पाचन तंत्र जो अंग तथा ग्रंथियां सम्मिलित रूप से भोजन को शरीर के उपयोग में आने योग्य बनाती है उसको पाचन तंत्र कहते हैं भोजन से प्राप्त प्रोटीन हमारे शरीर की रोगों से रक्षा करता है रक्त में कुछ एंटीबायोटिक होते हैं जो प्रोटीन से बनी होती है इन एंटीबायोटिक का मुख्य कार्य रोगों के जीवाणु से लड़ना और रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाना होता है इस प्रकार प्रोटीन हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ात...
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पाचन तंत्र जो अंग तथा ग्रंथियां सम्मिलित रूप से भोजन को शरीर के उपयोग में आने योग्य बनाती है उसको पाचन तंत्र कहते हैं भोजन से प्राप्त प्रोटीन हमारे शरीर की रोगों से रक्षा करता है रक्त में कुछ एंटीबायोटिक होते हैं जो प्रोटीन से बनी होती है इन एंटीबायोटिक का मुख्य कार्य रोगों के जीवाणु से लड़ना और रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाना होता है इस प्रकार प्रोटीन हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है
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kumarivanshika01232@gmail.com
04 Mar 2026
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भोजन का पाचन:- जब कोई पुरानी भजन जैसी रोटी दाल सब्जी चावल मां ठंड अधिक ग्रहण करता है तब उसे इन भोज्य पदार्थों से पौष्टिक तत्व जैसे प्रोटीन वसा कार्बज खनिज लवण विटामिन प्राप्त होती है इन पोषक तत्वों में से खनिज लवण वह विटामिन जो रक्त द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं परंतु से तत्व रक्त में आसानी से अवशोषित नहीं हो पाते हैं क्योंकि इनमें कुछ जटिल यौगिक उपस्थित रहते हैं जिनका छोटे-छोटे नो में विभाजित ह...
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भोजन का पाचन:- जब कोई पुरानी भजन जैसी रोटी दाल सब्जी चावल मां ठंड अधिक ग्रहण करता है तब उसे इन भोज्य पदार्थों से पौष्टिक तत्व जैसे प्रोटीन वसा कार्बज खनिज लवण विटामिन प्राप्त होती है इन पोषक तत्वों में से खनिज लवण वह विटामिन जो रक्त द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं परंतु से तत्व रक्त में आसानी से अवशोषित नहीं हो पाते हैं क्योंकि इनमें कुछ जटिल यौगिक उपस्थित रहते हैं जिनका छोटे-छोटे नो में विभाजित होना आवश्यक होता है तभी यह रक्त द्वारा शोषण किए जाते हैं पाचन क्रिया का पदार्थ में पाचक रसों की उपस्थिति में रासायनिक वह भौतिक परिवर्तन करके प्रोटीन वसा व कार्बज को रक्त द्वारा अवशोषित करने योग्य सरल पोषक पदार्थ में परिवर्तित करती है यह सरल पोषक पदार्थ रक्त द्वारा अवशोषित होकर ऊतक में पहुंच जाते हैं और अपशिष्ट पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाते हैं अतः ठोस आहार को पाचक रसों या एंजाइमों की सहायता से रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा विलय और अवशोषण योग्य बदलने की क्रिया को पाचन कहते हैं
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kumarivanshika01232@gmail.com
03 Mar 2026
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भोजन के सामाजिक कार्य:- विशेष अवसर सरोज शादी जन्मदिन आदि पर दिए जाने वाले भोजन के द्वारा ही सामाजिकता का विकास होता है कोई भी खुशी का अवसर हो तो विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाने की बात सबसे पहले चलती है स्वादिष्ट और उच्च स्तर के भजन व्यंजनों के बिना तो किसी भी खुशी के अवसर का आनंद उठाया ही नहीं जा सकता है तो भोज्य व्यंजनों से हमारे सामाजिक एवं राष्ट्रीयता प्रतिष्ठा का परिचय मिलता है इसलिए अतिथि के...
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भोजन के सामाजिक कार्य:- विशेष अवसर सरोज शादी जन्मदिन आदि पर दिए जाने वाले भोजन के द्वारा ही सामाजिकता का विकास होता है कोई भी खुशी का अवसर हो तो विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाने की बात सबसे पहले चलती है स्वादिष्ट और उच्च स्तर के भजन व्यंजनों के बिना तो किसी भी खुशी के अवसर का आनंद उठाया ही नहीं जा सकता है तो भोज्य व्यंजनों से हमारे सामाजिक एवं राष्ट्रीयता प्रतिष्ठा का परिचय मिलता है इसलिए अतिथि के आने पर हम विभिन्न प्रकार के एवं स्वादिष्ट व्यंजन बनाते हैं भोजन विभिन्न जातियों एवं समुदाय के लोगों को आपस में मिलने और सामाजिक सुंदरिया बढ़ाने का भी कार्य करता है धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
03 Mar 2026
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शरीर के लिए भोजन की उपयोगिता:- हमारा शरीर एक मशीन के समान है जिस प्रकार मशीन को चलाने से उसके पुर्जे घिसते हैं उसे प्रकार शरीर रूपी मशीन में भी टूट-फूट होती रहती है मशीन में जिस प्रकार पुराने पुर्जे के स्थान पर नया पुर्जा लगाना पड़ता है उसी प्रकार शरीर में भी कोशिकाओं के नष्ट हो जाने पर दूसरी नवीन कोशिकाएं उनका स्थान ग्रहण कर लेते हैं जिस प्रकार तेल के अभाव में मशीन नहीं चल सकती है उसी प्रकार भो...
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शरीर के लिए भोजन की उपयोगिता:- हमारा शरीर एक मशीन के समान है जिस प्रकार मशीन को चलाने से उसके पुर्जे घिसते हैं उसे प्रकार शरीर रूपी मशीन में भी टूट-फूट होती रहती है मशीन में जिस प्रकार पुराने पुर्जे के स्थान पर नया पुर्जा लगाना पड़ता है उसी प्रकार शरीर में भी कोशिकाओं के नष्ट हो जाने पर दूसरी नवीन कोशिकाएं उनका स्थान ग्रहण कर लेते हैं जिस प्रकार तेल के अभाव में मशीन नहीं चल सकती है उसी प्रकार भोजन के अभाव में शेयर नहीं चल सकता है धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
03 Mar 2026
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prastavana:- Hamara Sharir ki antriyan engine ke Saman Hai Jiske vibhinn bhagyantra ke cal punjon ke Saman Har Samay kriyashil rahte hain iski kriyashilta ko banae rakhne ke liye indhan ki avashyakta Hoti Hai Jise Ham bhojan ke roop Mein prapt Karte Hain Shamshad jivit prani niyamit Roop se Jivan Bhar Aahar grahan Karte Hain manushya ke atirikt Karya Anya sabhi praniyon ka Aahar prakrutik Roop...
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prastavana:- Hamara Sharir ki antriyan engine ke Saman Hai Jiske vibhinn bhagyantra ke cal punjon ke Saman Har Samay kriyashil rahte hain iski kriyashilta ko banae rakhne ke liye indhan ki avashyakta Hoti Hai Jise Ham bhojan ke roop Mein prapt Karte Hain Shamshad jivit prani niyamit Roop se Jivan Bhar Aahar grahan Karte Hain manushya ke atirikt Karya Anya sabhi praniyon ka Aahar prakrutik Roop se nishchit AVN nirdharit hai manushya Ke Aahar Mein atyadhik vividhta Pai Jaati Hai manushya Ek baudhik prani hai tatha vah apne sharirik Vikas AVN Swasthya ke Prati purn Roop se Jagruk Hai manushya ne apne adhyayan ke vistar se jaan liya hai ki Hamare liye Kisi Ek Ya Kuchh khak padarthon ko grahan karna anivarya Nahin Hai sharirik Swasthya AVN Vikas ke liye Kuchh Poshak Tatv ki avashyakta Hoti Hai yah Poshak Tatv Hai protein carbohydrate Varsha vitamin khanij tatha Jal inhen Aahar ke avashyak Poshak Tatv Kaha Jata Hai ine Poshak tatvon ko Vividh Prakar ke khak padarthon se prapt kiya Ja sakta hai atah manushya Ne Anek Prakar ke padarthon ko Apne Aahar Mein sammilit Kar Liya manushya ne apne adhyayan se yah Vigyan kar liya hai ki Khad padarthon ko Keval grahan karna hi Kafi Nahin Hai grahan kiye Gaye padarthon ka Sharir Mein pachan Hona bhi avashyak hai Hamare Sharir Mein Ek alag Tantra Hai Jise pachan Tantra Kaha jata hai tatha bhojan ke Poshak Tatv ko avshoshit kar lete hain isase hi Sharir ka Vikas AVN poshan Hota Hai thank you
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kumarivanshika01232@gmail.com
03 Mar 2026
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जल की कमी से हानियां :- उत्सर्जित पदार्थों का बाहर निष्कासना नहीं हो पता गुर्दे संबंधित रोग हो जाते हैं रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है शारीरिक वृद्धि पर प्रभाव पड़ता है चेहरा निस्तेज लगता है पाचन ठीक प्रकार नहीं हो पता शरीर का भार कम होने लगता है अतः व्यक्ति को प्रतिदिन तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए तथा जल पीना चाहिए धन्यवाद
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जल की कमी से हानियां :- उत्सर्जित पदार्थों का बाहर निष्कासना नहीं हो पता गुर्दे संबंधित रोग हो जाते हैं रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है शारीरिक वृद्धि पर प्रभाव पड़ता है चेहरा निस्तेज लगता है पाचन ठीक प्रकार नहीं हो पता शरीर का भार कम होने लगता है अतः व्यक्ति को प्रतिदिन तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए तथा जल पीना चाहिए धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
02 Mar 2026
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जल के कार्य क्या है:_ शरीर के विसर्जन योग्य पदार्थ को शरीर से बाहर निकलने में सहायक होता है चेहरे में चमक लाता है शरीर के ताप को नियंत्रित रखता है विभिन्न प्रकार के पाचक रसों का निर्माण करता है रक्त को तरलता प्रदान करता है धन्यवाद
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जल के कार्य क्या है:_ शरीर के विसर्जन योग्य पदार्थ को शरीर से बाहर निकलने में सहायक होता है चेहरे में चमक लाता है शरीर के ताप को नियंत्रित रखता है विभिन्न प्रकार के पाचक रसों का निर्माण करता है रक्त को तरलता प्रदान करता है धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
02 Mar 2026
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वाटर :- पेपरदार तुम्हें जल का मुख्य स्थान है शरीर का लगभग एक अध्याय भाग जल की होती है तो शरीर को भोजन के अपेक्षा जल की अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है यही कारण है कि भोजन के बिना मनुष्य 30 या 40 दिन तक जीवित रह सकता है परंतु जल के बिना दो या तीन दिन तक जीवित रहना भी कठिन हो जाता है की आवश्यकता मुख्य रूप से जल की पीकर पूर्ण की जाती है तथा कुछ जल हमें पूज्य पदार्थ तथा पर पदार्थ द्वारा भी प्राप्त ह...
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वाटर :- पेपरदार तुम्हें जल का मुख्य स्थान है शरीर का लगभग एक अध्याय भाग जल की होती है तो शरीर को भोजन के अपेक्षा जल की अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है यही कारण है कि भोजन के बिना मनुष्य 30 या 40 दिन तक जीवित रह सकता है परंतु जल के बिना दो या तीन दिन तक जीवित रहना भी कठिन हो जाता है की आवश्यकता मुख्य रूप से जल की पीकर पूर्ण की जाती है तथा कुछ जल हमें पूज्य पदार्थ तथा पर पदार्थ द्वारा भी प्राप्त होता है जल की आवश्यक मात्रा:- व्यक्ति को केवल पीने के लिए ही नहीं बल्कि अनेक देने कार्यों के लिए भी जल की आवश्यकता होती है जैसे नहाने धोने सफाई भोजन पकाने आदि के लिए परंतु पीने के लिए प्रतिदिन एक व्यक्ति को लगभग चार लीटर जल पानी चाहिए वैसे यह अपनी रुचि मौसम आदि के अनुसार काम या अधिक भी हो सकता है किंतु अत्यधिक जल पीना तथा भोजन के बीच-बीच में अधिक जल पीना हानिकारक होता है इसमें भोजन अधिक पतला हो जाता है तथा पाचन में कठिनाई होती है हां प्यास लगने पर खूब जल पीना चाहिए तथा पीते समय स्वास्थ्य की दृष्टि से जल की शुद्धता का ध्यान रखना भी नियंत्रांता आवश्यक है धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
02 Mar 2026
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प्राप्ति के स्रोत प्रोटीन के अतिरिक्त मांस मछली अंडे तथा दूध से भी गंधक की प्राप्ति होती रहती है अनाज डाले मूली पालक आदि भी गंधक प्राप्ति के स्रोत है उपयोगिता एवं महत्व गंधक एक उपयोगी खनिज है या प्रोटीन के पाचन एवं अवशोषण में सहायक है इसके अतिरिक्त बलों तथा नाखूनों की उचित वृद्धि और स्वास्थ्य के लिए भी यह उपयोगी है शरीर में होने वाली ऑक्सीकरण की प्रक्रिया में भी इसका योगदान होता है
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प्राप्ति के स्रोत प्रोटीन के अतिरिक्त मांस मछली अंडे तथा दूध से भी गंधक की प्राप्ति होती रहती है अनाज डाले मूली पालक आदि भी गंधक प्राप्ति के स्रोत है उपयोगिता एवं महत्व गंधक एक उपयोगी खनिज है या प्रोटीन के पाचन एवं अवशोषण में सहायक है इसके अतिरिक्त बलों तथा नाखूनों की उचित वृद्धि और स्वास्थ्य के लिए भी यह उपयोगी है शरीर में होने वाली ऑक्सीकरण की प्रक्रिया में भी इसका योगदान होता है
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kumarivanshika01232@gmail.com
01 Mar 2026
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गंधक क्या है शरीर के लिए अल्प मात्रा में आवश्यक खनिजों में गंधक भी एक है हमारे शरीर में गंधक की समानता कमी नहीं होती है वास्तव में प्रोटीन के एक आवश्यक के रूप में हमारे शरीर में पहुंचता रहता है यदि हमारे आहार में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा हो तो शरीर में गंधक की कमी का प्रश्न ही नहीं उठाता प्राप्ति के स्रोत प्रोटीन के अतिरिक्त मांस मछली अंडे तथा दूध से भी गंधक की प्राप्ति होती रहती है अनाज दा...
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गंधक क्या है शरीर के लिए अल्प मात्रा में आवश्यक खनिजों में गंधक भी एक है हमारे शरीर में गंधक की समानता कमी नहीं होती है वास्तव में प्रोटीन के एक आवश्यक के रूप में हमारे शरीर में पहुंचता रहता है यदि हमारे आहार में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा हो तो शरीर में गंधक की कमी का प्रश्न ही नहीं उठाता प्राप्ति के स्रोत प्रोटीन के अतिरिक्त मांस मछली अंडे तथा दूध से भी गंधक की प्राप्ति होती रहती है अनाज दालें मूली पालक आदि भी गंधक प्राप्ति के स्रोत है उपयोगिता एवं महत्व गंधक एक उपयोगी खनिज है यह प्रोटीन के पाचन एवं अवशोषण में सहायक है इसके अतिरिक्त बलों तथा नाखूनों की उचित वृद्धि एवं स्वास्थ्य के लिए भी यह उपयोगी है शरीर में होने वाली ऑक्सीकरण की प्रक्रिया में भी इसका योगदान है कमी के प्रभाव यदि किसी कारण में शरीर में गंधक की कमी हो जाए तो इसका प्रतिकूल प्रभाव बलों तथा एवं नाखूनों के अतिरिक्त प्रोटीन के अवशोषण पर भी पड़ता है धन्यवाद
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kumarivanshika01232@gmail.com
28 Feb 2026
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