पं. पंडित नहरू 14 नवंबर को जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, पंडित नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 ई. को प्रयाग, इलाहाबाद में हुआ था। इनमें से एक पिता मोतीलाल नेहरू प्रसिद्ध वकील थे। माता स्वरूप रानी उदार महिला थी। नेहरू जी की आरंभिक शिक्षा घर में ही हुई। विलायत से वकालत की शिक्षा पूरी कर इलाहाबाद में इन्होंने वकालत शुरू कर दी। इस समय उनकी भेंट गांधीजी से हुई। वकालत छोड़कर ये स्वाधीनता स...
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पं. पंडित नहरू 14 नवंबर को जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, पंडित नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 ई. को प्रयाग, इलाहाबाद में हुआ था। इनमें से एक पिता मोतीलाल नेहरू प्रसिद्ध वकील थे। माता स्वरूप रानी उदार महिला थी। नेहरू जी की आरंभिक शिक्षा घर में ही हुई। विलायत से वकालत की शिक्षा पूरी कर इलाहाबाद में इन्होंने वकालत शुरू कर दी। इस समय उनकी भेंट गांधीजी से हुई। वकालत छोड़कर ये स्वाधीनता संग्राम में देश को आजाद कराने के लिए सक्रिय हो गए। सन 1919 ईस्वी में जलियांवाला बाग कांड से देश में क्रोध की ज्वाला धधक उठी। सन 1920 ईस्वी में गांधीजी ने असहयोग आंदोलन शुरू कर दिया। सन 1921 ईस्वी में प्रिंस ऑफ वैक्स भारत आए। उनके स्वागत का बहिष्वर वनकिया गया। इलाहाबाद में विरोध का नेहरू जी ने किया। यह पहली बार अपने पिता के साथ जेल गए। 27 में 1964 ई को इनका निधन हो गया।
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14 Feb 2026
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लाल बहादुर शास्त्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर सन 1904 को मुगलसराय (तत्कालीन वाराणसी वर्तमान चंदौली) के एक साधारण परिवार में हुआ था। इसके पिता का नाम शारदा प्रसाद और माता का नाम रामदुलारी देवी था। अपनी शिक्षा पूरी कर लाल बहादुर वाराणसी आ गए। पढ़ने-लिखने विशेष रुचि थी। वे बहुत ही सीधे-सीधे शांत और सरल स्वभाव के विद्यार्थी थे। जब लाल बहादुर बनारस के हरिश्चंद्र हाई स्कूल में पढ़ रहे...
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लाल बहादुर शास्त्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर सन 1904 को मुगलसराय (तत्कालीन वाराणसी वर्तमान चंदौली) के एक साधारण परिवार में हुआ था। इसके पिता का नाम शारदा प्रसाद और माता का नाम रामदुलारी देवी था। अपनी शिक्षा पूरी कर लाल बहादुर वाराणसी आ गए। पढ़ने-लिखने विशेष रुचि थी। वे बहुत ही सीधे-सीधे शांत और सरल स्वभाव के विद्यार्थी थे। जब लाल बहादुर बनारस के हरिश्चंद्र हाई स्कूल में पढ़ रहे थे उसे समय लोकमान्य बालगंगाधर तिलक क नारा "स्वराज हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है।" पूरे देश में गूंज रहा था। इससे उसे देश देश प्रेम की प्रेरणा मिली। उसके भाषण से वह बहुत प्रभावित हुए। अब मैं पढ़ाई के साथ-साथ स्वराज आंदोलन में भी भाग लेने लगे। गांधी जी का असहयोग आंदोलन आरंभ हुआ। लाल बहादुर भी पढ़ाई छोड़कर आंदोलन में कूद पड़े। आजादी की लड़ाई में उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। बाद मैं लाल बहादुर काशी विद्यापीठ में शिक्षागहण करने लगे। सन 1926 में उन्होंने शास्त्री की परीक्षा पास की। अब वे लाल बहादुर से लाल बहादुर शास्त्री बन गए। 10 जनवरी सन 1966 की ह्रदय गति रुक जाने से ताशकंद में ही उनका निधन हो गया।
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13 Feb 2026
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महात्मा गांधी भारतीय स्वाधीनता संग्राम में योगदान के कारण महात्मा गांधी 'राष्ट्रपति' कहे जाते थे। इन्हें प्यार से 'बापू' भी कहा जाता है। इनका जीवन भारतीय जनमानस का प्रेरणास्रोत हैं। ये जो व्यवहार दूसरों से चाहते थे। उसे पहले स्वयं करते थे। उनके सिद्धांतों को गांधीवाद और राजनीतिक काल को 'गांधी युग'के नाम से जाना जाता है। गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 ई में पोरबं...
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महात्मा गांधी भारतीय स्वाधीनता संग्राम में योगदान के कारण महात्मा गांधी 'राष्ट्रपति' कहे जाते थे। इन्हें प्यार से 'बापू' भी कहा जाता है। इनका जीवन भारतीय जनमानस का प्रेरणास्रोत हैं। ये जो व्यवहार दूसरों से चाहते थे। उसे पहले स्वयं करते थे। उनके सिद्धांतों को गांधीवाद और राजनीतिक काल को 'गांधी युग'के नाम से जाना जाता है। गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 ई में पोरबंदर ( गुजरात ) में हुआ था। इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। इनके पिता करमचंद और माता का नाम पुतलीबाई धार्मिक तथा सरल स्वभाव की थी। उनकी धार्मिक आस्था व सादगी का गांधी पर बहुत प्रभाव पड़ा। बचपन में गाधी जी ने सत्य हरिश्चंद्र और श्रवण कुमार नाटक देखें। सत्य निष्ठा, अहिंसा, त्याग वह मानव सेवा की झलक उनके जीवन के अनेक प्रसंगों में मिलती है। गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में अंग्रेजों की रंगभेदनीति और भारत में सहेली छुआछूत करीति का जमकर विरोध किया। साबरमती में आश्रम के नियम बनाएं सत्य बोलना, अहिंसा के भाव, ब्रह्मचर्य व्रत, भोजन संयम, चोरी ना करना, स्वदेशी का प्रयोग, चरखा काटना आदि। 30 जनवरी 1948 ई को गांधी जी की हत्या कर दी गई।
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12 Feb 2026
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस सुभाष चंद्र बोस एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्हें "नेताजी" के नाम सेजाना जाता था। वह 23 जनवरी 1897 ई में कटक (ओडीशा) में एक हिंदू परिवार में पैदा हुए। उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माता का नाम प्रभावती देवी था। वे स्कूल में बहुत प्रतिभाशाली छात्र थे। उन्होंने अपना स्कूल कटक में पूरा किया, कक्षा 10 कलकात्ता (अब कोलकाता) और स्नातक 1918 में कलकात्ता विश्वविद्यालय में प...
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस सुभाष चंद्र बोस एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्हें "नेताजी" के नाम सेजाना जाता था। वह 23 जनवरी 1897 ई में कटक (ओडीशा) में एक हिंदू परिवार में पैदा हुए। उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माता का नाम प्रभावती देवी था। वे स्कूल में बहुत प्रतिभाशाली छात्र थे। उन्होंने अपना स्कूल कटक में पूरा किया, कक्षा 10 कलकात्ता (अब कोलकाता) और स्नातक 1918 में कलकात्ता विश्वविद्यालय में पूरा किया। बाद में उनके पिता ने उन्हें भारतीय सिविल सर्विस की परीक्षा देने वेफ लिए इंग्लैंड भेजा। वे पास हो गए और नौकरी में लग गई। परंतु जल्द ही उन्होंने भारतीय सिविल सर्विस से इस्तीफा दे दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए भारत वापस आ गए। वे राष्ट्रवादी देशबंधु चितरंजन दास, उनके राजनीतिक गुरु, से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने लोगों को स्वतंत्रता संघर्ष से जुड़ने के लिए अभिप्रेरित किया। "स्वराज"नामक अखबार से सुभाष चंद्र बोस ने ब्रिटिश राज का दृढ़ता से विरोध किया। वे सिंगापुर चले गए। और अपनी स्वयं की "आजाद हिंद फौज"का गठन किया। उन्होंने अपनी फौज को "दिल्ली चलो" और "जय हिंद" का नारा दिया। उन्होंने अपने महान शब्दों, "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा" के द्वारा अपनी सेना को पीड़ित किया, अपनी मातृभूमि को ब्रिटिश राज से स्वतंत्र करवाने के लिए। ऐसा माना जाता है की विमान हादसे में 1945 में तईवान में नताजी की मृत्यु हो गई। परंतु इनकी मौत का रहस्य आज तक अनसुलझा है। एक स्थायी प्रेरणा के रूप में नेताजी हर भारतीय के दिल में जीवित रहेंगे। "जय हिंद , जय भारत"
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11 Feb 2026
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गुलीवर और लिलिपुट एक नाविक था जिसका नाम गुलिवर था। वह अपने साथियों के साथ एक लंबी समुद्र यात्रा पर निकाल। एक दिन समुद्र में भायनक तूफान आया। उसका जहाज डूब गया परंतु गुलीवर तहरकर पास ही एक द्वीप पर पहुंच गया। वह लिलिपुट द्वीप था। जब वह वहां पहुंचा, वह बहुत थक गया था। जल्दी ही वह गहरी नींद में सो गया। जब वह सोया हुआ था। तब सैकड़ो छोटे-छोटे लोग वहां आए और उन्होंने उसे रस्सियों से बांध दया। जब व...
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गुलीवर और लिलिपुट एक नाविक था जिसका नाम गुलिवर था। वह अपने साथियों के साथ एक लंबी समुद्र यात्रा पर निकाल। एक दिन समुद्र में भायनक तूफान आया। उसका जहाज डूब गया परंतु गुलीवर तहरकर पास ही एक द्वीप पर पहुंच गया। वह लिलिपुट द्वीप था। जब वह वहां पहुंचा, वह बहुत थक गया था। जल्दी ही वह गहरी नींद में सो गया। जब वह सोया हुआ था। तब सैकड़ो छोटे-छोटे लोग वहां आए और उन्होंने उसे रस्सियों से बांध दया। जब वह उठा तब इतने छोटे-छोटे लोगों को देखकर आश्चर्य चकित हुआ। जल्दी ही वह उनका मित्र बन गया। उन्होंने रस्सियां खोल दी और उसे भोजन दिया। उनकी रोटियां इतनी छोटी थी कि वह एक साथ 10 रोटियां खा गया। दोपहर के भोजन में उसने हजार रोटियां, सो फूलगोभियां और सौ भेड़ें खाईं। छोटे लोग उसे अपने राजा रानी के पास ले गए। राजा का हाथ इतना छोटा था कि गुलीवर ने हाथ मिलाने के लिए अपनी केवल एक उंगली का प्रयोग किया। प्रत्येक वस्तु वह छोटी थी कि वह लिलिपुट के छोटे-छोटे लोगों के बीच एक विशाल रक्षास की भांति प्रतीत होता था। वे छोटे लोग बहुत दयालु और सहायक थे। उन्होंने उसके लिए एक नाव बनाई। गुलीवर के घर जाने का समय आ गया। वह अपने प्रिय मित्रों से दूर जाने से बहुत उदास था। वह अपनी नाव में बैठा और यात्रा पर निकल पड़ा और छोटे-छोटे लोगों के हाथ हिलाकर उसे "अलविदा" कहा।
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10 Feb 2026
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गधा और कुत्ता एक धोबी के पास एक गधा और एक कुत्ता था। प्रतिदिन वह नदी पर कपड़े धोने जाता था। आओ गधा कपड़ों का भार ढोता था। वह अपने मालिक के घर के बाहर छप्पर में रहता था और कुत्ता पूरे दिन घर के अंदर रहता था शाम के समय कुत्ता अपने मलिक को देख बहुत प्रसन्न होता था। वह मालिक को चाटता और उसके ऊपर कूदता था। मलिक कुत्ते को अपनी बाहों में बिठाने और घर के अंदर ले जाता। ऐसा देखकर गधा भी घर के अंद...
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गधा और कुत्ता एक धोबी के पास एक गधा और एक कुत्ता था। प्रतिदिन वह नदी पर कपड़े धोने जाता था। आओ गधा कपड़ों का भार ढोता था। वह अपने मालिक के घर के बाहर छप्पर में रहता था और कुत्ता पूरे दिन घर के अंदर रहता था शाम के समय कुत्ता अपने मलिक को देख बहुत प्रसन्न होता था। वह मालिक को चाटता और उसके ऊपर कूदता था। मलिक कुत्ते को अपनी बाहों में बिठाने और घर के अंदर ले जाता। ऐसा देखकर गधा भी घर के अंदर रहना चाहता था। उसने सोचा, "यदि मैं भी कुत्ते की तरह मलिक पर कूद जाऊं, तब्बू वह भी मुझे बाहों में उठाएगा और घर के अंदर ले जाएगा। अगली शाम गधा घर के अंदर गया। वह अपने मालिक पर खुदा और उसे चाटना शुरू कर दिया। मालिक मैं गधे को उठाया। वह उसे छप्पर में ले गया। गधे को थपथपाते हुए मालिक ने उसे कहा, "तुम कुत्ते की तरह नहीं हो। तुम बहुत बड़े हो इसलिए तुम घर में नहीं आ सकते।" मालिक ने फिर कहा, "तुम भारी भी हो इसलिए तुम्हें मुझ पर नहीं कूदना चाहिए। मैं कुत्ते को उठा सकता हूं लेकिन तुम्हें नहीं। परंतु मैं तुमसे भी उतना ही प्यार करता हूं जितना मैं कुत्ते से करता हूं। तुम्हें समझ जाना चाहिए कि अलग हो।"
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09 Feb 2026
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साइकिल साइकिल भारत में बहुत लोकप्रिय हैं। बड़े और जवान, दूधवाला, अखबार वाला लड़का डाकिया और फेरीवाला सभी इसका प्रयोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए करते हैं। बहुत से शिक्षित नौजवान पर्यावरण की चिंता करके साइकिल का प्रयोग करते हैं। पहली साइकिल 1816 मैं एक जर्मन नेबनाई थी। वह लकड़ी से बनी थी। साइकिल सवार सीट पर बैठता और अपने पैरों से जमीन को धक्का मार कर उसे चलता। इंग्लैंड म...
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साइकिल साइकिल भारत में बहुत लोकप्रिय हैं। बड़े और जवान, दूधवाला, अखबार वाला लड़का डाकिया और फेरीवाला सभी इसका प्रयोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए करते हैं। बहुत से शिक्षित नौजवान पर्यावरण की चिंता करके साइकिल का प्रयोग करते हैं। पहली साइकिल 1816 मैं एक जर्मन नेबनाई थी। वह लकड़ी से बनी थी। साइकिल सवार सीट पर बैठता और अपने पैरों से जमीन को धक्का मार कर उसे चलता। इंग्लैंड मैं इस मशीन को "होगी हॉर्स" कहते थे। एक एस्कॉटिश आदमी मेकमिलन ने हॉबी हॉर्स में सुधार किया। उसने इसमें पैडल लगाए जो पिछले पहिए से लंबे छड़ियों से जुड़े हुए थे। एक फ्रैंच आदमी ने 1861 में एक बेहतर मशीन बनाई। उसका नाम था "बोनशेकर" क्योंकि उसके लकड़ी के पहिए उबड-खुद सवारी देते थे। जल्द ही रबड़ के पहिए लगाए गए और तब से इस मशीन का नाम साइकिल पड़ा।
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06 Feb 2026
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गंगा नदी तंत्र - गंगा नदी की मुख्य धारा भागीरथी कहलाती हैं, जो गंगोत्री हिमनद से निकाल कर दक्षिण की ओर बढ़ती है। देवप्रयाग में अलकनंदा इसमें मिलकर इसे गंगा नदी का नाम दे देती हैं। हरिद्वार निकट गंगा नदी पर्वतीय जन्म भूमि को छोड़कर मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है। गंगा भारत की सबसे लंबी, महत्वपूर्ण और पवित्र नदी है। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनकी प्रशंसा इन शब्दों में की है, "अपनी अधिगम स्रोप्रशंसा...
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गंगा नदी तंत्र - गंगा नदी की मुख्य धारा भागीरथी कहलाती हैं, जो गंगोत्री हिमनद से निकाल कर दक्षिण की ओर बढ़ती है। देवप्रयाग में अलकनंदा इसमें मिलकर इसे गंगा नदी का नाम दे देती हैं। हरिद्वार निकट गंगा नदी पर्वतीय जन्म भूमि को छोड़कर मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है। गंगा भारत की सबसे लंबी, महत्वपूर्ण और पवित्र नदी है। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उनकी प्रशंसा इन शब्दों में की है, "अपनी अधिगम स्रोप्रशंसा सागर तक, पुराने समय से आधुनिक काल तक गंगा भारत की सभ्यता की कहानी है। " गंगा नदी का जल भारत में भौतिक उपयोग के साथ धार्मिक, आर्थिक जीवन और विकास की कहानी है। पश्चिम बंगाल में यह हुगली तथा बांग्लादेश में पदमा बन जाती है। यह बंगाल की खाड़ी में गिरने से एक विशाल डेल्टा बनाती है। यह विश्व का विशालतम तथा तीव्रता के साथ वृद्धि करने वाला डेल्टा है। इसमें सुंदरी वृक्ष तथा टाइगर पाए जाते हैं। इसे सुंदरवन डेल्टा का नाम दिया जाता है।यमुना, घाघरा,गंडक तथाकोशी इसकी सहायक नदियां हैं जो हिमालय पर्वत से निकलती है। जबकि चंबल औरसोन सहायक नदियां प्रायद्वीपीय उच्चभूमि कर आती है। गंगा नदी की द्रोणी 25 किमी लंबी है। अंबाला नगर सिंधु तथा गंगा अपवाह तंत्र के बीच जल विभाजन का कार्य करता है। यमुना नदी जो गंगा नदी की सबसे महत्वपूर्ण सहायक नदी है। यमुनोत्री हिमनद से निकलकर इलाहाबाद में गंगा से मिलकर पवित्र संगम का निर्माण करती है।
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05 Feb 2026
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निर्धनता का अर्थ निर्धनता शब्द का अर्थ है,धनहीन होना की अथवा धनभव की स्थिति की ही मूलरूप में निर्धनता कहा जाता है। निर्धनता वह स्थित है जो व्यक्ति को अपनी तथा अपने परिवार की आवश्यक आवश्यकताओं को संतुष्ट बनती हैं। धन दैनिक जीवन यापन करने का एकमात्र स्रोत है, जबकि धनहीनता ही निर्धनता का अभिशाप बन जाती है। धन का अभाव व्यक्ति की सबसे बड़ी दुर्बलता और विवशता है, क्योंकि धन से ही सब कुछ होता है...
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निर्धनता का अर्थ निर्धनता शब्द का अर्थ है,धनहीन होना की अथवा धनभव की स्थिति की ही मूलरूप में निर्धनता कहा जाता है। निर्धनता वह स्थित है जो व्यक्ति को अपनी तथा अपने परिवार की आवश्यक आवश्यकताओं को संतुष्ट बनती हैं। धन दैनिक जीवन यापन करने का एकमात्र स्रोत है, जबकि धनहीनता ही निर्धनता का अभिशाप बन जाती है। धन का अभाव व्यक्ति की सबसे बड़ी दुर्बलता और विवशता है, क्योंकि धन से ही सब कुछ होता है। बिन धन के कुछ भी नहीं होता। निर्धनता व्यक्ति लिए दुखद एवं समाज के लिए घर अभिशाप है। निर्धनता उन वस्तुओं का अभाव या अपर्याप्त पूर्ति हैं। जोकि एक व्यक्ति तथा उसके आश्रित को स्वस्थ बनाए के लिए आवश्यक है।" दूसरे शब्दों में, "निर्धनता एक ऐसा जीवन स्तर हैं जिसमें स्वास्थ्य और शारीरिक दक्षता नहीं बनी रहती है। निर्धनता के करण व्यक्ति रोटी, वस्त्र तथा भवन की सुविधाओं से वंचित होकर दयनीय जीवन जीने के लिए विवश हो जाता है। निर्धनता के प्रकार शहरी निर्धनता - नगरों एवं महानगरों में झुग्गी झोपड़ियों से निर्धनता जगती दिखाई पड़ रही है। रामसरण एक मिल में रू० 3,500 माह नौकरी है, इतने कम पैसों न तो वह अपने परिवार के लिए ठीक से भोजन और वस्त्रों की व्यवस्था कर पता है न मकान ही सुलभ कर पता है। नगरों में बसने वाले हजारों रामसन इसी तरह निर्धनता के दुष्चक्र में जीवन जीते थे। ग्रामीण निर्धनता - रामदास भूमिहीन होने के कारण प्रतिदिन भूपतियो के घर रोजगार पाने के लिए चक्कर लगाता है। उसे रुपए 50 प्रतिदिन की दहाड़ी पर किसानों के खेतों में काम करके अपने परिवार का पालन पोषण करना है। बलवान गांव से मरियल से घोड़ा वाली टांगे में सवारियां कस्बे तक ले जाता है। और शाम तक मारखाप कर ₹200 कम पता हैं। उसी आय से घोड़े का चारा तथा 6 लोगों के पेट पालने पर विवश रहता है।
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04 Feb 2026
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संत रविदास जयंती आज गुरु रविदास जयंती हैं। गुरु रविदास जयंती हर वर्ष पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह जानती गुरु रविदास के जन्मदिन के उपलक्ष में मनाई जाती है। गुरु रविदास का जन्म 1398 ई में हुआ था। गुरु रविदास एक आध्यात्मिक नेता थे। जिन्होंने समानता, एकता और ईश्वर के प्रति भक्ति का संदेश फैलाया। गुरु रविदास जी को संत रविदास जी के नाम से भी जाना जाता है। वे 14वीं शताब्दी के संत कवि और...
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संत रविदास जयंती आज गुरु रविदास जयंती हैं। गुरु रविदास जयंती हर वर्ष पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह जानती गुरु रविदास के जन्मदिन के उपलक्ष में मनाई जाती है। गुरु रविदास का जन्म 1398 ई में हुआ था। गुरु रविदास एक आध्यात्मिक नेता थे। जिन्होंने समानता, एकता और ईश्वर के प्रति भक्ति का संदेश फैलाया। गुरु रविदास जी को संत रविदास जी के नाम से भी जाना जाता है। वे 14वीं शताब्दी के संत कवि और समाज सुधारक थे। जिन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से जातिगत भेदभाव को चुनौती दी। संत रविदास जी, संत कबीर दास समकालीन थे। उन्हें कृष्णा भक्त मीराबाई के आध्यात्मिक गुरु के रूप में जाना जाता है। उन्होंने भक्ति आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका नभाई। उन्होंने सभी इंसानों को एक समान माना। उनका जीवन बेहद सरल और पवित्र था। संत रविदास की पुण्यतिथि पर लोग मंदिर जाकर भजन करते थे। उनके भक्त उनकी शिक्षाओं और भक्ति गीतों का पाठ करते हैं। इस अवसर पर कई श्रद्धालु गंगा नदी मैं पवित्र स्नान करते हैं। कई स्थान पर संत रविदास के संबंधित स्वभाव और विशेष परेड का आयोजन किया जाता है। यह जयंती केवल उत्सव नहीं, वास्तव में संत रविदास के ज्ञान और शिक्षाओं कोई याद करने और समाज में प्रेम एवं समानता की प्रेरणा देता है।
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sonusaini@gamil.com
01 Feb 2026
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