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Anshika

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Blog by Anshika | Digital Diary

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डाल्टन का परमाणु सिद्धांत

 डाल्टन का परमाणु सिद्धांत  डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के आधार पर (1)  सभी पदार्थ सूक्ष्म कणों से बनी है जिन्हें परमाणु कहते हैं! (2)  परमाणु को विभाजित नहीं किया जा सकता और वह रासायनिक अभिक्रिया में परिवर्तित बना रहता है! (3)  परमाणु कोना ही उत्पन्न किया जा सकता है और ना ही नष्ट किया जा सकता है! (4)  एक ही तत्व के सभी परमाणु आकार द्रव्यमान तथा रासायनिक गुना में एक दूसरे के समान होते हैं और इनका द्... Read More
 डाल्टन का परमाणु सिद्धांत  डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के आधार पर (1)  सभी पदार्थ सूक्ष्म कणों से बनी है जिन्हें परमाणु कहते हैं! (2)  परमाणु को विभाजित नहीं किया जा सकता और वह रासायनिक अभिक्रिया में परिवर्तित बना रहता है! (3)  परमाणु कोना ही उत्पन्न किया जा सकता है और ना ही नष्ट किया जा सकता है! (4)  एक ही तत्व के सभी परमाणु आकार द्रव्यमान तथा रासायनिक गुना में एक दूसरे के समान होते हैं और इनका द्रव्यमान निश्चित होता है! (5)  विभिन्न तत्वों के परमाणु आकार द्रव्यमान तथा अन्य सभी गुना में एक दूसरे से अलग होते हैं! (6)  रासायनिक परिवर्तनों में परमाणु समान होते हैं! (7)  एक योग के सभी योग परमाणु समान होते हैं! (8) किसी योगी के योग परमाणु में तत्व के परमाणु की संख्या निश्चित होती है!  आता है परमाणु तत्व का वह सूक्ष्म या विभाज्य कौन है जो किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में भाग ले सकता है?  
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ak7749787@gamil.com 14 Jan 2026 134 Views

प्रकाश

 प्रकाश का परावर्तन   (Reflection of light )  आपने देखा होगा कि किसी तालाब के किनारे स्थित पेड़ में हमें तालाब के जाल में दिखाई पड़ता है स्टेनलेस स्टील की स्वच्छ ताली में देखने पर हमें अपना चेहरा दिखाई पड़ता है ऐसा क्यों?  किसी चमकीले परषठ से टकराने के पश्चात प्रकाश की हिंदी इस माध्यम में वापस लौट आती है, जिसके फल स्वरुप हम तालाब के किनारे स्थित वर्कशाॅ को जल में तथा चमकीले स्टील की थाली में अपना... Read More
 प्रकाश का परावर्तन   (Reflection of light )  आपने देखा होगा कि किसी तालाब के किनारे स्थित पेड़ में हमें तालाब के जाल में दिखाई पड़ता है स्टेनलेस स्टील की स्वच्छ ताली में देखने पर हमें अपना चेहरा दिखाई पड़ता है ऐसा क्यों?  किसी चमकीले परषठ से टकराने के पश्चात प्रकाश की हिंदी इस माध्यम में वापस लौट आती है, जिसके फल स्वरुप हम तालाब के किनारे स्थित वर्कशाॅ को जल में तथा चमकीले स्टील की थाली में अपना चेहरा देख पाते हैं/ वास्तव में हमारे चेहरे से चलने वाली प्रकाश की की ने जब चिकनी थाली पर पड़ती है तो थाली की सतह से टकराकर वापस हमारी आंख तक आती है, जिससे हमें अपना चेहरा दिखाई देता है/ प्रकाश की इस घटना को प्रवर्तन कहते हैं/  प्रकाश की किरण का किसकी परस्ट से टकरा कर इस माध्यम में वापस लौटने की घटना प्रकाश का परावर्तन कहलाती है /  प्रकाश की कि नहीं जब किसी वस्तु की सतह पर पड़ती है तो तीन प्रकार की घटनाएं घटती है - वस्तु द्वारा प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण, वस्तु से प्रकाश ऊर्जा का परागमन, वास्तु के प्रस्ट प्रकाश ऊर्जा का परावर्तन/  अधिकांश वस्तुएं अपने ऊपर पढ़ने वाले प्रकाश ऊर्जा का परावर्तन करती है/ कुछ वस्तुएं प्रकाश ऊर्जा का काम प्रवर्तन करती है तथा कुछ वस्तुएं प्रकाश ऊर्जा अधिक प्रवर्तन करती हैं  पॉलिशदार चमकीली सट्टा वाली वस्तु पोलिश रहित सातो वाली वस्तुओं की अपेक्षा प्रकाश ऊर्जा का अधिक प्रवर्तन करती है / 
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ak7749787@gamil.com 11 Jan 2026 155 Views

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