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Blog by Vanshika | Digital Diary

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Meri Kalam Se
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पर्यावरण प्रदूषण का जनजीवन पर प्रभाव

पर्यावरण प्रदूषण का जनजीवन पर प्रभाव
 पर्यावरण प्रदूषण का जन जीवन पर प्रभाव:-  पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न पक्षों का सामान्य परिचय हम प्राप्त कर चुके हैं संपर्क में कहा जा सकता है कि पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर समस्या है जिसका प्रतिकूल प्रभावजन जीवन के प्रत्येक पक्ष पड़ता है इसका प्रत्यक्ष प्रभावजन स्वास्थ्य पर पड़ता है क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप विभिन्न साधारण गंभीर तथा अति गंभीर रोग पनपन लगते हैं पर्यावरण प्रदूषण का अप... Read More
 पर्यावरण प्रदूषण का जन जीवन पर प्रभाव:-  पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न पक्षों का सामान्य परिचय हम प्राप्त कर चुके हैं संपर्क में कहा जा सकता है कि पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर समस्या है जिसका प्रतिकूल प्रभावजन जीवन के प्रत्येक पक्ष पड़ता है इसका प्रत्यक्ष प्रभावजन स्वास्थ्य पर पड़ता है क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप विभिन्न साधारण गंभीर तथा अति गंभीर रोग पनपन लगते हैं पर्यावरण प्रदूषण का अप्रत्यक्ष रूप में प्रतिकूल प्रभावजन साधारण के आर्थिक जीवन पर भी पड़ता है रोगों की वृद्धि तथा स्वास्थ्य के निम्न स्तर के कारण जनसाधारण की उत्पादक क्षमता घटती है तथा रोग निवारण के लिए अतिरिक्त धन खर्च करना पड़ता है इससे जनसाधारण का जीवन आर्थिक संकट का शिकार हो जाता है जन्म जीवन पर पर्यावरण प्रदूषण से पढ़ने वाले प्रभाव का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है   जल स्वास्थ्य पर प्रभाव-  पर्यावरण प्रदूषण का सर्वाधिक प्रतिकूल प्रभाव जन स्वास्थ्य पर पड़ता है जैसे-जैसे पर्यावरण का अधिक प्रदूषण होने लगता है वैसे-वैसे प्रदूषण जनित रोगों की दर एवं वीरता में वृद्धि होने लगती है पर्यावरण के विभिन्न पक्षों में होने वाले प्रदूषण से भिन्न-भिन्न प्रकार के रोग बढ़ाते हैं उदाहरण के लिए वायु प्रदूषण के परिणाम स्वरुप शोषण तंत्र से संबंधित रोग तथा जल प्रदूषण के परिणाम स्वरुप पाचन तंत्र संबंधित रोग अधिक फैलते हैं ध्वनि प्रदूषण भी तंत्रिका तंत्र हृदय एवं विकारों को जन्म देता है तथा मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहारगत समानता को भी विकृत कर देता है अन्य प्रकार के प्रदूषण विजन सामान्य को विभिन्न सामान्य एवं गंभीर रोगों का शिकार बनाते हैं संक्षेप में कहा जा सकता है कि पर्यावरण प्रदूषण अनिवार्य रूप से जन स्वास्थ्य को प्रभावित करता है प्रदूषण पर्यावरण में रहने वाले व्यक्तियों की औसत आयु भी करती है तथा स्वास्थ्य का स्तर भी सामान्य निम्न ही रहता है   व्यक्तिगत कार्य क्षमता पर प्रभाव-   व्यक्ति एवं समाज की प्रगति में संबंधित व्यक्तियों की कार्य क्षमता का विशेष महत्व होता है यदि व्यक्ति की कार्य क्षमता सामान्य या सामान्य से अधिक हो तो वह निश्चित रूप से प्रगति के मार्ग पर ए घर्षण होता है पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप व्यक्ति की कार्य क्षमता निश्चित रूप से घटित है तथा जन स्वास्थ्य का स्तर निम्न होता है निम्न स्वास्थ्य स्टार वाला व्यक्ति ना तो अपने कार्य को कुशलता पूर्वक कर सकता है और ना उसकी उत्पादन क्षमता की सामान्य रह पाती है यह दोनों ही स्थितियां व्यक्ति एवं समाज के लिए हानिकारक सिद्ध होती है वास्तव में प्रदूषित वातावरण में ही व्यक्ति अस्वस्थ ना भी हो तो भी उसकी चुस्ती एवं इस फुर्ती तो घाट ही जाती है  आर्थिक जीवन पर प्रभाव-  व्यक्ति समाज तथा राष्ट्र की आर्थिक स्थिति पर भी पर्यावरण प्रदूषण का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है पर्यावरण प्रदूषण के परिणाम स्वरुप व्यक्ति की उत्पादन क्षमता घट जाती है यदि व्यक्ति का सामान स्वास्थ्य का स्तर निम्न होगा तथा उसकी कार्य क्षमता भी कम होगी तो वह अपनी आवश्यकताओ की पूर्ति के लिए समुचित धन कदापि अर्जित नहीं कर पाएगा इस स्थिति में यदि व्यक्ति अथवा उसके परिवार का कोई सदस्य प्रदूषण का शिकार होकर के निसाधारण या गंभीर रोगों से ग्रस्त रहता है तो उसके उपचार पर भी अधिक व्यय करना पड़ सकता है इससे परिवार का आर्थिक बजट बिगड़ जाता है तथा आर्थिक स्थिति निम्न हो जाती है अतः कह सकते हैं कि पर्यावरण प्रदूषण के प्रभाव से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति प्रत्यक्ष एवं परोक्ष दोनों ही रूपों मैं प्रभावित होती है इस कारक के प्रबल तथा विस्तृत हो जाने पर समाज एवं राष्ट्र की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होती है  उपयुक्त विवरण द्वारा स्पष्ट है कि पर्यावरण प्रदूषण का जनजीवन पर बहुपक्षीय गंभीर तथा प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है यही कारण है कि पर्यावरण प्रदूषण को आज गंभीरतम राष्ट्रीय समस्या माना जाने लगा है धन्यवाद*
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kumarivanshika01232@gmail.com 05 Feb 2026 212 Views

सुख रोग या रिकेट्स

सुख रोग या रिकेट्स
कुपोषण जनित एक रोग सूखा रोग भी है इसे अस्थियां भी करती या रिकेट्स भी कहते हैं   अस्थि विकृति अथवा स्टेट्स नामक रोग मुख्य रूप से बच्चों में पाया जाता है यह रोग विटामिन डी की कमी के कारण होता है स्थिर विकृति जैसे कि नाम पर ही स्पष्ट है इस रोग में बच्चों की हत्या समान आकार की नहीं रहती इसमें विकार आ जाता है शब्द रूप से 6 बाहर से लेकर 2 वर्ष तक के बच्चों को यह रोग अधिक होता है  विटामिन डी की कमी के का... Read More
कुपोषण जनित एक रोग सूखा रोग भी है इसे अस्थियां भी करती या रिकेट्स भी कहते हैं   अस्थि विकृति अथवा स्टेट्स नामक रोग मुख्य रूप से बच्चों में पाया जाता है यह रोग विटामिन डी की कमी के कारण होता है स्थिर विकृति जैसे कि नाम पर ही स्पष्ट है इस रोग में बच्चों की हत्या समान आकार की नहीं रहती इसमें विकार आ जाता है शब्द रूप से 6 बाहर से लेकर 2 वर्ष तक के बच्चों को यह रोग अधिक होता है  विटामिन डी की कमी के कारण होने वाले इस रोग में अस्थियां कमजोर पड़ने लगती है इसका मुख्य कारण कैल्शियम तथा फास्फोरस है पर्याप्त अवशोषण होता है जब हत्या कमजोर पड़ने लगती है जब वह शरीर का भर नहीं सहन कर पाती है वह या तो झुक जाती है अथवा टेढ़ी होने लगती है इस रोग के कारण शरीर की सबसे दस्तीय क्रमश विकृत होने लगती है सर्वप्रथम इस रोग में शरीर की हड्डी कुछ लंबी बड़ी तथा चपटी होने लगती है तथा वह था आगे की ओर निकला हुआ सा प्रतीत होने लगता है इसके अतिरिक्त शरीर की लंबी हड्डियों के सीरी कुछ बढ़ जाते हैं तथा मोटे हो जाते हैं पसलियां पर हड्डी और उपस्थिति के जोड़ों के स्थान पर गोल उभर दिखाई देने लगता है इसे क्रिकेट रोसरी कहते हैं इसके अतिरिक्त श्रोणि मेखला की हड्डी कुछ संकुचित हो जाती है तथा रीड की हड्डी कुछ झुकी हुई सी प्रतीत होने लगती है क्रिकेटर्स डबोक रोग में घुटने कलाई तथा एडी की अस्थियां सामान्य रूप से अधिक चौड़ी हो जाती है अस्थियों के अतिरिक्त इस रोग का प्रभाव मांसपेशियां पर भी पड़ता है इस रोग में मांसपेशियों कमजोर हो जाती है तथा उनका समुचित विकास नहीं हो पता बच्चों का पेट बढ़ जाता है तथा आगे निकला हुआ तब प्रतीत होता है  क्रिकेटर्स नामक रोग जो कि विटामिन डी की कमी से परिणाम स्वरुप होता है में शारीरिक लक्षणों में अतिरिक्त कुछ सब भागवत परिवर्तन भी देखे जा सकते हैं इस रोग का शिकार हुआ बालक स्वभाव से चिड़चिड़ा सा हो जाता है हर समय थका हुआ परेशान दुखी तथा ऑपरेशन सा रहता है बच्चे को शांत नींद नहीं आती तथा सोते वक्त शरीर बैठा हुआ साफ रहता है कभी-कभी बच्चा सोते-सोते चौक पड़ता है यार होने लगता है रोग अधिक बढ़ जाने पर बच्चों को सांस लेने में भी तकलीफ होती है यह स्थिति काफी खतरनाक हो जाती है   इस रोग के उपचार के लिए बच्चों के आहार में विटामिन डी युक्त भोज्य पदार्थों का अधिक समावेशन होना चाहिए तथा कैल्सियम वाले भोज्य पदार्थ भी दिए जाने चाहिए चिकित्सक के परावर्ष से विटामिन डी की अतिरिक्त मात्रा दी जाती है बच्चे को कुछ समय के लिए सूर्य के प्रकाश में भी रखना आवश्यक होता है सामान्य सुपाच्य एवं संतुलन आहार देना चाहिए धन्यवाद-
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kumarivanshika01232@gmail.com 03 Feb 2026 158 Views

स्कर्वी रोग क्या हैक्या है

स्कर्वी रोग क्या हैक्या है
डिस्कवरी भी एक अभाव जनित रोग है यह रोग बच्चों में भी होता है तथा वयस्कों में भी दोनों प्रकार के रोगों का विवरण निम्न वर्णित है-  बच्चों में स्कर्वी  रोग-  बच्चों में आहार में विटामिन सी की निरंतर कमी बनी रहने में इन्हें इस कवि नामक रोग हो जाता है जैसे-जैसे बच्चों में इस रोग का पर कौन बढ़ता है वैसे-वैसे ही रोग लक्षण स्पष्ट होने लगते हैं प्रारंभ में बच्चों की भूख घटने लगती है बच्चा बेचैन रहने लगता ह... Read More
डिस्कवरी भी एक अभाव जनित रोग है यह रोग बच्चों में भी होता है तथा वयस्कों में भी दोनों प्रकार के रोगों का विवरण निम्न वर्णित है-  बच्चों में स्कर्वी  रोग-  बच्चों में आहार में विटामिन सी की निरंतर कमी बनी रहने में इन्हें इस कवि नामक रोग हो जाता है जैसे-जैसे बच्चों में इस रोग का पर कौन बढ़ता है वैसे-वैसे ही रोग लक्षण स्पष्ट होने लगते हैं प्रारंभ में बच्चों की भूख घटने लगती है बच्चा बेचैन रहने लगता है तथा उसकी टांगों और टांगों में सूजन हो जाती है तथा दर्द रहता है स्वभाव में बच्चा चिड़चिड़ा सा रहने लगता है तथा धीरे-धीरे वह वजन भी करने लगता है रक्त की कमी होने लगती है अतः रोगी बच्चे का रंग पीला पड़ने लगता है कभी-कभी बच्चों को दस्त तथा वामन भी होने लगती है इस कवि रोग का प्रभाव धातु एवं मसूड़े पर भी पड़ता है मसूड़े सो जाते हैं तथा उसमें से रक्त भी निकलने लगता है इस कवि का बच्चों की हड्डियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है यदि डिस्कवरी का रोग अधिक पुराना हो जाए तथा बढ़ जाए तो बच्चों का शरीर हटा सा रहने लगता है सही समय पर उचित उपचार न होने की स्थिति में बच्चों की मृत्यु भी हो सकती है  वयस्कों में स्कर्वी रोग - ​​​​​​ बड़ों में भी यह रोग का कारण विटामिन सी की कमी ही है इस रोग के कारण प्रारंभ में व्यक्ति को कमजोरी महसूस होने लगती है तथा वह परेशान सा रहने लगता है इसका प्रभाव मसूड़े पर भी पड़ता है मसूड़े फर बुरे से होने लगते हैं तथा इनमें से रक्त बहने लगता है इसके साथ ही साथ दांत भी ढीले होने लगते हैं तथा गिरने भी लगते हैं इस रोग के कारण ही व्यक्ति के शरीर में विभिन्न उत्तकों से रक्त का स्त्राव भी होने लगता है मांसपेशियों में सूजन लगती है तथा जोड़ों में भी सूजन तथा दर्द होने लगता है यदि कहीं चोट लग जाए तो सामान्य से अधिक रक्त बहता है तथा रक्त का बहाना देर से रुकता है इस रोग के रोग के कारण व्यक्ति को सांस लेने में भी परेशानी होती है  उपचार-  इस रोग के उपचार के लिए विटामिन सी की अतिरिक्त मात्रा देनी होती है यदि किसी बड़े व्यक्ति को यह रोग हो तो प्रारंभ में प्रतिदिन सो मिलीग्राम एक को ब्रेक एसिड का इन ड्राइव मस्कुलर इंजेक्शन एक सप्ताह तक दिया जाता है बच्चों को केवल 50 मिलीग्राम का ही इंजेक्शन दिया जाना चाहिए इसके बाद लगभग एक माह तक बड़ों को 500 मिलीग्राम तथा बच्चों को 100 मिलीग्राम विटामिन सी मुंह में दिया जाना चाहिए इसके अतिरिक्त आहार में ताजे फल जैसे संतरा अमरूदम पपीता ना ना शादी तथा हरी सब्जियां देनी चाहिए धन्यवाद-
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kumarivanshika01232@gmail.com 03 Feb 2026 162 Views

एनीमिया रोग क्या है

एनीमिया रोग क्या है
 "मैं आज आपको एनीमिया के बारे में बताऊंगी"  यह रोग किस प्रकार होता है  एनीमिया रोग- साप्ताहिक अर्थ के अनुसार शरीर में सामान्य से कम रक्त होना ही एनीमिया है परंतु शरीर विज्ञान के स्पष्टीकरण के अनुसार रक्त में हीमोग्लोबिन का सामान्य से कम होना ही रखताल पता इस स्पष्टीकरण के अनुसार यदि व्यक्ति के रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा 14 मिलीग्राम प्रतिशो मिली रक्त से कम होती है तो व्यक्ति को रक्ताल पता का शि... Read More
 "मैं आज आपको एनीमिया के बारे में बताऊंगी"  यह रोग किस प्रकार होता है  एनीमिया रोग- साप्ताहिक अर्थ के अनुसार शरीर में सामान्य से कम रक्त होना ही एनीमिया है परंतु शरीर विज्ञान के स्पष्टीकरण के अनुसार रक्त में हीमोग्लोबिन का सामान्य से कम होना ही रखताल पता इस स्पष्टीकरण के अनुसार यदि व्यक्ति के रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा 14 मिलीग्राम प्रतिशो मिली रक्त से कम होती है तो व्यक्ति को रक्ताल पता का शिकार माना जाता है हिमोग्लोबिन रक्त के लाल कणों में पाया जाता है अतः यदि शरीर में लाल रक्त कण होते हैं तो हीमोग्लोबिन का स्तर भी निम्न हो जाता है एनीमिया की अवस्था में शरीर की कोशिका को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलती तथा व्यक्ति छेद होने लगता है एनीमिया की अवस्था में जो शारीरिक लक्षण प्रकट होते हैं उनमें से मुख्य है सर दर्द भूख की कमी अपच विश्वास में परेशानी त्वचा का पीला होना तथा हृदय की धड़कन का बढ़ जाना   सामान्य रूप से एनीमिया के दो प्रमुख कारण है   शरीर में लोह खनिज की कमी  तथा विटामिन बी 12 की कमी इस प्रकार यह रोग भी पोषक तत्वों की कमी के कारण होने वाला एक रोग है  धन्यवाद-
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kumarivanshika01232@gmail.com 03 Feb 2026 151 Views

हमारे जीवन में आने वाले कुछ दुर्घटनाएं

हमारे जीवन में आने वाले कुछ दुर्घटनाएं
" हमारे जीवन में आने वाले कुछ दुर्घटनाएं "  "कुछ दुर्घटनाएं निम्नलिखित प्रकार से है "  आंख में किसी चीज का गिर जाना-  अक्सर किसी कारण बस ढुल आदि के कारण आंख में गिर जाते हैं अतः यदि कोई वस्तु पलक पर गिर गई है तो कोई साफ मुलायम कपड़ा लेकर किनारे से थोड़ा सा भिगोकर आज को साफ करना चाहिए क्लास में पानी भरकर आंख खोलने चाहिए आंखों में गुलाब जल डालना चाहिए जिससे आपकी आंखें स्वच्छ हो जाए और कोई जलन ना हो ... Read More
" हमारे जीवन में आने वाले कुछ दुर्घटनाएं "  "कुछ दुर्घटनाएं निम्नलिखित प्रकार से है "  आंख में किसी चीज का गिर जाना-  अक्सर किसी कारण बस ढुल आदि के कारण आंख में गिर जाते हैं अतः यदि कोई वस्तु पलक पर गिर गई है तो कोई साफ मुलायम कपड़ा लेकर किनारे से थोड़ा सा भिगोकर आज को साफ करना चाहिए क्लास में पानी भरकर आंख खोलने चाहिए आंखों में गुलाब जल डालना चाहिए जिससे आपकी आंखें स्वच्छ हो जाए और कोई जलन ना हो   नाक में कुछ अटकना -  कभी-कभी छोटे बच्चे खेल-खेल में नाक में कोई वस्तु डाल लेते हैं इसे निकालने के लिए सबसे पहले दूसरी तरफ की नाक को दबाया रोगी को स्वास्थ्य मुंह से लेनी चाहिए ठीक है दिलाना चाहिए जिस वस्तु झटके से बाहर निकल आती है  कान में कुछ चला जाना-  कान में कट मच्छर या कुछ चले जाने पर सरसों के तेल को गर्म करके ठंडा कर दे तथा कान में डाल ले और धीरे से पलट ले से आसानी से गेट निकल जाएगा  तालुवे में कुछ अटक जाना-  पर यह छोटे बच्चे मुंह में किसी भी वस्तु को डाल लेते हैं जो उनके मुंह में अटक जाती है ऐसा होने पर बच्चों का सिर नीचे की ओर करके कर ली तथा पीठ पर थपथपाना चाहिए   मुछरा आना -  सर पर चोट लगने या किसी अत्यंत दुखद घटना से घटित होने से पहले व्यक्ति मुचिछत हो जाता है इसमें मस्तिष्क अपना कार्य बंद कर देता है सांस नदी और हृदय की धड़कन की गति कम हो जाती है  ऐसी अवस्था में व्यक्ति को खुले स्थान पर लेट कर उसके मुंह पर पानी के चीते थे और उसकी हवा करें उसके आसपास भीड़ एकत्रित नहीं होने देना चाहिए शरद ऋतु में उसे घर में पहुंचने चाहिए और आवश्यकता अनुसार कृत्रिम स्वास्थ्य देनी चाहिए उसे खाने पीने को कुछ नहीं देना चाहिए अधिक देर तक मुजरा ना जाने पर डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए  धन्यवाद:-    
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kumarivanshika01232@gmail.com 03 Feb 2026 157 Views

हम आज आपको मोच आना और हड्डी के टूटने के बारे में बताइए

हम आज आपको मोच आना और हड्डी के टूटने के बारे में बताइए
 हमारे जीवन में आने वाली घरेलू दुर्घटना -  कुछ इस प्रकार-  मोच आना -  पारी खेलने कूदने फिसलने आदि से हड्डियों की संध्या खुल जाती है उसे वह जाना कहते हैं मौत का स्थान सोचकर दर्द करता है मोच वाले अंग को सर्दी के मौसम में गुनगुना नमक मिले पानी में कुछ देर रखने से मोच काफी ठीक हो जाती है गर्मी के मौसम में ठंडा पानी आराम देता है मोच वाले अंग को मसाला नहीं चाहिए मोच आने के पश्चात रोगी को हल्दी मिलाकर गर... Read More
 हमारे जीवन में आने वाली घरेलू दुर्घटना -  कुछ इस प्रकार-  मोच आना -  पारी खेलने कूदने फिसलने आदि से हड्डियों की संध्या खुल जाती है उसे वह जाना कहते हैं मौत का स्थान सोचकर दर्द करता है मोच वाले अंग को सर्दी के मौसम में गुनगुना नमक मिले पानी में कुछ देर रखने से मोच काफी ठीक हो जाती है गर्मी के मौसम में ठंडा पानी आराम देता है मोच वाले अंग को मसाला नहीं चाहिए मोच आने के पश्चात रोगी को हल्दी मिलाकर गर्म दूध पिलाना चाहिए इसके रक्त संचार बढ़ता है और दर्द कम होता है  हड्डी का टूटना -  छठ अथवा किसी ऊंचे पेड़ से गिरने पर खेल कूद में गिर जाने पर लाठी आई के लगने पर व्यक्ति की कोई हड्डी टूट सकती है हड्डी टूटने का स्थान सूख जाता है और उसमें दिए दर्द होता है ऐसी अवस्था में यदि रक्तस्राव रोकना चाहिए उसे अंग को बिना हिलाए व्यक्ति को आराम से लेट देना चाहिए हो सके तो व्यक्ति जहां गिरा हो वहीं पर उसे प्राथमिक चिकित्सा देते समय रेप कार्ड का प्रयोग करना चाहिए हड्डी टूटे हुए अंग के नीचे हल्की लकड़ी या तकदी या के बच्चा रखकर उसे भले भांति बांध देना चाहिए शरद ऋतु में रोगी को गर्म रखने का प्रयास करना चाहिए  धन्यवाद-  
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kumarivanshika01232@gmail.com 03 Feb 2026 168 Views

विश या कोई जहरीली वस्तु खाना

विश या कोई जहरीली वस्तु खाना
जलन पैदा करने वाले विश्व जैसे - कार्बोलिक एसिड पेट में हलचल मचाने वाले विश्व जैसे - पर संख्या आधी नदी को प्रभावित करने वाले विश्व जैसे - क्लोरोफॉर्म धतूरा आदि और नींद पैदा करने वाले विश्व जैसे अफीम कंपोज आदि मुख्य खाए जाने वाली विश्व है विश्व खाए हुए व्यक्ति का उपचार शीघ्र होना चाहिए नेता उसकी मृत्यु हो सकती है सबसे पहले खाए हुए विश्व का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए जलन पैदा करने वाले विश्व से प्यास अ... Read More
जलन पैदा करने वाले विश्व जैसे - कार्बोलिक एसिड पेट में हलचल मचाने वाले विश्व जैसे - पर संख्या आधी नदी को प्रभावित करने वाले विश्व जैसे - क्लोरोफॉर्म धतूरा आदि और नींद पैदा करने वाले विश्व जैसे अफीम कंपोज आदि मुख्य खाए जाने वाली विश्व है विश्व खाए हुए व्यक्ति का उपचार शीघ्र होना चाहिए नेता उसकी मृत्यु हो सकती है सबसे पहले खाए हुए विश्व का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए जलन पैदा करने वाले विश्व से प्यास अधिक कोर्ट और मुंह पर पीले काले सफेद दाग और पेट में दर्द होने के लक्षण होते हैं परी इसमें एक चम्मच चुनाव अथवा खड़िया मिट्टी सांसों म जल में मिलाकर और काफी या दूध देना चाहिए  संख्या आदि खाने पर उल्टी सफेद दस्त आते हैं और मूत्र रुक जाता है हाथ पांव ऐड लगते हैं तो अच्छा पर फुंसी निकल आती है ऐसी अवस्था में अंडे की सफेदी पानी में मिलाकर देनी चाहिए तथा पानी खूब पीने को देना चाहिए पेट पर बर्फ की पट्टी रखनी चाहिए और हाथ पांव को गर्म रखने चाहिए रोगी को विश्व प्रतिरोधक दवा देनी चाहिए और डॉक्टर को तुरंत बुलाना चाहि  अफीम कंपो जाति के खाने पर सिर में दर्द थकावट और निंद्रा आती है चेहरा पीला पड़ जाता है तथा शरीर ठंडा होने लगता है स्वास्थ्य गति धीमी हो जाती है रोगी मूर्छित हो जाता है ऐसी दशा में रोगी को जगाने का प्रयत्न करना चाहिए तेज चाय या कॉफी पीने को देवास में कठिनाई होने पर क्रिसमस देना चाहिए और डॉक्टर को तुरंत बुला देना चाहिए धतूरा तंबाकू आदि के खाने पर रोगी को उल्टी आती है और पेट में दर्द होता है अधिक कमजोरी आ जाती है ऐसी अवस्था में नमक और जल से पेट को साफ करें और उलटी करवा तेज छाया कॉफी डे क्षण में कठिनाई होने पर कृत्रिम स्वास्थ्य  धन्यवाद:-  
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kumarivanshika01232@gmail.com 03 Feb 2026 144 Views

मैं आज आपको नकसीर फूटना और शहर की मक्खी का बर्र का काटना बताऊंगी

मैं आज आपको नकसीर फूटना और शहर की मक्खी का बर्र का काटना बताऊंगी
 "मैं आज आपको हमारे जीवन में आने वाली कुछ घरेलू दुर्घटनाओं के बारे में बताने जा रही"  हमारे जीवन में बहुत से दुर्घटनाएं आती है जो निम्नलिखित प्रकार से है   नकसीर फुटना किसे कहते हैं -  गर्मी चोट रत्नलिका के फटने या रक्त की जनता के कारण नाक से रक्त पहने को नकसीर पटना कहते हैं सेवावस्था में रोगी को तुरंत खुली ताजी हवा में गर्दन को पीछे झुककर सीधा कुर्सी आज चौकी पर बैठा देना चाहिए उसके वेस्टन को ढीली... Read More
 "मैं आज आपको हमारे जीवन में आने वाली कुछ घरेलू दुर्घटनाओं के बारे में बताने जा रही"  हमारे जीवन में बहुत से दुर्घटनाएं आती है जो निम्नलिखित प्रकार से है   नकसीर फुटना किसे कहते हैं -  गर्मी चोट रत्नलिका के फटने या रक्त की जनता के कारण नाक से रक्त पहने को नकसीर पटना कहते हैं सेवावस्था में रोगी को तुरंत खुली ताजी हवा में गर्दन को पीछे झुककर सीधा कुर्सी आज चौकी पर बैठा देना चाहिए उसके वेस्टन को ढीली करके उसे मुंह द्वारा सांस लेने को कहा जाए तत्पश्चात नाक से ऊपर तथा गर्दन पर बर्फ की थैली से सिकाई करनी चाहिए उसके पैरों को गर्म पानी में रखना चाहिए और चूसने के लिए बर्फ देनी चाहिए रोगी को बिना हिले डोले उसकी नाक को अंगूठे और उंगली के बीच पड़कर लगभग 5 मिनट तक दबाना चाहिए नकसीर के बाद न होने पर कुछ और देर नाक दबाए या नाक के अंदर भी भर दे   रोगी को धैर्य संतान देते रहना चाहिए और नाक साफ नहीं करने देना चाहिए जब प्रयासों के सफल होने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए   शहर की मुखिया बर्र का काटना-  शहर की मक्खी अथवा बदल के काटने पर उसे स्थान पर बहुत बड़ा होती है जलन होने लगती है कटे हुए स्थान के चारों ओर सूजन आ जाती है कभी-कभी कटे हुए स्थान पर धक रह जाता है शहर की मक्खी अथवा बदल के काटने से उसके डाक को पी या चाबी की सहायता से बाहर निकाल देना चाहिए कटे हुए स्थान पर कोई बिना जग लगा साफ लोहा तुरंत रगड़ना चाहिए और स्पीड छोड़ना अथवा को रिस्टिक सोडा मारना चाहिए रोगी को पानी को पिलाना चाहिए गांव के ऊपर तुरंत एक पट्टी कसकर बांध देने से विश्व को फैलने से रोका जा सकता है धन्यवाद-  
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kumarivanshika01232@gmail.com 03 Feb 2026 157 Views

आएय जाने दिव्यंगता क्या है

आएय जाने दिव्यंगता क्या है
अपने अपने घर गांव तथा समाज में ऐसे लोगों को देखा होगा चोला टीका सहारा लेकर या दूसरों का हाथ पकड़ कर चलते हैं काम या बिल्कुल नहीं सुनते तथा मुंह से बोल नहीं पाते पैरों से चल नहीं पाते हैं तथा हाथों से काम नहीं कर पाते हैं ऐसे लोगों जिन्हें सुनने बोलने देखने तथा चलने में कठिनाई महसूस होती है उन्हें दिव्यांग कहा जाता है दिव्यांग या क्षमता की सामान्य कर श्रेणी होती है  1.सरवन संबंधी अक्षमता   2.दृष्टि... Read More
अपने अपने घर गांव तथा समाज में ऐसे लोगों को देखा होगा चोला टीका सहारा लेकर या दूसरों का हाथ पकड़ कर चलते हैं काम या बिल्कुल नहीं सुनते तथा मुंह से बोल नहीं पाते पैरों से चल नहीं पाते हैं तथा हाथों से काम नहीं कर पाते हैं ऐसे लोगों जिन्हें सुनने बोलने देखने तथा चलने में कठिनाई महसूस होती है उन्हें दिव्यांग कहा जाता है दिव्यांग या क्षमता की सामान्य कर श्रेणी होती है  1.सरवन संबंधी अक्षमता   2.दृष्टि संबंधी अक्षमता  3. अस्थि संबंधी अक्षमता   4.मानसिक अक्षमता  लेकिन क्या आप बता सकते हैं कि शारीरिक है अक्षमताएं लोगों में कैसे आ जाती है वास्तव में यह शारीरिक स अक्षमताएं चाहे दृष्टि संबंध हो या मानसिक या अस्थि संबंधी हो हमें मुख्य दो तरह से प्राप्त होती है  1.जन्मजात   2.जन्म के अपरांत   जन्मजात दिव्यांगता -  जन्मजात दिव्यंका का आशा ए गर्भावस्था शिशु में शारीरिक दोष आ जाना है आपने सुनाया देखा होगा कि कुछ बच्चे जन्म अंत लगभग मंद बुढ़िया अन्य शारीरिक दोष के साथ जन्म लेते हैं ऐसे बच्चे जन्मजात दिव्यांग किस श्रेणी में आते हैं  कारण है बचाव -  जन्मजात दिव्या गता के मुख्य कई कारण होते हैं   कभी-कभी दिव्यंका अनुवांशिक कर्म से होती है परंतु ऐसा काम ही होता है  अभी इसके कारण है ऐसी स्थिति में संतुलित आहार तथा जरूरी विटामिन युक्त भोजन तथा युक्त खाद पदार्थ द्वारा कम वजन कमजोर दृष्टि तथा लखवायुक्त शिशु के जन्म की संभावना को काम किया जा सकता है गर्भवती माता को ऐसी स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए तथा जरूरी सावधानी रखनी चाहिए  इसे भी जाने-  जिन बच्चों को हम पहले दीवान कहते थे उन्हें अब विशेष आवश्यकता वाले बच्चे कहते हैं यह बच्चे अपनी उम्र के अन्य बच्चों के समान ही है केवल उनकी आवश्यकता है की दूसरे बच्चों से अलग है सभी बच्चों को एक समान शिक्षा का बुनियादी अधिकार है  इन बच्चों को हमारी सहानुभूति या दया की कोई आवश्यकता नहीं है इन बच्चों को केवल हमारे सहयोग और प्रेम की आवश्यकता है  जन्म के बाद दिव्यांगता -  जन्म के बाद दिव्यंगता की चार श्रेणियां है   दृष्टि दोष (आंखों से कम या बिल्कुल ना दिखाई देना)   श्रवण दोष (कानों से सुने ना पढ़ना )  मुख बधिर (ऐसे लोग जो बोल नहीं पाते में कार्य सुन भी नहीं पाते )  शारीरिक रूप से आश्रम (ऐसे लोग जो पावे से चलने तथा हाथ से कार्य करने में असमर्थ है या कठिनाई महसूस करते हैं) ​​​​​ अति आवश्यक-  हमारे बीच कुछ ऐसे बच्चे भी होते हैं जिनका मानसिक विकास उनकी उम्र के हिसाब से कम होता है ऐसे बच्चों में भी सीखने समझने और कुछ करने की लगन होती है हमें इन बच्चों के प्रति कोई पूर्वक रह नहीं रखना चाहिए हमें इसे इसमें और सहयोग करना चाहिए   सगमय भारत अभियान-  दिव्यांग जनों की प्रकृति एवं विकास हेतु भारत सरकार द्वारा चलाई गई योजना है जिनके द्वारा प्रत्येक से परिवेश को दिव्यांगजनों के अनुकूलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है  धन्यवाद  
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kumarivanshika01232@gmail.com 03 Feb 2026 199 Views

इंनिश फ्री का झील द्वीप

इंनिश फ्री का झील द्वीप
मैं उठूंगा और अब चला जाऊंगा और इनिश फ्री को चला जाऊंगा और वहां में मिट्टी और टहनियां ट्रैक्टरों की एक छोटी झोपड़ी बनाऊंगा मैं वहां जो से की पंक्तियां लगाऊंगा और शहद के लिए एक छत्ता होगा और मधुमक्खियां की गुर्जर से युक्त खुले स्थान में अकेला रहूंगा  वहां में शांति का अनुभव करूंगा क्योंकि वहां सुबह के कारण से धीरे-धीरे कीर्ति शांति आती है जहां चीकू कहते हैं वहां आधी रात को मंत्र प्रकाश होता है और दो... Read More
मैं उठूंगा और अब चला जाऊंगा और इनिश फ्री को चला जाऊंगा और वहां में मिट्टी और टहनियां ट्रैक्टरों की एक छोटी झोपड़ी बनाऊंगा मैं वहां जो से की पंक्तियां लगाऊंगा और शहद के लिए एक छत्ता होगा और मधुमक्खियां की गुर्जर से युक्त खुले स्थान में अकेला रहूंगा  वहां में शांति का अनुभव करूंगा क्योंकि वहां सुबह के कारण से धीरे-धीरे कीर्ति शांति आती है जहां चीकू कहते हैं वहां आधी रात को मंत्र प्रकाश होता है और दोपहर को गुलाबी दीप्ति होती है और शामली नेट पक्षी के पंखों से भरी होती है अर्थात संध्या के आकाश में वाहन लेने पक्षी उड़ते हैं  मैं उठूंगा और अब चला जाऊंगा क्योंकि हमेशा रात दिन मुझे झील के किनारे धीमी आवाज में पानी की जब जब आहट सुनाई देती है जबकि मैं सड़क के मार्ग पर यह सड़क की पूरी पटरी पर खड़ा होता हूं मैं इस ध्वनि को मिलती है की गहराई से सुनता हूं  धन्यवाद-
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kumarivanshika01232@gmail.com 02 Feb 2026 215 Views