग्रेज सरकार यह मानने को तैयार नहीं थी कि भारत के लोगों को अपने देश का शासन चलाने का अधिकार होना चाहिए इसलिए भारत में साइमन जहां-जहां गया वहां उसके विरोध में जुलूस वह हड़ताल हुई और साइमन वापस जाओ का नारा जोरों से गूंजा धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
11 Mar 2026
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