
गांधी जी ने सत्याग्रह करने के लिए यह कार्यक्रम बनाए हैं अन्याय करने वाले का सहयोग न करना यानी अ सहयोग करना अनुचित लग रही बातों को मारने से इनकार कर देना यानि अविद्या करना गांधी जी ने राष्ट्रीय आंदोलन में अंग्रेज शासन के सहयोग और अवज्ञा का तरीका जोड़ा जब गांधी जी राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हुए तो उसे आंदोलन में एक नया मोड़ आया गांधी जी लोगों की छोटी...
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गांधी जी ने सत्याग्रह करने के लिए यह कार्यक्रम बनाए हैं
अन्याय करने वाले का सहयोग न करना यानी अ सहयोग करना
अनुचित लग रही बातों को मारने से इनकार कर देना यानि अविद्या करना
गांधी जी ने राष्ट्रीय आंदोलन में अंग्रेज शासन के सहयोग और अवज्ञा का तरीका जोड़ा जब गांधी जी राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हुए तो उसे आंदोलन में एक नया मोड़ आया गांधी जी लोगों की छोटी-छोटी वह ठोस डिकटों को हल करने के लिए आंदोलन चढ़ते थे वह अंग्रेज सरकार से मांग करते थे की लगन कम करें नमक पर कर हटाए जंगल के उपयोग पर पाबंदी हटाए शराब की बिक्री बंद करें शराब की बिक्री से सरकार को बहुत आए मिलती थी गांधी जी के नेतृत्व में हजारों की संख्या में लोग अपनी ईट हो समस्याओं से लड़ने के लिए आंदोलन की रहा पर निकलने लगे इसके पहले के किसी भी प्रयास से भारी संख्या में आम लोग राष्ट्रीय आंदोलन में नहीं उतरे थे गांधी जी ने ही देश भर में छुआछूत मिटाने का अभियान भी शुरू किया ताकि लोग नया राष्ट्रीय बनाने के आंदोलन में शामिल हो सके
धन्यवाद
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- Author:- kumarivanshika01232@gmail.com
- Date:- 2026:03:07
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जंक फूड :- आधुनिक सभ्यता के विकास के साथ-साथ मानव समाज ने विभिन्न पारंपरिक भोज्य पदार्थों के अतिरिक्त कुछ नए प्रकार के भोज्य पदार्थ तैयार करना प्रारंभ किया है इस वर्ग के कुछ अति लोकप्रिय भोज्य पदार्थों को जंक फूड या फास्ट फूड के नाम से जाना जाता है जंक फूड में मुख्य उदाहरण है चिप्स चॉकलेट पिज़्ज़ा बर्गर तथा अनेक प्रकार के तले होने भोज्य पदार्थ जंक फूड का प्रचलन पूरे विश्व म...
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जंक फूड :-
आधुनिक सभ्यता के विकास के साथ-साथ मानव समाज ने विभिन्न पारंपरिक भोज्य पदार्थों के अतिरिक्त कुछ नए प्रकार के भोज्य पदार्थ तैयार करना प्रारंभ किया है इस वर्ग के कुछ अति लोकप्रिय भोज्य पदार्थों को जंक फूड या फास्ट फूड के नाम से जाना जाता है जंक फूड में मुख्य उदाहरण है चिप्स चॉकलेट पिज़्ज़ा बर्गर तथा अनेक प्रकार के तले होने भोज्य पदार्थ
जंक फूड का प्रचलन पूरे विश्व में बहुत तेजी से हुआ है वैसे तो यह भोज्य पदार्थ सभी आयु वर्ग के व्यक्तियों द्वारा अपनाई जा रहे हैं परंतु बच्चों तथा युवा वर्ग की यह पहली पसंद बन गए हैं
परी सभी जंक फूड में पर संस्कृत कार्बोहाइड्रेट की अधिक मात्रा होती है इनमें तेल तथा खाद पदार्थों के संरक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाले रासायनिक रेट काफी अधिक मात्रा में होती है इसके अतिरिक्त इन भोज्य पदार्थों को स्वादिष्ट बनाने के लिए अनेक प्रकार के मिर्च मसाले भी इस्तेमाल किए जाते हैं
जंक फूड के प्रभाव
जंक फूड का प्रचलन बहुत अधिक है तथा इन्होंने सुविधाजनक होने के कारण हमारे आहार में विशेष स्थान पा लिया है परंतु विभिन्न अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि जंक फूड के अधिक इस्तेमाल से जन स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है
धन्यवाद
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यूरोपीय व्यापार पुर्तगालियों ने हिंद महासागर के माध्यम से होने वाले व्यापार पर अपना अधिकार कर लिया वह सोना चांदी आदि और हमारे देश से सूती रेशमी कपड़े और विभिन्न मसाले ले जाते थे और बहुत मुनाफा कमाते थे पुर्तगाल की मजबूत नौसेना के कारण हिंद महासागर से कोई दूसरा देश पुर्तगाल की इजाजत के बिना अपना जहाज नहीं ले जा सकता था वास्कोडिगामा के भारत पहुंचने के बाद एक-एक करके हाइलैंड फ्रांस और इंग...
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यूरोपीय व्यापार
पुर्तगालियों ने हिंद महासागर के माध्यम से होने वाले व्यापार पर अपना अधिकार कर लिया वह सोना चांदी आदि और हमारे देश से सूती रेशमी कपड़े और विभिन्न मसाले ले जाते थे और बहुत मुनाफा कमाते थे पुर्तगाल की मजबूत नौसेना के कारण हिंद महासागर से कोई दूसरा देश पुर्तगाल की इजाजत के बिना अपना जहाज नहीं ले जा सकता था वास्कोडिगामा के भारत पहुंचने के बाद एक-एक करके हाइलैंड फ्रांस और इंग्लैंड के व्यापारी भारत आने लगे
धन्यवाद
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यूरोपीय शक्ति का भारत में आगमन व्यापारिक मार्ग:- प्राचीन काल से ही भारत का विदेश से संपर्क रहा है 16वीं शताब्दी से भारत से व्यापार करने के लिए यूरोपीय शक्तियों ने भारत आना प्रारंभ किया जिसमें पुर्तगाली डच फ्रांसीसी और ब्रिटिश प्रमुख थी भारत और यूरोप के मध्य व्यापार जल और थल द्वारा होता था इन मार्गों की संख्या तीन थी प्रथम मार्ग फ्रांस की खाड़ी से होता हुआ समुद्री मार्ग था इस मार्...
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यूरोपीय शक्ति का भारत में आगमन
व्यापारिक मार्ग:-
प्राचीन काल से ही भारत का विदेश से संपर्क रहा है 16वीं शताब्दी से भारत से व्यापार करने के लिए यूरोपीय शक्तियों ने भारत आना प्रारंभ किया जिसमें पुर्तगाली डच फ्रांसीसी और ब्रिटिश प्रमुख थी भारत और यूरोप के मध्य व्यापार जल और थल द्वारा होता था इन मार्गों की संख्या तीन थी प्रथम मार्ग फ्रांस की खाड़ी से होता हुआ समुद्री मार्ग था इस मार्ग से इराक तुर्की वेनिस और जिनेवा से व्यापार होता था दूसरा मार्ग लाल सागर से अलेक्जेंड्रिया का था जहां से समुद्र द्वारा वेनिस और जिनेवा को जाया जाता था तीसरा मार्ग मध्य एशिया से मिर्च और फिर यूरोप के लिए था
इस प्रकार से यूरोप के सभी क्षेत्रों में भारत की वस्तुओं के वितरण के लिए वेनिस और जिनेवा प्रमुख व्यापारिक केंद्र थे इटली ने भारत की प्रमुख वस्तुओं के व्यापार पर अपना एकाधिकार जमाए रखने के लिए यूरोप की शक्तियों की व्यापार में हिस्सेदारी को रोक दिया
धन्यवाद
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प्लीहा इसे दिल्ली भी कहते हैं यह एक पिलपीली ग्रंथि होती है इसका आकार से के बीच की तरह होता है इसका रंग बैंगनी होता है तथा लंबाई 12 सेमी होती है इसका मुख्य कार्य आमाशय तथा आंतों को रक्त प्रदान करना होता है पाचन क्रिया के समय रक्त देते समय यह सिकुड़ जाती है और जब पाचन क्रिया पूर्ण हो जाती है तो यह फेल कर उर्वरक हो जाती है धन्यवाद
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प्लीहा
इसे दिल्ली भी कहते हैं यह एक पिलपीली ग्रंथि होती है इसका आकार से के बीच की तरह होता है इसका रंग बैंगनी होता है तथा लंबाई 12 सेमी होती है इसका मुख्य कार्य आमाशय तथा आंतों को रक्त प्रदान करना होता है पाचन क्रिया के समय रक्त देते समय यह सिकुड़ जाती है और जब पाचन क्रिया पूर्ण हो जाती है तो यह फेल कर उर्वरक हो जाती है
धन्यवाद
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कोल्लम ग्रंथि कोल्लम ग्रंथि में इंसुलिन बनता है जो रक्त में मिलकर तंतुओं के जलने की क्रिया में मदद देता है और कार्बोहाइड्रेट को वह करने में सहयोग देता है जब इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता है तो कार्बोहाइड्रेट हुए नहीं हो पाता और मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है यह एक प्रकार का रोग है जिसे डायबिटीज या मधुमेह रोग कहते हैं धन्यवाद
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कोल्लम ग्रंथि
कोल्लम ग्रंथि में इंसुलिन बनता है जो रक्त में मिलकर तंतुओं के जलने की क्रिया में मदद देता है और कार्बोहाइड्रेट को वह करने में सहयोग देता है जब इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता है तो कार्बोहाइड्रेट हुए नहीं हो पाता और मूत्र के साथ बाहर निकल जाता है यह एक प्रकार का रोग है जिसे डायबिटीज या मधुमेह रोग कहते हैं
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अग्नाशय के बारे में जाने यह आमाशय के नीचे पीछे की ओर एक लंबी सी ग्रंथि होती है इसकी लंबाई 14 सेमी और चौड़ाई 4 सेमी होती है इसकी आकृति कुछ पिस्टल के आकार के समान होती है इसका दाहिनी भाग मोटा और गोल तथा बाय भाग पतला होता है इसे पूछ कहते हैं यहां पर अग्नाशय रस बनता है जो एक प्रकार का पाचक रस होता है अग्नाशय रस साफ पतला तथा संयुक्त होता है इस रस के तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं धन्यवाद
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अग्नाशय के बारे में जाने
यह आमाशय के नीचे पीछे की ओर एक लंबी सी ग्रंथि होती है इसकी लंबाई 14 सेमी और चौड़ाई 4 सेमी होती है इसकी आकृति कुछ पिस्टल के आकार के समान होती है इसका दाहिनी भाग मोटा और गोल तथा बाय भाग पतला होता है इसे पूछ कहते हैं यहां पर अग्नाशय रस बनता है जो एक प्रकार का पाचक रस होता है अग्नाशय रस साफ पतला तथा संयुक्त होता है इस रस के तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं
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पिताशय क्या है यकृत के पीछे दहनी और एक थैली होती है यह पिताशय कहलाती है इसका आकार नाशपाती के समान होता है या ग्रंथ में बनने वाला पित्त रस यहीं पर संचित होता है पिताशय से एक नाली पित्त लेकर बकवास है में पहुंचती है इसी स्थान पर क्लास से रस भी पहुंचता है पित्त इस भोजन की अम्लीयत समाप्त करके उसे सरिए कर देता है क्योंकि अग्नाशक रस क्षारीय माध्यम में कार्य करता है धन्यवाद
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पिताशय क्या है
यकृत के पीछे दहनी और एक थैली होती है यह पिताशय कहलाती है इसका आकार नाशपाती के समान होता है या ग्रंथ में बनने वाला पित्त रस यहीं पर संचित होता है पिताशय से एक नाली पित्त लेकर बकवास है में पहुंचती है इसी स्थान पर क्लास से रस भी पहुंचता है पित्त इस भोजन की अम्लीयत समाप्त करके उसे सरिए कर देता है क्योंकि अग्नाशक रस क्षारीय माध्यम में कार्य करता है
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- Date:- 2026:03:06
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Duodenum:- amashay Aage chalkar Jis Ang Mein samapt Hota Hai use duodenum Kahate Hain yah Yuva kar ka 25 sentimeter Lamba hota hai pachan Tantra ke is Bhag Mein bhojan Mein Pitt Ras ya Granth se pitnali dwara tatha agnyasik Ras agnashay se 17 Vitt hokar colum Nali dwara Milta Hai bhojan ke is Bhag Mein pahunchte Hi yah Sabhi Ras ismein pahunchne Lagte Hain aur apni kriyarambh kar dete Hain&n...
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Duodenum:-
amashay Aage chalkar Jis Ang Mein samapt Hota Hai use duodenum Kahate Hain yah Yuva kar ka 25 sentimeter Lamba hota hai pachan Tantra ke is Bhag Mein bhojan Mein Pitt Ras ya Granth se pitnali dwara tatha agnyasik Ras agnashay se 17 Vitt hokar colum Nali dwara Milta Hai bhojan ke is Bhag Mein pahunchte Hi yah Sabhi Ras ismein pahunchne Lagte Hain aur apni kriyarambh kar dete Hain
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- Date:- 2026:03:05
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छोटी आत आहार नाल का शेष भाग 8 कहलाता है यह भाग अत्यधिक लंबा तथा कुंडली होता है यह लगभग पूरी तरह से गुहा को घेरे रहता है इसके दो प्रमुख भाग किया जा सकते हैं छोटी आंत तथा बड़ी आंत छोटी आंत ग्रैनी के निचले सिरे से छोटी आत आरंभ होती है यह सक्रिय तथा लगभग 6 मीटर लंबी पेशी नदी उधर के भीतर अत्यधिक कुंडली की स्थिति में स्थित रहती है छोटी आत की दीवार अपेक्षाकृत पतल...
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छोटी आत
आहार नाल का शेष भाग 8 कहलाता है यह भाग अत्यधिक लंबा तथा कुंडली होता है यह लगभग पूरी तरह से गुहा को घेरे रहता है इसके दो प्रमुख भाग किया जा सकते हैं छोटी आंत तथा बड़ी आंत
छोटी आंत
ग्रैनी के निचले सिरे से छोटी आत आरंभ होती है यह सक्रिय तथा लगभग 6 मीटर लंबी पेशी नदी उधर के भीतर अत्यधिक कुंडली की स्थिति में स्थित रहती है छोटी आत की दीवार अपेक्षाकृत पतली होती है इसकी संरचना में सब स्टार वही होता है जो ग्रास मिली तथा आमाशय की दीवार में होते हैं लेकिन अंतर केवल पैसे सूत्रों के फैलाव की दिशा में ही होता है छोटी आंत की बाहरी परत को सिस आवरण कहते हैं यह अत्यंत सूक्ष्म होता है और भीतरी पर तो से बिल्कुल सत रहता है इसके बाद वाली परत पेशी सूत्रों की होती है इस प्रकार मांस सूत्र आंतरिक को गोलाकार घिरे हुए होते हैं
धन्यवाद
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