Default Logo

Environment

Sahanewajmalik929@ggmail.com
WEFRU5550291115202
Scan to visit website

Scan QR code to visit our website

Blog by Environment | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se
Digital Diary Submit Post Environment

चतुर वकील और कंजूस व्यापारी

एक समय की बात है, एक शहर में रामप्रसाद नाम का एक बहुत ही अमीर लेकिन बेहद कंजूस व्यापारी रहता था। उसने एक बार अपनी हवेली की पेंटिंग और मरम्मत के लिए एक स्थानीय कारीगर को काम पर रखा। काम पूरा होने के बाद, जब पैसे देने की बारी आई, तो व्यापारी के मन में खोट आ गया और उसने कारीगर के पैसे देने से साफ़ मना कर दिया। गरीब कारीगर न्याय के लिए अदालत गया। व्यापारी ने अपनी तरफ से शहर के सबसे महंगे और चालाक वकील,... Read More
एक समय की बात है, एक शहर में रामप्रसाद नाम का एक बहुत ही अमीर लेकिन बेहद कंजूस व्यापारी रहता था। उसने एक बार अपनी हवेली की पेंटिंग और मरम्मत के लिए एक स्थानीय कारीगर को काम पर रखा। काम पूरा होने के बाद, जब पैसे देने की बारी आई, तो व्यापारी के मन में खोट आ गया और उसने कारीगर के पैसे देने से साफ़ मना कर दिया। गरीब कारीगर न्याय के लिए अदालत गया। व्यापारी ने अपनी तरफ से शहर के सबसे महंगे और चालाक वकील, वकील साहब को काम पर रखा। अदालत में मुकदमा शुरू होने से पहले, वकील साहब ने व्यापारी से अकेले में कहा, "देखो रामप्रसाद, मामला बिल्कुल साफ़ है। तुमने काम कराया है, तो पैसे तो देने पड़ेंगे। लेकिन अगर तुम जीतना चाहते हो, तो जैसा मैं कहता हूँ वैसा ही करना।" व्यापारी ने उत्सुकता से पूछा, "मुझे क्या करना होगा?" वकील साहब मुस्कुराए और बोले, "जब अदालत में जज साहब तुमसे कोई भी सवाल पूछें, तो तुम अपने मुँह से एक भी शब्द मत निकालना। बस अपनी आँखें बड़ी-बड़ी करना और गधे की तरह 'बें-बें' की आवाज़ निकालना। बाकी सब मैं संभाल लूँगा।" कंजूस व्यापारी इस बात के लिए तुरंत तैयार हो गया। मुकदमा शुरू हुआ। जज साहब ने व्यापारी से पूछा, "रामप्रसाद, क्या इस कारीगर ने तुम्हारे घर पर काम किया था? तुम इसके पैसे क्यों नहीं दे रहे हो?" व्यापारी ने जज की तरफ़ देखा, अपनी आँखें घुमाईं और चिल्लाया, "बें.... बें...." जज साहब हैरान रह गए। उन्होंने फिर से कड़क आवाज़ में पूछा, "यह क्या बकवास है? सीधे-सीधे सवाल का जवाब दो!" व्यापारी फिर से हाथ-पैर मारकर बोलने लगा, "बें.... बें....!" अदालत में सन्नाटा छा गया। तब व्यापारी के चतुर वकील साहब खड़े हुए और बड़ी मासूमियत से बोले, "हुजूर! माफ़ कीजिएगा। मेरे मुवक्किल की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। यह कुछ महीनों से अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं और किसी की बात नहीं समझ पाते। भला ऐसा पागल व्यक्ति किसी को काम पर कैसे रख सकता है और समझदारी से सौदा कैसे कर सकता है? यह कारीगर सरासर झूठ बोल रहा है।" जज साहब को भी लगा कि व्यापारी वाकई पागल हो चुका है। उन्होंने मामले को खारिज कर दिया और कारीगर को वहाँ से जाना पड़ा। व्यापारी मुकदमा जीत गया और उसके पैसे बच गए। अदालत से बाहर आने के बाद, व्यापारी ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर की तरफ़ जाने लगा। तभी वकील साहब ने उसका रास्ता रोका और कहा, "बधाई हो रामप्रसाद! हम केस जीत गए। अब जल्दी से मेरी ₹50,000 की फीस निकालो।" व्यापारी रुका, उसने वकील साहब की तरफ़ देखा, अपनी आँखें बड़ी-बड़ी कीं और मुस्कुराते हुए बोला- "बें.... बें....!" वकील साहब अपना सिर पकड़कर रह गए, क्योंकि उनका अपना ही सिखाया हुआ दांव उन पर ही उल्टा पड़ चुका था। सीख: जो लोग दूसरों को धोखा देने के लिए चालाकी का सहारा लेते हैं, एक दिन वे खुद भी उसी चालाकी का शिकार बन जाते हैं।
Read Full Blog
Sahanewajmalik929@ggmail.com 01 Oct 2026 86 Views