Company Logo

Vanshika

kumarivanshika01232@gmail.com
WEFRU9450291115202
Scan to visit website

Scan QR code to visit our website

Blog by Vanshika | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se
Digital Diary Submit Post Vanshika

The little fir tree

The little fir tree
Once a magician was returning home all of a sudden It begin to rain heavily he looked around for shelter and say a little fir Hiran tree and took shelter Soon it stopped raining the magician said to the tree thank you you have been kind to me I would like to reward you ask for four wishes, and I will Grand them", said the magician The fir tree ?had nedly like leaves and no birds ever made their ne... Read More
Once a magician was returning home all of a sudden It begin to rain heavily he looked around for shelter and say a little fir Hiran tree and took shelter Soon it stopped raining the magician said to the tree thank you you have been kind to me I would like to reward you ask for four wishes, and I will Grand them", said the magician The fir tree ?had nedly like leaves and no birds ever made their nests in it. So it said "I wish I had Green Leaves like my other friends. "  Next morning it's wish was  granted soon a got came alone and at all the Green Leaves oh! dear, "said the fir tree," I wish I had gold leaves. "  When the little Fir revoke up the next morning it was surprised to see the gold leaves a man came along and stole all the gold leaves.  This time the fir trees said "I wish I had glass man do not steal glass leaves at night the wild blew and all the glass leaves broke. The fir tree," said " I want my old nedly like Leaves back, so that goats do not eat them, man cannot  steal dam and wind cannot break them "  The tree went to slip when it work up the next morning its needly like leaves work back              again.  you should be happy with what you have   Thank you:-    
Read Full Blog
kumarivanshika01232@gmail.com 25 Jan 2026 191 Views

Alice in Wonderland

Alice in Wonderland
One day Alice was lying under a tree listening two her sister reading a story   Suddenly She saw a brown rabbit scamper by he had pink eyes and was wearing a Blue coat he took out a big watch from his waistcoat pocket and as he hurried away,he said," oh dear, I will be too late!" She thought there was something very different about this rabbit it could talk is wore a red waistcoat and it carried a... Read More
One day Alice was lying under a tree listening two her sister reading a story   Suddenly She saw a brown rabbit scamper by he had pink eyes and was wearing a Blue coat he took out a big watch from his waistcoat pocket and as he hurried away,he said," oh dear, I will be too late!" She thought there was something very different about this rabbit it could talk is wore a red waistcoat and it carried a watch alice wondered, "  A talking rabbit a rabbit who wears a waistcoat!" Alice was bruning with  coriosity and she followed the brown rabbit  The rabbit started running and Alice follow with the rabbit the rabbit suddenly popped down a large rabbit hole alice jumped into the rabbit hole too! The rabbit want down and down and down and down into the rabbit hole  Alice said aloud " where am I?how many Miles down have  I fallen? I must be getting somewhere near the centre of the earth. "  she wondered, " it will I slip  thought the earth to the other side? "   Thumb alice landed on a pile of dry leaves she looked around quickly and suddenly say the brown rabbit again it desappered saying oh my ears and whiskers! How late its getting alice student up and say a small door about 15 inches high it was to small 4 her to go thought  E se a glass table with a golden ki on ITE Si tried the little Golden key in the lock and to her delight it fitted alice opened the door and looked into the loveliest garden she had even seen how see longed to be among those bed of bride flowers and those cool fountains but she could not have and get her head throat the door way   "Oh! how I wish, I could became smaller! "she exclaimed loudly. -Adapted from a 'Alice in Wonderland' by  Lewis carroll  Thank you:-  
Read Full Blog
kumarivanshika01232@gmail.com 24 Jan 2026 139 Views

सितार – संगीत की रात

सितार – संगीत की रात
" प्रस्तुत कविता में केदारनाथ अग्रवाल द्वारा सीमित समारोह के अंतर्गत श्रोताओं की भाव धार का ममरूक चित्रण किया गया है " " यह कविता भी केदारनाथ जी ने ही प्रस्तुत की है" आग के ओट बोलते हैं                        सितार के बोल,                             खुलती चली जाती है                                       शहर की पंखुड़ियां,  चूमती उंगलियों के नृत्य पर,         राग पर राग करते हैं किलोल,          ... Read More
" प्रस्तुत कविता में केदारनाथ अग्रवाल द्वारा सीमित समारोह के अंतर्गत श्रोताओं की भाव धार का ममरूक चित्रण किया गया है " " यह कविता भी केदारनाथ जी ने ही प्रस्तुत की है" आग के ओट बोलते हैं                        सितार के बोल,                             खुलती चली जाती है                                       शहर की पंखुड़ियां,  चूमती उंगलियों के नृत्य पर,         राग पर राग करते हैं किलोल,                   रात के खुले वृक्ष पर,       चंद्रमा के साथ,  शताबदिया दिया जागती है                  अनंत की खिड़कियों से,         संगीत के समारहो में कोमार्य बरसता है,  हर्ष का हंस दूध पर तैरता है,            जिस पर सवार भूमि की सरस्वती     काव्य – लोग में विचरण करती है                                 धन्यवाद-  
Read Full Blog
kumarivanshika01232@gmail.com 23 Jan 2026 164 Views

अच्छा होता

अच्छा होता
 "प्रस्तुत कविता में केदारनाथ अग्रवाल ने मनुष्य के चरित्र गुना का मम्मिक चित्रण किया है" " यह कविता केदारनाथ जी ने लिखी है " अच्छा होता              अगर आदमी                           आदमी के लिए    प्रार्थी -                 पक्का -  और नियति का सच्चा होता                      न स्वार्थ का चहबच्चा -                                          न देगल–दागी -  नए चरित्र का कच्चा होता  अच्छा होता      ... Read More
 "प्रस्तुत कविता में केदारनाथ अग्रवाल ने मनुष्य के चरित्र गुना का मम्मिक चित्रण किया है" " यह कविता केदारनाथ जी ने लिखी है " अच्छा होता              अगर आदमी                           आदमी के लिए    प्रार्थी -                 पक्का -  और नियति का सच्चा होता                      न स्वार्थ का चहबच्चा -                                          न देगल–दागी -  नए चरित्र का कच्चा होता  अच्छा होता              अगरआदमी                        आदमी के लिए  दिलदार-            दिलेर -     और हृदय की थाती होता,  ना ईमान का घाती-                 ठगेत ठाकुर न मौत का बरसाती होता                                धन्यवाद:-  
Read Full Blog
kumarivanshika01232@gmail.com 23 Jan 2026 173 Views

केदारनाथ अग्रवाल

केदारनाथ अग्रवाल
" मैं आज आपको केदारनाथ अग्रवाल जी के बारे में बताना चाहती" हिंदी काव्य की प्रतिवादी धारा के मुंह धोने कवि केदारनाथ अग्रवाल का जन्म 1 अप्रैल सन 1911 ईस्वी में का मशीन गांव बड़ा उत्तर प्रदेश में हुआ था इन्होंने स्नातक इलाहाबाद विश्वविद्यालय इलाहाबाद से तथा एलएलबी की परीक्षा दव कॉलेज कानपुर से उतरें की हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा इन्हें 1989 ईस्वी में साहित्य वॉच संपति की मानव उपाधि तथा बुंदे... Read More
" मैं आज आपको केदारनाथ अग्रवाल जी के बारे में बताना चाहती" हिंदी काव्य की प्रतिवादी धारा के मुंह धोने कवि केदारनाथ अग्रवाल का जन्म 1 अप्रैल सन 1911 ईस्वी में का मशीन गांव बड़ा उत्तर प्रदेश में हुआ था इन्होंने स्नातक इलाहाबाद विश्वविद्यालय इलाहाबाद से तथा एलएलबी की परीक्षा दव कॉलेज कानपुर से उतरें की हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा इन्हें 1989 ईस्वी में साहित्य वॉच संपति की मानव उपाधि तथा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी द्वारा सन 1995 ईस्वी में डिलीट की उपाधि प्रदान की गई केदारनाथ जी के साहित्यिक अवदान का सम्मान करते हुए इन्हें समय पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा पुरस्कार किया गया जिम शोभित लैंड नेहरू पुरस्कार उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ का विशिष्ट सम्मान साहित्य अकादमी सम्मान मध्य प्रदेश साहित्य परिषद भोपाल का तुलसी एवं मैथिलीशरण गुप्त सम्मान प्रमुख है   बहुमुखी प्रतिभा के धनी केदारनाथ जी ने जिन विभिन्न विधाओं में साहित्य रचना की उनमें निबंध उपन्यास यात्रा वृतांत पत्र साहित्य और कविताएं मुख्य रूप से सम्मिलित है इन्होंने कल 24 काव्य संग्रह हो एक अनुवाद तीन निबंध संग्रह दो यात्रा तथा एक पत्र साहित्य की रचना की उनके इस रचना संसार का विस्तार सन 1947 ई से लेकर 1996 ई तक है इनका प्रथम काव्य संग्रह युग की गंगा सन 1979 तक है इनका निधन 22 जून सन 2000 ई को हुआ   धन्यवाद-
Read Full Blog
kumarivanshika01232@gmail.com 22 Jan 2026 166 Views

शिवमंगल सिंह सुमन

शिवमंगल सिंह सुमन
 "मैं आज आपको शिवमंगल सिंह सुमन के बारे में बताना चाहती हूं"  जन्म- हिंदी साहित्य में प्रगतिशील लेखन के अग्रणी एवं धरनी विद्वान शिवमंगल सिंह सुमन प्रसिद्ध कवि एवं शिक्षाविद थे इनका जन्म 5 अगस्त सन 1915 ई को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के जागीरपुर में हुआ था  शिक्षा- सुमन जी की प्रारंभिक शिक्षा उन्नाव जिले में ही हुई इन्होंने हिंदी विषय में मां पीएचडी की उपाधि अर्जित की बनारस हिंदू विश्वविद्यालय द्... Read More
 "मैं आज आपको शिवमंगल सिंह सुमन के बारे में बताना चाहती हूं"  जन्म- हिंदी साहित्य में प्रगतिशील लेखन के अग्रणी एवं धरनी विद्वान शिवमंगल सिंह सुमन प्रसिद्ध कवि एवं शिक्षाविद थे इनका जन्म 5 अगस्त सन 1915 ई को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के जागीरपुर में हुआ था  शिक्षा- सुमन जी की प्रारंभिक शिक्षा उन्नाव जिले में ही हुई इन्होंने हिंदी विषय में मां पीएचडी की उपाधि अर्जित की बनारस हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा इन्हें सन 1905 डिलीट की उपाधि से सम्मानित किया गया  व्यक्तित्व एवं कृति तत्व- डॉ शिवमंगल सिंह सुमन विशिष्ट प्रतिभा के धनी स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के दीवाने एवं सच्चे देशभक्त थे उनके व्यक्तित्व की एक महत्वपूर्ण विशेषता थी कि मैं अपनी सहजता में गंभीरता को छुपाए रखते थे सरल स्वभाव के डॉक्टर सुमन जी अपने प्रशंसा को से कहा करते थे कि मैं विद्वान नहीं बन पाया बस उसकी डेहरी को चुप भर पाया हूं यह एक प्रिय अध्यापक कुशल प्रशासक प्रखर चिंतक और विचारक थे बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉक्टर सुमन जी ने विभिन्न बढ़ाओ में अपनी लेखनी चलाई है इन्होंने 9 काव्य संग्रह एवं उनके वरणीय विश्व पर आधारित कविताओं का लेखन किया है जिसमें कुछ प्रमुख है  काव्या संग्रह- हिलोल,जीवन के गान, युग का माल, प्रलय सर्जन, विश्वास बढ़ता ही गया, विधि हिमाचल मिट्टी की बारात, वाणी की व्यवस्था कटिंग उठो की वंदन वाले आदि    कविताएं -जल रहे दीप,जल रही जवानी पटवार,असमर्जस,युगवाणी वरदान मांगूंगा नहीं इत्यादि उनकी कुछ प्रमुख कविताएं हैं   गद्य रचनाएं - गीति काव्य : उगम और विकास,महादेवी की काव्य साधना   नाटक- प्रकृति पुरुष कालिदास  साहित्यिक परिचय- शिवमंगल की मुख्य शिक्षा क्षेत्र से है जीवन जुड़े रहे इन्होंने सन 1968 से 78 के दौरान विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में कुलपति के रूप में अपनी सेवाएं दी उत्तर प्रदेश हिंदी संस्था लखनऊ के उपराष्ट्रपति सन 1956 से 61 के दौरान प्रेस और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जुड़े रहे भारतीय दूतावास काठमांडू नेपाल भारतीय विश्वविद्यालय का संघ व कालिदास अकादमी उज्जैन के कार्यकारी अध्यक्ष थे  हिंदी साहित्य में उनके विशिष्ट योगदान के लिए इनको विभिन्न साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया मिट्टी की बारात इसकी प्रसिद्ध काव्य कृति के लिए सन 1974 में साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया पद्मश्री पद्म भूषण सोवियत भूमि नेहरू पुरस्कार सरकार भारत भारतीय पुरस्कार इत्यादि अन्य पुरस्कार से नवाजा गया  हिंदी के महान सेवक प्रगतिवाद के संदर्भ शिवमंगल सिंह सुमन की लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचने के बाद 27 नंबर सन 2002 ई कोडल का दौरा पड़ने से चीन निद्रा में लीन हो गए उनकी मृत्यु पर भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति ने कहा था कि डॉक्टर शिवमंगल सिंह सुमन केवल हिंदी कविता के क्षेत्र में एक शक्तिशाली हस्ताक्षर नहीं थे बल्कि में अपने युग की सामूहिक चेतना के संरक्षक नहीं थे  धन्यवाद
Read Full Blog
kumarivanshika01232@gmail.com 22 Jan 2026 272 Views

नागार्जुन

नागार्जुन
जनजीवन कवि और प्रसिद्ध समाजवादी और नागार्जुन का वास्तविक नाम वेदनाथ मिश्र था परंतु पहले यह यात्री नाम से लिखा करते थे कालांतर में बौद्ध धर्म में प्रभावित होकर महात्मा बुद्ध के प्रसिद्ध शिष्य के नाम पर इन्होंने अपना नाम "नागार्जुन" रख लिया  नागार्जुन का सन 1911 ईस्वी में बिहार राज्य के दरभंगा जिले के सतलाखा गांव में हुआ था आरंभिक जीवन अभाव से ग्रस्त रहा घर की दैनिक आर्थिक स्थिति के कारण उनकी शिक्षा... Read More
जनजीवन कवि और प्रसिद्ध समाजवादी और नागार्जुन का वास्तविक नाम वेदनाथ मिश्र था परंतु पहले यह यात्री नाम से लिखा करते थे कालांतर में बौद्ध धर्म में प्रभावित होकर महात्मा बुद्ध के प्रसिद्ध शिष्य के नाम पर इन्होंने अपना नाम "नागार्जुन" रख लिया  नागार्जुन का सन 1911 ईस्वी में बिहार राज्य के दरभंगा जिले के सतलाखा गांव में हुआ था आरंभिक जीवन अभाव से ग्रस्त रहा घर की दैनिक आर्थिक स्थिति के कारण उनकी शिक्षा दीक्षा का समुचित प्रबंध न हो सका गांव की ही संस्कृत पाठशाला में इनके प्रारंभिक शिक्षा हुई जीवन के इन्हीं अभाव ने इन्हें शोषण के प्रति विरोध की भावनाओं से भर दिया साथ ही जीवन में घटित दुखद घटनाओं ने इन्हें मानव मात्र का दुख समझने की क्षमता प्रदान की यह घूम तो पार्वती के व्यक्ति थे तथा देश विदेश में घूमते हुए यह सन 1936 ईस्वी में श्रीलंका जा पहुंचे और महा संस्कृत के आचार्य बन गए स्वाध्याय से ही इन्होंने अनेक भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया श्रीलंका प्रवास में ही इन्होंने बौद्ध धर्म की दीक्षा ले ली सन 1941 ईस्वी में भारत लौट आए अपने निर्भर एक और कटु सत्य संभाषण के कारण नागार्जुन जी ने कई बार जेल यात्रा भी की स्वतंत्र भारत में भी इन्हें अपने विद्रोही प्रवृत्ति के कारण जेल जाना पड़ा तत्कालीन सत्संग राजनीतिक दल कि इन्होंने खुलकर आलोचना की अतः इन्हें जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा उनकी जय यात्राओं का एकमात्र प्रमुख कारण यही था इनका निधन 87 वर्ष की अवस्था में 5 नवंबर 1998 ई को हुआ  विद्रोही कवि नागार्जुन जी ने जीवन के कठोर यथार्थ एवं कल्पना पर आधारित अनेक कृतियों का सृजन किया स्वयं अभाव में जीवन व्यतीत करने के कारण उनके हृदय में समाज के पीड़ित वर्ग के प्रति सहानुभूति का भाव विज्ञान था अपने स्वार्थ के लिए दूसरों का शोषण करने वाले व्यक्तियों के प्रति उनके मन में विद्रोह की ज्वाला भरी थी सामाजिक विषमताओं शोषण और वर्ग संघर्ष पर उनकी लेखनी निरंतर आग उगलती रही अपनी कविताओं के माध्यम से इन्होंने दलित पंडित और शोषित वर्ग को अन्य नीति और अत्याचार का विरोध करने की प्रेरणा दी अपने स्वतंत्र एवं निर्भीक विचारों के कारण इन्होंने हिंदी साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएं समसैक राजनीति प्रेम और प्रकृति सौंदर्य पर भी उनकी अनेक रचनाएं बड़ी लोकप्रिय हुई उनकी गणना वर्तमान युग के प्रमुख वैज्ञानिक कारण में की जाती है प्रगतिवादी कवियों में इनका महत्वपूर्ण स्थान है  नागार्जुन समाजवाद की स्थापना का संपन्न देखने वाले जीवन जनता और श्रम के गतिक आने वाले यथार्थवादी कवि है अपनी सनातनी प्रसन्नता के कारण उनकी रचनाओं को किसी बात को सीमा में नहीं बांधा जा सकता उनके स्वतंत्र व्यक्ति तत्व की तरह उनकी रचनाएं भी स्वतंत्र अभिव्यक्ति के रूप में प्रतिष्ठ है सन 1945 ईस्वी में इनका साहित्य के क्षेत्र में "हुआ अब तक उनकी अनेक कृतियां प्रकाशित हो चुकी है इनके प्रकाशित कृतियों में पहला वर्ग उपन्यास का है और दूसरा वर्ग कविताओं का प्रीति नाथ की चाची बालचांदमा नई पौध बाबा बटेश्वर नाथ दुख मोचन और वरुण के बेटे उनके प्रसिद्ध उपन्यास है युग धारा इनका प्रारंभिक काव्य संकलन हैइनका प्रारंभिक काव्य संकलन है सतरंगी पंखों वाली में प्रकृति का मन अमेरिका चित्रण हुआ है प्यासी पत्री आंखों तथा खून और शोले आदि कविता संग्रह में प्रेम और प्रकृति चित्रण में संबंधित सुकुमार ओजस्वी कविता संकट है इन कविताओं के माध्यम से इन्होंने समाज की व्यवस्था से जुंजते सर्वहारा वर्ग की व्यथा की करुण गाथा को व्यक्त किया है बासमपुर नागार्जुन का प्रसिद्ध पौराणिक खंड काव्य है इसमें भस्मासुर की पुरानी कथा को नए रूप में प्रस्तुत किया गया है इसमें स्थान स्थान पर प्रेम सौंदर्य वह प्रकृति के क्षेत्र अत्यंत सुंदर रूप में चित्र हुए हैं 
Read Full Blog
kumarivanshika01232@gmail.com 22 Jan 2026 187 Views

हरिवंश राय बच्चन

हरिवंश राय बच्चन
"मैं आज आपको हरिवंश राय बच्चन के बारे में बताने जा रही हूँ -" हिंदी साहित्य में हलवादी काव्य के प्रवर्तक डॉक्टर हरीश वंश राय बच्चन का जन्म प्रज्ञा के एक सम्मानित कार्यस्ट परिवार में सन 1960 ईस्वी में हुआ था उनके पिता का नाम प्रताप नारायण था माता-पिता की धार्मिक रुचियां में संस्कारों का उनके जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा उनकी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू माध्यम से हुई इन्होंने वाराणसी वह प्रयाग में शिक्षा... Read More
"मैं आज आपको हरिवंश राय बच्चन के बारे में बताने जा रही हूँ -" हिंदी साहित्य में हलवादी काव्य के प्रवर्तक डॉक्टर हरीश वंश राय बच्चन का जन्म प्रज्ञा के एक सम्मानित कार्यस्ट परिवार में सन 1960 ईस्वी में हुआ था उनके पिता का नाम प्रताप नारायण था माता-पिता की धार्मिक रुचियां में संस्कारों का उनके जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा उनकी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू माध्यम से हुई इन्होंने वाराणसी वह प्रयाग में शिक्षा प्राप्त की लागत विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में मां और कमी ब्रिज विश्वविद्यालय में इन्होंने एचडी की उपाधि प्राप्त किया अनेक वर्षों तक प्रयाग विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के पर्याध्यापक रहे कुछ समय तक यह आकाशवाणी के साहित्य कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे सन 1955 ईस्वी में यह विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ के पद पर आसीन हुए सन 1966 ईस्वी में इन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया गया  हरिवंश राय बच्चन तत्कालीन वातावरण से प्रभावित होकर युवा कल में ही पढ़ाई छोड़कर राष्ट्रीय आंदोलन में कूद पड़े आर्थिक दशा ठीक ना होने के कारण उनकी पत्नी का ऐसा अध्याय रोग से असम में निधन हो गया पत्नी के वियोग ने इन्हें निराशा वह दुख से भर दिया किंतु कुछ समय पश्चात इन्होंने तेजी बच्चन से दूसरा विवाह करके पुणे नए सुख और संपन्नता से परिपूर्ण जीवन का आरंभ किया इलाहाबाद के इस प्रवृतक का 18 जनवरी सन 2003 को निधन हो गया  छायावादोत्तर काल के विख्यात कवियों में हरि वंश राय का महत्वपूर्ण स्थान है इन्होंने श्रृंगार के सहयोग एवं योग दोनों ही पशुओं का सुंदर वर्णन किया है उल्लास एवं वेदना पर आधारित उनकी कविताएं अत्यंत हृदय स्पर्शी है अमर खाग्यं की रूपों पर आधारित उनकी कृति मधुशाला ने इन्हें सर्वाधिक या स्पर्द्धन किया है उनकी यह रचना सामान्य जन्म जीवन में अत्यंत लोकप्रिय हुई एक प्रकार से इसी रचना से हिंदी में इलाहाबाद नाम से एक नए युग का सूत्रपात हुआ इन्होंने हिंदी काव्य को स्वच्छता पूर्ण शैली में जनसाधारण तक पहुंचाने का स्थिति कार्य किया बच्चन जी ने यथा थारपरक विचारधारा के समावेश द्वारा हिंदी गीतों को नवीन दिशा प्रदान की उनकी गणना छायावादी कवि के रूप में भी की जाती है मानवीय श्वेत नाम की स्वाभाविक अभिव्यक्तियों में इन्हें पर्याप्त सफलता प्राप्त हुई सफलता संभावित संगीता आत्मकथा और ममिता उनके काव्य की प्रमुख विशेषता है उनकी रचनाएं पाठ को एक स्रोतों को मंत्र मुकेश कर देने में समक्ष है मूल्य व्यक्तिवादी कवि होते हुए भी इन्होंने अपने काव्य में सामाजिक जनजीवन के मनोभाव को अभिव्यक्ति प्रदान की है  डॉक्टर हरिवंश राय बच्चन की प्रथम काव्य कृति तेरा हर का प्रकाशन सन् 1932 ईस्वी में हुआ इसके पश्चात इनके मधुशाला मधुबाला मधु कलर्स - यह तीनों संग्रह प्रकाशित हुए हिंदी में इन्हें इलाहाबाद की संख्या से अभिहित किया गया इन कविताओं में मानक प्रेमी और आपसी वैमनस्य से उत्पन्न पीड़ा की कसक है यह कविताएं जीवन के दुखों को बुलाने में सहायक है हिंदी में इन्हें इलाहाबाद की संख्या से अभिहित किया गया इन कविताओं में मानक प्रेमी और आपसी वैमनस्य से उत्पन्न पीड़ा की कसक है यह कविताएं जीवन के दुखों को बुलाने में सहायक है निशा नाम निमंत्रण और एकांत संगीत में कवि के हृदय की पीड़ा साकार हो उठी है यह करती हो इसके सर्वोच्च कष्ट काव्य रचना में सम्मिलित है सतरंगिणी एवं मिलन या मनी इनके उल्लास तथा श्रृंगार रस से परिपूर्ण गीतों के संग्रह  अपनी सभी रचनाओं में बच्चन जी ने अपने व्यक्तिवादी अनुभव को अभिव्यक्ति दी है अतः इन्हें व्यक्तिवादी कवि कहा जा सकता है किंतु बंगाल का कल और इसी प्रकार की अन्य रचनाओं में इन्होंने जनजीवन के क्रियाकलापों एवं अनुभव का भी प्रभावपूर्ण सुंदर चित्रण क्या है अतः इन्हें मानवतावादी खाने में भी कोई दुविधा नहीं है  धन्यवाद-
Read Full Blog
kumarivanshika01232@gmail.com 21 Jan 2026 318 Views

Mother Earth

Mother Earth
The earth is my mother.  She is good to me.  She gives me everything that I ever need.  Food on the table,the clothes I wear.  The sun and the water And the cool fresh air,  The great provider for me and you.  Her ways and gently, her life is strong   Living in turn like a beautiful song,  The earth is my mother and my best friend too.  The great provider for me and you.  The earth is my mother.  ... Read More
The earth is my mother.  She is good to me.  She gives me everything that I ever need.  Food on the table,the clothes I wear.  The sun and the water And the cool fresh air,  The great provider for me and you.  Her ways and gently, her life is strong   Living in turn like a beautiful song,  The earth is my mother and my best friend too.  The great provider for me and you.  The earth is my mother.  She is good to me.  Earth day is celebrated on 22nd April 
Read Full Blog
kumarivanshika01232@gmail.com 21 Jan 2026 128 Views

सोहनलाल द्विवेदी

सोहनलाल द्विवेदी
"मैं आज आपको सोहन लाल द्विवेदी जी के बारे में बताऊंगी " राष्ट्रकवि की उपाधि से विभूषित सोहनलाल द्विवेदी का जन्म स्थान 1906 में फतेहपुर जिले के बंदगी नामक कस्बे में एक संपन्न ब्राह्मण परिवार में हुआ था उनके पिता का नाम वृंदावन प्रसाद द्विवेदी था उनकी हाई स्कूल तक की शिक्षा फतेहपुर में तथा उच्च शिक्षा काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में संपन्न हुई इन्होंने यहां से एमए एलएलबी की उपाधियां प्राप्त की... Read More
"मैं आज आपको सोहन लाल द्विवेदी जी के बारे में बताऊंगी " राष्ट्रकवि की उपाधि से विभूषित सोहनलाल द्विवेदी का जन्म स्थान 1906 में फतेहपुर जिले के बंदगी नामक कस्बे में एक संपन्न ब्राह्मण परिवार में हुआ था उनके पिता का नाम वृंदावन प्रसाद द्विवेदी था उनकी हाई स्कूल तक की शिक्षा फतेहपुर में तथा उच्च शिक्षा काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में संपन्न हुई इन्होंने यहां से एमए एलएलबी की उपाधियां प्राप्त की यही महान यह सभी महान मदन मोहन मालवीय के सत्संग में इनमें राष्ट्रीय भावना के अंकुर जागृत हुई और यह राष्ट्रीय भावना पर आधारित कविताएं लिखने लगे साहित्य प्रेम इन्हें जन्मजात प्राप्त हुआ था कानपुर विश्वविद्यालय में इन्होंने सन 1976 ईस्वी में डिलीट की उपाधि प्राप्त की माखनलाल चतुर्वेदी की प्रेरणा से इनमें राष्ट्र प्रेम और साहित्य सृजन की भावना बदलती बदलती हुई सन 1938 ईस्वी से 1942 ई तक यह दैनिक राष्ट्रीय पत्रकार अधिकार का लखनऊ से संपादन करते रहे कुछ वर्षों तक इन्होंने बाल सखा का वैधानिक संपादन भी किया   द्विवेदी जी में जन्म से ही कई प्रतिभा विद्यमान थी अपने विद्यार्थी जीवन से ही इन्होंने कविताएं लिखनी प्रारंभ कर दी अपनी कविताओं के माध्यम से इन्होंने देश के नवयुवकों में है भूतपूर्व उत्साह एवं देश प्रेम की भावना का संचार किया इन्होंने बाल सखा नामक मासिक बाल पत्रिका का संपादन भी किया गांधीजी से ही विशेष रूप से प्रभावित थे इसी कारण उनके काव्य में गांधीवादी विचारधारा के दर्शन होते हैं सन 1942 ईस्वी में इनका पहला काव्य संग्रह भैरवी प्रकाशित हुआ बालकों को संस्कारित करने एवं उसमें राष्ट्रीय तथा मानव प्रेम की भावना जगाने के उद्देश्य में इन्होंने श्रेष्ठ साहित्य का सृजन किया   द्विवेदी जी ने स्वाधीनता आंदोलन में भी सक्रिय रूप से भाग लिया अपनी पौराणिक एवं राष्ट्रीय प्रेम की रचनाओं के कारण यह जनता तथा कवि सम्मेलनों में सदैव सामान प्राप्त करते रहे इन्होंने कभी भी साहित्य सेवा को व्यवसाय के रूप में स्वीकार नहीं किया स्वतंत्रता के पश्चात भी गांधीवाद की मशाल को जलाए रखने वाले यह अनुपम कवि अयोध्या थे इनका निधन 19 फरवरी सन 1988 ई को हुआ   हिंदी साहित्य की उन्नति एवं समृद्धि हेतु इन्होंने अंत तक साहित्य साधना की उनकी प्रथम कृति भैरवी में सब देश प्रेम के भाव की प्रधानता है वासवादाता में भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव का भाव झलकता है इनके द्वारा रचित कुड़ाल प्रबंध काव्य ऐतिहासिक आधार लिए हुए हैं पूजा के स्वर के माध्यम से द्विवेदी जी ने जनता में नव जागृति उत्पन्न करते हुए एक युग पर दी निधि कवि के रूप में चतुर्थी कार्य किया पूजा गीत विश्व पान यशोधर व शांति तथा चित्र उनकी राष्ट्रीय चेतना से उत्प्रोत अन्य रचनाएं हैं बाल साहित्य के रूप में उनकी लोकप्रिय बाल रचना है बांसुरी और झरना बच्चों के बापू दूध बताशा बल भारती शिशु भारती हंसो हंसो तथा नेहरू चाचा  धन्यवाद:-
Read Full Blog
kumarivanshika01232@gmail.com 20 Jan 2026 281 Views