सितार – संगीत की रात
" प्रस्तुत कविता में केदारनाथ अग्रवाल द्वारा सीमित समारोह के अंतर्गत श्रोताओं की भाव धार का ममरूक चित्रण किया गया है " " यह कविता भी केदारनाथ जी ने ही प्रस्तुत की है" आग के ओट बोलते हैं सितार के बोल, खुलती चली जाती है शहर की पंखुड़ियां, चूम...
Read full post →