दूरी (dispanc) किसी गतिमान वस्तु द्वारा किसी समय में तय की गई पथ की लंबाई को उसे वस्तु द्वारा चली गई दूरी कहते हैं। दूरी एक अदिश राशि है। दूरी का मात्रक SI प्रणाली में मीटर होता है। दूरी सदैव धनात्मक होती है। यह वस्तु के पद की आकृति पर निर्भर करती है। इसका मन विस्थापन के परिणाम के बराबर अथवा उससे बड़ा होता है। विस्थापन(Displacement) वास्तु के अंतिम स्थिति तथा प्रारंभिक स्थिति के बीच क...
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दूरी (dispanc) किसी गतिमान वस्तु द्वारा किसी समय में तय की गई पथ की लंबाई को उसे वस्तु द्वारा चली गई दूरी कहते हैं। दूरी एक अदिश राशि है। दूरी का मात्रक SI प्रणाली में मीटर होता है। दूरी सदैव धनात्मक होती है। यह वस्तु के पद की आकृति पर निर्भर करती है। इसका मन विस्थापन के परिणाम के बराबर अथवा उससे बड़ा होता है। विस्थापन(Displacement) वास्तु के अंतिम स्थिति तथा प्रारंभिक स्थिति के बीच की न्यूनतम दूरी को विस्थापन कहते हैं । विस्थापन एक सदिश राशि हैं। इसमें परिणाम और दिशा दोनों होते हैं। विस्थापन का मात्रक SI प्रणाली में मीटर होता है।
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sonusaini@gamil.com
06 Jan 2026
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गति (Motion) किसी वस्तु की स्थिति किसी स्थिर बिंदु की सापेक्ष समय के साथ-साथ परिवर्तन हो तब वह गति की अवस्था में कहलाती है तथा यह स्थिर बिंदु मूल बिंदु या निर्देश बिंदु कहलाती हैं। गति के प्रकार (1) सरल रेखीय गति (Rectilinear Motion) जब कोई कण एक सरल रेखा में गतिमान होता हैं तो उनकी गति सरल रेखा गति कहलाती है और जब एक वस्तु एक सीधी रेखा मे गतिमान होती है तो उसकी...
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गति (Motion) किसी वस्तु की स्थिति किसी स्थिर बिंदु की सापेक्ष समय के साथ-साथ परिवर्तन हो तब वह गति की अवस्था में कहलाती है तथा यह स्थिर बिंदु मूल बिंदु या निर्देश बिंदु कहलाती हैं। गति के प्रकार (1) सरल रेखीय गति (Rectilinear Motion) जब कोई कण एक सरल रेखा में गतिमान होता हैं तो उनकी गति सरल रेखा गति कहलाती है और जब एक वस्तु एक सीधी रेखा मे गतिमान होती है तो उसकी गति स्थानांतरित गति कहलाती है। उदाहरण सीधे चलती हुई ट्रेन की गति । (2) वृत्तीय गति(Cirular Motion) जब कोई कण किसी वृत्ताकार मार्क पर गति करता है तो उसकी गति वृत्तीय गति कहलाती हैं। उदाहरण सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की गति। (3) आसमान में गति (Non-uniform motion) जब कोई वस्तु समय अंतराल में आसमान में दरी तय करती है तो उसे आसमान गति कहते हैं। उदाहरण एक मक्खी का उड़ना। (4) दोलन गति तथा कंपन गति (Virbra ting motion) जब कोई वस्तु किसी निश्चित बिंदु के इधर-उधर गति करती है। तो उसकी गति कंपन गति या दोलन गति कहलाती है। उदाहरण झूला झूलती हुई लड़की। (5) प्रक्षेप्य गति (Praje ctic motion) जब कोई वस्तु गरुत्वाकर्षण बल के अधीन गति करती है तो उसे गति को प्रक्षेप्य गति कहलाती हैं। उदाहरण छत से फेंकी गई गेंद की गति , टॉप से छट्टी गले की गति। (6) एक समान वृत्तीय गति जब कोई कम एक समान चार से वृत्तीय पथ पर गति करता है। तो कण की इस गति को एक समान वृत्तीय गति कहते हैं। उदाहरण घड़ी की सीई की नोक की गति।
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sonusaini@gamil.com
06 Jan 2026
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एपीथीलियमी ऊतक जंतु के शरीर को ढकने या बाहा रक्षा प्रदान करने वाले ऊतक एपीथीलियमी ऊतक है।एपीथीलियमी शरीर के अंदर स्थिर बहुत से अंगों और गुहिकाओ को ढखते है। यह भिन्न-भिन्न प्रकार के शारीरिक तंत्र को एक-दूसरे से अलग करने के लिए अवरोध का निर्माण करते हैं। त्वचा, मुंह ,आहारनलिया, रक्तवहनी नली का अस्तर, फेफड़ों की फूपिका नली आदि सभी एपीथिलियमी ऊतक से बने होते हैं। एपीथिलियमी...
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एपीथीलियमी ऊतक जंतु के शरीर को ढकने या बाहा रक्षा प्रदान करने वाले ऊतक एपीथीलियमी ऊतक है।एपीथीलियमी शरीर के अंदर स्थिर बहुत से अंगों और गुहिकाओ को ढखते है। यह भिन्न-भिन्न प्रकार के शारीरिक तंत्र को एक-दूसरे से अलग करने के लिए अवरोध का निर्माण करते हैं। त्वचा, मुंह ,आहारनलिया, रक्तवहनी नली का अस्तर, फेफड़ों की फूपिका नली आदि सभी एपीथिलियमी ऊतक से बने होते हैं। एपीथिलियमी ऊतक की कोशिकाएं एक दूसरे से सटी होती है। और यह एक अनवरत परत का निर्माण करती है। इन परतों के बीच चिपकाने वाले पदार्थ काम होते हैं। जो भी पदार्थ शरीर में प्रवेश करता है। या बाहर निकलता हैं, वह एपीथिलियमी कि किसी परत से होकर गुजरता हैं।
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sonusaini@gamil.com
03 Jan 2026
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जटिल ऊतक अब तक हम एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने भिन्न-भिन्न प्रकार के ऊतकों पर विचार कर चुके हैं जो की एक ही तरह के दिखाई देते हैं। ऐसे ऊतकों को साधारण स्थायी ऊतक कहते हैं। अन्य प्रकार के स्थायी ऊतक कहते हैं। जटिल ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर एक इकाई की तरह कार्य करते हैं। जाइलम और फलोएम इसी प्रकार के जटिल ऊतकों के उदाहरण है।
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जटिल ऊतक अब तक हम एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने भिन्न-भिन्न प्रकार के ऊतकों पर विचार कर चुके हैं जो की एक ही तरह के दिखाई देते हैं। ऐसे ऊतकों को साधारण स्थायी ऊतक कहते हैं। अन्य प्रकार के स्थायी ऊतक कहते हैं। जटिल ऊतक एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर एक इकाई की तरह कार्य करते हैं। जाइलम और फलोएम इसी प्रकार के जटिल ऊतकों के उदाहरण है।
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sonusaini@gamil.com
02 Jan 2026
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स्थायी ऊतक विभज्योतक द्वारा बनी कोशिकाओं का क्या होता हैं। ये यह विशिष्ट कार्य करती हैं और विभाजित होने की शक्ति को खो देती है। जिसके फल स्वरुप वे स्थायी ऊतक का निर्माण करती है। सरल स्थायी ऊतक कोशिकाओं की कुछ परतें होती हैं । जिसे सरल स्थायी ऊतक कहते हैं। पैरेंकाइमा सबसे अधिक पाया जाने वाला सरल स्थायी ऊतक है। पतली कोशिकाओं भित्ति वाली सरल कोशिकाओं का बना होता है। ये जीवित कोशिकाएं हैं। यह प्रायः...
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स्थायी ऊतक विभज्योतक द्वारा बनी कोशिकाओं का क्या होता हैं। ये यह विशिष्ट कार्य करती हैं और विभाजित होने की शक्ति को खो देती है। जिसके फल स्वरुप वे स्थायी ऊतक का निर्माण करती है। सरल स्थायी ऊतक कोशिकाओं की कुछ परतें होती हैं । जिसे सरल स्थायी ऊतक कहते हैं। पैरेंकाइमा सबसे अधिक पाया जाने वाला सरल स्थायी ऊतक है। पतली कोशिकाओं भित्ति वाली सरल कोशिकाओं का बना होता है। ये जीवित कोशिकाएं हैं। यह प्रायः बंधन मुक्त होती हैं। तथा इस प्रकार के उत्तक की कोशिकाओं के मध्य काफी रिक्त स्थान पाया जाता है।
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sonusaini@gamil.com
29 Dec 2025
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पादप ऊतक पौधों में वृद्धि कुछ निश्चित क्षेत्र में ही होती है। ऐसा विभाजित ऊतकों के उन भागों में पाए जाने के कारण होता हैं। ऐसा ऊतकों को विभाज्योतक(Meristematic Tissue) भी कहा जाता हैं। ये विभज्योतक किस में स्थित है। विभज्योतक की उपस्थिति वाले क्षेत्रों के आधार पर इन्हें शीर्षस्थ के बियम अंतर्विष्ट भागो में वर्गीकृत किया जाता हैं। विभज्योतक के द्वारा तैयार नई कोशिका प्रारम्भ में विभज्योतक की तरह...
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पादप ऊतक पौधों में वृद्धि कुछ निश्चित क्षेत्र में ही होती है। ऐसा विभाजित ऊतकों के उन भागों में पाए जाने के कारण होता हैं। ऐसा ऊतकों को विभाज्योतक(Meristematic Tissue) भी कहा जाता हैं। ये विभज्योतक किस में स्थित है। विभज्योतक की उपस्थिति वाले क्षेत्रों के आधार पर इन्हें शीर्षस्थ के बियम अंतर्विष्ट भागो में वर्गीकृत किया जाता हैं। विभज्योतक के द्वारा तैयार नई कोशिका प्रारम्भ में विभज्योतक की तरह होती हैं।लेकिन जैसे ही ये बढ़ती और परिपक्व होती हैं। इनकी गुणों में धीरे-धीरे परिवर्तन होता हैं और ये दूसरे ऊतकों के घटकों के रूप में विभाजित हो जाती हैं।
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sonusaini@gamil.com
28 Dec 2025
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AI ऐप (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐप ) एक ऐसा सॉफ्टवेयर है। जो मनवीय बुद्धि वाले कम जैसे सीखना,समझना,समस्या हल करना,और निर्णय लेना,करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमान (AI) तकनीक का इस्तेमाल करता है। जिस काम करना आसान, तेज और ज्यादा सटीक हो जाते हैं, जैसे Chatgpt, Google Gemini यह फोटो एडिटिंग ऐप्स जो आपके लिए तस्वीर बनाते हैं। AI अप क्या करते हैं। डेटा से सीखना और विश्लेषण करना।यह ऐ भारी मात्रा में समझकर पै...
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AI ऐप (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐप ) एक ऐसा सॉफ्टवेयर है। जो मनवीय बुद्धि वाले कम जैसे सीखना,समझना,समस्या हल करना,और निर्णय लेना,करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमान (AI) तकनीक का इस्तेमाल करता है। जिस काम करना आसान, तेज और ज्यादा सटीक हो जाते हैं, जैसे Chatgpt, Google Gemini यह फोटो एडिटिंग ऐप्स जो आपके लिए तस्वीर बनाते हैं। AI अप क्या करते हैं। डेटा से सीखना और विश्लेषण करना।यह ऐ भारी मात्रा में समझकर पैटर्न ढूंढते हैं। जैसे Google Analytics यह सोशल मीडिया ट्रेडस आदि। कार्य संचालन(Automation) यह तस्वीरें को एडिट करते हैं, नई तस्वीर बनाते हैं। और टेक्स्ट को सुरक्षित करते हैं। उदाहरण Chat Gpt/Gemini सवालों के जवाब देने कंटेंट लिखना कोड बनाना। Google Assistant/Siri/Alera रिमाइंडर सेट करना, कॉल करना जानकारी खोजने।
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sonusaini@gamil.com
23 Dec 2025
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पादप कोशिका पादप कोशिकाओं मैं पलैजामा झिल्ली के अतिरिक्त कोशिका भित्ति भी होती हैं । पादप कोशिका भित्ति मुख्यतः से लयूलोज की बनी होती हैं। जब किसी पादप कोशिका में परसारण द्वारा पानी की हानि होती हैं तो कोशिका झिल्ली सहित अंतरित पदार्थ संकुचित हो जाता हैं। पादप कोशिकाएं परासरण द्वारा जल ग्रहण करती हैं। पादप कोशिकाओं में रसधानिया बहुत बड़ी होती...
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पादप कोशिका पादप कोशिकाओं मैं पलैजामा झिल्ली के अतिरिक्त कोशिका भित्ति भी होती हैं । पादप कोशिका भित्ति मुख्यतः से लयूलोज की बनी होती हैं। जब किसी पादप कोशिका में परसारण द्वारा पानी की हानि होती हैं तो कोशिका झिल्ली सहित अंतरित पदार्थ संकुचित हो जाता हैं। पादप कोशिकाएं परासरण द्वारा जल ग्रहण करती हैं। पादप कोशिकाओं में रसधानिया बहुत बड़ी होती है। पलैसटिड केवल पादप कोशिकाओं में स्थित होता है। जंतु कोशिका जंतु कोशिकाओं राजधानियां छोटी होती है। प्लेस्टिड जंतु कोशिकाओ मैं स्थित नहीं होती है। लाइसोसोम लाइसोसोम में बहुत शक्तिशाली पाचनकारी एग्जाम होते हैं जो जटिल पदार्थों को सरल पद्धति ऑन में तोड़ते हैं।
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sonusaini@gamil.com
20 Dec 2025
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Kendrak Kendra ke Charon or dohre parat ka ek satar hota hai jise kendrak jhilli kahate Hai. Kendrak jhilli mein छोटे-छोटे chhidra hote Hai. Ine chitron ke dwara kendrak ke andar ki koshika drav Kendra ke bahar Ja pata hai. Kendrak mein kormosouce hota hai Jo koshika vibhajan ke samay chhudakar dikhai padte Hai. Kormosoce main anuwanshik gunon ki jo suchna Hoti Hai vah Mata pita...
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Kendrak Kendra ke Charon or dohre parat ka ek satar hota hai jise kendrak jhilli kahate Hai. Kendrak jhilli mein छोटे-छोटे chhidra hote Hai. Ine chitron ke dwara kendrak ke andar ki koshika drav Kendra ke bahar Ja pata hai. Kendrak mein kormosouce hota hai Jo koshika vibhajan ke samay chhudakar dikhai padte Hai. Kormosoce main anuwanshik gunon ki jo suchna Hoti Hai vah Mata pita Se (DNA)( डिऑक्सी रायपुर न्यूकलीक अम्ल) Anu ke roop mein ungali संतति main jaate Hai. Koshika dravya Jab humne pyaj ki jhilli tatha manushya ke gal ki koshikaon ki slide Ko dekha tab hamen pratyek koshika Main ek bada Kshetra dikha Jo koshika jhilli se gira hua tha is Kshetra mein bahut halka dhabba tha ise koshika dravya kahate Hai. Koshika angk Pratyek koshika ke Charon or apni jhilli Hoti Hai jisse ki usmein sthiti padarth pahna paryavaran Se Alag Rahe padi tatha jatil koshikaon jismein Bahu koshika jio ki koshikayen bhi Shamil Hai upcharik kriyaon ki bahut avashyakta hoti hai. Jisse ki vah jatil sanrachna tatha karya ko sahas De sake.
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sonusaini@gamil.com
18 Dec 2025
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आय ki dava mein Parivar ka biwi ko paranjan asambhav hai .aaj ke vatavaran yog mein manushya ki avashyakta bahut badh gai hai aur jivan shaili mein Amul chul Parivartan a gaya hai parantu use anupat mein Aaye nahin badhi hai. Aaj karya vyavastha ko ki prakar se chalane ke liye vibhinn prakar ke bhautik sthanon ki avashyakta hoti hai vah ine avashyaktaon karna prapti hai. Parivar ke sadasyon ko dh...
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आय ki dava mein Parivar ka biwi ko paranjan asambhav hai .aaj ke vatavaran yog mein manushya ki avashyakta bahut badh gai hai aur jivan shaili mein Amul chul Parivartan a gaya hai parantu use anupat mein Aaye nahin badhi hai. Aaj karya vyavastha ko ki prakar se chalane ke liye vibhinn prakar ke bhautik sthanon ki avashyakta hoti hai vah ine avashyaktaon karna prapti hai. Parivar ke sadasyon ko dhan ka aayojan karna padta hai Parivar ki aay per hi uska rahan sahan V Sukh Shakti nirbhar Karti Hai. Atah grah vyavastha mein parivarik aay ka Vishesh mahatva hai. Parivarik Aaye mukhyat do bhagon mein Banta jaati Hai. 1. प्रत्यक्ष आय _yah vah I hai jismein Parivar ke sadasya vetan ke roop mein tatha vyavsay ke dwara pravdhan ko एकत्रित karte Hai 2. अप्रत्यक्ष आय_yah vah Aaye Hain jisse Parivar ko kuchh vyay nahin karna padta hai aur Parivar Ko suvidhaen bhi prapt Ho jaati Hai Jaise nishulk Makan, muft yatayat vah chikitsa avm Shiksha suvidhaen.
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sonusaini@gamil.com
17 Dec 2025
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