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" To Present local Business identity in front of global market"
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सामान्य रूप से माना जाता है कि यदि व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा मैं अर्थात भरपेट आहार उपलब्ध हो जाए तो उसकी आहार संबधी आवश्यकतापूरी हो जाती है परंतु वर्तमान पोषण विज्ञान के अध्ययनों ने स्पष्ट कर दिया है की आहार संबंधी यह सामान्य गलत है। वास्तव में आहार ग्रहण करने के विभिन्न उद्देश्य है। आहार के ग्रहण करने से जहां हमारी भूख शांत होती हैं, वहीं आहार ग्रहण करने से हमें शारीरिक श्रम करनेक लिए आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती है। बाहर से ही हमारे शरीरक रखरखाव होता है। इसके अतिरिक्त आहारह हमारे शरीर को विभिन्न रोगों से लड़नेक क्षमता प्रदान करता है। इस स्थिति में जिस आहार को ग्रहण करने से इन सभी उद्देश्योंकी गली भारती पूर्ति हो जाए, उस आहार को संतुलित आहार कहते है संतुलित आहार में सभी पोषक तत्व सहीमत्रा तथा सहीअनपात विद्यमान होते हैं।
भारतीयअनुसंधानपरिषद के अनुसार, "संतुलित आहार वह होता है जो शरीर की वृद्धि विकास कार्य तथा स्वास्थ्य संरक्षण के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को सम्मिलित करता है जिसमें मात्रा व गुण संतुलित रूपह पाए जाते हैं।'
विशेष अवस्थाएं_ गर्भवती अथवा स्तनपान करने वाली स्त्री की पूजा सबंधी आवश्यकता स्त्री की अपेक्षा अधिक हो जाती है। अतः भोजन को संतुलित करने के लिए उपरोक्त बातों का ध्यान रखना पड़ता है
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