1. नौकरी बाजार प्रतिस्पर्धा : मनोविज्ञान का क्षेत्र अत्यधिक प्रतिस्पर्धा हो सकता है। क़ई स्नातक नौकरी की संभावनाओ को बढाने के लिए उन्नत डिग्री ( जैसे मास्टर या डाक्टरेट) का पीछा करते है। जिसके लिए अतिरिक्त समय और खर्च की आवश्यकता होती है।
2. भावनात्मक बोझ: मानसिक बीमार आघात और मानवीय पीडा से संबंधित विषयो से जुडना भावात्मक रुप से बोझिल हो सकता है। छात्र को परोक्ष या आघात या बर्नआउट का अनुभव हो सकता है।
3. बैचलर डिग्री के साथ सीमित करियर मार्ग: मनोविज्ञान के कई प्रवेश स्तर ी नौकरियाँ के लिए कम से कम मास्टर की डिग्री आवश्यक हो सकती है। मनोविज्ञान के स्नातक की डिग्री के बिना आगे की शिक्षा के लिए अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी नही मिल सकती है।
नैतिक विचार: छात्रो को जटिल नैतिक मुद्दो से निपटाना चाहिए, खासकर शोध करते समय या ग्राहको के साथ काम करते समय। नैतिक दिशा निर्देशो को समझना और उनका पालन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
5. सिद्धांतिक जटिलता : मनोविज्ञान और सिद्धांतो और दृष्टिकोणो के एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है जिसे समझना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। छात्रो को कुछ मनोवैज्ञानिक अवधारणाओ की अमूर्त प्रकृति के साथ संघर्ष करना पड सकता है।
6. इन चुनौतियाँ के बावजूद, छात्रो का मानना है कि मनोविज्ञान का अध्ययन करने के लाभ जैसे मानव व्यवहार को समझना और मानसिक स्वास्थ्य मे सुधार करना नुकसानो से कई अधिक है।
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