व्यायाम के लाभ हानिकारक पदार्थों का विसर्जन- शरीर में विभिन्न हानिकारक पदार्थ एकत्रित होते रहते हैं जिनके शरीर से बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है व्यायाम के द्वारा पीसने के रूप में उनके उत्सर्जी पदार्थ शरीर से विसर्जित हो जाते हैं इसके अतिरिक्त व्यायाम पेट और आम तो का कार्य भी नियमित कर देता है जिससे कब्ज दूर हो जाता है और शरीर में माल भी सरलता से बाहर आ जाता है रक्त संचरण में वृद्धि- ध...
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व्यायाम के लाभ हानिकारक पदार्थों का विसर्जन- शरीर में विभिन्न हानिकारक पदार्थ एकत्रित होते रहते हैं जिनके शरीर से बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है व्यायाम के द्वारा पीसने के रूप में उनके उत्सर्जी पदार्थ शरीर से विसर्जित हो जाते हैं इसके अतिरिक्त व्यायाम पेट और आम तो का कार्य भी नियमित कर देता है जिससे कब्ज दूर हो जाता है और शरीर में माल भी सरलता से बाहर आ जाता है रक्त संचरण में वृद्धि- ध्यान सी केवल रक्त ही शुद्ध होता है वर्णन इसमें रक्त की गति भी बढ़ जाती है जिससे शरीर के विभिन्न अंगों में रक्त का ठीक संचरण होता है इससे मांसपेशियां मजबूत होती है और शरीर के विभिन्न क्रियाशील रहते हैं पाचन शक्ति में वृद्धि- व्यायाम भोजन की भली भांति बचाने में सहायक होता है जिससे पाचन शक्ति में वृद्धि होती है भूख में वृद्धि- ध्यान द्वारा जब पाचन शक्ति ठीक हो जाती है तो भूख में खूब खुलकर लगती है अतः व्यायाम से भूख में भी वृद्धि होती है नियमित श्वास गति - व्यायाम से नियमित स्वास्थ्य गति फेफड़ों को अधिक आक्सीजन प्रदान करती है जिससे शरीर में से अधिक से अधिक गंदी वायु बाहर आती है कार्य क्षमता में वृद्धि - व्यायाम द्वारा शारीरिक एवं मानसिक विकास होने से मनुष्य की कार्य क्षमता बढ़ जाती है जिससे वह अधिक धन का अपवर्जन करने में सफल हो सकता है शारीरिक एवं मानसिक विकास: जब व्यायाम द्वारा शरीर के हानिकारक पदार्थों का विसर्जन हो जाता है स्वास्थ्य गति और रक्त की मात्रा बढ़ जाती है पाचन शक्ति और भूख में वृद्धि हो जाती है और मांसपेशियां मजबूत हो जाती है तो शारीरिक विकास होता है शारीरिक विकास से स्वस्थ ही मस्तिष्क विकसित होता है सुख शांति की अनुभूति- नियमित व्यायाम मनुष्य को स्वस्थ बना देता है और विभिन्न रोगों से मुक्ति प्राप्त हो जाती है इससे मनुष्य का शरीर कांतिमान है सुंदर बन जाता है परिणाम फल स्वरुप मनुष्य सुख शांति की अनुभूति करता है व्यायाम न करने से कई हानियां होती है शरीर की चर्बी और रक्तचाप बढ़ जाता है पाचन शक्ति खराब हो जाती है हारती है और स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है व्यक्ति स्वभाव से चिड़चिड़ा हो जाता है और चेहरे से क्रांति लुप्त हो जाती है इससे शरीर समय से पहले कमजोर हो जाता है स्त्रियों पुरुषों और बच्चों के लिए व्यायाम कार्य अलग-अलग प्रकार के होते हैं घूमने तो सभी के लिए उपयुक्त है योगासन तो बड़े बच्चों पुरुषों और स्त्रियों के लिए अत्यंत लाभकारी है स्त्रियों के लिए नृत्य और घर के विभिन्न कार्य अभियान है विशेष कर लेते में पेशी ए सुडौल बनती है और शारीरिक सौंदर्य में वृद्धि होती है जो व्यक्ति शारीरिक कार्य करते होने व्यायाम करना आवश्यक नहीं है परंतु मानसिक कार्य करने वाले व्यक्ति को शारीरिक व्यायाम विशेष कर टहलने का काम आवश्यक करना चाहिए धन्यवाद-
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kumarivanshika01232@gmail.com
02 Feb 2026
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शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा के उपाय शारीरिक स्वास्थ्य उत्तम रहे इसके लिए हम स्वास्थ्य रक्षा के निम्नलिखित उपाय करने चाहिए वातावरण- व्यक्ति का अधिकांश हमें घर पर ही बीतता है अतः घर का वातावरण आनंद देतायक होना चाहिए परिवार के सभी सदस्यों में आत्म संतोष की भावना होनी चाहिए हमेशा सकारात्मक सूचना चाहिए और नारात्मक प्रवृत्ति का त्याग करना चाहिए चिंता रहित जीवन- चिंता एवं चिंता के समान यह सत्य है कि प...
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शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा के उपाय शारीरिक स्वास्थ्य उत्तम रहे इसके लिए हम स्वास्थ्य रक्षा के निम्नलिखित उपाय करने चाहिए वातावरण- व्यक्ति का अधिकांश हमें घर पर ही बीतता है अतः घर का वातावरण आनंद देतायक होना चाहिए परिवार के सभी सदस्यों में आत्म संतोष की भावना होनी चाहिए हमेशा सकारात्मक सूचना चाहिए और नारात्मक प्रवृत्ति का त्याग करना चाहिए चिंता रहित जीवन- चिंता एवं चिंता के समान यह सत्य है कि प्रत्येक के जीवन में कुछ ना कुछ समस्याएं रहती है परंतु निरंतर चिंता चिंता करने रहने से किसी समस्या का समाधान नहीं होता बल्कि आत्म शक्ति कम हो जाती है तब फल की इच्छा के बिना अपना कर्तव्य करते रहना चाहिए मादक पदार्थों से दूर रहना- स्वस्थ रहने के लिए यह आवश्यक होता है कि हमें विभिन्न प्रकार के मादक पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए सभी प्रकार के मादक पदार्थों के प्रयोग में हमारे जीवन की सोने विराज ने की शक्ति नष्ट हो जाती है आमाशय की क्रियाशीलता काम हो जाती है हृदय की धड़कन बढ़ जाती है कैंसर अधिक नींद आती बीमारियां उत्पन्न हो जाती है तो मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहना चाहिए सार्वजनिक स्वच्छता - स्वस्थ रहने के लिए घर ही नहीं हैप्पी तो सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना प्रतीक नागरिक का कर्तव्य बन जाता है खसते या चकते समय मुंह पर रुमाल लगाना चाहिए सार्वजनिक स्थानों पर बने तोक दान का प्रयोग ठोकने के लिए करना चाहिए घर का कूड़ा निर्धारित स्थान पर ही फेंकना चाहिए यदि किसी सकरात्मक बीमारी की जानकारी मिले तो पास के किसी सरकारी अस्पताल में जाकर बताना चाहिए बच्चों में अच्छी आदतों का विकास- बच्चों में प्रारंभ से ही अच्छी आदतों का विकास करना चाहिए छोटे बच्चों का अनुकरण से सीखते हैं अतः स्वयं अपनी ऐसी जीवन शैली अपने जिससे बच्चे प्रेरणा का सके और अपने सुंदर आता तो का विकास कर सके एक बार यदि बचपन में कोई आदत पड़ जाए तो जीवन भर यह आदत फिरती नहीं है अतः अच्छी आदतों को जीवन के प्रारंभिक काल में ही डालने का ऑपरेशन करना चाहिए धन्यवाद-
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02 Feb 2026
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विश्राम एवं निंद्रा स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने के लिए विश्राम की आवश्यकता पड़ती है दैनिक जीवन के विभिन्न क्रियाकलाप करने के कारण हमारे मांसपेशियां थकान का अनुभव करने लगती है अतः यह आवश्यक हो जाता है कि हम पर्याप्त विश्राम करें पर्याप्त नींद लेने से व्यक्ति तक की महसूस करता है तथा स्वस्थ भी रहता है विश्राम तथा निद्रा के नियम रात में एक निश्चित समय पर सोना चाहिए सोने के बिस्तर आदि स्वच्छ होन...
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विश्राम एवं निंद्रा स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने के लिए विश्राम की आवश्यकता पड़ती है दैनिक जीवन के विभिन्न क्रियाकलाप करने के कारण हमारे मांसपेशियां थकान का अनुभव करने लगती है अतः यह आवश्यक हो जाता है कि हम पर्याप्त विश्राम करें पर्याप्त नींद लेने से व्यक्ति तक की महसूस करता है तथा स्वस्थ भी रहता है विश्राम तथा निद्रा के नियम रात में एक निश्चित समय पर सोना चाहिए सोने के बिस्तर आदि स्वच्छ होने चाहिए रात्रि में शयन कक्ष में हल्के प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए रात्रि में जल्दी सोने तथा प्राण कल जल्दी उठना चाहिए सोते समय सीधी लेटना चाहिए सोते समय किसी प्रकार का तनाव मन में नहीं लाना चाहिए कपड़े ढीले तथा सीधा जनक होने चाहिए तथा मुंह ठक्कर नहीं सोना चाहिए व्यसनो का त्याग अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह आवश्यक है की बुरी आदतें जैसी अत्यधिक धूम्रपान करना शराब पीना जुआ खेलने पूरे लोगों की संगति में रहना फिजूल खर्ची करना अधिक हथियार किया चाहे क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है इसके लिए आवश्यक है कि बच्चों में प्रारंभ से ही व्यसनों से दूर रहने की आदत डाली जाए धन्यवाद
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02 Feb 2026
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व्यायाम करने केनियम- व्यायाम करते समय कुछ नियमों का पालन भी आवश्यक है व्यायाम के नियम निम्नलिखित है प्रारंभ में सरल व्यायाम - प्रारंभ में सरल व्यायाम करना चाहिए और धीरे-धीरे कठिन व्यायाम की ओर बढ़ना चाहिए नियमित रूप से व्यायाम - व्यायाम नियमित रूप से किया जाना चाहिए चाहे वह थोड़े समय के लिए ही किया जाए सहनशक्ति के अनुसार व्यायाम - व्यायाम केवल उतना ही किया जाए जो शरीर सहन कर सके अन्यथा अत्य...
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व्यायाम करने केनियम- व्यायाम करते समय कुछ नियमों का पालन भी आवश्यक है व्यायाम के नियम निम्नलिखित है प्रारंभ में सरल व्यायाम - प्रारंभ में सरल व्यायाम करना चाहिए और धीरे-धीरे कठिन व्यायाम की ओर बढ़ना चाहिए नियमित रूप से व्यायाम - व्यायाम नियमित रूप से किया जाना चाहिए चाहे वह थोड़े समय के लिए ही किया जाए सहनशक्ति के अनुसार व्यायाम - व्यायाम केवल उतना ही किया जाए जो शरीर सहन कर सके अन्यथा अत्यधिक थकावट से अन्य कार्य करना भी कठिन हो जाता है अवतार खुले स्थान पर व्यायाम - व्यायाम करते समय पर्याप्त ऑक्सीजन के लिए यह आवश्यक है कि व्यायाम खुले स्वच्छ और हवा दार स्थान पर किया जाए खाने के बाद व्यायाम न करना- खाने के बाद व्यायाम कथा भी नहीं करना चाहिए नेता भोजन का पाचन कठिन हो जाता है पेट में दर्द हो सकता है और उल्टी भी आ सकती है व्यायाम के तुरंत बाद पानी न पीना- जैसे भोजन के तुरंत बाद व्यायाम नहीं करना चाहिए वैसे ही व्यायाम के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए अन्यथा स्वास्थ्य को हानि हो सकती है स्नान से पहले व्यायाम - स्नान करने से पर्याप्त समय पहले व्यायाम करना चाहिए और पसीना सूखने पर ही स्नान किया जाना चाहिए बूड़ो और छोटे बच्चों को व्यायाम ना करना - बुढो और बहुत छोटे बच्चों को व्यायाम करना आवश्यक नहीं है इसी प्रकार अस्वस्थ व्यक्ति को भी व्यायाम नहीं करना चाहिए व्यायाम के समय अधिक वस्त्र ना पहनना - व्यायाम करते समय शरीर पर काम से कम वस्त्र पहने चाहिए ताकि शरीर को हवा लग सके धन्यवाद-
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02 Feb 2026
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मूर्खों के राज्य में राजा और मंत्री दोनों मुर्गी थे वे दूसरे राज्यों की तरह राजकाज नहीं चलाना चाहते थे इसलिए उन्होंने रात को दिन में और दिन को रात में बदलने का फैसला कर लिया उन्होंने आदेश दिया कि हर कोई रात में जागे अपने खेत जोत और अपने व्यापार को केवल अंधेरा होने के बाद चलाया करें और जैसे ही सूर्य ऊपर आए ज स जाए कोई भी जो आदेश का उंगलन करेगा उसे मृत्युदंड दिया जाएगा लोगों ने मृत्यु के दर से वैसा...
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मूर्खों के राज्य में राजा और मंत्री दोनों मुर्गी थे वे दूसरे राज्यों की तरह राजकाज नहीं चलाना चाहते थे इसलिए उन्होंने रात को दिन में और दिन को रात में बदलने का फैसला कर लिया उन्होंने आदेश दिया कि हर कोई रात में जागे अपने खेत जोत और अपने व्यापार को केवल अंधेरा होने के बाद चलाया करें और जैसे ही सूर्य ऊपर आए ज स जाए कोई भी जो आदेश का उंगलन करेगा उसे मृत्युदंड दिया जाएगा लोगों ने मृत्यु के दर से वैसा ही किया जैसा उन्हें कहा गया था राजा और बद्री अपनी योजना की सफलता पर प्रश्न थे एक दिन एक गुरु तथा उनका शिष्य शहर में आए यह सुंदर शहर दीघा का समय था लेकिन आसपास कोई भी नहीं था हर कोई सोया हुआ था एक चुहिया भी घूम नहीं रही थी यहां तक की गाय बैलों को भी दिन में सोना सिखाया गया था दोनों अजनबी उसे देखकर आश्चर्यचकित थे जो कुछ इन्होंने अपने चारों ओर देखा था और शाम तक शहर में चारों ओर तब तक घूमते रहे जब तक की अचानक सारा शहर जाग नहीं गया और अपना रात का क्रियाकलाप नहीं करने लगा दोनों लोगों को भूख लग आई थी अब जब दुकान खुल गई थी वह कुछ खाने पीने का सामान खरीदने चले गए उदय आश्चर्य हुआ जब उन्होंने पाया कि हर चीज का दान एक ही था एक अकेला लड्डू चाहे उन्होंने चावल की एक मात्र खरीदी या खेलों का एक गुंजा इसका मूल्य एक लड्डू था गुरुजी और उसका शिष्य प्रश्न थे उन्होंने कभी भी ऐसी बात नहीं सुनी थी वह एक रुपए में वह सारा भोजन खरीद सकते थे जो वह चाहते थे पाक हाथ चुकाने के बाद गुरुजी को एहसास हुआ कि यह मूर्खों का राज्य है और उनके लिए यहां रुकने का विचार अच्छा नहीं होगा यह स्थान हमारे लिए नहीं है आओ चले उन्होंने अपने शिष्य से कहा लेकिन सीसी वह स्थान छोड़ नहीं जाता था यहां सब कुछ सस्ता था वह बस अच्छा सस्ता खाना चाहता था गुरुजी ने कहा वह सब मुर्ख है यह सब ज्यादा समय तक नहीं चलेगा और तू नहीं कह सकता कि वह इसके बाद तेरे साथ क्या करेंगे लेकिन फिर से देव गुरुजी की बुद्धिमानी की बात को नहीं सुना वह ठहरना चाहता था अंत में गुरुजी के हर बाली और कहा वह कर जो तू चाहता है बचा रहा हूं और चले गए इसी से ठहर गया रोग भरपेट खाना खाने लगा के ले और घी और चावल और गेहूं और पवित्र अवार्ड गली के सांड की तरह मोटा हो गया एक दिन खिली धूप में एक चोर ने एक धनी व्यापारी के घर में शहर लगाया उसने एक दीवार में किया हो चुपचाप अंदर चला गया और जब वह अपनी लूट को बाहर ले जा रहा था तब पुराने मकान की दीवार उसके सिर पर डे गई और वही उसी स्थान पर मर गया उसका भाई राजा के पास दौड़कर गया और शिकायत की है महाराज जब मेरा भाई अपना प्राचीन व्यापार कर रहा था तो एक दीवार उसे पर गिर गई और वह मर गया दोस्त व्यापारी का है उसे अच्छी और मजबूत दीवार बनाने चाहिए थी आपको उसे धार्मिक को दंडित करना चाहिए तथा परिवार को इस अध्याय की श्रुति पूर्ति करनी चाहिए राजा ने कहा न्याय किया जाएगा चिंता मत करो और तुरंत मकान के मालिक को बुलाया लिया जब व्यापारी आया तब राजा ने से प्रश्न किया तुम्हारा नाम क्या है अमुक और आमुख महाराज क्या तुम घर पर थे जब मृतक ने तुम्हारी घर पर चोरी की थी हां महाराज उसने शेर लगाई थी और दीवार कमजोर थी यह उसे पर गिर पड़ी आरोपी ने अपना प्राप्त स्वीकार कर लिया है तुम्हारे दीवाने इस आदमी के भाई को मार डाला तुमने एक व्यक्ति की हत्या की है अब तुम्हें दंडित करना पड़ेगा स्वामी आसाई व्यापारी ने कहा मैंने दीवार नहीं बनाई थी यह तो प्रस्तुत उसे आदमी का दोष है जिसने दीवार बनाई थी उसमें उसे ठीक से नहीं बनाई थी आपको उसे दंडित करना चाहिए वह कौन है स्वामी यह दीवार मेरे पिताजी के समय में बढ़ाई गई थी मैं उसे आदमी को जानता हूं अब वह बूढ़ा हो चुका है वह पास में ही रहता है राजा ने उसे राज मिस्त्री को जिसने दीवार बनाई थी को बुलाने के लिए दूध भेज दिया वे उसके हाथ पांव बंद कर उसे ले अरे तुम क्या तुमने इस आदमी की दीवार इसके पिताजी के समय भी बनाई थी हां महाराज मैंने बनाई थी यह किस तरह की दीवार तुमने बनाई थी यह बेचारे आदमी पर गिर गई और उसे मार डाला तुमने उसकी हत्या की है हमें तुम्हें मृत्युदंड देना पड़ेगा इससे पहले की राजा फांसी का आदेश देता बेचारे राजमिस्त्री ने प्रार्थना की कृपया अपना आदेश देने से पहले मेरी बात सुन लीजिए यह सच है कि मैं ही यह दीवार बनाई थी और यह अच्छी नहीं थी लेकिन ऐसा इसलिए था कि मेरा मन इसमें नहीं था मुझे अच्छी तरह याद है कि एक नाचने वाली लड़की जो कि सारा दिन उसे गली से इधर-उधर अपनी पायल झुनझुन कर दी जा रही थी और मैं अपनी आंखों या अपना दिमाग उसे दीवार में नहीं रख सका जिसे मैं बना रहा था आपको उसे नाचने वाली लड़की को पकड़ना चाहिए मुझे पता है कि वह कहां रहती है तुम ठीक रहते हो बला गहरा गया है हमें इसमें जाना पड़ेगा इतनी जटिल बाबू का न्याय करना आसान नहीं है पकड़ना चाहिए उसे व्यक्ति को चाहे वह कहां जहां भी होना अच्छी वाली लड़की अब बड़ी स्त्री काटते हुए दरबार में आई क्या तुम कई वर्षों पहले उसे गली में इधर से उधर जा रही थी जबकि यह बेचारा आदमी दीवार बना रहा था क्या तुमने उसे देखा था हां मेरे स्वामी मुझे यह अच्छी तरह से याद है तो तुम इधर-उधर आ जा रही थी अपनी पायल छठ छठ कटे हुए तुम युवा थी और तुमने उसका ध्यान बता दिया इसलिए उसने खराब दीवार बनाई यह एक गरीब कर पर गिर गई है और उसे मार डाला तुमने एक दिन दोस्त व्यक्ति को मार डाला है तुम्हें दंड मिलेगा उसने 1 मिनट तक सोच और कहां स्वामी रुक अब मैं जान गई हूं कि मैं गली में आज क्यों रही थी मैंने सुंदर को अपने लिए आभूषण बनाने के लिए कुछ सोना दिया था वह आलसी बेईमान आदमी था उसने इतने सारे बहाने बनाए कहां में इसे अब दूंगा मैं इसे अब दूंगा विज्ञान विज्ञान सारे दिन उसकी वजह से ही वह उसके घर एक दर्जन बाहर आती जाती रही और तभी इस राज मिस्त्री ने मुझे देखा इसमें मेरा दोस्त नहीं है स्वामी यह इस घटिया सुधार का दोष है बेचारी वह बिल्कुल ठीक कह रही है राजा ने सोचा साक्षी को तोड़ते हुए अतः हमें वास्तविक दोषी मिल गया है पड़कर लो उसे सुंदर को जहां कहीं भी वह छुपा है तुरंत राजा के कार्य उद्योग ने उसे सुनार की तलाश की जो अपनी दुकान के कोने में छुपा था जब उसने अपने विरुद्ध आप सुन तो उसने अपनी खुद की कहानी सुना दी स्वामी उसने कहा मैं गरीब सुंदर हो यह सच है कि इस नाटकी को कई बार अपने द्वार पर बुलाया था मैंने उससे इसलिए बहाने बनाए थे क्योंकि धनी व्यापारी ऑडर खत्म करने से पहले उसके आभूषण पूरे नहीं बन सकता था उनके यहां शादी आ रही थी और वह प्रतीक्षा नहीं कर सकते थे आप जानते ही है की धनी व्यक्ति कितने अधिक होते हैं कौन है यह धनी व्यापारी जिसने तुम्हें इस निर्धन स्त्री के आभूषण उधर चलाया जिसने राजमिस्त्री का ध्यान भटका दिया जिसने अपनी दीवार को गड़बड़ कर गिर गई है और उसे मार डाला क्या तुम उसका नाम बता सकते हो सुना नहीं उसने परी का नाम बताया और वह और कोई नहीं वरन् मूल स्वामी था उसे मकान का जिसकी दीवार गिरी थी अब न्याय हूं फिर कर्म ही आ गया है राजा ने सोचा वापस व्यापारी पर जब उसे कठोरता से वापस दरबार में बुलाया गया तो वह रोता हुआ आया मैं नहीं था बल्कि मेरे पिताजी थे जिन्होंने आभूषण बनाने को दिया था वह मर चुके हैं वह मैं निर्दोष हो लेकिन राजा ने मंत्री से वापस किया और निर्णय दिया यह सच है कि तुम्हारे पिताजी ही असली हत्यारे हैं वह मर चुके हैं लेकिन उनके स्थान पर किसी को तो दंडित किया जाना चाहिए तुमने अपने अपराधी पिता से सब कुछ प्रत्येक करता में पाया है उनकी संपत्ति और साथ ही उनके पाप भी में तो तुरंत जान गया था तब ही जब मैं तुम्हें पहली बार देखा था कि तुम ही इस भयानक अपराध के मूल में हो तुम्हें मरना पड़ेगा और उसने राजा ने फांसी के लिए एक नई सूली तैयार करने का आदेश दिया जब नौकरों ने सली को तेज किया और अपराधी की अंतिम सजा के लिए तैयार किया तो मंत्री को लगा की धनी व्यापारी ठीक से सूली पर फांसी देने के लिए कुछ अधिक ही पतला है उसने राजा का ध्यान इस और दिलाया राजा भी इस विषय में चिंतित हुआ हम क्या करें वह बोला जब अचानक उसके दिमाग में आया कि जो कुछ उन्हें करना है वह इतना मोटा आदमी तलाशना है जिस पर फंदा ठीक आए नौकरों को तुरंत सारे शहर में भेजा गया ऐसे आदमी की तलाश में जिसे फंदा सही आ सके और उसकी दृष्टि शिष्य पर पड़ी जो महीना तक अकेले और चावल और गेहूं और घी खाकर मोटा हो गया था मैंने क्या गलत किया है मैं निर्दोष हूं मैं एक संन्यासी हूं वह चिल्लाया यह सच सच हो सकता है लेकिन यह राजश्री निर्णय है कि हम इतने मोटे ताजे आदमी को तलाश से जिसे फंदा ठीक बैठे हुए बोले और उसे फांसी दिए जाने के स्थान पर ले गए उसे अपने बुद्धिमान गुरुजी के शब्द याद आए यह मूर्खों का शहर है तुम्हें नहीं पता कि वे इसके बाद क्या करेंगे जब वह मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहा था तो उसने मन में अपने गुरु जी की प्रार्थना की कहते हुए कि वह जहां भी हो उसका रोना सुन ले गुरुजी ने सब कुछ स्वप्न में देखा उनमें जादुई ताकत थी वह दूर तक देख सकते थे और वह भविष्य देख सकते थे वैसे ही जैसे में वर्तमान और भूत देख सकते थे वह तुरंत शिष्य को बचाने के लिए प्रकट हो गए जिसे खुद को खाने के प्रेम के चक्कर में ऐसी मुसीबत में डाल दिया था
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kumarivanshika01232@gmail.com
02 Feb 2026
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सम्रा औरंगजेब दे राज दिवस में पुंगी नमक वाद्य यंत्र बजाना प्रतिबंधित कर दिया क्योंकि इसकी आवाज अच्छी वह वृक्ष थी पुगी दरकत से बने शोर मचाने वाले सभी का सामान्य नाम पड़ गया शायद ही किसी ने सोचा होगा किया है एक दिन उधर जीवित हो जाएगी पेशेवर संगीतकारों के एक दी जिसकी राजमहल तक पहुंच थ्री डे पुंगी लंबा वह छोड़ा था और पाइप के शरीर में साथ छेड़ कर दिए जब उसने इसमें से कुछ शब्दों को बंद करके तथा खोलकर इस...
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सम्रा औरंगजेब दे राज दिवस में पुंगी नमक वाद्य यंत्र बजाना प्रतिबंधित कर दिया क्योंकि इसकी आवाज अच्छी वह वृक्ष थी पुगी दरकत से बने शोर मचाने वाले सभी का सामान्य नाम पड़ गया शायद ही किसी ने सोचा होगा किया है एक दिन उधर जीवित हो जाएगी पेशेवर संगीतकारों के एक दी जिसकी राजमहल तक पहुंच थ्री डे पुंगी लंबा वह छोड़ा था और पाइप के शरीर में साथ छेड़ कर दिए जब उसने इसमें से कुछ शब्दों को बंद करके तथा खोलकर इसे बजाय तो कुबल में मधुर धनिया उत्पन्न हुई उसने राज परिवार के सदस्य के सामने वाद्य यंत्र को बजाय और इसे हर कोई प्रभावित हुआ पुंगी से एकदम भेद इस बगेंद्र को एक नया नाम दे रहा था जैसे की कथा कहीं जाती है क्योंकि यह पहली बार सब के कक्षा में बजाई गई थी तथा एक नई के द्वारा बजाई गई थी इस बगेंद्र को शहनाई नाम दिया गया शहनाई की आवाज को शुभ माना जाना लगा तथा इसी कारण से इसे आज भी मंदिरों में बचाया जाता है और यह किसी भी उत्तर भारतीय विभाग का अनिवार्य अंग है अतीत में शहनाई डोबेट या राज दरबारों में पाए जाने वाले दो परंपरागत बगेंद्र समूह का अंग थी हाल ही तक इसका प्रयोग केवल मंदिरों में विवाहों में होता था इस वाद्य यंत्र को शास्त्रीय बचपन पर लाने का से उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को जाता है 5 वर्ष की अवस्था में बिहार में डूब राव के प्राचीन इलाके में तालाब के पास बिस्मिल्लाह खान दिल्ली दादा खेलने करते थे वह नियमित रूप से निकट के ब्याह है जी के मंदिर में भोजपुरी चेता गाने जाया करते थे जिनकी समाप्ति पर उन्हें एक पॉइंट 25 किलोग्राम का बड़ा लड्डू मिलता था जो उन्हें स्थानीय महाराज द्वारा पुरस्कार में दिया जाता था यह 80 वर्ष पुरानी बात है और यह छोटा बालक भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न प्राप्त करने के लिए दूर-दूर की यात्रा कर चुका है 21 मार्च 1916 को जन्मे बिस्मिल्लाह खान बिहार के एक संगीत्रों के सुविचार परिवार में आते है उनके दादा रसूल बख्श खान भोजपुरी के राजा के दरबार के शहनाई वाज थी उनके पिता पैगंबर बख्श तथा पिता के पक्ष के दूसरे पूर्वाझा भी वहां शहनाई वादक थे छोटे बालक ने प्रारंभिक जीवन में ही संगीत में रुचि लेना प्रारंभ कर दिया था 3 वर्ष के अवस्था में जब उनकी माताजी उन्हें उनके बाबा जी के घर पर बनारस अब वाराणसी ले गई तो बिस्मिल्लाह खान अपने बाबो को शहनाई का आरंभ करते देखकर मुग्ध हो गए शीघ्र ही बिस्मिल्लाह दे अपने मामा अली बक्स के साथ बनारस के विष्णु मंदिर जाना प्रारंभ कर दिया जहां वक्त शहनाई वादन के लिए नियुक्त थे अली बक्स शहनाई बजाय करते थे और बिस्मिल्लाह करो तक लगातार मुक्त बैठे रहते थे धीरे-धीरे उन्होंने वाद्य यंत्र बजाने में पाठ देना प्रारंभ कर दिया और वह पूरे दिन बैठे आरंभ किया करते थे आने वाले वर्षों में बालाजी और मंगल मैया के मंदिर और गंगा के किनारे युवा प्रशिक्षण के प्रिया स्थान बन गए जहां वह एकांत में अभ्यास कर सकता था गंगा के बहते जल ने उन्हें नए रगों में एकांक परिवर्तन करने तथा नवीन राघव की रचना करने की ने पहले शहनाई की सीमा से परे माना जाता था की प्रेरणा दी 14 वर्ष की अवस्था में बिस्मिल्लाह अपने पिता के साथ इलाहाबाद संगीत सम्मेलन में गए उनकी संगीत प्रस्तुति के अंत में उस्ताद फायदा खान ने युवा लड़के की पीठ थपथपाई और कहां मेहनत करो और तुम आवश्यक कर पाओगे लखनऊ में 1938 में ऑल इंडिया रेडियो के प्रारंभ के साथ ही बिस्मिल्लाह को बड़ा स अक्षर प्राप्त हुआ वह शीघ्र ही रेडियो पर बहुत सुने जाने वाले शहनाई वादक बन गए जब भारत को 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्त हुई तो बिस्मिल्लाह खान राष्ट्र को अपनी शहनाई से राष्ट्र का अभिवादन करने वाले प्रथम भारतीय बने इन्होंने लाल किले श्रोतागण के सम्मुख जिम पंडित जवाहरलाल नेहरू भी शामिल थे राग काफी में अपनी आत्मा उदल दी जिन्होंने नेहरू ने बाद में अपना प्रसिद्ध भाषण ट्रस्ट विद डिसीजन दिया धन्यवाद-
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kumarivanshika01232@gmail.com
02 Feb 2026
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प्रस्तावना "स्वस्थ नागरिक ही देश की वास्तविक विरासत है" प्रत्येक राष्ट्रीय की उन्नति वहां के नागरिकों पर निर्भर करती है जिस देश के नागरिक स्वस्थ होंगे वह देश भी उन्नत सील होगा जनता का स्वास्थ्य वहां के प्रशासन पर निर्भर करता है सरकार का कर्तव्य है कि वह अपने देश के नागरिकों को स्वच्छ जल पौष्टिक भोजन उचित शिक्षा में साफ सुथरा घर हेतु पर्याप्त सुविधा दे जिससे देश के नागरिक स्वस्थ स्वतंत्रता प्रा...
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प्रस्तावना "स्वस्थ नागरिक ही देश की वास्तविक विरासत है" प्रत्येक राष्ट्रीय की उन्नति वहां के नागरिकों पर निर्भर करती है जिस देश के नागरिक स्वस्थ होंगे वह देश भी उन्नत सील होगा जनता का स्वास्थ्य वहां के प्रशासन पर निर्भर करता है सरकार का कर्तव्य है कि वह अपने देश के नागरिकों को स्वच्छ जल पौष्टिक भोजन उचित शिक्षा में साफ सुथरा घर हेतु पर्याप्त सुविधा दे जिससे देश के नागरिक स्वस्थ स्वतंत्रता प्राप्ति के पक्ष भारत सरकार ने इस और विशेष प्रयास किए हैं विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से सरकार ने जन स्वास्थ्य के स्तर को ऊंचा उठाने की विशेष प्रयास किए हैं जन स्वास्थ्य का अर्थ- सामान्य रूप से स्वास्थ्य को एक व्यक्तिगत गुण माना जाता है तथा अलग-अलग व्यक्तियों के स्वास्थ्य का मूल्यांकन किया जाता है परंतु स्वास्थ्य विज्ञान के अंतर्गत यह कहा गया है कि प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य हिंदी व्यक्तियों के स्वास्थ्य से भी प्रभावित होता है यदि कोई व्यक्ति स्वास्थ्य के नियमों का पालन करता है तो उसका स्वास्थ्य अच्छा होता है यदि किसी क्षेत्र में अधिकांश व्यक्ति का स्वास्थ्य चलना है तथा विभिन्न लोगों के शिकार रहते हो तो उसके भी स्वास्थ्य के सांसद नियमों का पालन करने वाला व्यक्ति भी अधिक समय तक स्वस्थ नहीं रह पाता वास्तव में व्यक्तिगत स्वास्थ्य का घनिष्ठ समझ जन स्वास्थ्य से भी है जन स्वास्थ्य का अर्थ किसी क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों का सामूहिक स्वास्थ्य है किसी क्षेत्र के अधिकांश व्यक्तियों के स्वस्थ होने से जन स्वास्थ्य का स्तर उन्नत होता है समाज के अधिकांश व्यक्तियों द्वारा स्वास्थ्य के नियमों का पालन करने से क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति के स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है अतः प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के साथ-साथ जन स्वास्थ्य के प्रति भी संचित रहे इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को जल स्वास्थ्य के नियमों का पालन करना चाहिए जन स्वास्थ्य के मुख्य व्यक्ति को खने तथा सीखने नेता आसानी बरतनी चाहिए व्यक्ति को इधर-उधर ठोकना नहीं चाहिए मल मूत्र त्यागने के लिए शौचालय का प्रयोग करना चाहिए जहां था कूड़ा करकट नहीं फेंकना चाहिए कभी भी सकारात्मक रोग के फैलने की आशंका होते ही स्वास्थ्य विभाग को सूचित करना चाहिए जन स्वास्थ्य शिक्षा के उद्देश्य जन स्वास्थ्य शिक्षा के निम्नलिखित उद्देश्य है समाज के प्रत्येक व्यक्ति तथा राष्ट्र का स्वास्थ्य उत्तम हो सके तथा राष्ट्र प्रगति के शिखर पर बढ़ सके जनता को स्वास्थ्य संबंधित सभी वैज्ञानिक ज्ञान के लाभों की जानकारी देना स्वास्थ्य सुरक्षा संपत्ति जानकारी देना सांसद देसी विदेशी स्वास्थ्य संगठनों के द्वारा समय-समय पर चलाए गए अभियानों तथा कार्यक्रमों की जानकारी देना धन्यवाद-
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kumarivanshika01232@gmail.com
01 Feb 2026
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सार्वजनिक स्वच्छता सामान्य रूप से घर की संपूर्ण सफाई को ही प्राथमिकता दी जाती है परंतु जन स्वास्थ्य तथा सफाई के विभिन्न उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए घर की आंतरिक सफाई के साथ ही साथ घर के आसपास की सफाई अर्थात सार्वजनिक सफाई की भी समुचित व्यवस्था करनी अनिवार्य वास्तव में सफाई के विभिन्न लबों को प्राप्त करने के लिए घर पर्यावरण दोनों की संस्थान अनिवार्य है घर की आंतरिक सफाई वाले ही पूर्ण रूप से...
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सार्वजनिक स्वच्छता सामान्य रूप से घर की संपूर्ण सफाई को ही प्राथमिकता दी जाती है परंतु जन स्वास्थ्य तथा सफाई के विभिन्न उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए घर की आंतरिक सफाई के साथ ही साथ घर के आसपास की सफाई अर्थात सार्वजनिक सफाई की भी समुचित व्यवस्था करनी अनिवार्य वास्तव में सफाई के विभिन्न लबों को प्राप्त करने के लिए घर पर्यावरण दोनों की संस्थान अनिवार्य है घर की आंतरिक सफाई वाले ही पूर्ण रूप से सर्वोत्तम श्रेणी की क्यों ना हो यदि घर के आसपास गंदगी का सामाजिक से हो तो घर में रहने वाले व्यक्ति सफाई के लाभों से कार्य वर्जित भी रह सकते हैं यदि घर के आसपास गंदगी हो तो वहां विभिन्न लोगों के रोगाणु बनाते हैं दुर्गंध उत्पन्न होती है मक्खी मच्छर एवं अन्य आसपास की गंदगी की हर किसी के लिए अशोक के लिए भी होती है जिसे देखकर काफी बुरा महसूस होता है तथा घर की सफाई से उत्पन्न होने वाली प्रशंसा कार्य समाप्त हो जाती है इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक रेडियो सभी नागरिकों को सुझाव दिया जाता है कि घर की सफाई के साथ-साथ घर के आसपास की सफाई का भी समुचित ध्यान रखें घर के आसपास अर्थात् अपने पर्यावरण को संपूर्ण स्वच्छता के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित उपायों को अनिवार्य रूप से बनाएं खुले में सोच का पूर्ण बहिष्कार- पारंपरिक रूप से बहुत से लोग खुले विशेष क्रिया करते रहे हैं अब इसे पूर्ण रूप से अनुचित तथा अशोक भी नहीं मान लिया गया है खुले में सोच से पर्यावरण प्रदूषण होता है तथा गंदगी फैलती है जो की जन स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक है खुले में सोच को पूरी तरह समाप्त करने के लिए हमारी सरकार कृत संकल्प है स्वच्छ भारत स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत घरों में शौचालय बनाने के लिए अनुदान की भी व्यवस्था है तथा इसके लिए जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार भी किया जा रहा है घर के आसपास के कूड़े करकट की समुचित व्यवस्था- किसी भी प्रकार की सफाई के लिए संबंधित कूड़े करकट को सही ढंग से ठिकाना लगाना थी आवश्यक है हम अपने घर के अंदर की सफाई के लिए हर प्रकार के कूड़े करकट को ठिकाना लगाने के लिए हर संभव उपाय करते हैं इस सत्य को ध्यान में रखते हुए घर के आसपास के कूड़े करकट को फीस माफ करने के दास संभव उपाय किए जाने चाहिए इसके लिए सर्व प्रमुख उपाय यह है कि घर के आसपास कूड़ा करकट एकत्रित न होली भाई घर से निकलने वाले घोड़े को किसी भी दशा में घर के बाहर या आसपास ना फेलने दे इसके बावजूद यदि घर के आसपास किसी भी प्रकार का घोड़ा करके देखरत होने लगे तो उसे वहां से हटाने अथवा नष्ट करने का उचित उपाय किया जाना चाहिए कूड़े में यदि खास पत्ते तथा कागज आदि हो तो उन्हें जलाकर समाप्त कर दे अथवा उसमें खाद बनाने की प्रक्रिया को अपने ध्यान रखें रबर प्लास्टिक तथा पॉलिथीन आदि के अवशेषों को कदापि न जलाए इसके जलने से पर्यावरण में दूषित है हानिकारक गैसों से व्यापक होने का खतरा रहता है यहां यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि घर के आस-पास की सफाई का दायित्व प्रत्येक निवासी का है केवल अपने घर के सामने के मुख्य द्वार की सफाई का ही ध्यान रखना पर्याप्त नहीं है संपूर्ण पर्यावरण की सफाई अभीष्ट है आसपास के खरपतवार को समाप्त करना- घर के आसपास की सफाई के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण उपाय है घर के आसपास के खरपतवार को समाप्त करना सामान्य रूप से आवश्यक क्षेत्र में कुछ खाली स्थान खाली प्लाट या गली का कोण है होते हैं इन खाली स्थान में तरह-तरह के खरपतवार उगने लगते हैं एक खरपतवारों के कारण वातावरण में गंदगी की व्यापक होने लगती है वह तरह-तरह के कीट पतंगे पड़ने लगते हैं खुदाई मृत होने लगता है तथा आवारा पशु भी वह गंदगी फैलाने लगते हैं कुछ खरपतवार टोचन स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले होते हैं जिनकी गांडिया पराग करो से एलर्जी जनित रोग उत्पन्न होने की आशंका रहती है अनेक क्षेत्रों में होने वाली अमेरिकी का इसका एक स्पष्ट उदाहरण है इन संस्कृत तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सुझाव दिया जाता है कि घर के आसपास आवश्यक खरपतवार न पान अपने दे यदि खरपतवार को प्रारंभ में ही नष्ट कर दिया जाए तो समस्या बढ़ती ही नहीं गंदे पानी की समुचित व्यवस्था- घर के आसपास की सफाई व्यवस्था के अंतर्गत गंदे पानी की समुचित व्यवस्था करना भी आवश्यक होता है सार्वजनिक डोलियों की व्यवस्था के अभाव में घरों से निकलने वाला गंदा पानी तथा बरसात का पानी भी वातावरण में गंदगी का कारण बन जाता है यदि इस प्रकार की स्थिति हो तो इस विषय में समुचित उपाय करना अति आवश्यक होता है इसका सर्वोत्तम उपाय है डालियन की समुचित व्यवस्था करना यदि नालियों की व्यवस्था करने में कोई कठिनाई हो तो प्रत्येक घर के बाहर ढके हुए शॉकिंग पित्त बनाए जाने चाहिए इसके अतिरिक्त यदि घर के आसपास कई गड्ढे हो या गहरे स्थान हो जहां पानी एकत्रित हो जाता है वहां मिट्टी डालकर उन्हें तक देना चाहिए ताकि वहां पानी एकत्रित न होने पाए यदि इस प्रकार के गधों को थकना कठिन हो तो उन में दर्द होने वाले पानी पर समय-समय पर मिट्टी के तेल अथवा मच्छर मार तेल का छिड़काव करना आवश्यक होता है इसमें मच्छरों की उत्पत्ति को नियंत्रित किया जा सकता है सार्वजनिक नालियों की सफाई व्यवस्था- अवश्य वातावरण को स्वच्छ और स्वस्थ कर बनाए रखने के लिए क्षेत्र की सार्वजनिक नालियों की व्यवस्था होनी चाहिए इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की नालियों में गंदा पानी न रोकना पाए इसके लिए नालियों की ढाल ठीक होनी चाहिए तथा उनकी नियमित सफाई की व्यवस्था होनी चाहिए नालियों में कूड़ा कर कर नहीं डालना चाहिए डोलियों में पानी के बहन को अवरुद्ध करने में पॉलिथीन का सर्वाधिक योगदान रहता है अतः पॉलिथीन को जहां तहां न फेक सार्वजनिक नालियों के आसपास चुनाव या कोई रोगाणु नाशक खोल का छिड़काव भी करते रहना चाहिए मृत पशुओं को हटाने की व्यवस्था- अवश्य वातावरण की स्वच्छता के लिए आवश्यक है कि यदि पशु मर जाए तो उसके मृत शरीर को वहां से सरक हटाने की व्यवस्था की जाए अन्यथा क्षेत्र में तीव्र दुर्गंध तथा विभिन्न रोगाणु व्यापक होने लगते हैं पशुओं के मृत शरीर को हटाने के लिए स्थानीय संस्थाओं अथवा निर्धारित ठेकेदार को सूचित करना चाहिए संपूर्ण पर्यावरण की स्वच्छता सार्वजनिक स्वच्छता के लिए चंद जागरूकता अनिवार्य है इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपने दायित्व निभाना चाहिए वर्तमान समय में हमारी सरकार इस दिशा में अत्यधिक प्रयत्नशील है तथा स्वच्छ भारत मिशन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है आशा है की सीख रही हमारा देश पूर्ण रूप से स्वच्छ भारत बन जाएगा तथा गंदगी का पूर्ण अनुलन हो जाएगा धन्यवाद-
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kumarivanshika01232@gmail.com
01 Feb 2026
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विटामिनों की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव- विटामिनों को स्वास्थ्य विज्ञान की भाषा में सुरक्षात्मक तत्व कहा जाता है यह व्यक्ति को स्वस्थ रहने में विशेष रूप में सहायक होते हैं तथा उनकी कमी करने वाले रूप से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है विभिन्न विटामिनों की कमी से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पढ़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव का विवरण निम्नलिखित है विटामिन ए - विटामिन ए की कमी से आंख...
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विटामिनों की कमी का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव- विटामिनों को स्वास्थ्य विज्ञान की भाषा में सुरक्षात्मक तत्व कहा जाता है यह व्यक्ति को स्वस्थ रहने में विशेष रूप में सहायक होते हैं तथा उनकी कमी करने वाले रूप से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है विभिन्न विटामिनों की कमी से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पढ़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव का विवरण निम्नलिखित है विटामिन ए - विटामिन ए की कमी से आंखों और त्वचा संबंधित विभिन्न रोग हो जाते हैं विटामिन ए की कमी से होने वाले मुख्य आंखों संबंधित रोग है रतौंधी कांच कटी वाइडएस्ट जीरो तथा कीटो मलेशिया उसके तीर्थ विटामिन ए की कमी के कारण फॉलिकुलर हाइपोक्रेटोसिस नामक त्वचा संबंधित रोग भी हो जाते हैं विटामिन बी कंपलेक्स- विटामिन बी समूह के विटामिनों की कमी के कारण रूप से बेरी बेरी तथा प्लेन का नामक रोग हो जाता है इन रोगों के अतिरिक्त विटामिन बी की कमी से व्यक्ति के सामान्य स्वास्थ्य पर भी अनेक प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं विटामिन सी - विटामिन सी की कमी के परिणाम स्वरुप व्यक्ति नामक रोग का शिकार हो जाता है विटामिन डी - विटामिन डी की कमी के कारण व्यक्ति की अस्थियां कमजोर हो जाती है तथा वह अस्थि विकृत या रिकेट्स नामक रोग का शिकार हो जाता है इसके अतिरिक्त इस विटामिन की कमी से व्यक्ति का सामान्य स्वास्थ्य भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित होता है विटामिन ई - विटामिन ई की कमी के कारण स्त्री पुरुषों में प्रजनन क्षमता घट जाती है तथा वह ब्येपन के शिकार हो जाते हैं विटामिन के - विटामिन के की कमी के परिणाम स्वरुप व्यक्ति के रक्त में थक्के जमने की क्षमता का हर्ष हो जाता है इस स्थिति में चोट लग जाने पर रक्त का बहाना मुश्किल से रुकता है धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
01 Feb 2026
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परिचय प्रत्येक व्यक्ति को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है जिस प्रकार इंजन को चलाने के लिए तेल कोयला तथा ईंधन की जरूरत होती है उसी प्रकार मानव शरीर को सक्रिय रखने के लिए भोजन की अति आवश्यकता होती है प्रत्येक व्यक्ति को ऐसा भोजन ग्रहण करना चाहिए जिससे सभी आवश्यक पोषक तत्व उपस्थित हो भोजन में आवश्यक तत्वों की मात्रा इतनी होनी चाहिए कि शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ रह सके अर्थात ऐसा भोजन जिसमे...
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परिचय प्रत्येक व्यक्ति को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है जिस प्रकार इंजन को चलाने के लिए तेल कोयला तथा ईंधन की जरूरत होती है उसी प्रकार मानव शरीर को सक्रिय रखने के लिए भोजन की अति आवश्यकता होती है प्रत्येक व्यक्ति को ऐसा भोजन ग्रहण करना चाहिए जिससे सभी आवश्यक पोषक तत्व उपस्थित हो भोजन में आवश्यक तत्वों की मात्रा इतनी होनी चाहिए कि शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ रह सके अर्थात ऐसा भोजन जिसमें सभी तत्व उपस्थित हो उसे संतुलित भोजन आहार कहते हैं संतुलित आहार का अर्थ एवं परिभाषा संतुलित आहार की अर्थ क्रिया को नीचे दी गई परिभाषाओं द्वारा स्पष्ट रूप से संबंध जा सकता है विभिन्न पदार्थों के बना वह भोजन जो हमारे शरीर को सभी पौष्टिक तत्व हमारे आवश्यकताओं के अनुसार उचित मात्रा में प्रदान करता है संतुलित आहार कहलाता है C. Gopalan के अनुसार संतुलित आहार वह ऊर्जा है जो विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थ को ऐसी मात्रा एवं अनुपात में लेने से आती है जिसमें क्लोरीन खनिज विटामिन आवश्यक पोषक तत्वों की तथा शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके और पोषण की कुछ अतिरिक्त मात्रा भी बच जाए आहार और स्वास्थ्य का संबंध - आहार द्वारा संपन्न होने वाले कार्यों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट कहा जा सकता है की आहार और स्वास्थ्य में पारस्परिक घनिष्ठ संबंध है व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक आवश्यक कारक है समुचित एवं संतुलित आहार ग्रहण करना स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति को ऊर्जावान एवं रोग मुक्त होना अनिवार्य है ऊर्जा की प्राप्ति संतुलित आहार से होती है नियमित रूप से संतुलित आहार ग्रहण करने से व्यक्ति को आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती रहती है आहार में विद्वान कार्बोहाइड्रेट वसा तथा प्रोटीन व्यक्ति को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करते हैं स्वास्थ्य में संबंधित दूसरा महत्वपूर्ण कारक है व्यक्ति का रोग मुक्त रहना इस कारक के संबंध में दो बातें महत्वपूर्ण है प्रथम यह है कि रोगों से बचाव के लिए व्यक्ति के शरीर में एक विशिष्ट क्षमता होती है जिसे रोग प्रतिरोधक क्षमता कहते हैं इस क्षमता के बल पर ही व्यक्ति का शरीर विभिन्न रोगों को उत्पन्न करने वाले कारकों का मुकाबला करता है तथा उन कारकों को परसत करके निरंतर स्वस्थ बना रहता है यहां यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि व्यक्ति के शरीर में रोग रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास में सर्वाधिक योगदान संतुलित अप पोस्टिक आहार का ही होता है आहार में विद्वान प्रोटीन विटामिन तथा खनिज लवण व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सामान्य बनाए रखने तथा विकसित करने में भरपूर योगदान प्रदान करते हैं आहार द्वारा रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के तथ्य को ध्यान में रखते हुए हम कह सकते हैं कि आईएस स्वास्थ्य में घनिष्ठ संबंध है स्वास्थ्य एवं आहार के पारस्परिक संबंध को स्पष्ट करने वाला दूसरा तृतीय है अभाव जनित रोगों का नियंत्रण स्वस्थ रहने के लिए रोग मुक्त रहना अति आवश्यक है रोगों की उत्पत्ति संबंधी कारकों का विश्लेषण करने से स्पष्ट होता है कि कुछ रोग सकारात्मक तथा रोगाणुओं द्वारा उत्पन्न होने वाले हैं परंतु अनेक रोग ऐसे भी है जो शरीर के पोषक तत्वों की कमी या अभाव के कारण होते हैं इन रोगों को अभाव जनित रोग कहते हैं जैसे कि विटामिन सी की कमी से डिस्कवरी तथा आयोडीन की कमी से घेंघा नामक रोग हो जाता है तथा तथ्य को ध्यान में रखते हुए कहा गया है कि संतुलित आहार ग्रहण करते रहने से व्यक्ति को अभाव जनित रोग नहीं होते इसके साथ-साथ यह भी सत्य है कि यदि किसी व्यक्ति को कोई अभाव जनित रोग हो जाता है तो उसे स्थिति में व्यक्ति के उपचार के लिए उसके आहार में संबंधित पोषक तत्व की मात्रा बढ़ा दी जाती है इससे व्यक्ति अभाव जनित रोग से मुक्त हो जाता है इस स्थिति में व्यक्ति को किसी औषधि की आवश्यकता कार्य नहीं होती इस तथ्य के आधार पर ही कहा जाता है की आहार तथा स्वास्थ्य का घनिष्ठ संबंध है
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kumarivanshika01232@gmail.com
01 Feb 2026
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