Blog by Lakshita | Digital Diary
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ताड़ासन को समस्थिति भी कहा जाता है। ताड़ शब्द का अर्थ संस्कृत में पर्वत होता है, जिसके ऊपर इस आसन का नाम रखा गया है। ताड़ासन योग का एक मूलभूत आसन है क्योंकि यह आसन अनेक आसनों का आधार है।
इस लेख में ताड़ासन के आसन को करने के तरीके और उससे होने वाले लाभों ंके बारे में बताया गया है। साथ में यह भी बताया गया है कि आसन करने के दौरान क्या सावधानी बरतें।

ताड़ासन के लाभ इस प्रकार हैं:
1.यह आसन शारीरिक और मानसिक संतुलन विकसित करता है।
2.शरीर के पोस्चर में सुधार लाता है।
3.जांघों, घुटनों और टखनों को मजबूत करता है।
4.पेट और नितंबों को टोन करता है।
5.रीढ़ की हड्डी में खिचाव लाकर उसके विकारों को मिटाता है।
6.कटिस्नायुशूल (साइटिका) से राहत दिलाता है।
7.फ्लैट पैर की परेशानी में मदद करता है।
ताड़ासन करने से पहले आप यह आसन ज़रूर करें:
1.अधो मुख श्वानासन (Adho Mukha Svanasana or Downward-Facing Dog Pose)
2.उत्तानासन (Uttanasana or Standing Forward Bend)
ताड़ासन करने का तरीका इस प्रकार है:
1.दोनो पंजों को मिलाकर या उनके बीच 10 सेंटीमीटर की जगह छोड़ कर खड़े हो जायें, और बाज़ुओं को बगल में रखें।
2.शरीर को स्थिर करें और शरीर का वजन दोनों पैरों पर समान रूप से वितरित करें।
3.भुजाओं को सिर के उपर उठाएं। उंगलियों को आपस में फसा कर हथेलियों को ऊपर की तरफ रखें।
4.सिर के स्तर से थोड़ा ऊपर दीवार पर एक बिंदु पर आँखें टीका करें रखें। पुर अभ्यास के दौरान आंखें इस बिंदु पर टिका कर रखें।
5.बाज़ुओं, कंधों और छाती को ऊपर की तरफ खींचें और फैलाएं।पैर की उंगलियों पर आ जायें ताकि दोनो एड़ी उपर उठ जायें।
6.बिना संतुलन और बिना पैरों को हिलायें, पूरे शरीर को ऊपर से नीचे तक ताने।
7.श्वास लेते रहें और कुछ सेकंड के लिए इस मुद्रा में ही रहें।
8.शुरुआत में संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है लेकिन अभ्यास के साथ यह आसान हो जाएगा।
9.आसन से बाहर निकलने के लिए सारे स्टेप्स विपरीत क्रम में करें।
10.यह एक चक्र है। अगले चक्र से पहले कुछ सेकंड के लिए आराम करें। 5 से 10 चक्र का अभ्यास करें।
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To the little girl he was a figure to be fered and avoided .Every morning before going to work he came into her room and gave her a casual kiss,to which she responded with ''Goodby Father And oh there was a glad sense of relief when she heard the noise of the carriage growing fainter and fainter down the rod! in the evning when he came home she stood near the staircse and heard tis loud voice in the hall.''Bring my tea into the drawing -room...Hasn' t the paper come yet ! MOTHER 'GO AND SEE IF MY PAPER
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योग एक प्राचीन भारतीय अभ्यास है जो 'युज' (जुड़ने) शब्द से बना है, जिसका अर्थ है शरीर, मन और आत्मा का मिलन, या व्यक्तिगत चेतना का सार्वभौमिक चेतना से जुड़ाव; इसमें आसन (शारीरिक मुद्राएँ), प्राणायाम (श्वास नियंत्रण), और ध्यान शामिल हैं, जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास के लिए एक समग्र मार्ग प्रदान करते हैं। योग का अर्थ और उद्देश्य जुड़ावः योग का मूल अर्थ है स्वयं को प्र...
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योग एक प्राचीन भारतीय अभ्यास है जो 'युज' (जुड़ने) शब्द से बना है, जिसका अर्थ है शरीर, मन और आत्मा का मिलन, या व्यक्तिगत चेतना का सार्वभौमिक चेतना से जुड़ाव; इसमें आसन (शारीरिक मुद्राएँ), प्राणायाम (श्वास नियंत्रण), और ध्यान शामिल हैं, जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास के लिए एक समग्र मार्ग प्रदान करते हैं।
जुड़ावः योग का मूल अर्थ है स्वयं को प्रकृति और परम सत्ता से जोड़ना, मन और शरीर के बीच सामंजस्य स्थापित करना।
चित्त वृत्ति निरोधः पतंजलि के अनुसार, मन की चंचल वृत्तियों (विचारों) को रोकना ही योग है, जिससे एकाग्रता और शांति मिलती है।
आत्म-साक्षात्कारः योग का अंतिम लक्ष्य स्वयं को जानना (आत्म-साक्षात्कार) और मोक्ष या स्वतंत्रता प्राप्त करना है।
1.यम (नैतिक नियम): अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह।
2. नियम (व्यक्तिगत अनुशासन): शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर-प्रणिधान।
3.आसन (शारीरिक मुद्राएँ): शरीर को स्वस्थ और स्थिर
बनाने के लिए विभिन्न मुद्राएँ (जैसे भुजंगासन, पश्चिमोत्तानासन)।
4. प्राणायाम (श्वास नियंत्रण): प्राण (जीवन-शक्ति) को
नियंत्रित करने के लिए साँस लेने के व्यायाम (जैसे कपालभाति)।
5. प्रत्याहार (इंद्रियों का वश में करना): बाहरी विषयों से इंद्रियों को हटाकर भीतर की ओर लगाना।
6. धारणा (एकाग्रता): किसी एक बिंदु पर मन को केंद्रित करना।
7. ध्यान (meditation): एकाग्रता की निरंतर प्रक्रिया।
8. समाधि (परमानंद): गहन समाधि की अवस्था, जहाँ व्यक्ति स्वयं को ब्रह्मांड के साथ एकाकार महसूस करता है।
शारीरिकः रक्तचाप में कमी, बेहतर मुद्रा, पाचन में सुधार, लचीलापन और शक्ति में वृद्धि।
मानसिकः तनाव कम करना, एकाग्रता बढ़ाना, मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक स्थिरता लाना।
आध्यात्मिकः आंतरिक शांति और आत्म-ज्ञान की प्राप्ति।
संक्षेप में, योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक पूर्ण जीवन-शैली है जो व्यक्ति को स्वस्थ, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने में मदद करती है।
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