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Vanshika

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Blog by Vanshika | Digital Diary

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आएइ जाने की प्रोटीन के कार्य


 प्रोटीन के कार्य:-  1.प्रोटीन पोषक तत्वों का संवहन करते हैं   2.प्रोटीन के द्वारा प्रतिरक्षी कोशिकाओं का निर्माण होता है  3. प्रोटीन शरीर का निर्माण करता है प्रोटीन से शरीर की वृद्धि तथा शरीर में होने वाले टूट-फूट का पुनर्निर्माण संभव होता है 4. प्रोटीन चोट लगने के समय होने वाले रक्त प्रभाव को रोकते हैं 5. प्रोटीन के ऑक्सीकरण से ऊर्जा प्राप्त होती है 6. सभी एंजाइम्स प्रोट... Read More

 प्रोटीन के कार्य:-

 1.प्रोटीन पोषक तत्वों का संवहन करते हैं 

 2.प्रोटीन के द्वारा प्रतिरक्षी कोशिकाओं का निर्माण होता है 

3. प्रोटीन शरीर का निर्माण करता है प्रोटीन से शरीर की वृद्धि तथा शरीर में होने वाले टूट-फूट का पुनर्निर्माण संभव होता है

4. प्रोटीन चोट लगने के समय होने वाले रक्त प्रभाव को रोकते हैं

5. प्रोटीन के ऑक्सीकरण से ऊर्जा प्राप्त होती है

6. सभी एंजाइम्स प्रोटीन द्वारा निर्मित होते हैं

7. रक्त में पाए जाने वाला पदार्थ हीमोग्लोबिन प्रोटीन पर आधारित होता है

8. आवश्यकता से अधिक प्रोटीन लेने पर यह व्हाट्सएप में परिवर्तित हो जाता है तथा गार्बेज के अभाव में यही वसा तथा एकत्रित प्रोटीन ऑक्सीजन के फल स्वरुप ऊर्जा प्रदान करता है

 धन्यवाद


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  • Author:- kumarivanshika01232@gmail.com
  • Date:- 2026:02:22
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आएइ जाने की प्रोटीन क्या है और प्रोटीन का वर्गीकरण


 प्रोटीन:-  प्रोटीन जीवन के लिए सबसे अधिक आवश्यक तत्व होता है इसके बिना जीवन संभव है प्रोटीन की रचना कार्बन हाइड्रोजन ऑक्सीजन नाइट्रोजन तथा गंधक से होती है इसमें कुछ अंश फास्फोरस का भी होता है प्रोटीन शरीर निर्माण भजन तत्व है प्रोटीन की इकाई अमीनो एसिड कहलाती है प्रोटीन में नाइट्रोजन की मात्रा 13 से 20% तक होती है  प्रोटीन का वर्गीकरण:-  विभिन्न स्रोतों के आधार पर प्रोटीन को दो... Read More

 प्रोटीन:-

 प्रोटीन जीवन के लिए सबसे अधिक आवश्यक तत्व होता है इसके बिना जीवन संभव है प्रोटीन की रचना कार्बन हाइड्रोजन ऑक्सीजन नाइट्रोजन तथा गंधक से होती है इसमें कुछ अंश फास्फोरस का भी होता है प्रोटीन शरीर निर्माण भजन तत्व है प्रोटीन की इकाई अमीनो एसिड कहलाती है प्रोटीन में नाइट्रोजन की मात्रा 13 से 20% तक होती है

 प्रोटीन का वर्गीकरण:-

 विभिन्न स्रोतों के आधार पर प्रोटीन को दो भागों में बांटा गया है

 जंतु प्रोटीन:- यह प्रोटीन जंतु जगत से प्राप्त होता है जैसे दूध दूध से बने पदार्थ पनीर दही मांस मछली तथा एंड आदि इस प्रकार का प्रोटीन उत्तम प्रोटीन कहलाता है तथा शारीरिक वृद्धि एवं भरण पोषण के लिए सहायक है 

 वनस्पति प्रोटीन :- यह प्रोटीन वनस्पति जगत से प्राप्त होता है जैसे अनाज दालें में वह फल सब्जी आदेश प्रकार के प्रोटीन से वृद्धि तो संभव है पर विकास नहीं

 प्राप्ति के स्रोत:-  प्रोटीन प्राप्ति के विभिन्न स्रोत है इसे पशु जगत तथा वनस्पति जगत दोनों से ही प्राप्त किया जा सकता है प्रत्येक प्रकार के मांस अंडे मछली दूध तथा दूध से बनी हुई वस्तुओं में भरपूर मात्रा में प्रोटीन होती है वनस्पति जगत में मुख्य रूप से सोयाबीन मटर तथा दलों आदि में पर्याप्त प्रोटीन होती है मूंगफली गेहूं धान आदि के अतिरिक्त गाजर शलजम पत्ता गोभी पालक आदि कुछ साथ सब्जी में विभिन्न मात्रा में प्रोटीन पाई जाती है

 धन्यवाद


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  • Author:- kumarivanshika01232@gmail.com
  • Date:- 2026:02:22
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आहार का अर्थ एवं परिभाषा


 आहार का अर्थ है परिभाषा-  भूख लगा प्राणी मात्र का एक नेस ग्रीक लक्षण है जो कुछ भी खाक पदार्थ ग्रहण करने से भूख शांत हो जाए साधारण उसे आहार कहा जाता है उदाहरण के लिए किसी प्रणीय मनुष्य को भूख लगे और वह कोई फलिया कंदमूल खा ले तथा उसकी बुक शांत हो जाए तो उसे फल या कंदमूल को उसका आहार कहां जाएगा अतः जो सामग्री ग्रहण करने से प्राणी एवं मनुष्य की भूख शांत हो जाए वह सामग्री आहार है आहार का यह... Read More

 आहार का अर्थ है परिभाषा-

 भूख लगा प्राणी मात्र का एक नेस ग्रीक लक्षण है जो कुछ भी खाक पदार्थ ग्रहण करने से भूख शांत हो जाए साधारण उसे आहार कहा जाता है उदाहरण के लिए किसी प्रणीय मनुष्य को भूख लगे और वह कोई फलिया कंदमूल खा ले तथा उसकी बुक शांत हो जाए तो उसे फल या कंदमूल को उसका आहार कहां जाएगा अतः जो सामग्री ग्रहण करने से प्राणी एवं मनुष्य की भूख शांत हो जाए वह सामग्री आहार है आहार का यह अर्थ अति साधारण एवं आशिक है मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है उसने आहार के विषय में व्यापक अध्ययन किया तथा ज्ञात किया कि इसका एकमात्र उद्देश्य भूख मिटाना ही नहीं वास्तव में आहार के विभिन्न उद्देश्य है यह हमारी भूख को तो शांत करता ही है इसके अतिरिक्त यह शरीर को शक्तियां ऊर्जा प्रदान करता है इसकी वृद्धि एवं विकास में योगदान देता है उसके रखरखाव के साथ उसकी रोगों से बचने की क्षमता भी प्रदान करता है इन सांसद उद्देश्यों की पूर्ति करने वाले सामग्री को आहार कहते हैं 

 निष्कर्ष रूप से हम कह सकते हैं कि" वह ठोस या तरल सामग्री आहार कहलाती है जिसे ग्रहण करने से भूख मिटी है शरीर शक्ति प्राप्त करता है इसकी वृद्धि एवं विकास होता है उसके अंदर होने वाले टूट-फूट की मरम्मत होती है तथा रोगों से लड़ने की क्षमता प्राप्त होती है" इसके अतिरिक्त और ग्रहण करने से एक विशेष प्रकार की टरपट्टी या संतुष्टि भी प्राप्त होती है

 धन्यवाद


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  • Author:- kumarivanshika01232@gmail.com
  • Date:- 2026:02:21
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आहार के पोषक तत्व


 आहार के पोषक तत्व :-  प्रस्तावना- " प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा खनिज लवण जल तथा विटामिन आदि आहार के पोषक तत्व कहलाते हैं"  आर्य भोजन ग्रहण करने का उद्देश्य भूख शांत करने के साथ-साथ अनिवार्य रूप से शरीर का पोषण करना भी है आहार द्वारा शरीर का पोषण एक निश्चित प्रक्रिया के माध्यम से होता है इस प्रक्रिया के मुख्य रूप से दो भाग है प्रथम भाग है आहार का पाचन तथा द्वितीय भाग है पोश... Read More

 आहार के पोषक तत्व :-

 प्रस्तावना-

" प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा खनिज लवण जल तथा विटामिन आदि आहार के पोषक तत्व कहलाते हैं"

 आर्य भोजन ग्रहण करने का उद्देश्य भूख शांत करने के साथ-साथ अनिवार्य रूप से शरीर का पोषण करना भी है आहार द्वारा शरीर का पोषण एक निश्चित प्रक्रिया के माध्यम से होता है इस प्रक्रिया के मुख्य रूप से दो भाग है प्रथम भाग है आहार का पाचन तथा द्वितीय भाग है पोशाक तत्व ऑन का शोषण आहार के पाचन के अंतर्गत ग्रहण किए गए जटिल भोज्य पदार्थों को सरल तथा गलत अवस्था में परिवर्तन किया जाता है पचे हुए आहार में विद्यमान पोषक तत्वों को शरीर द्वारा आत्मसात कर लेने की क्रिया को पोषक तत्वों का शोषण कहा जाता है हमारे आहार में मुख्य पोषक तत्व है प्रोटीन वसा तथा कार्बोहाइड्रेट

धन्यवाद


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  • Date:- 2026:02:21
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सोने तथा चांदी के तंतु


 सोने तथा चांदी के तंतु -  सोने तथा चांदी के तंतुओं से वस्त्र निर्माण की कला अति प्राचीन है इन वेस्टन के तंतु विशेष धातुओं से खींचे गए तार होते हैं जालीदार व किम ख्वाब के वस्त्र सोने में चांदी जैसी धातुओं से तंतु खींचकर बनाए जाते हैं यह वस्त्र बहुत कीमती होते हैं पहले धातुएं सस्ती होती थी और लोग आसानी से उनके बने वस्त्र पहनते थे परंतु अब यह धातुए अधिक मूल्यवान हो गई है अब लोग स्टील के ता... Read More

 सोने तथा चांदी के तंतु -

 सोने तथा चांदी के तंतुओं से वस्त्र निर्माण की कला अति प्राचीन है इन वेस्टन के तंतु विशेष धातुओं से खींचे गए तार होते हैं जालीदार व किम ख्वाब के वस्त्र सोने में चांदी जैसी धातुओं से तंतु खींचकर बनाए जाते हैं यह वस्त्र बहुत कीमती होते हैं पहले धातुएं सस्ती होती थी और लोग आसानी से उनके बने वस्त्र पहनते थे परंतु अब यह धातुए अधिक मूल्यवान हो गई है अब लोग स्टील के तारों का प्रयोग करने लगे हैं उनकी चमक खराब नहीं होती है

 धन्यवाद


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  • Date:- 2026:02:21
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असली रेशम की पहचान


 असली रेशम की पहचान  1.जलने पर बालों के जलने जैसी गंध आती है 2. अम्ल के घोल में डालने पर गुल जाएगा  3.तंतु जलने पर कई गोली सा बन जाता है   धन्यवाद Read More

 असली रेशम की पहचान

 1.जलने पर बालों के जलने जैसी गंध आती है

2. अम्ल के घोल में डालने पर गुल जाएगा

 3.तंतु जलने पर कई गोली सा बन जाता है 

 धन्यवाद


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  • Author:- kumarivanshika01232@gmail.com
  • Date:- 2026:02:20
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उन क्या है


 उन क्या है -  यह तंतु पशुओं के बालों तथा रोग से प्राप्त होता है जिन जानवरों के शरीर पर लंबे बाल होते हैं उनके बालों को मशीनों द्वारा खींच लिया जाता है अंगोरा बकरी तथा भेद के में मन से पश्मीना ऊन प्राप्त की जाती है यह उन बहुत मुलायम तथा बहुत गर्म होती है उनको गर्मी का कुछ अलग कहा जाता है उनका तंतुला चिल तथा मजबूत होता है इसमें चमक नहीं होती है बढ़िया उन तंतु की लंबाई 5 से 12 सेंटीमीटर तथ... Read More

 उन क्या है -

 यह तंतु पशुओं के बालों तथा रोग से प्राप्त होता है जिन जानवरों के शरीर पर लंबे बाल होते हैं उनके बालों को मशीनों द्वारा खींच लिया जाता है अंगोरा बकरी तथा भेद के में मन से पश्मीना ऊन प्राप्त की जाती है यह उन बहुत मुलायम तथा बहुत गर्म होती है उनको गर्मी का कुछ अलग कहा जाता है उनका तंतुला चिल तथा मजबूत होता है इसमें चमक नहीं होती है बढ़िया उन तंतु की लंबाई 5 से 12 सेंटीमीटर तथा खराब उनके लंबाई 12 सेंटीमीटर से अधिक होती है उनके वस्त्र तप को शरीर से बाहर नहीं निकलने देते हैं यही कारण है कि सर्दी में उन निर्मित वस्त्र पहने जाते हैं

 उन के तंतु में सल्फर पाया जाता है इसमें ऑक्सीजन नाइट्रोजन हाइड्रोजन कार्बन तथा सल्फर के सहयोग से कैरोटीन नामक प्रोटीन का निर्माण होता है इसकी अनुप्रस्थ काट का आकार गोल और अंडाकार होता है उनके तंतु में कुछ टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं दिलाई  देती है 

 धन्यवाद 


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  • Author:- kumarivanshika01232@gmail.com
  • Date:- 2026:02:20
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प्राणी जगत से प्राप्त तंतु


 प्राणी जगत से प्राप्त तंतु-  इन तंतुओं की उत्पत्ति जीव जंतु जगत से होती है इसलिए इनको केंद्रीय जनता तंतु कहते हैं यह प्रोटीन निर्मित तंतु है इनके दो प्रमुख उदाहरण उन और रेशम है इसके बारे में मैं आपको इस ब्लॉग मैं मैं आपको रेशम के बारे में बताऊंगी और अगर आपको उनके बारे में जानना है तो मैं आपको दूसरे ब्लॉक में जानकारी दूंगी  रेशम-  रेशम का निर्माण एक विशेष प्रकार के कीड़ों द्वार... Read More

 प्राणी जगत से प्राप्त तंतु-

 इन तंतुओं की उत्पत्ति जीव जंतु जगत से होती है इसलिए इनको केंद्रीय जनता तंतु कहते हैं यह प्रोटीन निर्मित तंतु है इनके दो प्रमुख उदाहरण उन और रेशम है इसके बारे में मैं आपको इस ब्लॉग मैं मैं आपको रेशम के बारे में बताऊंगी और अगर आपको उनके बारे में जानना है तो मैं आपको दूसरे ब्लॉक में जानकारी दूंगी

 रेशम-

 रेशम का निर्माण एक विशेष प्रकार के कीड़ों द्वारा होता है इन्हें रेशम के कीड़े रहते हैं रेशम के कीड़े अधिकतर शहतूत के पेड़ों पर पाले जाते हैं युवा अवस्था में यह कीड़ा अपने मुख से एक विशेष प्रकार का लसदर पदार्थ निकलता है जिससे कोई कोकून के रूप में अपने चारों ओर लपेट चला जाता है यह रस हवा में सुख कर लंबा तंतु बन जाता है रेशम के कीड़ों को मारकर रेशम प्राप्त कर लिया जाता है रेशम पा अवस्था में ही प्राप्त होता है यदि थोड़ी देर हो जाए तो कीड़ा अपने चारों ओर धागे को काटकर पा की अवस्था से निकलकर बाहर हो जाता है और चारों ओर का लगता हुआ धागा नष्ट हो जाता है रेशम दो प्रकार का होता है प्रथम प्रकार के रेशम का तंतु शहतूत के पत्तों पर पहले कीड़ों से प्राप्त होता है जो चिकन चमकीला एक सा मोटा और पारदर्शक होता है यह तंतु कार्य क्रीम रंग का और उच्च कोटि का होता है इसी से रेशम होता है इस रेशम के तंतुओं की लंबाई सामान्य 800 से 1200 मीटर तक होती है लेकिन कभी-कभी यह 3000 मीटर तक लंबे होते हैं

 घटिया रेशम जंगली कीड़ों से प्राप्त होता है और जंगली कीड़े आंख के पत्तों पर पाले जाते हैं यह रेशम मोटा कड़ा तथा कुछ भूरापन लिए होता है

 धन्यवाद


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  • Date:- 2026:02:20
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सन का रेशा क्या है


 सन कर क्या है:-  सन का रेशा झूठ कह रहे से अच्छा होता है इसका रंग भी हल्का होता है इसमें तनाव सहने की क्षमता अधिक होती है सन के पैसे का प्रयोग कागज उद्योग में मछली पकड़ने के जल के नीचे कालीन सुतली आदि बनाने में होता है यह एशिया के दक्षिण भाग विशेष कर भारतवर्ष में उत्पन्न होता है  धन्यवाद Read More

 सन कर क्या है:-

 सन का रेशा झूठ कह रहे से अच्छा होता है इसका रंग भी हल्का होता है इसमें तनाव सहने की क्षमता अधिक होती है सन के पैसे का प्रयोग कागज उद्योग में मछली पकड़ने के जल के नीचे कालीन सुतली आदि बनाने में होता है यह एशिया के दक्षिण भाग विशेष कर भारतवर्ष में उत्पन्न होता है

 धन्यवाद


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  • Author:- kumarivanshika01232@gmail.com
  • Date:- 2026:02:19
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नारियल का रेशा


 नारियल का रेशा-  यह कड़ा तथा रुख रे ऐसा होता है इसका प्रयोग भी सीमित है समुद्र के नमकीन पानी में फुल कर पीट कर इसका रेशा साफ किया जाता है यह मोटे कपड़े चटाई डोर मेट दरी गलीचे ब्रश आदि बनाने में उपयोग आता है  धन्यवाद Read More

 नारियल का रेशा-

 यह कड़ा तथा रुख रे ऐसा होता है इसका प्रयोग भी सीमित है समुद्र के नमकीन पानी में फुल कर पीट कर इसका रेशा साफ किया जाता है यह मोटे कपड़े चटाई डोर मेट दरी गलीचे ब्रश आदि बनाने में उपयोग आता है

 धन्यवाद


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  • Date:- 2026:02:19
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