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Blog by pratiksha | Digital Diary

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सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियम

सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियम  प्रत्येक व्यक्ति का जीवन अमूल्य है। इसका कोई मतलब नहीं हो सकता जब घर से बाहर सड़क पर निकलते हैं तो दुर्घटनाओं की आशंकाओं के चलते हमारा जीवन जिंदगी की कश्मकश के बीच दांव पर लगा होता हैं। सड़क पर चलते जीवन पर मंडराते इस खतरे को हम सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियमों का पालन करके समाप्त नहीं कर सकते तो न्यूनतम अवश्य कर सकते हैं। सड़क दुर्घटनाओं एवं उससे होने वाली म्यू... Read More
सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियम  प्रत्येक व्यक्ति का जीवन अमूल्य है। इसका कोई मतलब नहीं हो सकता जब घर से बाहर सड़क पर निकलते हैं तो दुर्घटनाओं की आशंकाओं के चलते हमारा जीवन जिंदगी की कश्मकश के बीच दांव पर लगा होता हैं। सड़क पर चलते जीवन पर मंडराते इस खतरे को हम सड़क सुरक्षा एवं यातायात के नियमों का पालन करके समाप्त नहीं कर सकते तो न्यूनतम अवश्य कर सकते हैं। सड़क दुर्घटनाओं एवं उससे होने वाली म्यूट का सबसे मुख्य कारण यातायात के नियमों की जानकारी का अभाव और उन नियमों का पालन न करना ही है। लोग इन नियमों को जाने, समझे, उनका पालन करें और दूसरों को भी सुरक्षित बनाने में सहयोग करें।  दो शब्दों से मिलकर है, 'रात + आयात'; जिसका अर्थ है, आना- जना। संपूर्ण विश्व में यातायात से संबंधित महत्वपूर्ण नियम बनाए गए हैं। क्योंकि इससे नए केवल यातायात सुखम बनता है बल्कि सड़क दुर्घटना से होने वाले भयावह खतरों से भी बचा जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रतिवर्ष १० लोक से अधिक सड़क- हादसों के शिकार व्यक्तियों की मौत हो जाती   है। हादसों से बचने के लिए यातायात के नियमों   का पालन करना अति आवश्यक है इसके    ज्ञान के अभाव में एवं एवं सुचारु रूप से    पालन न करने के कारण भारत में प्रत्येक वर्ष १,४०,००० से अधिक व्यक्ति सड़क दुर्घटना      में मारे जाते हैं। ऐसी विकट परिस्थितियों की भयवहता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है। कि विवभर के कुल वाहनों में से केवल एक प्रतिशत ही वहां भारत में हैं।      जबकि विश्व की कुल सड़क दुर्घटना मैं से १०% हादसे भारत में होते हैं।
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sonusaini@gamil.com 20 Jan 2026 126 Views

रवींद्रनाथ टैगोर

          रवींद्रनाथ टैगोर रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म सन् १८६१ को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम देवेंद्र नाथ टैगोर तथा माता का नाम शारदा देवी था। तू इनके पिता तथा दादा अत्यंत संपन्न व्यक्ति होने के कारण के साथजीवन व्यतीत करते थे। उनके परिवार का समाज में अत्यधिक सम्मान था, इसी सम्मान के कारण लोग इनके दादा और पिता को ठाकुर कहकर बुलाते थे। यही ठाकुर शब्द अंग्रेजी के प्रभाव से टैगोर बन... Read More
          रवींद्रनाथ टैगोर रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म सन् १८६१ को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम देवेंद्र नाथ टैगोर तथा माता का नाम शारदा देवी था। तू इनके पिता तथा दादा अत्यंत संपन्न व्यक्ति होने के कारण के साथजीवन व्यतीत करते थे। उनके परिवार का समाज में अत्यधिक सम्मान था, इसी सम्मान के कारण लोग इनके दादा और पिता को ठाकुर कहकर बुलाते थे। यही ठाकुर शब्द अंग्रेजी के प्रभाव से टैगोर बन गया। घर में नौकरों की अधिकता और विलासिता के अत्यधिक साधनों के कारण इनको स्वतन्त्रता पूर्वक घूमने तथा खेलने के अवसर प्राप्त न हो सके। यह स्वयं को बंदी जैसे अनुभव करते हुए अत्यधिक खिन्न रहते थे।  टैगोर जी की प्रारंभिक शिक्षा बांग्ला भाषा में घर पर ही आरंभ हुई। प्रारंभिक शिक्षा समाप्त होने के पश्चात इनका प्रवेश पहले कलकात्ता के ओरिएंटल सेमिनार विद्यालय नार्मल विद्यालय में कराया गया। रवींद्रनाथ टैगोर साहित्यकार, विचारक देशभक्त और उच्च कोटि के दार्शनि थे। सरस्वती के इस महान आराधक का ७ अगस्त १९४१ ई० को निधनह गया।
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sonusaini@gamil.com 19 Jan 2026 108 Views

महादेवी वर्मा

महादेवी वर्मा  महादेवी वर्मा का जन्म फर्रुखाबाद के एक शिक्षित और सम्भ्रांत परिवार में सन १९०७ ई० मैं उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद मैं हुआ था। इनके पिता गोविंद प्रसाद वर्मा भागलपुर में एक विद्यालय में प्रधानाचार्य और नाना ब्रजभाषा के एक अच्छे कवि थे। माता हमरानी वर्मा परम- विदुषी महिला थी। इन सभी के करण महादेवी वर्मा एक सफल प्रधानाचार्य और भावुक कवितयित्री बन गई। इनका विवाह ११ वर्ष की अल्पायु में ही... Read More
महादेवी वर्मा  महादेवी वर्मा का जन्म फर्रुखाबाद के एक शिक्षित और सम्भ्रांत परिवार में सन १९०७ ई० मैं उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद मैं हुआ था। इनके पिता गोविंद प्रसाद वर्मा भागलपुर में एक विद्यालय में प्रधानाचार्य और नाना ब्रजभाषा के एक अच्छे कवि थे। माता हमरानी वर्मा परम- विदुषी महिला थी। इन सभी के करण महादेवी वर्मा एक सफल प्रधानाचार्य और भावुक कवितयित्री बन गई। इनका विवाह ११ वर्ष की अल्पायु में ही डॉक्टर डाक्टर स्वरूप नारायण वर्मा से हो गया। शवसुर के विरोध के कारण इनकी शिक्षा में व्यवधान आ गया। उनकी देहावसान के बाद इन्होंने पूर्ण शिक्षा प्रारंभ की और प्रयाग विश्वविद्यालय मैं मा (संस्कृत) की परिभाषा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसके पश्चात् प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्राचार्या नियुक्त हुई जहां से सन १९६४ ई० एक से अवकाश ग्रहण किया। इनको नीरज पर सेक्सरिया तथा यामा पर मंगलाप्रसाद पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। 
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sonusaini@gamil.com 18 Jan 2026 116 Views

पं० प्रताप नारायण मिश्र

पंडित प्रताप नारायण मिश्र  प्रताप नारायण मिश्र का जन्म सन १८५६ ई० को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का बैजेगांव में हुआ था। मिश्रा जी के जन्म के कुछ दिनों बाद ही  इनके ज्योतिषी पिता पंडित संकटाप्रसाद मिश्र कनपुर आकर सपरिवार रहने लगे। यहीं पर इनकी शिक्षा दीक्षा हुई। पिता इन्हें ज्योतिषी पढ़कर अपने पैतृक व्यवसाय में ही लगाना चाहते थे। परंतु इनका मनमौजी स्वभाव उनमें नहीं रमा। इन्होंने कुछ समय तक अंग्रेज... Read More
पंडित प्रताप नारायण मिश्र  प्रताप नारायण मिश्र का जन्म सन १८५६ ई० को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का बैजेगांव में हुआ था। मिश्रा जी के जन्म के कुछ दिनों बाद ही  इनके ज्योतिषी पिता पंडित संकटाप्रसाद मिश्र कनपुर आकर सपरिवार रहने लगे। यहीं पर इनकी शिक्षा दीक्षा हुई। पिता इन्हें ज्योतिषी पढ़कर अपने पैतृक व्यवसाय में ही लगाना चाहते थे। परंतु इनका मनमौजी स्वभाव उनमें नहीं रमा। इन्होंने कुछ समय तक अंग्रेजी स्कूल मैं शिक्षा प्राप्त की, किंतु कोई भी अनुशासन और निष्ठा का कार्य, जिसमें विषय  की नीरसता के साथ प्रतिबंधता भी आवश्यक होती, इनके मोदी और फक्कड़ स्वभाव के विपरीत था; अतः यह यहां भी पढ़ न सके। घर में स्वाध्याय से ही इन्होंने संस्कृत, उर्दू, फारसी, अंग्रेजी, और बांग्ला पर अधिकार प्राप्त कर लिया। बहुमुखी प्रतिभा के धनी मिश्र जी का ३८ वर्ष की अल्पायु मैं सन १८९४ ई० में कानपुर में निधन हो गया।   
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sonusaini@gamil.com 18 Jan 2026 163 Views

सुमित्रानंदन पन्त

सुमित्रानंदन पन्त  सुमित्रानंदन पन्त जी का 20 में सन 1900 ई० अल्मोड़ा (उत्तराखंड) के निकट कौसनी ग्राम में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा ग्राम की ही पाठशाला में हुई। उनकी साहित्यिक सेवा के लिए भारत सरकारने इन्हें "पद्म भूषण" से सम्मान विभूषण किया। इनकी प्रमुख रचनाएं हैं वाणी, ग्रंथि, पल्लव, गुंजन आदि। सुमित्रानंदन जी का निधन 28 दिसंबर सन 1977 ई० को हुआ।                    कविता                चिर  ... Read More
सुमित्रानंदन पन्त  सुमित्रानंदन पन्त जी का 20 में सन 1900 ई० अल्मोड़ा (उत्तराखंड) के निकट कौसनी ग्राम में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा ग्राम की ही पाठशाला में हुई। उनकी साहित्यिक सेवा के लिए भारत सरकारने इन्हें "पद्म भूषण" से सम्मान विभूषण किया। इनकी प्रमुख रचनाएं हैं वाणी, ग्रंथि, पल्लव, गुंजन आदि। सुमित्रानंदन जी का निधन 28 दिसंबर सन 1977 ई० को हुआ।                    कविता                चिर  महान जगजीवन में जो चिर महान, सौंदर्यपूर्ण औ सत्यवान, मैं उसका प्रेमी बनूं नाथ, जो हो मानव के हिट सामान, जिससे जीवन में मिली शक्ति,     छूटे भय , सशंय अंधभक्ति मैं वह प्रकाश बन सकूं, नाथ मिल जाए जिसमें अखिल व्यक्ति , पाकर प्रभु तुमसे अमर दान करने मानव का परित्राण ला सकूं विश्व में एक बार फिर से नवजीवन का विहान ।                                                                 -सुमित्रानंदन पन्त।                                                   
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sonusaini@gamil.com 17 Jan 2026 138 Views

ध्वनि (sound)

            ध्वनि (Sound) सभी जिओ तथा निर्जीवों द्वारा उतन्न अनेक प्रकार की आवाज जैसे चिड़िया का चहचाना, सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों का बचाना, बरसात के मौसम में बादलों का गर्जना आदि, भाषाओं की वैज्ञानिक रूप ध्वनि कहते हैं। ध्वनि ऊर्जा का वह रूप है जो(Vibration) या विक्षोभ (disturbance) के कारण उत्पन्न होती है और ठोस , द्रव, गैस जैसे माध्यम से तिरंगे(Waves) के रूप में फैलती है।  (1) कंम्पन - जब कोई... Read More
            ध्वनि (Sound) सभी जिओ तथा निर्जीवों द्वारा उतन्न अनेक प्रकार की आवाज जैसे चिड़िया का चहचाना, सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों का बचाना, बरसात के मौसम में बादलों का गर्जना आदि, भाषाओं की वैज्ञानिक रूप ध्वनि कहते हैं। ध्वनि ऊर्जा का वह रूप है जो(Vibration) या विक्षोभ (disturbance) के कारण उत्पन्न होती है और ठोस , द्रव, गैस जैसे माध्यम से तिरंगे(Waves) के रूप में फैलती है।  (1) कंम्पन - जब कोई वस्तु अपनी मध्य स्थित के दोनों और इधर-उधर गति करती है तो उसकी गति दोलन, कंम्पन कहलाती है। (2) आवर्तकाल-  कंम्पन करने वाली वास्तु दोबारा एक कंम्पन     में लगे समय को आवर्तकाल (Perion) कहते हैं। (3) आवृती (Frijuency)- प्रति सेकंड में किए गए कंम्पनो की संख्या उसकी आवृती (Frijuency) कहलाती है इसका SI मात्रक हर्टज होता है। इसका संकेत HZ हैं। एक हर्टज आवर्ती $1 प्रति सेकंड के बराबर होती है।  (4) आयाम (dimension)- कंम्पन करती हुई वस्तु का अधिकतम विस्थापन आयाम कहलाता है। (5) प्रबलता- प्रबलता ध्वनि का वह गुण है जिससे ध्वनि तीव्र तथा मंद्र सुनाई देती है। (6) तारत्व(Pitch)- तारत्व ध्वनि का वह गुण है जिसके द्वारा हम मोती (भारी) या पतली (धीमी) ध्वनि मैं अंतर कर सकते हैं। उच्च तरत्व वाली ध्वनि की आवृती उच्च तथा निम्न तारत्व वाली ध्वनि की आवृति निम्न होती हैं।    
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sonusaini@gamil.com 11 Jan 2026 132 Views

आइये ऊर्जा के बारे में समझे।

                   ऊर्जा  किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। ऊर्जा का मात्रक वही होता हैं। जो कार्य का मात्रक है तथा कार्य भी भांति यह भी एक अदिश राशि है। MKS यध्दिति में ऊर्जा का मात्रक जूल है। किसी वस्तु की ऊर्जा की मैप उसे कार्य से की जाती हैं। जो वह सुनने ऊर्जा वली स्थिति आने तक कर सकती हैं। • ऊर्जा के रूप -  ऊर्जा के विभिन्न रूप हैं। (1) यांत्रिक ऊर्जा- वह ऊर्जा जो किसी वस्... Read More
                   ऊर्जा  किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। ऊर्जा का मात्रक वही होता हैं। जो कार्य का मात्रक है तथा कार्य भी भांति यह भी एक अदिश राशि है। MKS यध्दिति में ऊर्जा का मात्रक जूल है। किसी वस्तु की ऊर्जा की मैप उसे कार्य से की जाती हैं। जो वह सुनने ऊर्जा वली स्थिति आने तक कर सकती हैं। • ऊर्जा के रूप -  ऊर्जा के विभिन्न रूप हैं। (1) यांत्रिक ऊर्जा- वह ऊर्जा जो किसी वस्तु में यांत्रिक कार्य के कारण सचित होती है। यांत्रिक ऊर्जा कहलाती है। जैसे-गिरता हुआ पत्थर, खींचा हुआ तीर, घड़ी का स्प्रिंग, दबी हुई स्प्रिंग आदि से प्राप्त ऊर्जा यांत्रिक ऊर्जा है। यांत्रिक ऊर्जा दो प्रकार की होती है। (1) गतिज ऊर्जा। (2) स्तितिज ऊर्जा। (2) ऊष्मीय ऊर्जा - ईंधन चलने से ऊर्जा अथवा सौर विकरण से उत्पन्न ऊषा ऊष्मीय ऊर्जा कहलाती है जैसे  ईंधन,पेट्रोल, इंजन तथा डीजल इंजन से प्राप्त ऊर्जा ऊष्मीय ऊर्जा है। (3) प्रकाश ऊर्जा- वह ऊर्जा जिसके कारण हमें दिखाई देता है। प्रकाश ऊर्जा कहलाती है। जैसे-विद्युत बल्ब मोमबत्ती, सूर्य आदि प्राप्त ऊर्जा प्रकाश ऊर्जा है। (4) रासायनिक ऊर्जा- वह ऊर्जा जो किसी रसायनिक अभिक्रिया से प्राप्त होती है। रासायनिक ऊर्जा है ।जैसे- कोयला, पेट्रोल ,डीजल आदि से प्राप्त ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा है। (5) विद्युत ऊर्जा- वह ऊर्जा जो विद्युत धारा द्वारा संचारित विद्युत ऊर्जा कहलाती है। जैसे विद्युत जनित्र ऊर्जा विद्युत ऊर्जा कहलाती हैं। (6) ध्वनि ऊर्जा - वह ऊर्जा जिसके कारण हमारे कान के पर्दों हिला कर सनते ध्वनि को सुन है जैसे लाउडस्पीकर से प्राप्त ध्वनि ऊर्जा हैं।  
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sonusaini@gamil.com 10 Jan 2026 143 Views

The Little Girl

The Little Girl
To the little gril he was be figure and avoideb. Every morning before going to work he came into her room and  gave her a casual  kiss, to which she responded with ''Goodbey , Father ''. And oh, there was a glad sense of relief whenshe heard the noise of the carriage growing fainter down the long road. In the evening when he came home she stood near the staircase and heard his loud... Read More
To the little gril he was be figure and avoideb. Every morning before going to work he came into her room and  gave her a casual  kiss, to which she responded with ''Goodbey , Father ''. And oh, there was a glad sense of relief whenshe heard the noise of the carriage growing fainter down the long road. In the evening when he came home she stood near the staircase and heard his loud voice in the hall. ''Bring my tea into the drawing - room... Hasn't paper come yet? mother go and snd see if my paper's out there -and dringb me slippers . ''Kezia ,'' Mother would call to her ,'' if you'', a good girl you can come down and take off father 's boots .''slowly the girl would slip down the stairs , more slowly still across the hall, and push open the drawing -room door .By that time he had his spectacles on and looked at her over them in a way that was terrifying to the little girl. '' Well kezia, hurry up and pull off these boots and take them outside. Have you been a good girl today. '' '' I d-d-don't know, Father .'' You d-d-don,t know ?If you stutter like that mother will have to take you to docter.
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sonusaini@gamil.com 09 Jan 2026 242 Views

कार्य क्या है।

(1) कार्य की वैज्ञानिक संकल्पना  बल लगातार किसी वस्तु को बल की दिशा में विस्थापित करने की क्रिया को कार्य कहते हैं। अर्थात कार्य होने के लिए बल तथा बल की दिशा में विस्थापन दोनों आवश्यक हैं। एक नियत बल द्वारा किया गया कार्य  किसी वस्तु की एक निश्चित दूरी तक विस्थापित करने में किया गया कार्य वस्तु पर लगाए गए बल के अंनुक्रमा अनुपाती है।                  कार्य ( W ) ×  बल  ( F ) अतः सामान बल लगातार कि... Read More
(1) कार्य की वैज्ञानिक संकल्पना  बल लगातार किसी वस्तु को बल की दिशा में विस्थापित करने की क्रिया को कार्य कहते हैं। अर्थात कार्य होने के लिए बल तथा बल की दिशा में विस्थापन दोनों आवश्यक हैं। एक नियत बल द्वारा किया गया कार्य  किसी वस्तु की एक निश्चित दूरी तक विस्थापित करने में किया गया कार्य वस्तु पर लगाए गए बल के अंनुक्रमा अनुपाती है।                  कार्य ( W ) ×  बल  ( F ) अतः सामान बल लगातार किसी वास्तु को विस्थापित करने में किया गया विस्थापन के अनुक्रमानुपाती होता हैं।           कार्य  ( W ) × विस्थापन ( d )  कार्य का मात्रक  कार्य का मत्रक = बाल का मात्रक × विस्थापन का मात्र अतः कार्य का मात्रक = I N×1ma-N-msi पद्धति में कार्य के मात्रक न्यूटन मीटर को सकेत J सब प्रदर्शित करते हैं। अतः 1J का कार्य उसे समय होगा जब 1N का बल लगातार वस्तु को बालक दिशा में 1m विस्थापित किया जाता है। अतः इसका प्रतिशत करते समय दिशा बताने की आवश्यकता नहीं होती हैं।
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sonusaini@gamil.com 09 Jan 2026 474 Views

एक समान गति तथा असमान गति

एक समान गति तथा आसमान गति  (Uniform motion and non-uniform motion) (1) एक समान गति(Uniform motion) जब कोई वस्तु समान अंतराल में निश्चित दिशा में समान दूरी तय करती है तब वस्तु की गति एक समान गति कहलाती है।एक समान गति में वस्तु का वेग नेट रहता है।  (2) असमान गति (non-uniform motion) जब कोई वस्तु सामान अंतरालों में आसमान दूरियां तय करती है, तब वस्तु की यह गति आसमान गति या परिवर्ती गति कहलाती है। असमा... Read More
एक समान गति तथा आसमान गति  (Uniform motion and non-uniform motion) (1) एक समान गति(Uniform motion) जब कोई वस्तु समान अंतराल में निश्चित दिशा में समान दूरी तय करती है तब वस्तु की गति एक समान गति कहलाती है।एक समान गति में वस्तु का वेग नेट रहता है।  (2) असमान गति (non-uniform motion) जब कोई वस्तु सामान अंतरालों में आसमान दूरियां तय करती है, तब वस्तु की यह गति आसमान गति या परिवर्ती गति कहलाती है। असमान गति में वस्तु का वेग समय के साथ परिवर्तित होता है।  चाल(Speld) किसी वस्तु द्वारा एकांक समयांतराल(Time in terval) मैं चली गई दूरी को वस्तु की चाल कहते हैं। यह अदिश राशि है। इसे (V) से प्रतिशत किया जाता है। वेग(Velocity) किसी वस्तु द्वारा एकांक समय में निश्चित दिशा में चली गई दूरी अर्थात विस्थापन को उसका वेग कहते हैं। अर्थात किसी वस्तु द्वारा एकांक समयांतराल में तय की गई विस्थापन वस्तु का वेग कहलाता है। वेग को (V) से प्रदर्शित करते हैं।         
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sonusaini@gamil.com 08 Jan 2026 553 Views