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Blog by ilma | Digital Diary

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योग का पूरा नाम क्या है?


योग का पूरा नाम क्या हैं। वैसे 'योग' शब्द 'युजिर योगे' तथा 'युज संयमने' धातु से भी निष्पन्न होता है किन्तु तब इस स्थिति में योग शब्द का अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ तथा नियमन होगा। आगे योग में हम देखेंगे कि आत्मा और परमात्मा के विषय में भी योग कहा गया है। युज् समाधौ – दिवादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, समाधि । Read More

योग का पूरा नाम क्या हैं।

वैसे 'योग' शब्द 'युजिर योगे' तथा 'युज संयमने' धातु से भी निष्पन्न होता है किन्तु तब इस स्थिति में योग शब्द का अर्थ क्रमशः योगफल, जोड़ तथा नियमन होगा। आगे योग में हम देखेंगे कि आत्मा और परमात्मा के विषय में भी योग कहा गया है। युज् समाधौ – दिवादिगणीय युज् धातु का अर्थ है, समाधि ।


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  • Author:- nawazishgayyur@gmail.com
  • Date:- 2025:01:27
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योग के जन्मदाता कौन थे?


योग के जन्मदाता कौन थे। जानकारी दे दें कि योग दर्शन के प्रणेता महर्षि पतंजलि द्वारा 'योग सूत्र' की रचना की। इसलिए महर्षि पतंजलि को योग का जनक यानी पिता माना जाता है। योग की परंपरा भारतीय समाज में हजारों सालों से है। बता दें कि योग को भारत में करीब 26,000 साल पहले की देन माना जाता है। Read More

योग के जन्मदाता कौन थे।

जानकारी दे दें कि योग दर्शन के प्रणेता महर्षि पतंजलि द्वारा 'योग सूत्र' की रचना की। इसलिए महर्षि पतंजलि को योग का जनक यानी पिता माना जाता है। योग की परंपरा भारतीय समाज में हजारों सालों से है। बता दें कि योग को भारत में करीब 26,000 साल पहले की देन माना जाता है।


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  • Date:- 2025:01:26
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योग के जन्मदाता कौन थे?


योग के जन्मदाता कौन थ। जानकारी दे दें कि योग दर्शन के प्रणेता महर्षि पतंजलि द्वारा 'योग सूत्र' की रचना की। इसलिए महर्षि पतंजलि को योग का जनक यानी पिता माना जाता है। योग की परंपरा भारतीय समाज में हजारों सालों से है। बता दें कि योग को भारत में करीब 26,000 साल पहले की देन माना जाता है। Read More

योग के जन्मदाता कौन थ।

जानकारी दे दें कि योग दर्शन के प्रणेता महर्षि पतंजलि द्वारा 'योग सूत्र' की रचना की। इसलिए महर्षि पतंजलि को योग का जनक यानी पिता माना जाता है। योग की परंपरा भारतीय समाज में हजारों सालों से है। बता दें कि योग को भारत में करीब 26,000 साल पहले की देन माना जाता है।


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  • Date:- 2025:01:23
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आसन कितने प्रकार का होता है?


आसन कितनेप्रकार का होता है । मुख्य रूप से आसन दो तरह के होते हैं- गतिशील आसन और स्थिर आसन. गतिशील आसन- वे आसन जिनमे शरीर शक्ति के साथ गतिशील रहता है. स्थिर आसन- वे आसन जिनमे अभ्यास को शरीर में बहुत ही कम या बिना गति के किया जाता है. आसनों के नियमित अभ्यास से चित्त स्थिर होता है एवं शरीर और उसके अंगों को दृढ़ता मिलती है. Read More

आसन कितनेप्रकार का होता है ।

मुख्य रूप से आसन दो तरह के होते हैं- गतिशील आसन और स्थिर आसन. गतिशील आसन- वे आसन जिनमे शरीर शक्ति के साथ गतिशील रहता है. स्थिर आसन- वे आसन जिनमे अभ्यास को शरीर में बहुत ही कम या बिना गति के किया जाता है. आसनों के नियमित अभ्यास से चित्त स्थिर होता है एवं शरीर और उसके अंगों को दृढ़ता मिलती है.


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  • Date:- 2025:01:20
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आसन कितने प्रकार का होता है?


आसन कितनेप्रकार का होता है । मुख्य रूप से आसन दो तरह के होते हैं- गतिशील आसन और स्थिर आसन. गतिशील आसन- वे आसन जिनमे शरीर शक्ति के साथ गतिशील रहता है. स्थिर आसन- वे आसन जिनमे अभ्यास को शरीर में बहुत ही कम या बिना गति के किया जाता है. आसनों के नियमित अभ्यास से चित्त स्थिर होता है एवं शरीर और उसके अंगों को दृढ़ता मिलती है. Read More

आसन कितनेप्रकार का होता है ।

मुख्य रूप से आसन दो तरह के होते हैं- गतिशील आसन और स्थिर आसन. गतिशील आसन- वे आसन जिनमे शरीर शक्ति के साथ गतिशील रहता है. स्थिर आसन- वे आसन जिनमे अभ्यास को शरीर में बहुत ही कम या बिना गति के किया जाता है. आसनों के नियमित अभ्यास से चित्त स्थिर होता है एवं शरीर और उसके अंगों को दृढ़ता मिलती है.


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  • Date:- 2025:01:20
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सूर्य नमस्कार के 12 घंटे का क्या मतलब है?


सूर्य नमस्कार के 12 घंटे का क्या मतलब है। सूर्य नमस्कार को 'परम आसन' माना जाता है क्योंकि इसमें 12 आसनों को एक ही व्यायाम में शामिल किया जाता है । ये आसन चक्रीय रूप से किए जाते हैं और पूरे शरीर का व्यायाम कर सकते हैं। सूर्य नमस्कार करते समय आप अपनी पीठ और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं। यह पेट के अंगों को भी फैलाता है और फेफड़ों को हवादार बनाता है Read More

सूर्य नमस्कार के 12 घंटे का क्या मतलब है।

सूर्य नमस्कार को 'परम आसन' माना जाता है क्योंकि इसमें 12 आसनों को एक ही व्यायाम में शामिल किया जाता है । ये आसन चक्रीय रूप से किए जाते हैं और पूरे शरीर का व्यायाम कर सकते हैं। सूर्य नमस्कार करते समय आप अपनी पीठ और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं। यह पेट के अंगों को भी फैलाता है और फेफड़ों को हवादार बनाता है


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  • Date:- 2025:01:19
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सबसे पहले कौन सा योग करना चाहिए?


सबसे पहले कौन सा योग करना चाहिए। शरीर की अलग-अलग बीमारियों के लिए या रोजाना स्वस्थ रहने के लिए योग शुरू करने से पहले कमलासन या पद्मासन को करना चाहिए। ध्यान के लिए किया जाने वाला ये योग आपको शरीर और मन को एकाग्र करता है और योग के लिए तैयार करता है। तो चलिए जानें पद्मासन या कमलासन । Read More

सबसे पहले कौन सा योग करना चाहिए।

शरीर की अलग-अलग बीमारियों के लिए या रोजाना स्वस्थ रहने के लिए योग शुरू करने से पहले कमलासन या पद्मासन को करना चाहिए। ध्यान के लिए किया जाने वाला ये योग आपको शरीर और मन को एकाग्र करता है और योग के लिए तैयार करता है। तो चलिए जानें पद्मासन या कमलासन ।


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  • Date:- 2025:01:18
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योग का सबसे पुराना रूप क्या है?


योग का सबसे पुराना रूप क्या है? योग का सबसे पुराना रूप वैदिक योग के नाम से जाना जाता है, जिसकी शुरुआत ऋग्वेद से हुई है, जो दुनिया का सबसे पुराना लिखित संस्कृत ग्रंथ है। इसे संभवतः लगभग 10,000 साल पहले स्वर्ण युग या सत्य युग के दौरान लिखा गया था। Read More

योग का सबसे पुराना रूप क्या है?

योग का सबसे पुराना रूप वैदिक योग के नाम से जाना जाता है, जिसकी शुरुआत ऋग्वेद से हुई है, जो दुनिया का सबसे पुराना लिखित संस्कृत ग्रंथ है। इसे संभवतः लगभग 10,000 साल पहले स्वर्ण युग या सत्य युग के दौरान लिखा गया था।


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  • Date:- 2025:01:17
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वज्रासन करने का क्या तरीका है? और उसके क्या लाभ है?


वज्रासन करने का सही तरीका क्या है ?और इसके क्या फायदे हैं? वज्रासन( Vajrasana) इसे धनात्मक आसान भी कहते हैं। इस आसन को करने हेतु सर्वप्रथम दोनों टांगों को आगे की ओर फैला कर बैठिए । उसके बाद बाएं व  पैर पर शरीर का भार रखते हुए  दाहिनी टांग के घुटने को मोड कर दाएं हाथ की मदद से नितम के नीचे रखें। इसके पश्चात दाएं हाथ व मुड़े हुए घुटने पर शरीर के भार कै रखते हुए बाएं हाथ की मदद से बाएं... Read More

वज्रासन करने का सही तरीका क्या है ?और इसके क्या फायदे हैं?

वज्रासन( Vajrasana) इसे धनात्मक आसान भी कहते हैं। इस आसन को करने हेतु सर्वप्रथम दोनों टांगों को आगे की ओर फैला कर बैठिए । उसके बाद बाएं व  पैर पर शरीर का भार रखते हुए  दाहिनी टांग के घुटने को मोड कर दाएं हाथ की मदद से नितम के नीचे रखें। इसके पश्चात दाएं हाथ व मुड़े हुए घुटने पर शरीर के भार कै रखते हुए बाएं हाथ की मदद से बाएं पैर को बाय नितिन के नीचे रखिए इस अवस्था में घुटने, टाखने, और पैरों की उंगलियां फर्श से स्पर्श होनी चाहिए ।  अब अपने हाथों की हथेलियां अपने घुटनों पर रखिए । ऊपर का शरीर सीधा रहना चाहिए। इस समय श्व़ास गहरी,सम व धीमी होनी चाहिए। 

लाभ( Benefits)

  • यह एकाग्रता हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है। 
  • यह पेट दर्द व छाती से संबंधित विकारों से बचाव पर सहायक है।
  • यह स्मरन शक्ति को बढ़ाता है।
  • यह राजोधर्म से संबंधित समस्याओं के बचाव में सहायक है।
  • इस आसन के नियमित अभ्यास से मानसिक तनाव कम होता है।
  • यह श्रोणी संबंधित मांसपेशियों की शक्ति में वृद्धि करता है।
  • यह आसान संबंधी विकृति ( Postural deformities)  को दूर करने में मदद करता है
  • यह हर्निया से बचाव करता है और बवासीर में आराम देता है। 
  • यह आसान उन लोगों हेतु उचित ध्यानासन  है जोकटिस्नायुशूल ( Sciatical) तथा त्रिक् संक्रमक रोगों से पीड़ित है।
  • यह नितंबों की वसा को कम करने में सहायता करता है।
  • यह आसान पाचन तंत्र को मजबूत करता है।
  • यह आसान मोटापा नहीं अने में मदद करता है।
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  • Author:- nawazishgayyur@gmail.com
  • Date:- 2025:01:16
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वज्रासन कैसे करते हैं?


वज्रासन कैसे करते हैं। ज्रासन को करने की विधि बहुत ही आसान है, इस योग को करने के लिए आपको सबसे पहले अपने दोनों घुटने के बल खड़ा होना पड़ता है और उसके बाद पीछे की तरफ जाए और कूल्हों पर एड़ी रख कर बैठ जाएं। बैठने के बाद आपको सीधे देखना होता है और अपने दोनों हाथ घुटनों पर रखने होते   Read More

वज्रासन कैसे करते हैं।

ज्रासन को करने की विधि बहुत ही आसान है, इस योग को करने के लिए आपको सबसे पहले अपने दोनों घुटने के बल खड़ा होना पड़ता है और उसके बाद पीछे की तरफ जाए और कूल्हों पर एड़ी रख कर बैठ जाएं। बैठने के बाद आपको सीधे देखना होता है और अपने दोनों हाथ घुटनों पर रखने होते

 


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  • Author:- nawazishgayyur@gmail.com
  • Date:- 2025:01:16
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