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नवग्रहों की शांति के लिए उपयोग होने वाली लकड़ियों के क्या नाम है?

आप सूर्य के लिए आर्क की लकड़ियां। राहु के लिए दुर्वा की लकड़ियां। केतु के लिए कुशा की लकड़ियां। शनि के लिए शमि की लकड़ियां। शुक्र के लिए औदुम्बर की लकड़ियां। गुरु के लिए पीपल की लकड़ियां। बुध के लिए अपामार्ग की लकड़ियां। मंगल के लिए खदिर की लकड़ियां। चंद्र के लिए पलाश की लकड़ियां। Read More
आप सूर्य के लिए आर्क की लकड़ियां। राहु के लिए दुर्वा की लकड़ियां। केतु के लिए कुशा की लकड़ियां। शनि के लिए शमि की लकड़ियां। शुक्र के लिए औदुम्बर की लकड़ियां। गुरु के लिए पीपल की लकड़ियां। बुध के लिए अपामार्ग की लकड़ियां। मंगल के लिए खदिर की लकड़ियां। चंद्र के लिए पलाश की लकड़ियां।
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sanreaders@gmail.com 11 Aug 2024 533 Views

श्री लक्ष्मी आरती

卐 श्री लक्ष्मी आरती 卐   ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥... Read More
卐 श्री लक्ष्मी आरती 卐   ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता। कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता। रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता। उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ ओम जय लक्ष्मी माता॥ ॥ इति श्री लक्ष्मी आरती ॥ Om Jai Laxmi Mata, Maiya Jai Laxmi Mata Tumko Nis Din Sewat, Hari Vishnu Vidhaata Om Jai Laxmi Mata Uma, Rama, Brahmaani, Tum Hi Jag Mata Surya Chanrama Dhyaawat , Naarad Rishi Gaata Om Jai Laxmi Mata Durga Roop Niranjani, Sukh Sampati Data Jo Koyi Tumko Dhyaawat , Ridhee Sidhee Dhan Paataa Om Jai Laxmi ata Tum Patal Niwasani , Tum Hi Shubh Daata Karma Prabhav Prakashini , Bhav Nidhi Ki Traata Om Jai Laxmi Mata Jis Ghar Mein Tum Rahatee, Tah Sab Sad Guna Aataa Sab Sambhaw Ho Jaata, Man Nahin Ghabaraata Om Jai Laxmi Mata Tum Bin Yagnya Na Hote, Vastra Na Koi Paata Khan Paan Ka Vaibhava, Sab Tum Se Aata Om jai laxmi Mata Shubh Gun mMandir Sundar, Kshirodadhi Jata Ratan Chaturdash Tum Bin, Koi Nahi Paata Om Jai Laxmi Mata Maha Laxmi Ji Ki Aarati, Jo Koi Jan Gaata Ur Aanand Samaata, Paap Utar Jaata Om Jai Laxmi Mata ॥ It's Shree Laxmi Aarati॥   आरती से पहले इन मंत्रों से भी मां की पूजा करनी चाहिए इससे इंसान को दोहरे फल की प्राप्ति होती है। ऊँ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।। श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा। ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम: लक्ष्मी नारायण नम: ऊँ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नम: धनाय नमो नम: ॐ लक्ष्मी नम: ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम: पद्मानने पद्म पद्माक्ष्मी पद्म संभवे तन्मे भजसि पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम् . ऊं ह्रीं त्रिं हुं फट   लक्ष्मी जी का मंत्र: हम आपको लक्ष्मी मंत्र की जानकारी भी दे रहे हैं। इस मंत्र को 42 दिनों के भीतर 1.25 लाख बार जप किया जाता है। इसके बाद हवन कर देवी लक्ष्मी की षोडशोपचार विधि से पूजा की जाती है।  पढ़ें मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ।  
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sanreaders@gmail.com 08 Jan 2024 1302 Views

श्री विन्ध्येश्वरी आरती

卐 श्री विन्ध्येश्वरी आरती 卐 सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, कोई तेरा पार ना पाया । पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले तेरी भेट .चढ़ाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ सुवा चोली तेरी अंग विराजे, केसर तिलक लगाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ नंगे पग माँ अकबर आया, सोने का छत्र चढ़ाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ उँचे पर्वत बन्यो देवालय, नीचे शहर बसाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ सतयुग, द्वापर, त्र... Read More
卐 श्री विन्ध्येश्वरी आरती 卐 सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी, कोई तेरा पार ना पाया । पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले तेरी भेट .चढ़ाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ सुवा चोली तेरी अंग विराजे, केसर तिलक लगाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ नंगे पग माँ अकबर आया, सोने का छत्र चढ़ाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ उँचे पर्वत बन्यो देवालय, नीचे शहर बसाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ सतयुग, द्वापर, त्रेता मध्ये, कलयुग राज सवाया ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ धूप दीप नैवेद्य आरती, मोहन भोग लगाया ॥सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ ध्यानू भगत मैया तेरे गुण गाया, मनवांछित् फल पाया ॥सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी .. ॥ ॥ इति श्री विन्ध्येश्वरी आरती ॥   Sun Meri Devi Parvatvaasini, Koi Tera Paar Na Paya Paan Supari Dhvaja Nariyal , Le Teri Bhet Chadhaya, Sun Meri Devi Parvatvaasini Suva Choli Tere Ang Viraje, Kesar Tilak Lagaya, Sun Meri Devi Parvatvaasini Nange Pag Maa Akbar Aaya , Sone Ka Chhatra Chdhaya, Sun Meri Devi Parvatvaasini Uche Parvat Banyo Devalay Niche Shahar Basaya Sun Meri Devi Parvatvaasini Satyug Dwapar Treta Madhye, Kalyug Raaj Sawaya, Sun Meri Devi Parvatvaasini Dhoop Deep Naivaidy Aarati, Mohan Bhog Lagaaya Sun Meri Devi Parvatvaasini Dhyanu Bhagat Maiya Tere Gun Gaya Mannvanchit Phal Paya, Sun Meri Devi Parvatvaasini ॥ It's Shree Vindhyeshwari Aarati॥
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sanreaders@gmail.com 08 Jan 2024 1320 Views

भगवान विष्णु जी की आरती

卐 श्री विष्णु आरती 卐   ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे || || ॐ जय जगदीश हरे || जो ध्यावे फल पावे, दुख विनसे मन का स्वामी दुख विनसे मन का सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का || || ॐ जय जगदीश हरे || मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी स्वामी शरण गहूं मैं किसकी तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी || || ॐ जय जगदीश हरे || तुम पूरण परमात्मा,... Read More
卐 श्री विष्णु आरती 卐   ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे || || ॐ जय जगदीश हरे || जो ध्यावे फल पावे, दुख विनसे मन का स्वामी दुख विनसे मन का सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का || || ॐ जय जगदीश हरे || मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी स्वामी शरण गहूं मैं किसकी तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी || || ॐ जय जगदीश हरे || तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी स्वामी तुम अंतर्यामी पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी || || ॐ जय जगदीश हरे || तुम करुणा के सागर, तुम पालन कर्ता स्वामी तुम पालन कर्ता मैं मूरख खल कामी , कृपा करो भर्ता || || ॐ जय जगदीश हरे || तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति, किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति || || ॐ जय जगदीश हरे || दीनबंधु दुखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी ठाकुर तुम मेरे अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा मैं तेरे || || ॐ जय जगदीश हरे || विषय विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा, स्वामी पाप हरो देवा, श्रद्धा भक्ति बढ़ा‌ओ, संतन की सेवा || || ॐ जय जगदीश हरे || श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे || || ॐ जय जगदीश हरे || ॥ इति श्री विष्णु आरती॥   Om Jai Jagadish Hare, Swami Jai Jagadish Hare Bhakt Jano Ke Sankat , Daas Jano Ke Sankat, Kshan Me Door kare । । Om Jai Jagadish Hare ..। Jo Dhyaave Phal Paave, Dukh Vinase Manaka, Swami Dukh Vinase Manaka । Sukh Sampati Ghar Aave, Kasht Mite Tan Ka । । Om Jai Jagadish Hare ..। Maat Pita Tum Mere, Sharan Gahoon Main Kisaki, Swami Sharan Gahoon Main Kisaki । Tum Bin Aur Na Dooja, Aas Karoon Main Jisaki । । Om Jai Jagadish Hare ..। Tum Pooran Paramaatma, Tum Antarayaami, Swami Tum Antarayaami Paarabrahm Parameshwar, Tum Sabake Swami । । Om Jai Jagadish Hare ..। Tum Karuna Ke Sagar, Tum Palan Karta, Swami Tum Palan Karta । Main Moorakh Khal Kaami, Kripa Karo Bharta । । Om Jai Jagadish Hare ..। Tum Ho Ek Agochar, Sabke Pranapati, Swami Sabke Pranapati, Swami, Kis Vidhi Miloon Dayamay, Tumko Main Kumati। । Om Jai Jagadish Hare ..। Deen Bandhu, Dukh Harta, Thakur Tum Mere, Swami Thakur Tum Mere । Apane Haath Uthao, Dwar Pada Main Tere । ।Om Jai Jagadish Hare ..। Vishay Vikar Mitao , Paap Haro Deva, Swami Paap Haro Deva । Shraddha Bhakti Badhao , Santan Ki Seva। । Om Jai Jagadish Hare ..। Shree Jagadish Jee Ki Aarati, Jo Koi Nar Gaave, Swami Jo Koi Nar Gaave । Kahat Shivaanand Swami, Sukh Sampatti Paave । ।Om Jai Jagadish Hare ..। ॥ It's Vishnu Jee ki Aarati
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sanreaders@gmail.com 08 Jan 2024 1159 Views

मां वैष्णो आरती

卐 श्री वैष्णो आरती 卐 जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता। हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी। गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी॥ ॥ जय वैष्णवी माता ॥ ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे। सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे। बार-बार देखन को, ऐ माँ मन चावे॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ भवन पे... Read More
卐 श्री वैष्णो आरती 卐 जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता। हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी। गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी॥ ॥ जय वैष्णवी माता ॥ ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे। सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे। बार-बार देखन को, ऐ माँ मन चावे॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ भवन पे झण्डे झूलें, घंटा ध्वनि बाजे। ऊँचा पर्वत तेरा, माता प्रिय लागे॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ पान सुपारी ध्वजा नारियल, भेंट पुष्प मेवा। दास खड़े चरणों में, दर्शन दो देवा॥ ॥जय वैष्णवी माता ॥ जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे। उसकी इच्छा पूरण, माता हो जावे॥ ॥ जय वैष्णवी माता ॥ इतनी स्तुति निश-दिन, जो नर भी गावे। कहते सेवक ध्यानू, सुख सम्पत्ति पावे॥ ॥ जय वैष्णवी माता ॥ ॥ इति वैष्णो आरती ॥         Jai Vaishnavi Mata, Maiya Jai Vaishnavi Mata Hatha Joda Tere Age, Aarti Main Gata. Jai Vaishnavi Mata.. Shisha Pe Chhatra Viraje, Muratiya Pyari Ganga Bahati Charanana, Jyoti Jage Nyari Jai Vaishnavi Mata.. Brahma Veda Padhe Nit Dware, Shankara Dhyan Dhare. Sevaka Chanwar Dulavata, Narad Nritya Kare. Jai Vaishnavi Mata.. Sundara Gufa Tumhari, Man Ko Ati Bhave. Bar-Bar Dekhana Ko, Ye Maa Man Chave . Jai Vaishnavi Mata.. Bhavan Pe Jhande Jhulein, Ghanta Dhwani Baje. Uncha Parvat Tera, Mata Priya Lage. Jai Vaishnavi Mata.. Pan Supari Dhwaja Nariyal, Bhent Pushp Meva. Daas Khadein Charanon Mein, Darshan Do Deva. Jai Vaishnavi Mata.. Jo Jan Nishchay Karake, Dwara Tere Aave. Usaki Ichchha Purana, Mata Ho Jave. Jai Vaishnavi Mata.. Itani Stuti Nish-Din, Jo Nar Bhi Gaave. Kahate Sevak Dhyanu, Sukh Sampatti Paave. Jai Vaishnavi Mata.. ॥ It's Shree Vaishno Mata Aarati॥
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sanreaders@gmail.com 08 Jan 2024 1172 Views

श्री शनि आरती

卐 श्री शनि आरती 卐 जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धर नाथ गज की असवारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ देव दनुज ऋषि... Read More
卐 श्री शनि आरती 卐 जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धर नाथ गज की असवारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी। विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥ ॥जय जय श्री शनिदेव.. ॥ ॥ इति श्री शनि आरती ॥   Jai Jai Shri Shani Dev Bhaktan Hitkari Suraj Ke Putra Prabhu Chaaya Mahtari ॥Jai Jai Shri Shani Dev Bhaktan … ॥ Shyam Ank Vakra Drishti Chaturbhurja Dhaari Nilambar Dhar Nath Gaj Ki Aswari ॥Jai Jai Shri Shani Dev Bhaktan … ॥ Krit Mukut Sheesh Ranjit Dipat Hain Lilari Muktan Ki Mala Gale Shobhit Balihari ॥Jai Jai Shri Shani Dev Bhaktan … ॥ Modak Mishtaan Pan Chadhat Hain Supari Loha, Til, Tel,Urad Mahishi Ati Pyari ॥Jai Jai Shri Shani Dev Bhaktan … ॥ Dev Danuj Rishi Muni Sumiran Nar Nari Vishwanath Dharat Dhayan Sharan Hain Tumhari ॥Jai Jai Shri Shani Dev Bhaktan … ॥ ॥ It's Shani Dev Ki Aarati॥
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sanreaders@gmail.com 08 Jan 2024 1085 Views

शिव आरती

卐 श्री शिव आरती 卐 ॐ जय शिव ओंकारा , प्रभु हर ॐ शिव ओंकारा | ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| एकानन चतुरानन पंचांनन राजै | हंसासंन , गरुड़ासन , वृषवाहन साजै॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| दो भुज चार चतुर्भज दस भुज अति सोहें | तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| अक्षमाला , वनमाला , मुण्डमालाधारी | चंदन , मृगमद सोहें, भाले शशिधारी ॥ || ॐ जय शिव ओंकारा…... Read More
卐 श्री शिव आरती 卐 ॐ जय शिव ओंकारा , प्रभु हर ॐ शिव ओंकारा | ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| एकानन चतुरानन पंचांनन राजै | हंसासंन , गरुड़ासन , वृषवाहन साजै॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| दो भुज चार चतुर्भज दस भुज अति सोहें | तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| अक्षमाला , वनमाला , मुण्डमालाधारी | चंदन , मृगमद सोहें, भाले शशिधारी ॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघाम्बर अंगें। सनकादिक, ब्रह्मादिक , भूतादिक संगें॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| कर मध्ये कमण्डलु , चक्र त्रिशूलधर्ता | जगकर्ता, जगहर्ता, जगपालनकर्ता ॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| ब्रम्हा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका | प्रवणाक्षर के मध्यें ये तीनों एका ॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| त्रिगुण शिव की आरती जो कोई नर गावें | कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावें ॥ || ॐ जय शिव ओंकारा……|| ॥ इति श्री शिव आरती॥   Om Jai Shiv Omkara, Prabhu Har Shiv Omkara। Brahma,Vishnu,Sadashiv, Ardhangi Dhara॥ ॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ Ekanan Chaturanan Panchanan Raje। Hansanan, Garudasan Vrishvahan Saje॥ ॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ Do Bhuj, Chaar Chaturbhuj Dashabhuj Ati Sohe। Teeno Roop Nirakhata Tribhuvan Jan Mohe॥ ॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ Akshamala Vanamala Mundamala Dhari। Chandan Mrig Mad Sohe Bhale Shashi Dhari॥ ॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ Shvetambar Pitambar Baaghambar Ange। Sankadik Brahmadik Bhootadik Sange॥ ॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ Kar Madhye Kamandalu Chakra Trishuldharta। Jagharta Jagkarta Jagpalan Karta॥ ॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ Brahma Vishnu Sadashiv Janat Aviveka। Pranaavakshar Ke Madhye , Yah Teeno Ekaa॥ ॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ Trigunswami Ji Ki Aarti Jo Koi Nar Gave। Kahat Shivanand Swami, Manvanchhit Phal Pave॥ Om Jai Shiv Omkara..॥ ॥ It's Shiv Aarti ॥
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sanreaders@gmail.com 08 Jan 2024 698 Views

श्री सरस्वती आरती

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ जय सरस्वती माता॥ चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥ जय सरस्वती माता॥ बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥ जय सरस्वती माता॥ देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥ जय सरस्वती माता॥ विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह... Read More
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ जय सरस्वती माता॥ चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥ जय सरस्वती माता॥ बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥ जय सरस्वती माता॥ देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥ जय सरस्वती माता॥ विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥ जय सरस्वती माता॥ धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो। ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥ जय सरस्वती माता॥ माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे। हितकारी सुखकारी ज्ञान भक्ति पावे॥ जय सरस्वती माता॥ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता। सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ जय सरस्वती माता॥ ॥ इति श्री सरस्वती आरती ॥     Jai Saraswati Mata, Maiya Jai Saraswati Mata Sadgun Vaibhav Shalini, Tribhuvan Vikhyaata Jai Saraswati Mata.. Chandravadani Padmaasini, Dyuti Mangal Kaari, Sohe Shubh Hans Sawaari, Atul Tej Dhaari. Jai Saraswati Mata.. Baaye Kar Mein Veena, Daaye Kar Mala. Sheesh Mukut Mani Sohe, Gale Motiyan Mala Jai Saraswati Mata.. Devi Sharan Jo Aaye, Unka Uddhar Kiya. Baithi Manthra Daasi, Rawan Sanhaar Kiya. Jai Saraswati Mata.. Vidya Gyan Pradaayini, Gyan Prakash Bharo. Moh Agyan Aur Timir Ka, Jag Se Nash Karo. Jai Saraswati Mata.. Dhoop Deep Phal Meva, Maa Swikaar Karo. Gyanchkshu De Mata , Jag Nistar Karo. Jai Saraswati Mata.. Maa Sarswati Ki Aarti Jo Koi Nar Gaave Hitkari Shukhkari Gyan Bhakti Paave Jai Saraswati Mata.. ॥ It's Shree Saraswati Aarati॥
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sanreaders@gmail.com 27 Dec 2023 1383 Views

श्री सूर्य आरती

श्री सूर्य आरती जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। त्रिभुवन – तिमिर – निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥ ॥जय कश्यप-नन्दन .. ॥ सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी। दु:खहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी॥ ॥ जय कश्यप-नन्दन .. ॥ सुर – मुनि – भूसुर – वन्दित, विमल विभवशाली। अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥ ॥जय कश्यप-नन्दन .. ॥ सकल – सुकर्म – प्रसविता, सविता शुभकारी। विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी॥ ॥ जय कश्यप-नन्दन .. ॥ क... Read More
श्री सूर्य आरती जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। त्रिभुवन – तिमिर – निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥ ॥जय कश्यप-नन्दन .. ॥ सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी। दु:खहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी॥ ॥ जय कश्यप-नन्दन .. ॥ सुर – मुनि – भूसुर – वन्दित, विमल विभवशाली। अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥ ॥जय कश्यप-नन्दन .. ॥ सकल – सुकर्म – प्रसविता, सविता शुभकारी। विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी॥ ॥ जय कश्यप-नन्दन .. ॥ कमल-समूह विकासक, नाशक त्रय तापा। सेवत साहज हरत अति मनसिज-संतापा॥ ॥जय कश्यप-नन्दन .. ॥ नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी। वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥ ॥ जय कश्यप-नन्दन .. ॥ सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै। हर अज्ञान-मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै॥ ॥ जय कश्यप-नन्दन .. ॥ ॥ इति श्री सूर्य आरती ॥     Jai Kashyap-Nandan, Om Jai Aditi-Nandan। Tribhuvana-Timira-Nikandana, Bhakta-Hridaya-Chandana॥ ॥ Jai Kashyap-Nandan .. ॥ Sapta-Ashvaratha Rajita, Ek Chakradhari। Dukhahari-Sukhakari, Manasa-Mala-Hari॥ ॥Jai Kashyap-Nandan .. ॥ Sura-Muni-Bhusura-Vandita, Vimala Vibhavashali। Agha-Dala-Dalana Diwakara, Divya Kirana Mali॥ ॥ Jai Kashyap-Nandan .. ॥ Sakala-Sukarma-Prasavita, Savita Shubhakari। Vishwa-Vilochana Mochana, Bhava Bandhana Bhari॥ ॥ Jai Kashyap-Nandan .. ॥ Kamala-Samuha-Vikasaka, Nashaka Traya Tapa। Sevata Sahaja Harata, Ati Manasija-Santapa॥ ॥ Jai Kashyap-Nandan .. ॥ Netra-Vyadhi-Hara Survara Bhv-Pida-Hari। Vrishti-Vimochana Santata Parahita-Vratadhari॥ ॥ Jai Kashyap-Nandan .. ॥ Suryadeva Karunakara, Ab Karuna Kijai। Hara Agyana-Moh Sab Tatvagyana Dijai॥ ॥ Jai Kashyap-Nandan .. ॥ ॥ It's Shree Surya Aarati॥
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sanreaders@gmail.com 27 Dec 2023 1253 Views

श्री हनुमान आरती

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥ अंजनि पुत्र महा बलदाई। सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥ ॥ आरती कीजै हनुमान.. ॥ दे बीड़ा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥ लंका सो कोट समुद्र-सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥ ॥ आरती कीजै हनुमान.. ॥ लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सवारे॥ लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥ ॥ आरती की... Read More
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके॥ अंजनि पुत्र महा बलदाई। सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥ ॥ आरती कीजै हनुमान.. ॥ दे बीड़ा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सिया सुधि लाए॥ लंका सो कोट समुद्र-सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥ ॥ आरती कीजै हनुमान.. ॥ लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज सवारे॥ लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥ ॥ आरती कीजै हनुमान.. ॥ पैठि पाताल तोरि जम-कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥ बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥ ॥ आरती कीजै हनुमान.. ॥ सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥ कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई॥ ॥ आरती कीजै हनुमान.. ॥ जो हनुमानजी की आरती गावे। बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥ ॥ आरती कीजै हनुमान.. ॥ ॥ इति श्री हनुमान आरत 卐 SHREE HANUMAN AARATI 卐 Aarti Kije Hanuman Lala Ki। Dusht Dalan Ragunath Kala Ki॥ Jake Bal Se Girivar Kaanpe। Rog Dosh Ja Ke Nikat Na Jhaanke॥ Anjani Putra Maha Baldaaee। Santan Ke Prabhu Sada Sahai॥ । Aarti Kije Hanuman Lala Ki.. । De Beera Raghunath Pathaaye। Lanka Jaari Siya Sudhi Laaye॥ Lanka So Kot Samundra-Si Khai। Jaat Pavan Sut Baar Na Lai॥ ।Aarti Kije Hanuman Lala Ki.. । Lanka Jaari Asur Sanhare। Siyaramji Ke Kaaj Sanvare॥ Lakshman Moorchhit Pade Sakaare। Aani Sajeevan Pran Ubaare॥ । Aarti Kije Hanuman Lala Ki.. । Paithi Pataal Tori Jam-kaare। Ahiravan Ke Bhuja Ukhaare॥ Baayen Bhuja Asur Dal Mare। Daahine Bhuja Santjan Tare॥ । Aarti Kije Hanuman Lala Ki.. । Sur Nar Muni Aarti Utare। Jai Jai Jai Hanuman Uchaare॥ Kanchan Thaar Kapoor Lau Chhaai। Aarti Karat Anjana Maai॥ । Aarti Kije Hanuman Lala Ki.. । Jo Hanumanji Ki Aarti Gaave। Basi Baikunth Param Pad Pave॥ । Aarti Kije Hanuman Lala Ki.. । ॥ It's Shree Hanuman Aarati
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sanreaders@gmail.com 27 Dec 2023 1373 Views

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