- : सांप का काटना : - सांप काटना (Snake Biting):-भारत में प्रतिवर्ष लगभग 100000 व्यक्ति सांप के काटने से मर जाते है। जहरीले सांपों के काटने से व्यक्तिक जीवन खतरे में पड़ जाता है। विशेष रूप से कोरल तथा समुद्री सांपों के काटने से जहर का प्रभाव स्नायु संस्थान पर पड़ता है। और व्यक्ति जल्दी ही दम तोड़ देता है। प्रायः ऐसी दुर्घटनाएं भी ग्रामीण क्षेत्रों में ही अधिक होता है। यह सभी दुर्घटनाएं शाहरी...
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- : सांप का काटना : - सांप काटना (Snake Biting):-भारत में प्रतिवर्ष लगभग 100000 व्यक्ति सांप के काटने से मर जाते है। जहरीले सांपों के काटने से व्यक्तिक जीवन खतरे में पड़ जाता है। विशेष रूप से कोरल तथा समुद्री सांपों के काटने से जहर का प्रभाव स्नायु संस्थान पर पड़ता है। और व्यक्ति जल्दी ही दम तोड़ देता है। प्रायः ऐसी दुर्घटनाएं भी ग्रामीण क्षेत्रों में ही अधिक होता है। यह सभी दुर्घटनाएं शाहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मानव के जीवन में आए दिन होती रहती हैं। अतः मनुष्य को प्राथमिक उपचार की शिक्षा लेनी चाहिए। तथा समाज में जागरूकता फैलानी चाहिए। विश्व के सभी मानव समुदाय के साथ यह सभी दुर्घटनाएं भी हो सकती हैं। दुर्घटना का बचाव धैर्य वह जागरूकता हो सकते हैं।
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sonusaini@gamil.com
10 Mar 2026
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घाव (Wounds)- खेल के मैदान में खिलाड़ी को खेलते समय ऐसी चोट लगती है। जिससे त्वचा तथा उसके नीचे के तंतु फट जाती है, या कट जाती है, उसे ही घाव कहते हैं। घाव कई प्रकार के होते है। • कटा हुआ घाव : - यह गांव गहरे होते हैं। चोट लगने से धमनियां या नाड़ियां भी कट जाती है। कांच चुभना, चाकू या ब्लेड से घाव हो जाते हैं। • कुचला हुआ घाव : - कई बार हाथ यहां जोड़ों की उंगलियों के को चल जाने से घाव हो जाते हैं ज...
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घाव (Wounds)- खेल के मैदान में खिलाड़ी को खेलते समय ऐसी चोट लगती है। जिससे त्वचा तथा उसके नीचे के तंतु फट जाती है, या कट जाती है, उसे ही घाव कहते हैं। घाव कई प्रकार के होते है। • कटा हुआ घाव : - यह गांव गहरे होते हैं। चोट लगने से धमनियां या नाड़ियां भी कट जाती है। कांच चुभना, चाकू या ब्लेड से घाव हो जाते हैं। • कुचला हुआ घाव : - कई बार हाथ यहां जोड़ों की उंगलियों के को चल जाने से घाव हो जाते हैं जिससे नील पड़ जाते हैं। पीड़ा भी हो जाती हैं। • फटाका हुआ घाव : - यह गांव काटे एवं कुचले हुए घाव से अधिक खतरनाक होते हैं। गांव के किनारे फटे फटे से एवं टेढ़े मेढ़े होते हैं। इसमें से रक्त अधिक नहीं बहता किंतु उनके विषैली होने का अधिक में भर रहता है। घाव के भर जाने पर भी शरीर पर स्थायी एवं भद्दे निशान पड़ जाते हैं।
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sonusaini@gamil.com
09 Mar 2026
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संतुलित आहार (Balanced Diet) "अलग-अलग खाद्य पदार्थों के मिश्रण से बना वह आहार, जो शरीर को सभी पौष्टिक तत्व उसकी न्यूनतम शारीरिक आवश्यकताओं के अनुपात में प्रदहै, संतुलित आहार कहलाता है।"
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संतुलित आहार (Balanced Diet) "अलग-अलग खाद्य पदार्थों के मिश्रण से बना वह आहार, जो शरीर को सभी पौष्टिक तत्व उसकी न्यूनतम शारीरिक आवश्यकताओं के अनुपात में प्रदहै, संतुलित आहार कहलाता है।"
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08 Mar 2026
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- : दम घुटने : - दम घुटना (Choking) - यह अकसर छोटे बच्चों को हो जाता है। जब कोई खाने की अथवा कोई अन्य वस्तु व्यक्ति की स्वांस नली में फस जाती है तो वह ठीक प्रकार से स्वांस नहीं ले पाता। यदि स्वांस नली बिल्कुल बंद हो जाए तो व्यक्ति सिर्फ 5 मिनट में मर सकता है। अतः ऐसे व्यक्ति को तुरंत प्राथमिक सहायता की आवश्यकता होती है। उपचार (Treatment) प्राथमिक सहायता देने वाले व्यक्ति को सबसे पहले...
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- : दम घुटने : - दम घुटना (Choking) - यह अकसर छोटे बच्चों को हो जाता है। जब कोई खाने की अथवा कोई अन्य वस्तु व्यक्ति की स्वांस नली में फस जाती है तो वह ठीक प्रकार से स्वांस नहीं ले पाता। यदि स्वांस नली बिल्कुल बंद हो जाए तो व्यक्ति सिर्फ 5 मिनट में मर सकता है। अतः ऐसे व्यक्ति को तुरंत प्राथमिक सहायता की आवश्यकता होती है। उपचार (Treatment) प्राथमिक सहायता देने वाले व्यक्ति को सबसे पहले यहपता लगाना चाहिए की है दिल के दौरे का मामला तो नहीं। यदि उसका दम घुट रहा हो, तो इस विधि का प्रयोग करना चाहिए अर्थात यदि घायल व्यक्ति खड़ा हुआ है तो उसके पीछे की ओर पहुंचकर दोनों हाथों से पेट के ऊपर उसे पकड़ लेना चहिए। उसके पश्चात अपने हाथों से ऊपर की और झटका देना चाहिए। बार-बार ऐसा करने से स्वांस नाली में से वास्तु बाहर निकल जाती हैं।
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sonusaini@gamil.com
08 Mar 2026
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- : ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र : - ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम स्रोत मानसरोवर झील के पूर्व में स्थित विशाल हिम्मत है। ब्रह्मपुत्र नदी को तिब्बत में सांगपो तथा बांग्लादेश में जमुना कहते हैं। इस नदी का पर प्रवाह मार्ग बहुत टेढ़ा-मेढ़ा होने के कारण यह सांपों नदी भी कहलाती हैं। इस नदी का प्रवाह मार्ग सिंधु नदी से भी अधिक है।
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- : ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र : - ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम स्रोत मानसरोवर झील के पूर्व में स्थित विशाल हिम्मत है। ब्रह्मपुत्र नदी को तिब्बत में सांगपो तथा बांग्लादेश में जमुना कहते हैं। इस नदी का पर प्रवाह मार्ग बहुत टेढ़ा-मेढ़ा होने के कारण यह सांपों नदी भी कहलाती हैं। इस नदी का प्रवाह मार्ग सिंधु नदी से भी अधिक है।
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08 Mar 2026
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- : संविधान के मूल आदर्श : - भारतीय संविधान के पीछे जो दर्शन कार्य कर रहा था। उसी से इसके आदर्श स्पष्ट हो जाते हैं। भारतीय संविधान के मूल आदर्श निम्नलिखित है। 1. भारतीय संविधान का मूल आदर्श होगा : राष्ट्र के निर्माण में निर्धन से निर्धन व्यक्ति की भूमिका तथा सत्ता में उसकी भागीदारी। 2. भारतीय संविधान का मूल आदर्श छुआछूत, नशीले पदार्थों का उन्मूलन तथा स्त्रियों को पुरुषों के समान अधिकारों में...
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- : संविधान के मूल आदर्श : - भारतीय संविधान के पीछे जो दर्शन कार्य कर रहा था। उसी से इसके आदर्श स्पष्ट हो जाते हैं। भारतीय संविधान के मूल आदर्श निम्नलिखित है। 1. भारतीय संविधान का मूल आदर्श होगा : राष्ट्र के निर्माण में निर्धन से निर्धन व्यक्ति की भूमिका तथा सत्ता में उसकी भागीदारी। 2. भारतीय संविधान का मूल आदर्श छुआछूत, नशीले पदार्थों का उन्मूलन तथा स्त्रियों को पुरुषों के समान अधिकारों में समाहित होगा। 3. यह डॉक्टर भीमराव के सपने, "भेदभाव और असमानता से मुक्त भारत के निर्माण के आदर्श का पोषण होगा।" 4. भारतीय संविधान का मूल आदर्श लोगों को सामाजिक समानता के सथ-साथ आर्थिक समानता देना भी होगा। 5. भारतीय संविधान का मूल आदर्श निर्धनता, अज्ञानता, असमानता को दूर कर रोगों से लड़कर नागरिकों को स्वस्थ जीवन प्रदान करना होगा। 6. भारतीय संविधान का मूल आदर्श देश में एक प्रमुख संपन्न और पंथ निरपेक्ष गणराज्य की स्थापना करना है। 7. भारतीय संविधान के मूल आदर्श राष्ट्र मैं समानता, स्वतंत्रता और भाईचारा की छटा बिसराने के लक्ष्य को पूरा करेगा। 8. भारतीय संविधान के मूल आदर्श देश में लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और मौलिक मानव अधिकारों की स्थापना से संबंध होगे।
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sonusaini@gamil.com
08 Mar 2026
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-:भारतीय संविधान की रचना :- भारत का संविधान लिखित, निर्मित तथा विशाल है। मूलरूप से इसके चार भाग हैं- (1) प्रस्तावना (2) अनुच्छेद (3) अनुसूचियां (4) परिशिष्ट। निर्माण के समय इसमें 22 भागों में विभाजित 395 अनुच्छेद एवं 8 अनुसूचियां एवं 4 परिशिष्ट थे। जबकि वर्तमान में इसमें 25भागों मे विभाजित 465 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियां एवं 5 परिशिष्ट है। प्रत्येक संवैधानिक संशोधन के साथ इसके स्वरूप का विकास हो...
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-:भारतीय संविधान की रचना :- भारत का संविधान लिखित, निर्मित तथा विशाल है। मूलरूप से इसके चार भाग हैं- (1) प्रस्तावना (2) अनुच्छेद (3) अनुसूचियां (4) परिशिष्ट। निर्माण के समय इसमें 22 भागों में विभाजित 395 अनुच्छेद एवं 8 अनुसूचियां एवं 4 परिशिष्ट थे। जबकि वर्तमान में इसमें 25भागों मे विभाजित 465 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियां एवं 5 परिशिष्ट है। प्रत्येक संवैधानिक संशोधन के साथ इसके स्वरूप का विकास होता हैं। अपनी प्रस्तावना के अनुकूल यह संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य की स्थापना करता है।
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08 Mar 2026
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प्रेम एक शिक्षक है परंतु इसे प्राप्त करना कठिन है इसे श्रमपूर्वक धीरे-धीरे जीता जाता है। बाहर के लोग आपको तभी सम्मान और प्रेम देंगे, जब आप स्वयं से प्रेम करेगे। सबसे महत्वपूर्ण बात, सिमस झूठ ना बोले। जो व्यक्ति स्वयं से झूठ बोलता है। अपने झूठ को सुनता है, वह एक ऐसी बिंदु पर पहुंच जाता है, जहां वह सत्य और झूठ के बीच फर्क करने की क्षमता खो जाता है। प्रेम के अभाव में वह खोखला हो जाता है। आपने खालीपन...
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प्रेम एक शिक्षक है परंतु इसे प्राप्त करना कठिन है इसे श्रमपूर्वक धीरे-धीरे जीता जाता है। बाहर के लोग आपको तभी सम्मान और प्रेम देंगे, जब आप स्वयं से प्रेम करेगे। सबसे महत्वपूर्ण बात, सिमस झूठ ना बोले। जो व्यक्ति स्वयं से झूठ बोलता है। अपने झूठ को सुनता है, वह एक ऐसी बिंदु पर पहुंच जाता है, जहां वह सत्य और झूठ के बीच फर्क करने की क्षमता खो जाता है। प्रेम के अभाव में वह खोखला हो जाता है। आपने खालीपन को भरने के लिए वह अनावश्यक गतिविधियों में लिप्ट हो जाता है। जिसके परिणाम स्वरूप वह जीवन के उद्देश्य से भटक जाता है। समय के साथ वह पशुवत व्यवहार और अनैतिकता पर उत्तर जाता है। जो व्यक्ति स्वयं से झूठ बोलता है। वह अक्सर सबसे पहले नाराज़ होता है। हर दिन, हर घंटे, हर मिनट, अपने क्या अपनी छवि सभ्य है। यदि आप एक छोटे बच्चों के पास से ऐसी छवि के साथ गुजारते हैं। जो कूट और क्रोधी हो, तो भले ही अपने बच्चों को न देखा हो। उसने आपको देखा है। यदि आप पूरी दुनिया पर विजय प्राप्त करना चाहते हैं। तो पहले स्वयं पर विजय प्राप्त करें। जीवन का अर्थ आपने भी ढूंढ सारी हो। पर इससे अधिक से अधिक प्रेम करें।
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02 Mar 2026
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हमारा राष्ट्रीय ध्वज अपने अपने विद्यालय में 15 अगस्त, 2 अक्टूबर एवं 26 जनवरी आदि राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगा ध्वज फहराते हुए देखा होगा। यहीं हमारा राष्ट्रीय ध्वज है। हम सब भारत देश के नागरिक हैं। प्रत्येक देश की अपनी पहचान होती है। यही पहचान एक देश के नागरिकों को दूसरे देश के नागरिकों से अलग करती है। भारतीय ध्वज संहिता 2002 के अनुसार आम नागरिक भी राष्ट्रीय ध्वज का प्रदर्शन नियम अनुसार कर सकता...
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हमारा राष्ट्रीय ध्वज अपने अपने विद्यालय में 15 अगस्त, 2 अक्टूबर एवं 26 जनवरी आदि राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगा ध्वज फहराते हुए देखा होगा। यहीं हमारा राष्ट्रीय ध्वज है। हम सब भारत देश के नागरिक हैं। प्रत्येक देश की अपनी पहचान होती है। यही पहचान एक देश के नागरिकों को दूसरे देश के नागरिकों से अलग करती है। भारतीय ध्वज संहिता 2002 के अनुसार आम नागरिक भी राष्ट्रीय ध्वज का प्रदर्शन नियम अनुसार कर सकता है। आपने ओलम्पिक मैदान में कई देशों के झण्डों को लहराते हुए देखा होगा। किसी भी राष्ट का ध्वज उस देश के इतिहास, पहचान, संस्कृति, परम्परा एवं विशेषताओं का
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27 Feb 2026
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शारीरिक शिक्षा शारीरिक शिक्षा का अर्थ:- शारीरिक शिक्षा व शिक्षा है जो शारीरिक प्रशिक्षण अभ्यास और खेल के माध्यम से किसी व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक संवेगात्मक सामाजिक पहलुओं के समग्र विकास पर जोर देती है। इसके अतिरिक्त, इसमें स्वस्थ्य और स्वच्छता के सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। किसी कार्य को करने के लिए शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है। पढ़ने लिखने एवं खेलने आदि सभी कार...
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शारीरिक शिक्षा शारीरिक शिक्षा का अर्थ:- शारीरिक शिक्षा व शिक्षा है जो शारीरिक प्रशिक्षण अभ्यास और खेल के माध्यम से किसी व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक संवेगात्मक सामाजिक पहलुओं के समग्र विकास पर जोर देती है। इसके अतिरिक्त, इसमें स्वस्थ्य और स्वच्छता के सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। किसी कार्य को करने के लिए शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है। पढ़ने लिखने एवं खेलने आदि सभी कार्यों में हमारा मस्तिष्क और शरीर दोनों एक साथ कार्य करते हैं। शारीरिक शिक्षा से लाभ:- 1. शारीरिक शिक्षा शरीर एवं मस्तिक को स्वस्थ और मजबूत बनाने में सहयोग देती है। 2. इस शिक्षा में खेल क्रियोओं द्वारा स्फूर्ति, आनंद और ऊर्जा प्राप्त होती हैं। 3. जितने यहां हारने पर अपने ऊपर नियंत्रण रखने से अनुशासन और साहस का गुण विकसित होता है। 4. नैतिक मूल्यों जैसे सहयोग की भावना, विचार शीलता, दृढ़ता, संयम आदि मूल्यों का विकास होता है।
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sonusaini@gamil.com
26 Feb 2026
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